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कांग्रेस ‘लास्ट’में ‘फास्ट’ होने के चक्कर में ‘कास्ट’ गेम खेल रही है,डॉ. नरोत्तम मिश्रा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा जातिगत जनगणना (Caste Census) कराए जाने की बात पर गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने करारा प्रहार किया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस लास्ट में फास्ट होने के चक्कर में कास्ट गेम खेल रही है। इनकी शुरु से आदत रही है कि फूट डालो शासन करो। लोगों को अलग-अलग कर सरकार बनाने की इनकी रणनीति हमेशा रही है। वही पित्रपक्ष के दौरान भाजपा की सूची जारी होने पर कांग्रेस द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं जिस पर गृह मंत्री ने कहा कि कोई नया काम पित्रपक्ष में नही किया जाता है भाजपा उम्मीदवारों की सूची (BJP Candidate list) तो महीने भर से जारी हो रही है ऐसे में इसमें कुछ नया नही है। और पित्रपक्ष में तो पितरों का आशीर्वाद लिया जाता है इससे अच्छा समय क्या हो सकता है। गृह मंत्री ने पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) द्वारा सीएम पर सवाल खड़ा करने पर कहा कि जितने महीने कमलनाथ सीएम नहीं रहे उससे ज्यादा साल तक शिवराज सिंह चौहान सीएम रह चुके हैं और अब भी हैं। शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) जैसे नेता पर सवाल खड़ा करने से पहले कमलनाथ और कांग्रेस के नेताओं को सोचना चाहिए। गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि अबकी बार फिर भाजपा की सरकार बनने जा रही है और यह कोई अतिशियोक्ति नहीं है बल्कि सच्चाई है जो तीन दिसंबर को सभी के सामने आ जाएगी।

सीएम शिवराज का राहुल गांधी पर निशाना,कहा झूठे वचन पत्र के लिए मांफी मांगे राहुल गांधी
प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू (model code of conduct) होते ही भाजपा और कांग्रेस के बीच जुवानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिं चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में वोट नहीं, झूठे वचन पत्र के लिए राहुल गांधी माफी मांगे। मुख्यमंत्री ने कहा राहुल गांधी झूठ की दुकान के मैनेजर हैं और , कमलनाथ झूठ के सेल्समेन। साथ में मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कांग्रेस सरकार के काले कारनामे मध्यप्रदेश में गिना रहे राहुल गांधी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी बात मोहब्बत की करते हैं लेकिन असलियत में वो झूठ की दुकान चला रहे हैं। कांग्रेस पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए सीएम ने कहा, कांग्रेस ने देश को बांटा है, राहुल गांधी मध्यप्रदेश को बांटने आए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस से जवाब मांगा है। सीएम शिवराज ने कहा राहुल गांधी बताए - क्यों आदिवासी बहनों का हक छीना ? क्यों किसानों की कर्जमाफी न करके उन्हें डिफाल्टर बनाया? क्यों 4000 रुपए बेरोजगारी भत्ते का युवाओं से झूठा वादा किया? मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी जब भी मध्यप्रदेश के दौरे पर आएंगे उन्हे इसी प्रकार करारा जवाब दिया जाएगा। गौरतलब है कि साल 2018 के विधानसभा चुनाल में राहुल गांधी ने दस दिन के अंदर ऋण मांफी का वादा किया था जिसे कमलनाथ सरकार (Kamal Nath) पूरा नहीं कर पाई। और अब इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी 11 गारंटी लेकर आई है साथ में जातिगत जनगणना (caste census) कराने की लगातार बात कही जा रही है। मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी सभी वर्गों में जातियों का जहर घोल कर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाना चाहती है।

