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दलित अत्याचार से सत्ता का रास्ता खोज रही कांग्रेस
कांग्रेस की ओर से प्रदेश भर में जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) का आगाज 19 सितंबर से हो चुका है। कांग्रेस का यह आक्रोश सिर्फ यात्रा में नहीं दिख रहा है। आक्रोश को लगातार बनाए रखने का जिम्मा प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने उठा लिया है। कांग्रेस प्रभारी हर दूसरे,तीसरे दिन एक प्रेस वार्ता का आयोजन करते हैं और राज्य सरकार की नाकामी को गिनाते हैं। कांग्रेस ने अब अपने जन आक्रोश के निशाने पर दलित और आदिवासी को शामिल किया है। जिन पर हुए अत्याचार को कांग्रेस पार्टी हथियार के रुप में इस्तेमाल कर रही है। बुधवार को कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर राज्य सरकार (Shivraj Government) पर जमकर आरोप लगाया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एक दो घटनाएं हों तो उसको चूक कहा जा सकता है लेकिन दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के अनगित मामले हों तो साफ है कि प्रदेश की सरकार दलित और आदिवासी विरोधी सरकार है। इसी प्रकार कांग्रेस पार्टी ओबीसी की आबादी को भी अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग उपाय आजमा रही है। ओबीसी वर्ग के सभी नेताओं को कांग्रेस पार्टी ने ऐक्टिव कर दिया है। सभी ओबीसी वर्ग के नेता अपने वर्ग को साधने में जुटे हुए हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी द्वारा एक टीम का गठन कर सभी वर्गों के खिलाफ हुए अत्याचार की लिस्ट तैयार करवाई जा रही है। कांग्रेस का प्रयास है कि जब भी भाजपा सरकार पर आरोप लगाए जाएं तो पार्टी के पास उसके कुछ ठोस प्रमाण जरुर होना चाहिए यही कारण है कि कांग्रेस ने टीम का गठन किया है जिससे वो किसी भी आरोप का बारीकी से अध्ययन करें और फिर उसके बाद खुलासा किया जा सके।

भाजपा की दूसरी सूची पर अब तक रहस्य, कांग्रेस के नाम के कारण रुकी भाजपा की सूची
भारतीय जनता पार्टी की पहली सूची (MP BJP Candidate list) बहुत पहले आ चुकी है लेकिन दूसरी सूची पर रहस्य लगातार बरकरार है। कहा यह जा रहा है कि भाजपा (mp bjp) की दूसरी सूची को कांग्रेस के दो विधायकों ने रोक रखा है। यह दोनों विधायक बुंदेलखंड और ग्वालियर- चंबल के दो अलग-अलग क्षेत्र में कांग्रेस के गद्दार विधायक हैं। दोनों ही सीटें भाजपा के सर्वे में भी डेंजर जोन में रखी गई हैं, इसीलिए दोनों विधायकों को भाजपा में शामिल करने की कोशिश जारी हैं। दोनों को भाजपा में प्रवेश दिलाने और उनका टिकट पक्का करवाने के लिए प्रदेश के दो दिग्गज नेता प्रयास कर रहे हैं। इनमें से एक सीट भी दरबार है तो दूसरी राजनगर। छतरपुर जिले की राजनगर सीट कांग्रेस के पास 2008 से है। यहां से कांग्रेस के कुमार विक्रम सिंह 'नाती राजा' ने पिछला चुनाव मात्र 632 वोटों से भाजपा के अरविंद पटेरिया को हराया था। वही ग्वालियर जिले की भितरवार सीट से लखन सिंह यादव विधायक हैं। यह सीट 2008 में कांग्रेस के पास आई थी दरअसल दूसरी सूची में भी 35 ऐसी सिम शामिल हैं जिनमें कांग्रेस मजबूत है। गौरतला अब है कि भाजपा ने 17 अगस्त को ही विधानसभा चुनाव के लिए 39 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी थी। दूसरी सूची पर भी 13 सितंबर को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चर्चा हो चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) राजनगर सीट पर जिताऊ प्रत्याशी को ही टिकट दिए जाने के पक्ष में हैं। वही एक बड़े नेता भितरवार से लखन सिंह यादव को भाजपा में ले जाने के