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राजेन्द्र शुक्ला की जिद के चलते बीजेपी के हाथ से फिसल सकता है रीवा,कांग्रेस मजबूत
रीवा में अपना वर्चश्व कायम रखने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) को एक बार फिर चुनाव मैदान में टिकट दिला दिया है। जनार्दन मिश्रा उन निस्क्रिय सांसदों में गिने जाते हैं जो अपने दस साल के कार्यकाल में रीवा से बाहर ही नहीं निकले। रीवा संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें हैं उन विधानसभा क्षेत्र का दस साल में जनार्दन मिश्रा दौरा नहीं कर पाए। जनार्दन मिश्रा राजेन्द्र शुक्ला के बेहद करीबी माने जाते हैं इसी लिए उन्होने जनार्दन को एकबार फिर टिकट दिला कर जिताने की गारंटी ली है। लेकिन जनार्दन के खिलाफ एंटीइनकमबेंसी इतनी ज्यादा है कि अब खुद राजेन्द्र शुक्ला को अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है। ठीक इसी प्रकार उन्होने विधानसभा चुनाव में सेमरिया से केपी त्रिपाठी को टिकट दिलाया और आखिर में हताशा ही हाथ लगी। जिस उम्मीदवार ने विधानसभा में राजेन्द्र शुक्ला के करीबी केपी त्रिपाठी को चुनाव में हराया अब उन्ही अभय मिश्रा की पत्नी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में अपना भाग्य आजमा रही हैं। रीवा में राजनीतिक विश्लेषकों का साफ कहना है कि मोदी की गारंटी अलग विषय है लेकिन उन्हे एक ऐसा सांसद चाहिए जो उनके सुख दुख में खड़ा हो सके और जनार्दन मिश्रा में ऐसा कुछ नहीं है। वो थके हुए एक निस्क्रिय नेता हैं जो राजेन्द्र शुक्ला के द्वारा रीवा की जनता पर थोपे गए हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पीएम मोदी,उनकी योजनाएं और गारंटी सबकुछ ठीक है लेकिन क्षेत्र में अगर उनको कोई जरुरत पड़ेगी तो सांसद के पास ही जाएंगे न की मोदी के पास। लिहाजा भाजपा किसी को भी चुनाव मैदान में उतार देगी तो उसे बार-बार बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत
एमपी में विध्य क्षेत्र हमेशा राजनीति के जानकारों के लिए अबूझ पहेली रहा है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र की तासीर बदली है लेकिन इतनी भी नहीं बदली है जितनी भाजपा ने उम्मीद की है। रीवा की बात करें तो यह संसदीय क्षेत्र ब्राम्हण बाहुल माना जाता है। और बीजेपी ने उस ब्राम्हणत्व का पिछली दो पंचवर्षीय से काफी लाभ उठाया है। लेकिन इस बार की परिस्थितियां भिन्न हैं। हांलाकि बीजेपी अब भी मोदी की गारंटी का दंभ भर रही है और बीजेपी का यह भी मानना है कि मोदी की गारंटी फेल हुई तो 'राम बेड़ा पार करेंगे' लेकिन जिस प्रकार से रीवा में भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा (neelam mishra) पर दांव लगाया है उसके बाद लड़ाई दिलचश्प हो गई है। इन दोनों पार्टियों से अलग बीएसपी ने रीवा में भाजपा और कांग्रेस का तोड़ निकालते हुए कुर्मी को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। रीवा में ब्राम्हणों के अलावा कुर्मी समाज की बड़ी आबादी है और बीएसपी ने उसी का फायदा उठाते हुए अभिषेक पटेल (abhishekh patel) को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इतिहास गवाह है कि जब भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने ब्राम्हण को अपना उम्मीदवार बनाया है तो रीवा में बीएसपी उम्मीदवारों ने चमत्कारिक प्रदर्शन कर जीत दर्ज की है। सतना का भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। बीजेपी ने चार बार के सांसद गणेश सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जो विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं और कट्टर कुर्मी होने के कारण अन्य वर्ग इनसे काफी नाराज है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। यहां भी बीएसपी ने बड़ा खेला करते हुए पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। मतलब साब है कि बहुजन और ब्राम्हण एक तरफ होंगे तो यहां नारायण त्रिपाठी यानि बीएसपी जीत दर्ज कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में मोदी की गारंटी रीवा और सतना में फैल होने की उम्मीद की जा रही है।

