#assembly elections
Total published stories tagged under #assembly elections: 47

सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा का टिकट मिलते ही पुराने जख्म हुए हरे,मूल भाजपाइयों ने किया किनारा
भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 92 वे प्रत्याशियों की घोषणा कर कुल 228 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है अभी दो सीटों की घोषणा होनी बांकी है (bjp candidate list)। इस बीच सबसे चौकाने वाला जो नाम आया वो त्योंथर विधानसभा सीट से श्रीनिवास तिवारी (shrinivas tiwari) के नाती सिद्धार्थ तिवारी (siddharth tiwari) का नाम रहा है। सिद्धार्थ तिवारी काफी समय से त्योंथर (teonthar) में सक्रिय थे और उन्हे पूरी उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हे टिकट जरुर देगी। लेकिन उनके अरमानों में उस वक्त पानी फिर गया जब कांग्रेस ने दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) को टिकट दे दिया। सिद्धार्थ तिवारी को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में दिख रहा था ऐसे में उनके लिए मंत्री राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) उम्मीद की किरण बन कर आए और सिद्धार्थ को भाजपा में ज्वाइन करवा दिया। महज दो दिन पहले हाथ छोड़ फूल थामने वाले सिद्धार्थ तिवारी को भाजपा ने टिकट भी दे दिया। लेकिन भाजपा को यह नहीं मालूम था कि सिद्धार्थ को टिकट देने से वो सीट उसके हाथ से जा सकती है। एक कहावत है कि आधी छोड़ पूरी को धावे,पूरी मिलै ना आधी पावै, भाजपा के इस फैसले से त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। श्यामलाल द्विवेदी (shyamlal dwivedi) जैसे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता का टिकट कटने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं में काफी विरोध देखने को मिल रहा है। दूसरी तरफ श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि कांग्रेस की तत्कालीन दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh government) सरकार में जिस प्रकार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया और उनके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करवाए गए उससे त्योंथर भाजपा के कार्यकर्ता अब तक उबर नहीं पाए थे कि श्रीनिवास तिवारी के नाती को भाजपा ने टिकट देकर उन पुराने जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है। सिद्धार्थ तिवारी को टिकट मिलते ही कौशलेश द्विवेदी जैसे नेता फिर सक्रिय हो गए बिना भाजपा ज्वाइन किए सभी सिद्धार्थ के कार्यक्रम में शामिल होने लगे और परिणाम यह निकला कि भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं ने सिद्धार्थ और भाजपा से दूरी बना ली। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार रमाशंकर पटेल पटेल का चुनाव जीतना आसान नजर आने लगा है।

भाजपा में पांचवी सूची की नहीं सुलझ रही गुत्थी,पहले प्रदेश और अब दिल्ली में चल रही माथापच्ची
भारतीय जनता पार्टी ने पहली सूची जारी कर बहुत बड़ा दंभ भरा था कि कांग्रेस कहती रही और भाजपा ने सूची जारी कर दिखा दिया कि चुनावी तैयारी में कौन तेज चल रहा है (bjp candidate list)। भाजपा ने पहली सूची अगस्त के महीने में जारी कर सभी को चौंकाया उसके बाद सितंबर के महीने में भाजपा ने तीन सूचियां जारी की और लगातार कांग्रेस पर सूची को लेकर हमला किया। भाजपा ने चार सूचियों में 136 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया लेकिन पांचवीं सूची से भाजपा भटक गई,भाजपाई खेमें में हार का फोविया ऐसे हावी हुआ कि भाजपा का संगठन सूची जारी करने की हिम्मत ही नही जुटा पा रहा है। उधर कांग्रेस ने दो सूचियों में ही अपने सारे तुरुप के इक्कों को चुनावी मैदान में उतार कर यह