आज की सबसे बड़ी भविष्यवाणी- हारे कोई भी लेकिन सरकार तो 'कमल' की ही बनेगी
मप्र सहित पांच राज्यों में कल से आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है (Madhya Pradesh Elections)। अगले 37 दिनों तक प्रदेश में सियासी बुखार जमकर देखने को मिलने वाला है। प्रदेश में जिस प्रकार से भाजपा और कांग्रेस सत्ता हासिल करने के लिए अपने सियासी मोहरे फिट करने में जुटे हैं उससे स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस इस चुनाव को बिल्कुल भी हल्के में नहीं ले रहे हैं। कर्नाटक चुनाव में हार के बाद जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने वहां से सीख ली है तो वहीं कांग्रेस पार्टी अति उत्साहित नजर आ रही है। जो कांग्रेस अभी तक 150-180 सीटों का दावा कर रही थी उसी कांग्रेस के पदाधिकारी कुछ एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वे को वाट्सेप ग्रुपों में वायरल कर खुश हो रहे हैं। दरअसल एक एजेंशी के सर्वे में भाजपा को 104 से 116 सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं कांग्रेस को 116 से 125 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार के सर्वे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है। लेकिन उन्हे यह नहीं मालूम कि चुनाव का काउनडाउन अब शुरु हुआ है। जिस भारतीय जनता पार्टी को लड़ाई में नहीं माना जा रहा था उसी भारतीय जनता पार्टी को सर्वे एजेंसियों 104 से 116 सीट तक दे रहे हैं। मतलब साफ है कि मुख्यमंत्री शिवराज स़िह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) द्वारा ऐन मौके पर शुरु की गई लाड़ली बहना योजना (Ladli Behana Yojana) काम कर गई है जिसके कारण भाजपा के वोटबैंक का ग्राफ बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अलग-अलग तरह की यात्राएं निकाल कर लगातार जनता से संवाद भी किया है। भाजपा महिला मोर्चा (BJP Mahila Morcha) को भी लक्ष्य दे दिया गया है कि वो हर बूथ में जाएं वाट्सेप ग्रुप बनाएं और स्थानीय महिलाओं को ग्रुपों में जोड़ कर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से महिला हितैषी योजनाओं का जमकर प्रचार करें जिससे महिलाओं को भावनात्मक तरीके से भाजपा से जोड़ा जाए। जनता का दिल जीतने के लिए कांग्रेस (MP Congress) की ओर से भी बहुत सारे अभियान चलाए जाते रहे हैं लेकिन कांग्रेस की कमजोरी यही रही है कि भोपाल में पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) को खुश करने के लिए नेता और कार्यकर्ता तो जुट जाते हैं लेकिन वो अभियान भोपाल से निकलने के बाद कहां जाता है और कहां खत्म होता है इसका पता आज तक नहीं चल पाया है। बात स्पष्ट है कि अगले 37 दिन मध्यप्रदेश में जमकर एमोश्नल ड्रामा देखने को मिलने वाला है। साम-दाम-दंड और भेद सभी इस चुनाव में स्पष्ट रुप से देखने को मिलने वाला है। इस बीच यह बात तय है कि सत्ता के सिंहासन की इस लड़ाई में भाजपा और कांग्रेस कितनी भी मेहनत कर लें लेकिन यह अटल सत्य है कि सरकार 'कमल' की ही बनेगी।

देश के पांच राज्यों में आज से चुनाव आचार संहिता लागू,एमपी में 17 नवंबर को होगा मतदान
देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आज से आदर्श आचार संहिता लागू (model code of conduct) हो गई है (assembly elections)। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा है कि भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान को पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान किया जाएगा (MP Elections)। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान आयोजित किया जाएगा,पहला चरण 7 नवंबर और फिर दूसरा चरण 17 नवंबर को होगा। राजस्थान में 23 नवंबर को मतदान होगा,मिजोरम में सात नवंबर को मतदान होगा। तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान डाले जाएंगे। मतों की गणना तीन दिसंबर को की जाएगी। मतदान की तारीखों का ऐलान होते ही भाजपा और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते हुए चुनाव में दो-दो हाथ का ऐलान करते हुए शपथ की तारीखों का ऐलान तक कर दिया है।