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

शासकीय कर्मचारियों को चार फीसदी डीए देने का आदेश जारी,तीन किस्तों में मिलेगा एरियर
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार (mohan cabinet) ने होली से पहले सरकारी कर्मचारियों (mp government employees) को बड़ा तोहफा दिया है। मोहन सरकार ने शुक्रवार को कर्मचारियों का 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए है। बता दें कि गुरूवार को मोहन कैबिनेट की बैठक के बाद शुक्रवार को यह आदेश जारी किया गया है। इस महंगाई भत्ता का फायदा प्रदेश के 7.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगा।आदेश को जारी करते हुए वित्त विभाग ने कहा कि कर्मचारियों को एक जुलाई 2023 से 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत किया जाता है। इसके बाद महंगाई भत्ते की राशि बढ़कर 42 से 46 प्रतिशत हो गई है। महंगाई भत्ते में वृद्धि का लाभ मार्च माह के वेतन के साथ अप्रेल में होने वाले भुगतान में किया जाएगा। एक जुलाई से 29 फरवरी तक की राशि का भुगतान 3 समान किस्तों में किया जाएगा। यह राशि जुलाई, अगस्त, सितम्बर 2024 में एरियर के रूप में जमा की जाएगी।

कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल,पूछ रही सवाल क्या गारंटी है टिकट मिला तो आप अंत तक टिके रहेंगे
कांग्रेस पार्टी जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। मंगलवार को कांग्रेस के दस नामों की जारी सूची में स्पष्ट नजर आया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास आज उम्मीदवारों का अकाल पड़ चुका है (congress lok sabha candidate list) । कांग्रेस पार्टी ने दस उम्मीदवारों में तीन वर्तमान विधायकों को चुनावी मैदान में उतारा है उससे यह तस्वीर साफ हो गई कि कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल पड़ गया है। हार के डर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह,विवेक तन्खा सहित कई नेताओं ने चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया है। ऊपर से कांग्रेस जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता अगले दिन भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। इसी प्रकार कांग्रेस नेत्रृत्व ने जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह और सागर से अरुणोदय को भी लोकसभा में उतारने की रणनीति बनाई थी लेकिन इन दोनों नेताओं ने ऐन मौके पर कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया। दिल्ली में जब कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक हुई तो सबसे पहले यही सवाल उठा कि जिन नेताओं को वो टिकट देंगे उनकी मैदान में टिके रहने की क्या गारंटी है। पिछले एक हफ्ते से कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार अपने नेताओं को फोन करके सवाल कर रहा है कि चुनाव लड़ने की इच्छा है क्या? और अगर पार्टी आपको टिकट देती है तो क्या आप चुनाव मैदान में डटे रहेंगे। इस प्रकार के कई सवाल कांग्रेस नेत्रृत्व द्वारा संभावित दावेदारों से किए जा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस की कमर तोड़ने का पूरी तरह से मन बना लिया है। वो लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल कराते जा रहे हैं इसी लिए पूरी कांग्रेस में खलबली मची हुई है। कांग्रेस पार्टी में बचे खुचे नेताओं को सक की नजर से देखा जा रहा है। कोई भी नेता एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहा है।

कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव समिति (congress cec meeting) की बैठक में एमपी की 14 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है (congress candidate list)। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर भी शामिल हुए। बैठक के बाद जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 70% सीटों पर नाम तय कर लिए गए हैं। सर्वे के आधार पर जो नाम सर्वश्रेष्ठ थे उन्ही नामों पर सहमति बनी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से नकुलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में होंगे। जिन सीटों पर सिंगल नाम थे उन सीटों को भी फायनल कर दिया गया है। कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा भी इस बैठक में जमकर गर्माया है। कांग्रेस के कई ऐसे दावेदार थे जिन्हे पार्टी लोकसभा में उतारने जा रही थी लेकिन उन्होने नाम की घोषणा से पहले ही कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूर थाम लिया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करने पर दिक्कत हो रही है। कांग्रेस के नेता एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। टिकट देने से पहले कांग्रेस अपने संभावित दावेदारों से पूछ रही है कि ऐन मौके पर पार्टी छोड़ कर तो नहीं जाओगे। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने मिशन कांग्रेस मुक्त अभियान चला कर कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अभियान चलाया है उससे कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी सहमा हुआ है। कांग्रेस के नेता पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन उन्हे यही विश्वास नहीं हो रहा कि जिन्हे वो टिकट दे रहे हैं क्या वास्तव में वो नामांकन के आखिरी दिन तक कांग्रेस पार्टी में रहेंगे अथवा मौके पर पार्टी का दामन छोड़ कर हाथ में फूल तो नहीं थाम लेंगे।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।

विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी
भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी कहे जाने वाले भाजपा नेता भगवानदास सबनानी (bhagwandas sabnani) अब भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक बन गए हैं। यहां तो ठीक है लेकिन उनके पास पार्टी का प्रदेश महामंत्री का पद पहले से है जिसको वो पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उन्हे विधायक बनने का भी मौका दिया जिसमें वो फतह हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन अब भगवानदास सबनानी प्रदेश महामंत्री और विधायक पद के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम का विधायक होने के नाते भगवानदास सबनानी के पास रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ता अपना काम लेकर आते हैं लेकिन भगवानदास सबनानी पहले ही पार्टी के कामों में इतना ब्यस्त रहते हैं कि वो कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले भगवानदास सबनानी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के काफी करीबी माने जाते हैं जिसके कारण कार्यकर्ता उनसे कुछ कहने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। भगवानदास सबनानी इन दिनों चिड़चिड़े भी होने लगे हैं। पार्टी का काम और फिर विधायकी का काम दोनों एक ब्यक्ति पर आने के कारण ब्यस्तताएं बढ़ गई हैं। और यही उनके चिड़चिड़े होने का कारण भी बताया जा रहा है। इस बात में कोई सक नहीं कि भगवानदास सबनानी एक मेहनती वर्कर हैं लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अब वो सिर्फ प्रदेश महामंत्री नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के जनप्रतिनिधि भी हैं और उस क्षेत्र की जनता के साथ कार्यकर्ताओं की कुछ जरुरतें होती हैं जिनको पूरा करना जनप्रतिनिधि का ही काम होता है। कई कार्यकर्ता तो बीजेपी कार्यालय में सबनानी से मिलने के दिन भर खड़े रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात सबनानी से नहीं हो पाती। और यही करण है कि भगवानदास सबनानी के दोनों पदों से संतुलन नहीं बना पाने के कारण स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी का माहौल बनने लगा है।

अबकी बार 'गणेश विसर्जन' पर ध्यान,सतना रीवा की जनता भाजपा के 'थोपे' उम्मीदवारों से नाराज
लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने देश के 16 राज्यों की 195वे लोकसभा सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसमें एमपी की 29 सीटों के 24 उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा ने इस बार कोई भी चौकाने वाला निर्णय नहीं लिया जो जनता के गले से नहीं उतर रहा है। विंध्य की बात करें तो सतना लोकसभा सीट से सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर भाजपा ने एक बार फिर भरोसा कर स्थानीय जनता को नाराज कर दिया है। सतना एक ब्राम्हण बाहुल सीट मानी जाती है और गणेश सिंह कुर्मी समाज से आते हैं। और गणेश सिंह एक कट्टर जातिवादी नेता माने जाते हैं जिसके चलते अन्य वर्ग के लोग उनसे नाराज रहते हैं। दो बार सतना की जनता ने मोदी के नाम पर सांसद बना दिया लेकिन इस बार सतना की जनता गणेश सिंह को फिर सांसद नहीं बनाना चाहती है। जनता मोदी को तो चाहती है लेकिन गणेश सिंह को नहीं चाहती जिसका उदाहरण विधानसभा चुनाव में देखने को मिल चुका है। सतना की जनता गणेश सिंह को विधानसभा चुनाव में हरा चुकी है। कुछ ऐसा ही हाल रीवा का भी देखने को मिल रहा है जहां भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। जनार्दन मिश्रा को राजेन्द्र शुक्ला का डमी कैंडीडेट के रुप में माना जाता है। जनार्दन मिश्रा एक सरल और सौम्य सांसद की छवि रखते हैं लेकिन उनकी समस्या ये है कि वो क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहते हैं। दस साल तक सांसद रहने के बाद भी जनार्दन मिश्रा आज तक पूरे रीवा का भ्रमण नहीं कर पाए हैं। रीवा की जनता बहुत जागरुक मानी जाती है। थोपे गए नेताओं को रीवा की जनता ज्यादा बर्दास्त नहीं करती है। लिहाजा इस बार के लोकसभा चुनाव में रीवा और सतना की लोकसभा सीटें भाजपा के लाए कठिनाई पैदा कर सकती हैं। देखना दिलचश्प यही होगा कि जनता की नाराजगी जीतती है अथवा मोदी की गारंटी के आगे जनता नतमस्तक होती है।