पक्षधर हैं। लाखन सिंह यादव मूल रूप से दिग्विजय सिंह समर्थक हैं। साल 2018 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें कमलनाथ (kamal natha) सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। वहीं दूसरे बड़े नेता ने भितरवार के एक अन्य ओबीसी नेट का नाम प्रस्तुत किया है जो ग्वालियर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। दोनों सीटों के टिकट पर अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण फिलहाल दूसरी सूची जारी नहीं हो पा रही है।

जन आक्रोश यात्रा में दलबदलू नेताओं की होगी अग्नि परीक्षा
कांग्रेस पार्टी की 19 सितंबर से जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) का आगाज होने जा रहा है। इस यात्रा को सफल बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी (mp congress) ने अपनी सारी ताकत झोंक दी है। यात्रा की निगरानी का जिम्मा खुद प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने उठा रखी है। लेकिन कांग्रेस पार्टी इस यात्रा के माध्यम से एक तीर में दो निशाने भी लगाने जा रही है। दरअसल भाजपा से कांग्रेस में आए उन नेताओं पर कांग्रेस की विशेश नजर रहेगी जिन्होने कांग्रेस ज्वाइन करते समय कांग्रेस कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं की ताकत को दिखाया तो वही ताकत अब अग्नि परीक्षा के रुप में तब्दील हो चुकी है। भाजपा से कांग्रेस में आयातित नेताओं के प्रदर्शन के अनुसार ही पार्टी में उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। कुछ नेता चुनाव की दौड़ में भी शामिल हैं। अभी तक चंद्रभूषण सिंह बुंदेला (Chandra bhushan singh bundela) और रघुनंदन शर्मा (Raghunandan Sharma) को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। चुनाव से पहले जन आक्रोश यात्रा का बड़ा अभियान है। राज्य स्तर पर इसकी निगरानी प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेलाला कर रहे हैं तो लोकसभा पर्यवेक्षक विधानसभा क्षेत्रों में नजर रखेंगे। इसकी रिपोर्ट केन्द्रीय संगठन को सौपी जाएगी। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अधुसार भाजपा से जो लोग आए हैं,उन्हे अपनी ताकत दिखाने का अवसर भी इस यात्रा के माध्यम से दिया जा रहा है। सभी नेताओं से यह कह दिया गया है की वो अपने समर्थकों को साथ लेकर यात्रा को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। जन आक्रोश में इस दावे को भी परखा जाएगा और इस आधार पर यह भी निर्धारित होगा कि जो लोग चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं,उनका आधार कितना है। इसलिए भाजपा से कांग्रेस में आए नेताओं को अब जन आक्रोश यात्रा अग्नि परीक्षा के रुप में बन गई है। भाजपा से कांग्रेस में आए नेताओं का प्रदर्शन ही संगठन में आगे बढ़ने का आधार होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा अब तक नहीं हुई पूरी,संविदा कर्मियों को नहीं मिला वेतन और सुविधा
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में चार जुलाई को संविदा महापंचायत का आयोजन किया गया था (samvida mahapanchayat)। प्रदेश भर से हजारों की संख्या में संविदा कर्मी (samvida karmchari) भोपाल पहुंचे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने संविदा कर्मियों के लिए बड़ी घोषणा की जिसमें सीएम शिवराज ने कहा कि संविदा कर्मियों को वेतन और सभी प्रकार की सुविधाएं नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर दिया जाएगा (samvida news)। सीएम की घोषणा से संविदा कर्मियों को जैसे संजीवनी मिल गई। लेकिन सीएम शिवराज द्वारा की गई घोषणा का