बता दिया कि वो इस चुनाव को टेस्ट स्टाइल में नहीं टी20 की स्टाइल में देख रहे हैं। अब बारी भाजपा की है लेकिन एक-एक दिन कर बढ़ते चले जा रहे हैं आज से नामांकन की तारीख भी शुरु हो चुकी है और आलम यह है कि भाजपा ने अभी तक 94वे नामों पर सहमति नहीं बनाई है। एमपी बीजेपी से लेकर दिल्ली तक भाजपा की कई चरणों में बैठक हो चुकी है लेकिन पार्टी सही उम्मीदवारों का चयन करने में अब तक नाकाम साबित हुई है (bjp meeting)। भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का भी दंभ भरती है और हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि 94वे नाम भाजपा को नही मिल रहे जो कांग्रेस को चुनौती दे पाएं। मतलब साफ है। भाजपा के सर्वे में पार्टी की स्थिति ठीक नहीं है यही कारण है कि भाजपा अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पा रही है।

सिद्धार्थ के भाजपा ज्वाइन करते ही त्योंथर भाजपा में विद्रोह,सभी ने स्थानीय उम्मीदवार की उठाई मांग,बात नहीं मानी तो होंगे सामूहिक इस्तीफे
हाल ही में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) के नाती सिद्धार्थ (राज) तिवारी (Siddharth Tiwari) ने भोपाल स्थिति भाजपा कार्यालय में भाजपा की सदस्यता ली है। सिद्धार्थ के भाजपा ज्वाइन करने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हे भाजपा त्योंथर से अपना उम्मीदवार भी घोषित कर रकती है। और यही कारण है कि त्योंथर विधानसभा के सभी भाजपा पदाधिकारियों ने बगावती तेवर अपनाते हुए इस्तीफा देने का मन बना लिया है। गुरुवार को त्योंथर भाजपा के तीनों मंडल अध्यक्षों सहित ब्लाक के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने वर्तमान विधायक श्यामलाल द्विवेदी (Shyamlal Dwivedi) के निवास पर बैठक की थी। बैठक में सभी ने प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav) ,सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) और सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के नाम पर एक आवेदन तैयार किया है जिसमें उन्होने लिखा है कि कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए सिद्धार्थ तिवारी और उनके परिवार ने भाजपा और RSS के विरुद्ध हमेशा काम किया है। तिवारी खानदान के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध बहुत सारे प्रकरण दर्ज कराने के साथ-साथ प्रताड़ित भी किया गया था। पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर मांग करते हुए कहा है कि उन्हे स्थानीय और पार्टी के किसी मूल कार्यकर्ता में से ही उम्मीदवार का चयन करके दिया जाना चाहिए। बैठक में मंडल अध्यक्ष राजनारायण तिवारी,जिला अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा प्रशांत पाठक,कौशलेश तिवारी जिला कार्यकारिणी सदस्य,विभव कुमार जायसवाल,अध्यक्ष नगर परिषद चाकघाट। सहित कई पदाधिकारी शामिल हुए और सभी ने एकमत होते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मूल और स्थानीय कार्यकर्ता को ही टिकट दिया जाना चाहिए और ऐसा नहीं होने पर सभी पदाधिकारी सामूहिक रुप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे। पत्र की जानकारी सभी पदाधिकारियों ने मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को भी दी है,बैठक के दौरान मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को फोन लगाया गया और उन्हे बताया गया कि सिद्धार्थ तिवारी को टिकट दिया जाता है तो भाजपा के मूल कार्यकर्ता भाजपा के उम्मीदवार का साथ नहीं देंगे।

कांग्रेस ने 88 प्रत्याशियों की जारी की सूची,छह विधायकों के काटे टिकट