नारी शक्ति के भरोसे भाजपा का 51% वोट पाने का लक्ष्य,वाट्सेप ग्रुपों से जोड़ी जाएंगी महिलाएं
विधानसभा चुनाव में 51% वोट प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी महिलाओं पर लगातार फोकस बढ़ा रही है (MP BJP)। भाजपा अब प्रत्येक मतदान केन्द्र स्तर पर महिलाओं के वाट्सेप ग्रुप भी अलग से बनवा रही है,ताकि भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे महिला केन्द्रित कार्यों को प्रचारित किया था सके। भाजपा ने रणनीति बनाई है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का ब्यापक स्तर पर प्रचार- प्रसार किया जाएगा (Nari Shakti Vandan Adhiniyam)। भाजपा हर हाल में विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव को महिला केन्द्रित बनाने की तैयारी कर रही है। रणनीति के तहत प्रत्येक मतदान केन्द्रों पर ऐसी महिलाओं से संपर्क किया जा रहा है, जो केन्द्र या शिवराज सरकार की किसी ना किसी योजना से लाभान्वित हो रही हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Ladli Behana Yojana) के माध्यम से एक करोड़ 31 लाख लाड़ली बहनों को प्रतिमाह एक हजार 250 रुपये दिये जा रहे हैं। वहीं,प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Ujjwal Yojana) और लाड़ली बहनों को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आजीविका मिशन से भी 43 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इन सभी से महिला मोर्चा न केवल प्रत्यक्ष संपर्क करेगा,बल्कि इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यमों से भी अपनी बात पहुंचाएगा। इसके लिए मोर्चा की कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। प्रदेश स्तर से जिला और बूथ स्तर तक की महिला कार्यकर्ताओं को तत्थ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। महिला मोर्चा की पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में दो करोड़ 72 लाख 36 हजार 229 महिला मतदाता हैं। 29 विधानसभा में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है (MP Elections)।

प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस
पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है (MP Elections)। मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही भाजपा और कांग्रेस युवाओं को आकर्षित करते के लिए रणनीति बनाने में जुट गई हैं (First time voters)। मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश भर में 19 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। युवा मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंप दी है (BJP Yuva Morcha)। पार्टी हाई कमान का आदेश मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा ने तीन अक्टूबर से प्रदेश भर में नव मतदाता सप्ताह अभियान शुरु कर दिया है। इसके तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अपने सभी 1070 मंडलों में युवा मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। दस अक्टूबर को सभी मंडलों में इसका समापन होगा। इसमें युवा मतदाताओं के अलावा जिले के भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कुछ युवा मतदाताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव है ऐसे में युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस दोनों ही संगठन युवा मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं। युवा मोर्चा ने 'खेलेगा मध्यप्रदेश' समेत कई अभियान शुरु किए हैं। इसी प्रकार युवा कांग्रेस ने 'बूथ जोड़ो, यूथ जोड़ो' अभियान शुरु किया है (Youth Congress)। प्रदेश में एक करोड़ 48 लाख युवा मतदाता हैं। दोनों दलों को लगता है कि इन्हे साधने से पूरे परिवार के वोट उनकी झोली में आ जाएंगे।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद
कांग्रेस (MP Congress) विंध्य में काफी कमजोर है और उसकी विंध्य में अगर कोई उम्मीद हैं तो पूर्व मंत्री अजय सिंह (राहुल) भैया (Ajay Singh Rahul)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार से अजय सिंह की उपेक्षा हुई है उससे वो खुद परिचित हैं यही कारण है कि राहुल सिंह इस वक्त पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय खुद की विधानसभा में मेहनत करना ज्यादा जरुरी समझते हैं। मामला अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच का है। दरअसल कमलनाथ ने अजय सिंह को बुलाकर कहा कि आपको सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (Siddharth Kushwaha) की मदद करनी है जिसके बाद अजय सिंह ने कमलनाथ से सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद करने से साफ इंकार कर दिया। अजय सिंह ने कहा कि जब रैगांव में विधानसभा का उपचुनाव चल रहा था तब उन्होने सिद्धार्थ कुशवाहा से मदद करने के लिए कहा था जबकि उसके रैगांव में करीब दस हजार वोट हैं लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा ने कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा की किसी भी सूरत में मदद नहीं की। अजय सिंह (राहुल) भैया ने कमलनाथ से यहां तक कहा कि आप चाहो तो मेरा टिकट काट दो अथवा प्रदेश में किसी के भी पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए कहो मैं करुंगा लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद नहीं करुंगा। अजय सिंह के इस प्रकार बात करने से पीसीसी चीफ कमलनाथ भी टेंशन में आ गए हैं। सही मायने में कहा जाए तो कांग्रेस के पास विंध्य में कोई मजबूत नेता नहीं है। साल 2013 के बाद विंध्य में कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती चली गई है। अजय सिंह खुद चुनाव नहीं जीत पाए माना यह भी जा रहा है कि विंध्य में अजय सिंह ने सही तरीके से मेहनत नहीं की तो फिर कांग्रेस पार्टी विंध्य (Vindhya)में ठीक तरीके से परफार्मेंश नहीं कर पाएगी।

