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एक ऐसी विधानसभा सीट जहां पार्टियां बदलती हैं विधायक नहीं
भोपाल

एक ऐसी विधानसभा सीट जहां पार्टियां बदलती हैं विधायक नहीं

मप्र की एक ऐसी विधानसभा सीट है जहां हर पंचवर्षीय में राजनीतिक पार्टियां तो बदल जाती हैं लेकिन विधायक वही रहता है। इस सीट से समाजवादी पार्टी,कांग्रेस पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई लेकिन विधायक वही रहा। इस सीट का नाम सुन कर हैरानी होगी,महाकौशल और विंध्य क्षेत्र का वार्डर भी कहा जा सकता है। यह सीट है मैहर (Maihar) विधानसभा जो शारदामाई का स्थल भी है। और वो विधायक हैं नारायण त्रिपाठी (Narayan Tripathi) जो चुनाव तो लगातार जीतते हैं लेकिन इन्होने हर बार दल बदल कर ही चुनाव जीता है। इस सीट की मान्यता है कि अगर कोई विधायक एक ही पार्टी से चुनाव लड़ता है तो वो चुनाव हार जाता है। तीन अलग-अलग पार्टियों से जीत दर्ज करने वाले विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस बार खुद की पार्टी बनाई है VJP (विंध्य जनता पार्टी), नाराण त्रिपाठी उन नेताओं में शामिल हैं जो लगातार एक पार्टी में नहीं रहते दल बदल करते रहते हैं। और इनकी खूबी है कि जिस पार्टी में वो रहते हैं उस पार्टी का भी वो विरोध करते रहते हैं। नारायण त्रिपाठी को किसी भी पार्टी में टिकाऊ नेता के रुप में नहीं देखा जाता है। ये दल बदल की एक मूर्ति हैं। पिछले कुछ महीनों से नारायण त्रिपाठी पृथक विंध्य राज्य की मांग करते रहे हैं इसके लिए नारायण त्रिपाठी ने अलग-अलग तरह की मुहिम चलाई,कई यात्राएं भी निकाली लेकिन अभी तक उनको सफलता नहीं मिली है और वो पृथक विंध्य राज्य को लेकर आज भी संघर्ष कर रहे हैं। और यही कारण है कि नारायण त्रिपाठी ने विंध्य के नाम से ही अब अपनी पार्टी का गठन किया है। फिलहाल विंध्य जनता पार्टी की ओर से 25 उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है। नारायण त्रिपाठी का कहना है कि अभी तो शुरुआत है लोकसभा चुनाव में विंध्य जनता पार्टी (Vindhya Janta Party) का विराट रुप देखने को मिलेगा जो प्रदेश की जनता को पसंद भी आएगा। नारायण त्रिपाठी का साफ कहना है कि उन्होने अलग से पार्टी का गठन ही इसलिए किया है क्योंकि उन्हे किसी भी सूरत में पृथक विंध्य राज्य चाहिए और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तस तक अलग-अलग तरीके से उनका आंदोलन जारी रहेगा और वो विंध्य की जनता के बीच जाकर पृथक विंध्य राज्य की अपनी मांग को दोहराते रहेंगे।

27/10/2023181
चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को चाहिए 75 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट,भाजपा के लिए आसान
भोपाल

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को चाहिए 75 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट,भाजपा के लिए आसान