पालन आज तक नहीं हुआ है। संविदा कर्मियों को लगा था कि वो जंग जीत गए हैं लेकिन हकीकत तो यही है कि जंग अभी तक बांकी है। क्योंकि नियमितीकरण की मांग कर रहे संविदा कर्मियों के बीच पहुंच कर सीएम शिवराज ने उन्हे नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन और सुविधाएं देने का ऐलान तो कर दिया लेकिन वो सिर्फ ऐलान ही बन कर रह गया है। अगले महीने अक्टूबर में चुनाव आचार संहिता लगने की उम्मीद है। कहा ये भी जा रहा है कि दस अक्टूबर के बाद कभी भी चुनाव आचार सहिंता लग सकती है। ऐसे में अगर सीएम की घोषणा को अधिकारी लागू नहीं कर पाए तो सीएम की घोषणा झूठी साबित पड़ जाएगी और लाखों की संख्या में अलग-अलग विभागों में काम कर रहे संविदा कर्मियों का वोटबैंक भी भाजपा से छिटक जाएगा। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार सीएम ने घोषणा तो कर दी है लेकिन अब सरकार बजट की ब्यवस्था नहीं कर पा रही है। क्योंकि इस वक्त सरकार की नजर प्रदेश की आधी आवादी महिलाओं पर है। हर महीने लाड़ली बहना की किस्त देने में ही सरकार के पसीने छूट रहे हैं ऐसे में संविदा कर्मियों का वेतन बढ़ाना यानि सरकार के खजाने पर और बोझ बढ़ना है। सरकार पहले ही कर्ज लेकर लगातार घोषणाओं को पूरा कर रही है ऊपर से संविदा कर्मियों की मांग को पूरा करना सरकार के लिए टेढी खीर बनता जा रहा है। सीएम की घोषणा को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है इस बीच संविदा कर्मियों को दो सैलिरी मिल चुकी है। मतलब सीएम की घोषणा के बाद हर संविदा कर्मी को करीब 15 से 20 हजार रुपये का नुकसान हो चुका है। संविदा कर्मियों का इंतजार अब आक्रोश में तब्दील होता चला जा रहा है। संविदा कर्मियों के कुछ संगठनों से बात हुई तो उनका साफ कहना है कि इस महीने के 30 तारीख तक सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की तो सरकार के खिलाफ हल्लाबोल होगा और फैसला करके ही संविदा कर्मी लौटेंगे।

युवाओं और महिलाओं को आगे कर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रुप देने में जुटी कांग्रेस पार्टी युवाओं पर ज्यादा दांव लगाने की कोशिश में जुटी है (Congress Meeting)। कांग्रेस की ओर से ना सिर्फ युवाओं को ही आगे रखा जाएगा बल्कि महिलाओं को भी काफी मौके दिए जाएंगे। लगातार दो चुनाव हार चुके उन्ही नेताओं को टिकट मिलेगा जिनके नाम सर्वे के साथ पर्यवेक्षक की रिपोर्ट में जीतने की संभावना वाले दावेदार के रुप में आएंगे। प्रत्याशी चयन को लेकर दिल्ली में मध्य प्रदेश कांग्रेस (MP Congress)की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई थी (Congress Screening Committee)। इसमें समिति अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह(Jitendra Singh),प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) पिछले दिनों भोपाल में जिला,ब्लाक, प्रदेश पदादिकारी, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायकों से दावेदारों को लेकर जो रायशुमारी की थी,उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रत्याशी चयन को लेकर अपनी भी बात रखी। दिल्ली में कांग्रेस के वार रुम में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव,सुरेश पचौरी,नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह,अजय सिंह,अजय कुमार लल्लू,सप्तगिरी उल्का,कमलेश्वर पटेल,प्रदेश प्रभारी सहित अन्य नेता शामिल हुए। देर रात तक चली बैठक में वर्तमान विधायकों और लगातार हारने वाली 66 सीटों की स्थिति को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई। Mukhbirmp.com के अनुसार बैठक में एक बात साफ कर दी गई