'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे
हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं।

मासूम बच्ची को देख सीएम शिवराज ने गोदी पर उठाया,कहा हम 'सरकार नहीं परिवार चलाते हैं'
इंदौर के राऊ क्षेत्र में एक वाकये ने सबको भावविभोर कर दिया। मामला उस वक्त का है जब रात के 11.30 बज चुके थे, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मंच से जनता से संवाद कर रहे थे। सामने हज़ारों की संख्या में जनता मौजूद थी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें (Ladli Behna Yojana) मौजूद थीं। तभी मंच के सामने भीड़ में से एक 3-4 वर्ष की मासूम बालिका मुख्यमंत्री जी की तरफ़ देख 'मामा,मामा,मामा' ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और उनसे मिलने के लिये मंच की तरफ़ आगे बढ़ी। मामा शिवराज ने भी मासूम बिटिया को देख उसी समय अपना संबोधन रोका , बेटी को मंच पर बुलवाया , उसे गोदी में उठाया , दुलार और स्नेह दिया,मासूम भांजी , मामा से मिलकर बेहद खुश हुई जैसे उसकी कोई कामना पूरी हो गयी हो। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से कहा " मैं इसीलिये तो कहता हूं कि हम सरकार नहीं परिवार चलाते हैं। निश्चित तौर पर यह दृश्य वहां उपस्थित हज़ारों लोगों को भावविभोर कर देने वाला था। यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी मासूम को अपनी गोद में लिया है इससे पहले सीएम शिवराज का यह रुप पहले भी देखने को मिलता रहा है जिसको लेकर उनके विरोधी उन पर तंज कसते रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्वभाव में अभी बदलाव नहीं आया उनको प्रदेश के बच्चों का 'मामा' ऐसे ही नहीं कहा जाता अब तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि छोटे-छोटे बच्चों से उनके मामा का नाम पूछो तो वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ही नाम लेने लगे हैं और मामा से मिलने की जिद भी करने लगे हैं।

विधान चुनाव 2023: भाजपा या कांग्रेस जानिए इस बार क्या है जनता की राय
गांव से लेकर शहर तक हर ब्यक्ति की जुवान पर एक ही नाम है सरकार किसकी बनेगी। कुछ लोग कहते हैं सरकार भाजपा की बनेगी तो कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेस की सरकार बनेगी। वास्तव में प्रदेश की जनता अब तक यही तय नहीं कर पा रही है कि वोट किसको देना है।