क्रिकेट की तरह ही सियासत की पिच पर भी स्ट्राइक रेट का काफी महत्व होता है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2008, 2013 और 2018) के आंकड़े देखें तों 'स्ट्राइक रेट' में कांग्रेस भाजपा से पीछे है (madhya pradesh elections)। हम बात कर रहे हैं पिछले तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के लिहाज से सबसे मजबूत ( तीन में से तीन जीत) सीटों के बारे में। बड़े दिलचश्प हैं ये आंकड़े। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 74 सीटें ऐसी हैं,जिन पर कांग्रेस ने पिछले तीनों चुनाव में जीत दर्ज नहीं की है। वहीं भाजपा के लिए ऐसी सीटों की संख्या केवल 11 है। दूसरी ओर पिछले तीनों चुनावों में जीती जाने वाली भाजपा के सीटों की संख्या 58 है,जबकि कांग्रेस के खाते में ऐसी सिर्फ 10 सीटें हैं। इसे दूसरे अर्थों में यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस को इस बार सत्ता में आना है, तो 230 नहीं बल्कि 156 (230-74) सीटों में से बहुमत का आंकड़ा 116 छूना होगा। मतलब करीब 75 प्रतिशत स्ट्राइक रेट कांग्रेस को चाहिए होगा। भाजपा के लिए यह समीकरण थोड़ा आसान है। कुल सीटों मे से उसकी कमजोर 11 सीटें हटा दें, तो 219 सीटें रहती हैं, जिनमें 116 पर जीत दर्ज करने पर सरकार बनेगी। वनडे क्रिकेट में स्लाग ओवर्स मतलब आखिरी के ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की आवश्यकता होती है। कुछ ऐसा ही कांग्रेस को उन 61 सीटों पर करना होगा। जहां जहां पिछले तीन चुनावों के आंकड़े के अनुसार परिणाम कुछ भी हो सकता है। 2018 में कांग्रेस इनमें से 41 सीट जीती थी और सत्ता पर आई थी। जबकि भाजपा को सिर्फ 20 पर ही संतोष करना पड़ा था। इस बार भी ये सीट कांग्रेस की झोली में जाती है तो परिणाम कुछ भी हो सकते हैं।

27/10/202383
'गोरिल्ला' वॉर की तैयारी में भाजपा,30 अक्टूबर के बाद भाजपा कांग्रेस को करेगी 'चारों खाने चित्त'
भोपाल

'गोरिल्ला' वॉर की तैयारी में भाजपा,30 अक्टूबर के बाद भाजपा कांग्रेस को करेगी 'चारों खाने चित्त'

सियासत में शतरंज के खेल और उसकी बाजी का बड़ा महत्व होता है। और इस पूरे मामले में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी का कोई तोड़ नहीं है (mp bjp)। मप्र के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, अभी तक लग रहा था कि इस चुनावी चौसर में भारतीय जनता पार्टी काफी पीछे है लेकिन दिन बीतते-बीतते जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आती चली जा रही है भाजपा के सियासी घोड़े उल्टी चाल चलने लगे हैं जिसका जवाब कांग्रेस पार्टी (mp congress) दे पाने में असमर्थ साबित हो रही है। प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान है और 30 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है (MP Elections)। भाजपा ने अब तय कर लिया है कि कर्नाटक की गलतियों को एमपी में नहीं दोहराया जाएगा,और कांग्रेस को किसी प्रकार का मौका नहीं दिया जाएगा। इसी लिए भारतीय जनता पार्टी ने 'गोरिल्ला' वार की तैयारी को अंजाम देना शुरु कर दिया है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी अब अपने विपक्षी दलों को किसी प्रकार का मौका नहीं देना चाहती है। शतरंज के खेल में सामने वाले खिलाड़ी की नजर में देखना बहुत जरुरी होता है कि वो अगली चाल कौन सी चलने वाला है। भाजपा भी कुछ ऐसा ही करने जा रही है। 30 अक्टूबर के बाद भाजपा अपने सभी मोहरों को एमपी विधानसभा के चुनाव में उतारने जा रही है। कांग्रेस पार्टी के पास स्टार प्रचारकों से लेकर कार्यकर्ताओं की भारी कमी है। रही सही कसर कांग्रेस के नाराज खेमे पूरी कर दे रहे हैं। जिस प्रकार से कांग्रेस के बाहर और अंदर विरोध हो रहा है उसका भरपूर फायदा भारतीय जनता पार्टी उठाने की योजना बना रही है। कांग्रेस की जब एक जगह सभा हो रही होगी तब भाजपा की पांच से छह जगहों पर एक साथ सभाएं हो रही होंगी। कांग्रेस भाजपा पर एक आरोप लगाएगी तो उसके बदले भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं की पूरी फौज कांग्रेस पर काउंटर अटैक करने के लिए बैठी है। मतलब साफ है कि शह और मात के इस खेल में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को सोचने का भी मौका नहीं देने वाली है। जो कांग्रेस पार्टी अभी तक 180 सीटों का हिसाब लगा रही थी उसी कांग्रेस के नेता अब दबी जुवां कह रहे हैं कि जिस प्रकार से भाजपा की तैयारी चल रही है उससे लगता है कि बहुत करीबी मुकाबला होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को अंजाम दे दिया है उसको अमली जामा पहनाने के लिए 30 अक्टूबर का इंतजार किया जा रहा है। गोरिल्ला युद्ध के मास्टर माइंड केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अगले तीन दिनों तक एमपी में ही रहने वाले हैं और वो कई बैठकें भी करेंगे। सभी 230 विधानसभा सीटों के प्रभारियों को वो जीत का मंत्र भी देंगे इस दौरान वो ये भी बताएंगे कि किस प्रकार से कांग्रेस को चारों खाने चित्त करना है। भाजपा की नजर तो सीधे सेनापति पर भी है कि उन्ही को विधानसभा चुनाव में हरा दिया जाए। जिससे प्रदेश की जनता को पता चल सके कि कांग्रेस कितने पानी में है।

