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मध्य प्रदेश

भाजपा के लिए विंध्य बना सियासी और प्राकृतिक रुप से 'दोहन' का ठिकाना बदले में मिले राजेन्द्र शुक्ल जैसे नेता

मध्य प्रदेश भाजपा जीत के अजेय घोड़े पर सवार है जिसमें उन घोड़ों को रसद विंध्य से ही मिलता रहा है बदले में वहां की जनता को सिर्फ ठगने का प्रयास किया गय...

• Oct 20, 2026• 3 min read
भाजपा के लिए विंध्य बना सियासी और प्राकृतिक रुप से 'दोहन' का ठिकाना बदले में मिले राजेन्द्र शुक्ल जैसे नेता

📷 Cover Photo: भाजपा के लिए विंध्य बना सियासी और प्राकृतिक रुप से 'दोहन' का

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मध्य प्रदेश भाजपा जीत के अजेय घोड़े पर सवार है जिसमें उन घोड़ों को रसद विंध्य से ही मिलता रहा है बदले में वहां की जनता को सिर्फ ठगने का प्रयास किया गया है और प्राकृतिक रुप से विंध्य का दोहन कर उसके राजस्व का इस्तेमाल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में किया जाता रहा है। जबकि विंध्य विकास की उन ऊंचाइयों तक आज भी नहीं पहुंच पाया जहां उसे पहुंचना चाहिए था। साल 2013 से विंध्य की जनता लगातार भाजपा पर विश्वास जताती आई है और विंध्य के कारण ही प्रदेश में भाजपा का परचम लहराता रहा लेकिन भाजपा ने बदले में राजेन्द्र शुक्ल जैसे नेता को डिप्टी सीएम और राधा सिंह,प्रतिमा बागरी जैसी नेतृयों को राज्य मंत्री बना कर क्षेत्र को ठगने का प्रयास किया है। वहीं विंध्य की तुलना में अन्य क्षेत्रों की बात की जाए तो डॉ. मोहन यादव सरकार में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत मालवा-निमाड़ अंचल से कुल 9 मंत्री शामिल हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल की 34 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी के 18 विधायक जीते थे। जिसमें 4 मंत्री शामिल किए गए हैं। महाकौशल की 38 सीटों में भाजपा ने 21 से अधिक सीटें जीती थीं। जिसमें 4 से 5 मंत्री शामिल हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र (सागर संभाग की 26 सीटों) में भारतीय जनता पार्टी के 21 विधायक जीते थे। जिसमें 4 मंत्री शामिल किए गए हैं। और विंध्य की 30 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी। और बदले में एक डिप्टी सीएम समेत दो राज्य मंत्री बना कर भाजपा ने विंध्य की जनता के हाथ में झुनझुना थमा दिया। जबकि आर्थिक दृष्टि से देखें तो विंध्य से राजस्व की सबसे बड़ी राशि मिलती है क्योंकि खनिज संपदा के मामले में विंध्य प्रदेश में सबसे आगे है। ठीक उसी प्रकार विंध्य की जनता लगातार भाजपा पर विश्वास कर बोरों में भर कर विधायक देती रही है और बदले में उसे उतना प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया जितना मिलना चाहिए था। विंध्य भाजपा की सरकार के लिए दोहन का एक ऐसा अभेद्य किला बनता जा रहा है जहां से सिर्फ वोट की फसल काटी जा रही है। संगठन की बात करें तो वहां भी विंध्य के हाथ खाली हैं। प्रदेश अध्यक्ष महाकौशल से हैं और चार महामंत्रियों में एक भी विंध्य से नहीं आते हैं। कुल मिला कर भाजपा ने विंध्य को सिर्फ 'चारागाह' के रुप में इस्तेमाल किया जिसे वहां की स्थानीय जनता समझने लगी है यही कारण है कि भाजपा के इस दोहरे रवैए के कारण विंध्य की जनता के सब्र का बांध फूटने की कगार पर है। जिस दिन विंध्य की जनता के सब्र का बांध फूटा उस दिन भाजपा में एक ऐसी सियासी सुनामी आएगी जिसमें 2018 के परिणाम फिर दोहराएं जाएंगे तब कौन से सिंधिया भाजपा की नैया पार लगाएंगे यह एक बड़ा सवाल है।

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