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार देर रात को प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी (congress second list) । इसमें 88 नाम हैं, जिसमें में पहली सूची में घोषित तीन प्रत्याशी के टिकट भी बदले गए हैं। पार्टी ने छह विधायकों के टिकट काटे हैं। सूची के अनुसार अब दतिया से अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती, गोटेगांव में शेखर चौधरी की जगह नर्मदा प्रसाद प्रजापति यथावत और पिछोर से शैलेंद्र सिंह का टिकट काटकर अरविंद लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है। भोपाल दक्षिण-पश्चिम से पीसी शर्मा,गोविंदपुरा से रवीन्द्र साहू,हुजूर से नरेश ज्ञानचंदानी और भोपाल उत्तर से विधायक आरिफ अकील के उत्तराधिकारी के तौर पर आतिफ अकील मैदान में होंगे। छिंदवाड़ा से सांसद नकुल नाथ ने जिन तीन प्रत्याशियों के नाम पहले घोषित किए थे उन्हें शामिल करते हुए 88 प्रत्याशियों की सूची जारी की गई है (congress candidate list)। अब केवल बैतूल जिले की आमला सीट का प्रत्याशी घोषित होना बांकी है। कांग्रेस यहां से राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निशा बांगरी को चुनाव लड़ना चाहती है। पर अभी शासन ने उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया है। शिवपुरी से प्रत्याशी केपी सिंह को वापस किशोर भेजे जाने की चर्चा थी लेकिन पार्टी अपने पूर्व के निर्णय पर कायम रही। यहां से भाजपा से कांग्रेस में आए विधायक वीरेंद्र रघुवंशी का प्रत्याशी बनने की मांग रघुवंशी समाज कर रहा था। भिंड से एक बार फिर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को मैदान में उतर गया है वह भाजपा से फिर कांग्रेस में लौटे हैं।

श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी ने ली बीजेपी की सदस्यता,त्योंथर से लड़ेंगे चुनाव
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) के पोते और सुंदरलाल तिवारी (Sundar Lal Tiwari) के बेटे सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। सिद्धार्थ तिवारी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहनकर भाजपा की सदस्यता दिलाई है। इस दौरान सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि वह भाजपा की विकास गाथा से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं। सिद्धार्थ तिवारी ने कहा की उन्होंने 2003 का दौर देखा है और 2023 का दौर भी देख रहे हैं। पहले सड़कों में सिर्फ गड्ढे हुआ करते थे और आज की नेशनल हाईवे सबके सामने है। हालांकि सिद्धार्थ तिवारी ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगे लेकिन यह बातें मानी जा रही है कि वह रीवा की त्योंथर विधानसभा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। गौरतलब है कि अभी तक भाजपा ने त्योंथर से भाजपा ने अपने प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है और कांग्रेस पार्टी त्योंथर से रमाशंकर पटेल (Ramashankar Patel) का ऐलान कर चुकी है।

भाजपा की सूची में फंसा पेंच, केन्द्रीय नेतृत्व के मंथन में 'विष ही विष' कहां से लाएं 'अमृत'
प्रदेश की 94 वे सीटें भाजपा के गले की फांस बनती चली जा रही हैं (MP Elections)। भाजपा ने अब तक चार सूचियों में 136 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है लेकिन 94 वे सीटों पर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व आकर ठहर गया है (bjp candidate list)। क्योंकि पार्टी के पास दावेदार हैं कार्यकर्ता हैं लेकिन सूची जारी करने की हिम्मत नहीं है। दरअसल भाजपा ने पहली 39 नामों की सूची अगस्त के महीने में जारी की थी, दूसरी 39 नामों की सूची सितंबर के महीने में जारी की जिसमें तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा गया, इस दौरान जिन दावेदारों के नाम काटे गए वो और उनके समर्थक बगावत के मूड में आ गए, तीसरी सूची में एक ही नाम आया जिसका जमकर विरोध हुआ, चौथी सूची 57 नामों की आई जिसमें ज्यादातर नेताओं को रिपीट