27/10/2023136
'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'
भोपाल

'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'

चुनावी माहौल हो और राजनीतिक पार्टियों की जुवान पर भगवान श्रीराम का नाम ना हो ऐसा भारत देश में तो संभव नहीं है। समय-समय पर नेता यह बता देते हैं कि जब तक भगवान राम की क्रिपा उन पर है तब तक तो वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक ही सकते हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब खुद को हनुमान भक्त कहने वाले कमलनाथ (Kamal Nath) ने छिंदवाड़ा में नामांकन भरने के दौरान सियासी हुंकार भरते हुए कहा, भाजपा नेता तो ऐसे बता रहे हैं कि जैसे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) उनका हो। कमलनाथ के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कमलनाथ चुनावी हिंदू हैं और चुनाव देख कर छद्म हिंदुत्व राग अलापने लगते हैं। लेकिन देश की जनता जानती है कि उनकी ही पार्टी ने भगवान राम और राम सेतु के अस्तित्व को नकारा था। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने भी कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण को लटकाने,भटकाने,अटकाने वाले और प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताने वाले कांग्रेस नेता किस मुंह से राम मंदिर पर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को राम मंदिर पर बात करने का अधिकार नहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की चार राज्य सरकारों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। जिसमें मप्र की भाजपा सरकार भी शामिल थी। सरकार को बर्खास्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी असंबैधानिक बताया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने का फिर से संकल्प लिया था। यह निर्णय लेने वाली सरकार में सनातन विरोधी कमलनाथ प्रमुखता से शामिल थे। गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कन्या पूजन को नौटंकी बताने वाले कभी भारतीय संस्कृति और सनातन के पक्ष में नहघं हो सकते। कांग्रेस में कभी महिलाओं का सम्मान नहीं हुआ। जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानून बनाया। तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त की। प्रदेश में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया है।

26/10/202393
विंध्य में होगी मिली जुली सरकार,कांग्रेस,भाजपा के बाद बसपा को भी मिलेंगी सीटें
भोपाल