कि प्रत्याशी कोई भी हो उसे जिताने की जिम्मेदारी सामूहिक होगी। यह चुनाव पार्टी के लिए अहम है। इसका असर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की सभाओं पर पड़ेगा (Loksabha Elections 2024)। इसलिए प्रत्याशी चयन में जातिगत और स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। प्रत्याशी चयन के लिए तीन सूचियां तैयार होंगी। इसमें कमलनाथ और कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे, पर्यवेक्षक के साथ प्रभारी और पदाधिकारियों की रिपोर्ट में जिन सीटों के लिए एक ही नाम होगा उसकी सूची अलग बनेगी। वर्तमान विधायकों की एक सूची रहेगी और एक सूची उन सीटों की होगी,जहां दो या उससे अधिक दावेदार होंगे। आज एक बार फिर बैठक होगी जिसमें वर्तमान विधायक और लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा होगी।

जमीनी कार्यकर्ताओं पर भाजपा का फोकस,कल दिल्ली में हो सकती है बैठक,दूसरी सूची जल्द होगी जारी
भारतीय जनता पार्टी दूसरी सूची जारी करने की तैयारियों में जुट गई है। बुधवार को दिल्ली में केन्द्रीय नेतृत्व की बैठक (BJP Meeting) के दौरान सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। कांग्रेस जहां भाजपा के बड़े नेताओं को शामिल कर रही है तो भाजपा का फोकस जमीनी नेताओं पर है। जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) में ऐसे तीन हजार से अधिक नेता और कार्यकर्ताओं को अब तक की सदस्यता दिलाई जा चुकी है। दरअसल केन्द्रीय मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि बड़े नेताओं के स्थान पर उन लोगों को पार्टी के साथ जोड़ा जाए जो जमीनी स्तर पर पकड़ रखते हैं। 25 सितंबर को होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ (Karyakarta Mahakumbh) से पहले 50 हजार कार्यकर्ता भाजपा की ओर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कांग्रेस सहित सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं। भाजपा इन दिनों पंचामत से लेकर मंडल स्तर पर सक्रिय दूसरे दलों के प्रभावी कार्यकर्ताओं को जोड़ रही है। पिछले महीने जब गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक ली थी तब उन्होने पार्टी नेताओं को जमीन पर आधार को मजबूत करने के लिए कुछ रणनीतिक नुस्खे दिए थे। इस बार पार्टी बड़े चेहरों से ज्यादा फोकस निचले स्तर पर बूथों पर सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपने पाले में खींचने पर काम कर रही है। सतना के रैगांव विधानसभा में चार सितंबर को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) की उपस्थिति में कई पंचायतों के 130 लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली थी। पंधाना विस क्षेत्र में कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाई थी। इसी प्रकार प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) और सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) कई सरपंचों और अन्य प्रभावशाली लोगों को भाजपा की सदस्यता दिला चुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार 25 सितंबर को भाजपा के कार्यकर्ता महाकुंभ में पीएम मोदी की मौजूदगी में हजारों लोगों को भाजपा की सदस्यता दिलाई जा सकती है जिसमें कांग्रेस के कुछ बड़े चेहरे भी शामिल हैं।

भाजपा की नैया पार लगाने निकले गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा,विंध्य में जन आशीर्वाद यात्रा का मिला जिम्मा