कर दिया गया और यहां समझ में आया की भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व कितने डर में फैसले ले रहा है। अब 94 वे नामों पर भाजपा का लगातार मंथन चल रहा है जिसमें 27 हारी हुई भी सीटें शामिल हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार भाजपा करीब 20 सिटिंग एमएलए के टिकट काटने के मूड में है क्योंकि उनकी परफॉर्मेंश ठीक नहीं बताई जा रही है। अब भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व इस दुविधा में है कि अगर इन सीटों पर विधायकों के नाम काटे गए तो पार्टी के कार्यकर्ता विद्रोह की स्थिति में आ जाएंगे और उन्हे डैमेज कंट्रोल करते-करते मतदान का समय आ जाएगा ऐसी स्थिति में भाजपा की तैयारियां कमजोर हो सकती हैं। हांलाकि अब भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व जल्द ही फैसले लेने वाला है और माना जा रहा है कि एक दिन के अंदर भाजपा अपने बचे हुए 94 वे उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर देगी।

भर्तियों में गड़बड़ी की कांग्रेस कराएगी जांच,युवाओं को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी की बड़ी रणनीति
मप्र कांग्रेस कमेटी हर वर्ग को साधने के लिए अलग-अलग तरह के प्लान पर काम कर रही है (MP Congress)। कांग्रेस को इस बात का अहसास है कि युवाओं को अपने पक्ष में कर लिया तो विधानसभा चुनाव में फतह हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर शासकीय भर्तियों में हुई गड़बड़ी की जांच कराई जाएगी (congress vachan patra)। गौरतलब है कि एमपी में बहुचर्चित व्यापम घोटाले (vyapam ghotala) सहित पटवारी चयन परीक्षा (patwari exam) और पुलिस भर्ती सहित अलग-अलग परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के आरोप कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और अब कांग्रेस उसी आरोप को अपना हथियार बना कर चुनाव मैदान में उतरना चाहती है। गौरतलब है कि नई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में 14 लाख से अधिक युवा मतदाता जुड़े हैं और कांग्रेस को मालूम है कि इन युवाओं को अपने पक्ष में कर लिया तो चुनाव में फतह हासिल करने से कोई रोक नहीं पाएगा। क्योंकि इस वक्त प्रदेश में बेरोजगारी युवाओं की दुखती रग माना जाता है। जिस प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन चल रहा है उससे सरकार के प्रति लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी लिए कांग्रेस पार्टी भर्तियों में गड़बड़ी की जांच की गारंटी दे रही है। कांग्रेस की ओर से इंदौर में एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाना है जिसके माध्यम से कांग्रेस इस बात की ब्रैंडिंग करेगी कि कांग्रेस की सरकार बनी तो किस प्रकार से भर्तियों की गड़बड़ी को सामने लाया जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस इंदौर में बड़ा कार्यक्रम कर प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के युवाओं में एक मैसेज देना चाहती है कि कांग्रेस पर विश्वास कीजिए,सरकार बनी तो भर्तियों की गड़बड़ी का खुलासा होकर रहेगा। हांलाकि ये बात और है कि कांग्रेस ने भाजपा की सरकार पर आज तक जितने भी आरोप लगाए हैं उनको सिद्ध करने में कांग्रेस नाकाम रही है इसी लिए कांग्रेस पर प्रदेश की जनता पूरी तरह से विश्वास भी नहीं कर पा रही है। इससे पहले साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने व्यापम घोटाले को मुद्दा बनाया था और जब सरकार बनी तो कांग्रेस व्यापम घोटाले को भूल गई,ना कोई जांच हुई ना कोई खुलासा हुआ जिसके कारण कांग्रेस की गारंटी पर प्रदेश की जनता विश्वास भी नहीं कर पा रही है।

बसपा के वर्चश्व वाली 69 सीटों पर भाजपा की नजर