विंध्य में होगी मिली जुली सरकार,कांग्रेस,भाजपा के बाद बसपा को भी मिलेंगी सीटें

मप्र की राजनीति में विंध्य क्षेत्र किसी जमाने में विशेष स्थान रखा करता था (Vindhya Politics)। लेकिन श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) और पूर्व सीएम अर्जुन सिंह (Arjun Singh) के स्वर्गवासी होने के बाद विंध्य में एक भी ऐसा नेता तैयार नहीं हो पाया जो विंध्य को एकबार फिर सियासत के शिखर तक लेकर जाए। धीरे-धीरे भाजपा ने विंध्य में अपना वर्चश्व बनाया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि भाजपा ने जतीय समीकरण की नब्ज टटोल कर उम्मीदवार उतारे और उसमें भाजपा को सफलता मिली। साल 2018 में तो विंध्य में कांग्रेस को 30 में से महज छह सीटें मिलीं जिसके कारण कांग्रेस जादुई आंकड़े तक पहुंचते-पहुंचे रह गई। अब इस साल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा एकबार फिर दम मार रही हैं लेकिन स्थिति दोनों के लिए ठीक नहीं है। रीवा की सीट पर भाजपा और कांग्रेस ने ब्राम्हण उम्मीदवार उतारे हैं जिसमे राजेन्द्र शुक्ला एक बार फिर चुनाव जीतते नजर आ रहे हैं। गुढ़ की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस ने ठाकुर प्रत्याशियों को मौका दिया है जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार कपिध्वज सिंह की स्थिति ठीक नजर आ रही है। देवतालाब की बात करें तो कांग्रेस भाजपा ने चाचा भतीजे को एक दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया है इसलिए माना जा रहा है कि यहां से बीएसपी उम्मीदवार जीत का पर्चम लहरा सकता है। मऊगंज से बात करें तो वहां सुखेन्द्र सिंह बन्ना और प्रदीप पटेल के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है लेकिन यह सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। सिरमौर की बात करें तो कई ब्राम्हण खड़े हैं,दो ठाकुर प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं और कांग्रेस ने रामगरीब आदिवासी पर दांव लगाया है,यह सीट कांग्रेस के पाले में जाती दिख रही है। सेमरिया की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ब्राम्हण उम्मीदवार पर दांव लगा कर बीएसपी के लिए जीत का दरवाजा खोल दिया है। त्योंथर विधानसभा सीट बीजेपी अथवा बीएसपी जीतती रही है। इस बार भाजपा ने ऐन मौके पर कांग्रेस से भाजपा में आए सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) पर दांव लगाया है जो बाहरी कैंडिडेट हैं और कांग्रेस ने दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) (कुर्मी) को चुनाव मैदान में उतार दिया है,यह सीट ब्राम्हण बाहुल मानी जाती है,और सिद्धार्थ तिवारी की स्थिति ठीक बताई जा रही है लेकिन बीएसपी यहां छुपी रुस्तम की तरह जीत का पर्चम लहरा दे तो कोई असंभव की बात नहीं होगी। यानि रीवा की राजनीति में इस बार खिचड़ी सरकार का बोलबाला देखने को मिल सकता है।

25/10/2023201
गृह मंत्री को विधानसभा चुनाव में हरा कर पीसी शर्मा ने लहराया था जीत का पर्चम
भोपाल

गृह मंत्री को विधानसभा चुनाव में हरा कर पीसी शर्मा ने लहराया था जीत का पर्चम

भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट को भाजपा अपनी सीट मान कर चलती है और इस सीट से तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता (umashankar gupta) चुनाव लड़ा करते थे। उमाशंकर गुप्ता का बड़ा राजनीतिक कद माना जाता है वो भोपाल के महापौर भी रह चुके हैं। लेकिन साल 2018 में उन्हे पीसी शर्मा (PC Sharma) से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी यह मान कर चल रही थी कि दक्षिण-पश्चिम से किसी भी भाजपा नेता को कोई कांग्रेस नेता शिकस्त नहीं दे पाएगा लेकिन भाजपा के मुगालते उस वक्त दूर हो गए जब कांग्रेस पार्टी ने अपने तुरुप के इक्के यानि पीसी शर्मा को चुनाव मैदान में उतार दिया। पीसी शर्मा कांग्रेस के उन नेताओं में शुमार किए जाते हैं जिन्हे भोपाल की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा दो वो पार्टी के लिए पूरी क्षमता के साथ जी जान लगा कर जुट जाते हैं । उनकी छवि भी निर्दाग और मिलनसार है यही कारण है कि कांग्रेस ने जब पीसी शर्मा पर दांव लगाया तो भाजपा को बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि पीसी शर्मा उमाशंकर गुप्ता को हरा पाएंगे लेकिन आखिर में वही परिणाम आए जिसकी भाजपा को उम्मीद भी नहीं थी। अब एक बार फिर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा दक्षिण-पश्चिम (dakshin paschim) विधानसभा से चुनाव मैदान में हैं और जनता का आशीर्वाद चाहते हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि पीसी शर्मा को भोपाल की 108 भी कहा जाता है मतलब घटना होने के बाद एंबुलेंस भले लेट पहुंचे लेकिन पीसी शर्मा घटना स्थल पर तुरंत पहुंचते हैं।