भारतीय जनता पार्टी जब-जब संकट में आती है तो उसके संकटमोचक डॉ. नरोत्तम मिश्रा होते हैं (Narottam Mishra)। इसकी बानगी आए दिन देखने को मिलती रहती है। सदन में सरकार पर कोई आरोप लगता है तो गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा अंगद की तरह पांव जमा कर विपक्ष को करारा जवाब देते हैं और जब पार्टी में कोई संकट आता है तो गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा 'दादा' संकटमोचक बन कर सामने खड़े हो जाते हैं। पिछले कुछ समय से लगातार यह बातें उठ रहीं थी कि विंध्य इस बार भाजपा से नाराज है। खासकर विंध्य के ब्राम्हण भाजपा से खासे नाराज हैं। विंध्य में ब्राम्हणों की बहुत बड़ी आवादी निवास करती है और वहां की 30 सीटों में उन्ही का प्रभाव देखने को मिलता है। सबसे पहले विंध्य की नाराजी इस बात को लेकर थी कि उन्हे उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला जबकि विंध्य के लोगों ने 30 सीटों में 24 सीटें भाजपा को दी। नाराजगी पर तड़का उस वक्त और लग गया जब सीधी में पेशाब कांड (Sidhi Peshab Kand) हुआ और सरकार ने जल्दबाजी में आरोपी के घर पर बुल्डोजर चलवा दिया इससे ना सिर्फ ब्राम्हण वर्ग भाजपा से नाराज हुआ बल्कि सवर्ण वर्ग में आने वाले सभी लोग भाजपा से नाराज हो गए इस बात की जानकारी भाजपा की इंटरनल रिपोर्ट में सामने आई। ऐसी स्थिति में विंध्य में डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा के पास एक ही चेहरा था डॉ. नरोत्तम मिश्रा। ब्राम्हणों की नाराजगी के चलते ही भाजपा ने चित्रकूट से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) से जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) को हरी झंडी दिखवाई और फिर उसको गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हवाले कर दिया। गृह मंत्री पूर्व में रीवा के प्रभारी मंत्री रहे हैं और उनको वहां की तासीर मालूम है। विंध्य में नरोत्तम मिश्रा को बाहरी नहीं बल्कि घर का नेता माना जाता है। वैसे भी गृह मंत्री जिस विधानसभा दतिया से चुनाव लड़ते हैं पहले वो विंध्य का ही हिस्सा माना जाता था। डॉ. नरोत्तम मिश्रा की ब्राम्हणों के बीच जिस प्रकार की लोकप्रियता है उसी को भुनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हे विंध्य की जिम्मेदारी सौंपी है। और भाजपा यह मान कर चल रही है कि जब गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को जब एक बार कोई जिम्मेदारी सौंप दी जाती है तो उसको पूरा करके ही वो चैन की सांस लेते हैं। लिहाजा अब देखना यह दिलचश्प होगा कि भाजपा द्वारा खेला गया यह ब्राम्हण कार्ड विंध्य को रिझाने में कामयाब होगा अथवा नहीं यह तो वक्त बताएगा।

कांग्रेस की बनाई पिच पर खेल रही भाजपा,हड़बड़ाहट में किया उम्मीदवारों का ऐलान
अपनी रणनीति से कांग्रेस को चारों खाने चित्त करने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों कांग्रेस की बनाई पिच पर खेल रही है (MP BJP)। कांग्रेस के रणनीतिकार जिस प्रकार की रणनीति तैयार कर रहे हैं भाजपा उस रणनीति पर लगातार फंसती चली जा रही है। बात उस वक्त की है जब कांग्रेस पार्टी ने ऐलान किया था कि इस बार चुनाव के 06 महीने पहले ही कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी (congress candidate list)। इस इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के खेमे में हलचल पैदा हो गई। भाजपा ने आकांक्षी सीटों पर तेजी से मंथन करना शुरु कर दिया और कांग्रेस को इस बीच मौका मिला तो भाजपा के कार्यकर्ताओं को अपने पाले में करना शुरु कर दिया। भाजपा उम्मीदवारों के चयन में जुटी रही और कांग्रेस पार्टी भाजपा के करीब दर्जन भर पदाधिकारियों और इससे ज्यादा कार्यकर्ताओं को अपनी तरफ लाने में कामयाब हो गई। हड़बड़ाहट में भारतीय जनता पार्टी ने 39 नामों की