मप्र के विधानसभा चुनाव में बसपा हमेशा छुपी रुस्तम साबित होती रही है (bsp mp)। आंकड़ो के हिसाब से उसके पास सीटें एक या दो ही रहती हैं लेकिन प्रदेश में 69 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जिनमें बसपा का हमेशा वर्चश्व रहा है। जिसके कारण कांग्रेस और भाजपा को संतुलन बनाने में काफी दिक्कतें होती रही हैं। प्रदेश के एससी वर्ग का झुकाव भी बसपा की तरफ रहा है। प्रदेश में लगातार नौ फीसदी वोट भी बसपा को मिलता रहा है। कुछ सालों में बसपा के कमजोर होने से उसका वोट बैंक छिटकने लगा है लेकिन यह भाजपा को ना मिल कर कांग्रेस को जाता है। साल 2013 में भाजपा के पास एससी वर्ग की 28 सीटें थीं, जबकि साल 2018 में घट कर 18 रह गई। भाजपा की यही चिंता है, ऐसे में बसपा के वोट बैंक पर भाजपा की नजर लगातार बनी हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए संत रविदास मंदिर (sant Ravidas) और सुमित्रा वाल्मीकि (Sumitra Valmiki) को राज्यसभा सदस्य बनाने जैसे निर्णय को प्रचारित कर भाजपा बसपा के वोट बैंक में सेंध लगा रही है। भाजपा ने साल 2018 में हुए नुकसान की भरपाई के लिए और कुछ जातियों का साथ पाने के लिए इस वर्ग के कई नेताओं को अपने साथ मिलाया है। उत्तरप्रदेश सहित मध्यप्रदेश में अहिरवार,चौधरी,साकेत और जाटव जैसी जातियां बसपा का परंपरागत वोट बैंक रही हैं। वर्ष 2023 के चुनाव में भी इनके वोट निर्णायक भूमिका अदा करेंगे।इस बीच भाजपा ने बसपा के कई नेताओं को अपने पाले में कर लिया है। भाजपा की चिंता यह है की उत्तर प्रदेश सहित मध्य प्रदेश में अहिरवार, चौधरी, साकेत और जाटव जैसी जातियां बसपा का परंपरागत वोट रही है आप पार्टी के कमजोर पढ़ने के बाद भी यह जातियां बसपा को छोड़ कांग्रेस का साथ दे रही हैं। भाजपा ने इन जातियों के नेताओं को टिकट दिया तो भी जीत नहीं दिला पाई। ग्वालियर- चंबल और विंध्य में इन जातियों के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। यही कारण है कि अब बीजेपी इन जातियों का साथ पाने के लिए छोटे-छोटे नेताओं को तोड़ रही है। बसपा की पूर्व विधायक उषा चौधरी, सत्य प्रकाश सकवार जैसे नेताओं को भाजपा में शामिल कराया गया है। भिंड से बसपा विधायक संजीव कुशवाहा को भाजपा में शामिल तो कर लिया है लेकिन अभी उनका टिकट घोषित नहीं किया गया है। कांग्रेस भी एससी वोट के लिए पूरी कोशिश कर रही है। पार्टी ने वर्ष 2018 में बसपा से चुनाव लड़ने वाले कैलाश कुशवाहा को पहरी और सब सिंह गुर्जर को ग्वालियर ग्रामीण से प्रत्याशी बनाया है।

'शक्ति' के भरोसे भाजपा,प्रदेश भर में तीन दिनों तक आयोजित होंगे शक्ति सम्मेलन
नवरात्रि के मौके पर भारतीय जनता पार्टी शक्ति की आराधना करने जा रही है। मतलब प्रदेश की आधी आबादी को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी सभी दस हजार मंडलों में तीन दिवसीय शक्ति सम्मेलन का आयोजन करेगी। इस सम्मेलन का आगाज 17 अक्टूबर को होगा जिसका समापन 19 अक्टूबर को किया जाएगा। कल 12 बजे प्रदेश के सभी दस हजार मंडलों में शक्ति सम्मेलन (Shakti Sammelan) की एकसाथ शुरुआत की जाएगी। अगले तीन दिन तक चलने वाले शक्ति सम्मेलनों में भाजपा के सभी दिग्गज एकसाथ जुटेंगे, जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan),प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) और केन्द्रीय मंत्री शामिल होंगे। शक्ति सम्मेलनों के माध्यम भाजपा 51% वोट के लक्ष्य को पाने की कोशिश करेगी जिसमें महिलाओं की अहम भूमिका रहने वाली है (mp women voters)। भाजपा इस सम्मेलन के माध्यम से एक बार फिर प्रदेश की जनता के बीच पहुंच कर उन्हे यह बताना चाहती है कि केन्द्र और राज्य की सरकार मिल कर उनके लिए क्या-क्या योजनाएं संचालित कर रही है और फिर से भाजपा की सरकार क्यों जरुरी है।

विंध्य की राजधानी का चुनावी सर्वे: क्या कहता है विंध्य,अबकी बार किसकी सरकार...