25/10/2023156
मौन होकर चुनाव की बिसात बिछा रहे भाजपा के नेता,असंतुष्टों को भी साधने में हो रहे कामयाब
भोपाल

मौन होकर चुनाव की बिसात बिछा रहे भाजपा के नेता,असंतुष्टों को भी साधने में हो रहे कामयाब

भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने इन दिनों प्रदेश विधानसभा की चुनाव कमान संभाल रखी है। केन्द्रीय मंत्री और मप्र के चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) और सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) दोनों ही नेता मौन रह कर पार्टी की सारी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कई दिनों से दोनों नेताओं ने मध्य प्रदेश में ही डेरा जमाया हुआ है। ये नेता ना सिर्फ मप्र पर नजर रखे हुए हैं बल्कि टिकट वितरण से लेकर कार्यकर्ताओं में उठ रहे असंतोष को थामने के साथ समन्वय भी बिठा रहे हैं (mp elections)। प्रतिदिन दोनों नेता मप्र के सैकड़ों नेताओं से संवाद भी कर रहे हैं। इनके वार रुम से विपक्ष की पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर, कई नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव आयोग प्रबंधन के कार्य में एसएस उप्पल,अशोक विश्वकर्मा सहित छह लोगों की टीम लगाई गई है। इसी तरह चुनाव प्रबंधन के कार्य की जिम्मेदारी प्रदीप त्रिपाठी,आलोक संजर,विनोद गोटिया और राजेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री,गृह मंत्री राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रवास के दौरान उनके आवागमन और ठहरने की व्यवस्था के लिए अलग से समिति बनाई गई है। इसका जिम्मा आनंद सिंह सेंगर को दिया गया है। विमानन का काम राजेन्द्र राजपूत देख रहे हैं। मीडिया समन्वय का काम आशीष अग्रवाल और इंटरनेट मीडिया का काम अभिषेक शर्मा के जिम्मे है। विज्ञापन क्रिएशन और काल सेंटर के लिए पांच-पांच लोगों की टीम कार्य कर रही है। यह व्यवस्था प्रदेश से लेकर संगठनात्मक 57 जिला मुख्यालयों तक बनाई गई है।

24/10/2023106
धनतेरस के दिन लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1250 रुपये,जमकर मनेगी दिवाली
भोपाल

धनतेरस के दिन लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1250 रुपये,जमकर मनेगी दिवाली

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लाभार्थियों के लिए खुशखबरी है (ladli behna yojana)।दिवाली और मप्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की शिवराज सरकार 1.31 करोड़ लाड़ली बहनों को एक बार फिर बड़ा तोहफा देने जा रही है (madhya pradesh elections)। नवंबर में योजना की छठी किस्त के 1250 रुपए जारी किए जाएंगे। सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का कहना है कि कांग्रेस ने मेरी शिकायत चुनाव आयोग से की थी कि शिवराज चुपचाप महिलाओं के खातों में पैसे डाल रहा है। मैं चुपचाप पैसा क्यों डालूं, डंके की चोट पर आने वाली 10 तारीख को सभी लाड़ली बहनों के खातों में 1250 रुपये डालूंगा। दरअसल, हाल ही में अलीराजपुर दौरे पर पहुंचे सीएम शिवराज ने ऐलान किया था कि 10 तारीख को लाड़ली बहना के खातों में पैसा आएगा। इसके लिए आचार संहिता (model code of conduct) से पहले ही पैसे इकट्ठे करके रख दिए थे। अब इस योजना को कोई भी बंद नहीं कर सकता। कांग्रेसी चुनाव आयोग में मेरी शिकायत कर रहे कि मामा तो पैसे डाल रहा है। इनको बड़ी चिंता हो रही कि पैसे क्यों डाल रहा। जलने वाले जलें, हम तो खाते में पैसा डालेंगे। ये (कांग्रेस) बेईमान सरकार में आ गए तो लाड़ली बहनों के खातों में पैसा डालना बंद कर देंगे। सीएम ने एक्श ट्विटर के माध्यम से कांग्रेस पर निशाना भी साधा और लिखा है कि जिन्होंने सदैव महिलाओं का अपमान किया हो, उन्हें महिलाओं का सम्मान भला कैसे पसंद आ सकता है..?ये कांग्रेसी नहीं चाहते हैं कि महिलाओं का मान, सम्मान और स्वाभिमान बढ़ाने वाली ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ चले, तभी तो विपक्षी दल देश-दुनिया की इस ऐतिहासिक सामाजिक क्रांति का जरा भी समर्थन नहीं कर रहे।खैर, प्रदेश की नारी शक्ति और समस्त जनता कांग्रेस का सच जानती है, इसलिए कमलनाथ जी और दिग्विजय सिंह जी समेत दोनों की पूरी टीम कितना भी प्रयास क्यों न कर ले, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनने वाली।

