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मध्य प्रदेश

'शिव' पर भारी 'मोहन' का पास 17 साल के 'राज' का तीन साल के सीएम ने किया एक झटके में पर्दाफाश

मध्य प्रदेश की सियासत में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने करीब 17 साल तक एक छत्र राज किया। महिलाओं के भाई बेटियों के मामा के नाम से मशहूर पूर्व सीएम क...

• Oct 21, 2026• 3 min read
'शिव' पर भारी 'मोहन' का पास 17 साल के 'राज' का तीन साल के सीएम ने किया एक झटके में पर्दाफाश

📷 Cover Photo: 'शिव' पर भारी 'मोहन' का पास 17 साल के 'राज' का तीन साल के सी

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मध्य प्रदेश की सियासत में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने करीब 17 साल तक एक छत्र राज किया। महिलाओं के भाई बेटियों के मामा के नाम से मशहूर पूर्व सीएम की सियासत में चली आ रही बादशाहत एक झटके में चकनाचूर हो जाएगी किसी ने यह उम्मीद नहीं की होगी। साल 2023 में जब शिवराज सिंह चौहान की जगह डाक्टर मोहन यादव को सीएम बनाया गया तो प्रदेश में एक नए सूर्य का उदय हुआ। कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल देखने को मिला। प्रदेश में वर्तमान सीएम मोहन यादव और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की तुलना शुरु कर दी। यहां तक कहा गया कि वर्तमान सीएम कोई प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं। देखते-देखते करीब तीन साल बीत गए। 2024 में मामा की बिदाई कर दिल्ली का रास्ता दिखा दिया गया। मामा दिल्ली में जब तक अपने पांव फैलाता उसके पहले ही उसके पांव में बेड़ियां डाल दी गई। मामा जैसा सियासी और मझा खिलाड़ी छटपटाने लगा। अपनी तरफ से पूरी ताकत लगाई। साम-दाम,दंड भेद सभी नीतियों का इस्तेमाल किया लेकिन प्रदेश की सियासत में दाल नहीं गल पाई। इस बीच वर्तमान सीएम ने खुद को इतना मजबूत कर लिया कि मामा के 17 साल का मोहपाश खत्म हो गया। सियासी वर्चस्व खत्म होता देख मामा को मौके की तलाश थी। और वो मौका मिला मामा के क्षेत्र में आदिवासियों के रुप में। गौरतलब है कि बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोसमी गांव में लंबे समय से वन भूमि पर काबिज एक दर्जन बरेला समुदाय के आदिवासियों की घर-गृहस्थी को वन विभाग की तरफ से बुलडोज किया गया था। मामले की भनक लगते ही शिवराज सिंह मौके पर पहुंचे। मामा को अपने बीच पाते ही कार्रवाई से पीड़ित परिवारों ने उन्हें घेर लिया। महिलाएं चीख-चीखकर रोने लगीं। बच्चे भी बिलखते रहे थे। क्रुंदन सुनने के बाद, शिवराज सिंह ने सभी को ढांढस बंधाया। धरना स्थल पर बैठकर पीड़ितों की पीड़ा सुनी। शिवराज सिंह के सक्सेसर एवं बुधनी से भाजपा के विधायक रमाकांत भार्गव और अन्य नेतागण भी धरनारत पीड़ितों के साथ बैठे रहे। यहां से शुरु हुआ पूर्व सीएम के सियासी दबदबे को एक्सपोज करने का दौर। 'शिव' के कंठ में जितना भी जहर था उसको उन्होंने जम कर उगला लेकिन मोहन उस पूरे जहर को अमृत समझ कर पी लिया और पचा भी लिया। धरना हुआ अलाप-विलाप हुआ जम कर शिकायत हुई और नतीजा यह निकला की पूर्व सीएम की सियासत पूरी तरह से 'एक्सपोज' हो गई। दिल्ली में बैठे भाजपा के बड़े नेताओं ने पूर्व सीएम की एक नहीं सुनी जिसके कारण भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में शिवराज के लिए जो सम्मान था वो पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। प्रदेश की जनता के मन में मामा के प्रति जो अपनत्व की भावना थी वो एक धरने से खत्म हो गई। क्योंकि मामा ने मोहन से टकराने का प्रयास किया और नतीजा खुद का पलीता करा कर बैठ गए।

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