मप्र में विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीति पूरे शबाब पर है (MP Elections)। विंध्य में हर व्यक्ति यही बात कर रहा है अबकी बार किसकी सरकार। विंध्य की तासीर भी ऐसी है कि वहां का एक छोटा सा बच्चा भी राजनीति की बात करता है और उसका राजनीतिक ज्ञान भी कमाल का ही रहता है (Vindhya Range)। गांव में ठंड के सीजन में अलाव जलता है वहां बैठे लोग प्रदेश की राजनीति तय कर देते हैं वो यहां तक बता देते हैं कि इस बार प्रदेश का मुखिया कौन होगा। अब बात करते हैं विंध्य में कौन किस पर भारी पड़ सकता है (Vindhya Politics)। रीवा की त्योंथर विधानसभा सीट में बसपा अथवा भाजपा का वर्चश्व रहता है जब भी कांग्रेस और भाजपा ने त्योंथर से ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारा है तब हमेशा बसपा ने जीत दर्ज की है। पिछले दो चुनाव से बीजेपी ही जीत दर्ज कर रही है क्योंकि कांग्रेस रमाशंकर पटेल (कुर्मी) को अपना उम्मीदवार बना रही है। और इस चुनाव में फिर कांग्रेस ने भाजपा को वाकओवर देते हुए दो बार हार चुके रमाशंकर पटेल (Rama Shankar Patel) को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतार दिया है। देवतालाव की बात करें तो कुर्मी बाहुल सीट है यहां से गिरीश गौतम (Girish Gautam) तीन बार से विधायक हैं लेकिन बसपा यहां से मजबूत रहती है यहां भी अगर भाजपा के बाद कांग्रेस ब्राम्हण को चुनाव मैदान में उतारती है बसपा का उम्मीदवार देवतालाव से जीत दर्ज करता है। मनगंवा आरक्षित सीट है पहले श्रीनिवास तिवारी फिर गिरीश गौतम और अब पंचूलाल प्रजापति (Panchulal Prajapati) वहां से विधायक हैं माना जा रहा है कि गिरीश गौतम ने पंचूलाल प्रजापति को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी ली है इसलिए उन्हे भाजपा एक बार फिर टिकट दे सकती है। मऊगंज आम तौर पर कांग्रेस अथवा बसपा की पारंपरिक सीट मानी जाती है यहां का मतदाता हमेशा चौकाने वाले फैसले करता है। कभी लक्ष्मण तिवारी (Laxman Tiwari) जैसे नेता लोकजन शक्ति पार्टी से चुनाव जीत जाते हैं तो कभी सुखेन्द्र सिंह बन्ना (Sukhendra Singh Banna) कांग्रेस से चुनाव जीत जाते हैं पिछली बार भाजपा उम्मीदवार प्रदीप पटेल (Pradeep Patel) ने मऊगंज से जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में उनका भारी विरोध है,और माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता सुखेन्द्र सिंह बन्ना का दावा ज्यादा मजबूत है। गुढ़ की बात करें तो यहां से भाजपा उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह (Nagendra Singh) जीतते रहे हैं और इस चुनाव में उन्होने फिर दावा ठोंक रखा है कांग्रेस की तरफ से कपिध्वज सिंह (Kapidhwaj Singh) का टिकट फायनल हो चुका है,दोनों तरफ से ठाकुर नेता होने के कारण यहां के राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। सिरमौर से बीजेपी की तरफ से दिब्यराज सिंह (Divyaraj Singh) हैं जो दो बार के विधायक हैं,यहां से तीन ब्राम्हण चुनाव मैदान में हैं इसलिए माना जा रहा है कि दिब्यराज एकबार फिर फतह हासिल करने में कामयाब हो सकते हैं।

कांग्रेस में 'धारा 144 लागू' 96 वे विधायकों में 69 को मिला टिकट,सूची में मजबूत उम्मीदवारों की कमी
कांग्रेस पार्टी ने 144 नामों की सूची जारी करते हुए धारा 144 की यादों को ताजा कर दिया है (Congress Candidate list)। इसके उलट भारतीय जनता पार्टी ने चार सूची जारी की जिसमें 39-39,01 और 57 नामों की सूची जारी कर कुल 136 उम्मीदवारों की घोषणा की है (BJP Candidate list)। कांग्रेस पार्टी की सूची में मोहब्बत की दुकान चलाने के लिए एक मुस्लिम उम्मीदवार अरिफ मसूद (Arif Masood) को मौका दिया गया है। कांग्रेस की सूची में यह स्पष्ट नजर आया है कि उनके पास दावेदारों की भारी कमी थी,पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) कहते थे कि दो बार से ज्यादा हारे उम्मीदवारों को टिकट नही दिया जाएगा लेकिन इनमें त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से रमाशंकर पटेल (Rama shankar patel) ऐसे उम्मीदवार हैं जो दो बार पहले चुनाव हार चुके हैं और उन्हे तीसरी बार फिर मौका दिया गया है,जबकि यह सीट ब्राम्हण बाहुल सीट मानी जाती है और 35 साल से यहां कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है। कांग्रेस की पहली सूची में 