24/10/2023315
जगह-जगह घूम रहा हाथी,पंजे और फूल से मुकाबला करने कई दावेदार हाथी पर हुए सवार
भोपाल

जगह-जगह घूम रहा हाथी,पंजे और फूल से मुकाबला करने कई दावेदार हाथी पर हुए सवार

मप्र के विधानसभा चुनाल में एकबार फिर हाथी जमकर घूम रहा है (bsp mp)। साल 2018 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार हाथी अच्छी खुराग लेकर निकला है। यूपी से लगे क्षेत्रों में हाथी, पंजे और कमल को टक्कर देने के लिए लगातार फुफकार रहा है। भाजपा (mp bjp) और कांग्रेस (mp congress) के कई बागियों ने बसपा का दामन थामा और उन्हे 24 घंटे के अंदर बसपा की ओर से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। यह बागी ऐसे हैं कि इनका वोटबैंक भाजपा और कांग्रेस का ही है और ये नुकसान भी भाजपा और कांग्रेस को ही पहुंचाएंगे। साल 2018 में करीब एक दर्जन ऐसी सीटें थी जहां पर बसपा के उम्मीदवारों ने दस हजार से ज्यादा का वोट हासिल कर भाजपा और कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचाया था यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां बहुमत से दूर रह गई थी। बाद में कमलनाथ ने निर्दलीयों,सपा और बसपा के विधायकों को अपने साथ मिला कर प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी। इस विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से बसपा ने कुछ मजबूत उम्मीदवारों पर दांव लगाया है उससे ऐसी स्थिति स्पष्ट हो रही है कि तीन दिसंबर के बाद एमपी में एक बार फिर हाथी दौड़ लगाएगा। कुछ भाजपा के तो कुछ कांग्रेस के नाराज नेता इस बार बसपा से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे हैं और उनमें कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो चुनाव जीत भी सकते हैं पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के खाते में दो सीट आई थी लेकिन हालिया स्थिति की बात करें तो इस चुनाव में बसपा के खाते में ज्यादा सीटें आती दिख रही हैं। बसपा ने कुछ सीटों पर ब्राम्हण तो कुछ सीटों पर ठाकुरों को मौका दिया है जो चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

24/10/2023151
भाजपा और कांग्रेस में धधकी  विरोध की ज्वाला,प्रत्याशी चयन में पीसीसी चीफ कमलनाथ के निवास पर प्रदर्शन
भोपाल

भाजपा और कांग्रेस में धधकी विरोध की ज्वाला,प्रत्याशी चयन में पीसीसी चीफ कमलनाथ के निवास पर प्रदर्शन