मोहन यादव ने चुपके से बंद की 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना'
तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) में प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' (mukhyamantri kisan kalyan yojana) शुरु की गई थी जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) साल में तीन बार दो-दो हजार की तीन किस्त किसानों के खाते में डालते थे जो साल में कुल छह हजार रुपये किसानों को मिलती थी। केन्द्र सरकार की तरफ से भी किसान सम्मान निधि संचालित की जा रही है उस योजना में भी दो-दो हजार रुपये की साल में कुल तीन किस्ते ट्रांसफर की जाती हैं। इस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये खेती के लिए दिए जाते थे। लेकिन प्रदेश में सीएम बदलने के बाद एमपी सरकार की ओर से संचालित की जा रही 'किसान कल्याण' योजना को चुपके से बंद कर दिया गया। किसानों को इस बात की भनक तक नहीं लगी और प्रदेश की राज्य सरकार ने इतनी बड़ी योजना को बंद कर दिया है। इस बात से साफ दिखता है कि लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को संचालित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं को बंद किया जा रहा है। और को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है। इतना ही नहीं कर्मचारियों का चार फीसदी डीए छह महीने से लंबित है लेकिन राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के कारण उसका भुगतान भी नहीं कर पा रही है।

'ऐसा लगा जैसे बम फूटा हो' बीजेपी से नाम की घोषणा होने पर बोली अनीता नागर
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए 194वे उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है जिसमें एमपी की 24 सीटें शामिल हैं (bjp lok sabha candidate list)। एमपी की जैसे ही घोषणा हुई तो कुछ उम्मीदवारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रतलाम से अनीता नागर (anita nagar chouhan) को लोकसभा उम्मीदवार बनाया गया है उन्होने उम्मीद ही नहीं की थी कि उनका नाम भी लोकसभा प्रत्याशियों में हो सकता है। अनीता नागर ने कहा कि जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई 'ऐसा लगा जैसे बम फूट गया हो' अनीता नागर एक युवा नेत्री हैं उन्होने खुले तौर पर कहा कि पार्टी उन्हे भी मौका दे सकती है ऐसी उम्मीद उन्होने नहीं की थी। कुछ ऐसा ही हाल भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष दर्शन सिंह चौधरी के साथ भी हुआ। हांलाकि वो टिकट को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे थे। विधानसभा चुनाव में भी दर्शन सिंह ने प्रयास किया था लेकिन बात नहीं बनी और बात बनी तो लोकसभा चुनाव में। दर्शन सिंह का कहना है कि उन्होने अपने जीवन में पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया है कभी फल की उम्मीद नहीं की और उन्हे उम्मीद नहीं थी कि उनके जैसे छोटे कार्यकर्ता को मौका मिलेगा लेकिन भारतीय जनता पार्टी में मोदी हैं तो सबकुछ मुमकिन है। दर्शन सिंह ने कहा कि पार्टी के केन्द्रीय और प्रदेश के नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है उस पर वो पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा ने एमपी की 29 में से 24 सीटों की घोषणा की है जिसमें छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। और जिन छह नए लोगों को मौका मिला है वो अभी तक इस बात का विश्वास नहीं कर पा रहे कि पार्टी ने उन्हे लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का रहा जलवा,जो नाम दिये वो हुए कुबूल
लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी की 29 सीटों में 24 सीटों की घोषणा कर दी है (mp lok sabha candidate list)। हालाकि इस सूची की बात करें तो भाजपा ने एक बार फिर चौका दिया है। जिस प्रकार से लोगों ने सूची में बदलाव की उम्मीद की थी वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। जिन 24 सीटों की घोषणा हुई है उसमें सिर्फ छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। मतलब साफ है कि भाजपा ने सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रदेश की आम जनता को उम्मीद थी कि भाजपा इस चुनाव में काफी कुछ चौकाएगी। लेकिन सभी की उम्मीदों पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पानी फेर दिया। जिन सांसदों के टिकट कटने का लोग इंतजार कर रहे थे उन सांसदों का टिकट नहीं कटा। हांलाकि एमपी बीजेपी (mp bjp) इस सूची को सर्वश्रेष्ठ बताने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने जिस प्रकार से सीटों का आंकलन किया और अपनी अंतिम सहमति दी उसे केन्द्रीय नेतृत्व ने सहर्स स्वीकार किया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भोपाल से जरुर उम्मीद की जा रही थी लेकिन उन्हे खजुराहो से ही रिपीट किया गया है। एक बड़ा नाम है जिसकी सभी उम्मीद लगा रहे थे कि उनको भाजपा लोकसभा चुनाव में मौका देगी डॉ. नरोत्तम मिश्रा लेकिन अभी तक घोषित 24 नामों की सूची में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने किसी प्रकार से दिलचश्पी नहीं दिखाई है। अभी पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होनी बांकी है अब सभी की नजरें पांच सीटों पर टिकी हैं कि किसका भाग्य उन सीटों पर पलटने वाला है।