96 वे विधायकों में 69 को टिकट दिया गया है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के सामने अवधेश नायक (Avdesh Nayak) को चुनाव मैदान में उतारा,अवधेश नायक भाजपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे हैं। सिंधिया के साथ बीजेपी में गए और फिर वापस कांग्रेस में लौटे बैजनाथ यादव (Baijnath Yadav) को कोलारस से टिकट दिया। सुरखी से परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के ख़िलाफ़ जनपद अध्यक्ष नीरज शर्मा (Neeraj Sharma) को प्रत्याशी बनाया है। नरयावली से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस ने हारे हुए नेताओं को भी टिकट दिया।विजयपुर पूर्व विधायक रामनिवास रावत, जौरा में उपचुनाव हारे पंकज उपाध्याय, अटेर में पूर्व विधायक हेमंत कटारे, मेहगांव में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे राहुल भदौरिया को प्रत्याशी बनाया… गुना की बमोरी सीट पर पूर्व मंत्री कन्हैया लाल अग्रवाल के बेटे ऋषि अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया,कन्हैया लाल पिछला चुनाव भाजपा के महेन्द्र सिंह सिसोदिया (Mahendra Singh Sisodiya) से हार गए थे। मुंगावली सीट पर भाजपा के पूर्व विधायक रहे स्व. राव देशराज सिंह यादव के बेटे राव यादवेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया,कांग्रेस ने बसपा से चुनाव लड़े नेताओं को भी प्रत्याशी बनाया, ग्वालियर ग्रामीण सीट पर बहुजन समाज पार्टी से पिछला चुनाव लड़े साहब सिंह गुर्जर, भांडेर में पूर्व विधायक फूल सिंह बरैया, पोहरी सीट पर पिछला उपचुनाव लड़े कैलाश कुशवाह, शिवपुरी जिले की पिछोर सीट पर केपी सिंह की जगह शैलेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया,शैलेंद्र के पिता भानु प्रताप सिंह पहले विधायक रह चुके हैं, वर्तमान में शैलेंद्र सिंह नगर पालिका अध्यक्ष हैं। कांग्रेस ने 5 सीटों पर बदलाव किया। कटंगी से टामलाल सहारे की जगह पूर्व सांसद बोध सिंह भगत, गोटेगांव में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की जगह शेखर चौधरी, गुनौर से विधायक शिवदयाल बागरी की जगह जीवन लाल सिद्धार्थ, भगवानपुरा में निर्दलीय विधायक केदार डाबर और झाबुआ में वर्तमान विधायक कांतिलाल भूरिया की जगह बेटे विक्रांत भूरिया (Vikrant Bhuria) को उम्मीदवार बनाया।

कांग्रेस को घेरने के लिए भाजपा ने तैयार किया 'चक्रव्यूह' सीएम शिवराज होंगे व्यूह में सबसे आगे
कांग्रेस पार्टी को सभी मोर्चों में करारा जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 'व्यूह' रचना की है। इस व्यूह में सबसे आगे सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) को ही रखा जाएगा। भाजपा की इस रणनीति से यह भी स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सीएम शिवराज पर ही सबसे ज्यादा भरोसा है। सीएम शिवराज के साथ भारतीय जनता पार्टी ने अलग-अलग अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी कांग्रेस (mp congress) की घेराबंदी में लगा रखा है। यह नेता कांग्रेस नेताओं के बयान, आडियो-वीडियो संदेश या किसी रैली में आए तत्थ्यों का करारा जवाब देंगे। कांग्रेस के बड़े नेताओं के प्रवास की हर जानकारी तत्काल इन बड़े नेताओं तक भेजी जा रही है ताकि समय रहते उनका जवाब दिया जा सके। खास कर राहुल गांधी (Rahul Gandhi), प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi), कमलनाथ (Kamal Nath) और दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) की प्रत्येक चुनावी गतिविधि पर भाजपा की तरफ से नजर रखी जा रही है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने भोपाल में मोर्चा संभाल लिया है। सभी प्रवक्ताओं के साथ दिग्गज नेताओं की प्रतिदिन सुबह वर्चुअल बैठक भी हो रही है, जिसमें कांग्रेस पर किए जाने वाले हमले पर चर्चा कर लाइन तैयार की जा रही है। भाजपा चुनावी तैयारी में कांग्रेस से एक कदम आगे चल रही है। चाहे प्रत्याशियों की घोषणा हो या फिर चुनाव प्रचार को गति देने की बात हो। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी रोड शो और जनसभाएं कर रहे हैं। आचार संहिता (model code of conduct) लगने के बाद से वह भोपाल में तीन सभाएं और रोड शो कर चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार करने जाएंगे इसके लिए कार्य योजना तैयार की गई है।