एमपी में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस पार्टी की तरफ से उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है (Madhya Pradesh Elections)। लेकिन दोनों ही दलों की सूचियां जारी होते ही विरोध की आग दोनों दलों में धधकने लगी है। इसका असर भाजपा से ज्यादा कांग्रेस कार्यालय में ज्यादा देखने को मिल रहा है (congress protest)। अलग-अलग सीटों पर कांग्रेस के अन्य दावेदार खुद को ज्यादा मजबूत बता कर पार्टी के नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। विरोध इतना बढ़ गया है कि कुछ समर्थकों ने पीसीसी कार्यालय के बाहर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का पुतला दहन कर दिया तो कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) के निवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए टायर में आग लगा कर अपना विरोध दर्ज कराया। हाल कुछ ऐसा ही भाजपा का भी है जहां प्रदेश कार्यालय में तो जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ ही है साथ ही भाजपा के अलग-अलग जिला कार्यालयों में भी जमकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है (BJP Protest)। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी विरोध को शांत करने में काफी माहिर मानी जाती है। इसी लिए भाजपा ने अप्रिय स्थितियों से निपटने और कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है जो डैमेज को कंट्रोल करने का पूरा प्रयास कर रही है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस की 47 सीटों पर बगावत की आग धधक रही है तो भाजपा की 27 सीटों पर कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विरोध का आलम ये है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नाराज कार्यकर्ता 5 - 5 सीटों से बागी होकर चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। अब बात उन सीटों की करते हैं जिनमें कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। सुमावली, ग्वालियर, दतिया, पिछोर, निवाड़ी, नागौद, सिरमौर, सेमरिया, रीवा, गोटेगांव, पिपरिया, कुरवाई, भोपाल उत्तर, बैरसिया, गोविंदपुरा, हुजूर, नरसिंहगढ़, खातेगांव, नेपानगर, बुराहनपुर, बदनावर, रतलाम ग्रामीण, जावरा, जौरा, ग्वालियर ग्रामीण, डबरा, सेवढ़ा, भांडेर, सुर्खी, नरयावली, खरगापुर, बिजावर, पवई, गुन्नौर, नागोद, त्योंथर, हरदा, बुधनी, इंदौर 4, उज्जैन उत्तर, आलोट शामिल हैं। वहीं बीजेपी की बात करें तो उनको इन सीटों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। टीकमगढ़, पवई, भोपाल दक्षिण पश्चिम, त्योंथर, जबलपुर उत्तर, बुराहनपुर, जोबट, अलीराजपुर, कालापीपल, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण, अटेर, रैगांव, नागौद, वारासिवनी, नर्मदापुरम, भिंड, महू, मनावर, महेश्वर और देपालपुर शामिल हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि मतदान 17 नवंबर को होना है और 30 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है ऐसी स्थिति में भाजपा और कांग्रेस किस प्रकार से डैमेज कंट्रोल कर पाएंगी यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

22/10/2023127
दक्षिण-पश्चिम की 108 V/S 'भगवान' की लड़ाई,सतह पर आई
भोपाल

दक्षिण-पश्चिम की 108 V/S 'भगवान' की लड़ाई,सतह पर आई

भारतीय जनता पार्टी ने पांचवी सूची में 92 वे उम्मीदवारों की घोषणा कर अब तक 228 सीटों में अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है (bjp candidate list)। इस सूची में भोपाल की दक्षिण -पश्चिम विधानसभा सीट भी शामिल है। इस सीट के इतिहास पर जाएं तो इस सीट से जिस पार्टी का विधायक जीता है उसी की प्रदेश में सरकार बनी है। पहले इस सीट से पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता (Umashankar Gupta) जीता करते थे लेकिन साल 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा (PC Sharma) ने जीत दर्ज की और प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी हुई। पीसी शर्मा उन नेताओं में शुमार किए जाते हैं जो 24 घंटे अपने क्षेत्र की जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं। 2019 में गणेश चतुर्थी के दौरान एक घटना खटलापुरा में हुई थी जहां गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान कई बच्चे तालाब में डूब गए थे। रात के करीब दो बजे थे पीसी शर्मा जी को कहीं से घटना की जानकारी हुई,उस वक्त उनके पास ड्राइवर तक नहीं था लेकिन पीसी शर्मा ने सबकुछ परवाह किए बगैर घटना स्थल पर पहुंचे और अपनी तरफ से यथासंभव मदद की। उसके बाद कोरोनाकाल का दौर आया जब ना सिर्फ दक्षिण-पश्चिम विधानसभा (Bhopal Dakshin Paschim) बल्कि भोपाल की अलग-अलग विधानसभा सीटों की जनता राशन से लेकर उपचार तक के लिए परेशान होकर भटक रही थी उस दौरान भी पीसी शर्मा के दरवाजे लगातार जनता की मदद के लाए खुले रहे। पीसी शर्मा जनता की भलाई के लिए ना सिर्फ शारीरिक अथवा आर्थिक रुप से मदद करने के लिए तैयार रहते हैं बल्कि उनके क्षेत्र की जनता खुशहाल और समृद्ध रहे उसके लिए पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सावन के महीने में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन कराया लगातार पार्थिव शिवलिंग का भी निर्माण कराया,हाल ही में जब भाजपा और कांग्रेस के नेता टिकट के लिए अपने हाई कमान के पास चक्कर काट रहे थे उस दौरान पीसी शर्मा शास्त्री नगर में तीन दिवसीय भागवत कथा का आयोजन कर रहे थे। पीसी शर्मा हमेशा कहते हैं कि वो दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में आने वालों को वोटर नहीं बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। चुनाव वो पद अथवा प्रतिष्ठा के लिए नहीं लड़ते बल्कि जनता की सेवा के लिए वो चुनाव लड़ते हैं जिससे वो अपने क्षेत्र के जनता की पूरी शक्ति के साथ सेवा कर सकें।

22/10/2023103
सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा का टिकट मिलते ही पुराने जख्म हुए हरे,मूल भाजपाइयों ने किया किनारा
भोपाल

सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा का टिकट मिलते ही पुराने जख्म हुए हरे,मूल भाजपाइयों ने किया किनारा

भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 92 वे प्रत्याशियों की घोषणा कर कुल 228 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है अभी दो सीटों की घोषणा होनी बांकी है (bjp candidate list)। इस बीच सबसे चौकाने वाला जो नाम आया वो त्योंथर विधानसभा सीट से श्रीनिवास तिवारी (shrinivas tiwari) के नाती सिद्धार्थ तिवारी (siddharth tiwari) का नाम रहा है। सिद्धार्थ तिवारी काफी समय से त्योंथर (teonthar) में सक्रिय थे और उन्हे पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हे टिकट जरुर देगी। लेकिन उनके अरमानों में उस वक्त पानी फिर गया जब कांग्रेस ने दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) को टिकट दे दिया। सिद्धार्थ तिवारी को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में दिख रहा था ऐसे में उनके लिए मंत्री राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) उम्मीद की किरण बन कर आए और सिद्धार्थ को भाजपा में ज्वाइन करवा दिया। महज दो दिन पहले हाथ छोड़ फूल थामने वाले सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा ने टिकट भी दे दिया। लेकिन भाजपा को यह नहीं मालूम था कि सिद्धार्थ को टिकट देने से वो सीट उसके हाथ से जा सकती है। एक कहावत है कि आधी छोड़ पूरी को धावे,पूरी मिलै ना आधी पावै, भाजपा के इस फैसले से त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। श्यामलाल द्विवेदी (shyamlal dwivedi) जैसे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता का टिकट कटने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं में काफी विरोध देखने को मिल रहा है। दूसरी तरफ श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि कांग्रेस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh government) सरकार में जिस प्रकार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उनके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करवाए गए उससे त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ता अब तक उबर नहीं पाए थे कि श्रीनिवास तिवारी के नाती को भाजपा ने टिकट देकर उन पुराने जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है। सिद्धार्थ तिवारी को टिकट मिलते ही कौशलेश द्विवेदी जैसे नेता फिर सक्रिय हो गए बिना भाजपा ज्वाइन किए सभी सिद्धार्थ के कार्यक्रम में शामिल होने लगे और परिणाम यह निकला कि भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं ने सिद्धार्थ और भाजपा से दूरी बना ली। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार रमाशंकर पटेल पटेल का चुनाव जीतना आसान नजर आने लगा है।

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