पहली सूची जारी कर कांग्रेस को बताने का प्रयास किया कि हम आपसे आगे हैं (BJP Candidate list)। दरअसल भाजपा को यह नहीं मालूम था कि कांग्रेस के रणनीतिकार यही तो चाहते थे। भाजपा ने जो सूची जारी की उसमें एक-दो को छोड़ दिया जाए तो कुछ ज्यादा चौकाने वाली लिष्ट नहीं थी। ज्यादातर पिटे हुए मोहरों पर भाजपा ने फिर दांव लगाया। कांग्रेस यह भी चाहती थी कि पहले भाजपा अपने पत्ते खोले जिससे उनके खिलाफ अपने प्रत्याशियों का ऐलान करने में कांग्रेस को आसानी हो सके। कांग्रेस भाजपा से वचन पत्र के मामले में धोखा भी खा चुकी थी। क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र के कुछ वचन सार्वजनिक कर दिए जिसका तोड़ सीएम शिवराज ने तत्काल निकाल लिया और कांग्रेस के वो वचन फीके पड़ गए। कांग्रेस नेताओं ने यहां से सबक लेते हुए वचन पत्र में आगे क्या शामिल होने वाला है उसका खुलासा बंद कर दिया। कांग्रेस की हड़बड़ाहट के कारण भाजपा ने जन आशीर्वाद यात्रा का आगाज किया है जिसमें सारे नेता लग गए हैं इस बीच कांग्रेस अपने उम्मीदवारों पर मंथन करने में जुट गई है। अब कांग्रेस ने भी रणनीति तैयार की है जिसके तहत अब इंटरनेट मीडिया के सभी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। भाजपा द्वारा कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरोप का करारा जवाब दिया जाएगा। यह निर्णय रविवार रात पीसीसी चीफ कमलनाथ के निवास पर हुई बैठक पर लिया गया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कमलनाथ के निवास पर चली करीब डेढ़ घंटे की बैठक में निर्देश दिए गए कि भाजपा सरकार के खिलाफ जो आरोप पत्र जारी किया गया है उसके आधार पर घेराबंदी की जाए। मंहगाई,बेरोजगारी,कानून ब्यवस्था,अनुसूचित जाति-जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग के उत्पीड़न के मुद्दों को प्रमुखता के साथ जनता के बीच रखा जाएगा।

रुठे विंध्य को पहले मनाएगी भाजपा,बीजेपी से आज रवाना हुए रथ,कल नड्डा दिखाएंगे हरी झंडी
कहा जाता है कि पर्वतराज सुमेरू के शिखर कहे जाने वाले चित्रकूट गिरि को कामदगिरि होने का वरदान भगवान राम ने दिया था। तभी से विश्व के इस अलौकिक पर्वत के दर्शन मात्र से आस्थावानों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और अब भाजपा का भगवान राम ही बेड़ा पार कर सकते हैं। दरअसल Mukhbir को मिली जानकारी के अनुसार विंध्य (Vindhya) की जनता का मोह अब भाजपा से भंग हो चुका है और इसका खुलासा भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट (Bjp internal report) में हो चुका है यही कारण है कि चुनाव के महज डेढ़ महीने पहले भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को मंत्री बना कर विंध्य की जनता के जख्म पर मरहम लगाने का काम किया है। लेकिन विंध्य की जनता जितनी भावुक मानी जाती है ठीक उसी प्रकार से विंध्य की जनता राजनीतिक मामलों की भी जानकार मानी जाती है। विंध्य की जनता जब वोट देती है तो सभी प्रकार के सोच विचार करती है। जिस वक्त 2018 में माई के लाल का नारा चल रहा था और ग्वारियर-चंबल के सवर्णों ने भाजपा का साथ छोड़ कर कांग्रेस को जिताने में अपना योगदान दिया था तब विंध्य की जनता ने जाति की परवाह किए बगैर सीएम शिवराज के (Shivraj Singh Chouhan) द्वारा किए विकास को तरजीह दी जिसका नतीजा ये निकला कि विंध्य की 30 सीटों में 24 सीटें भाजपा की छोली में आई। साल 2020 में जब सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से फिर भाजपा की सरकार बनी तो विंध्य की जमकर उपेक्षा की गई और ग्वालियर-चंबल के हर तीसरे विधायक में एक को मंत्री बनाया गया। विंध्य देश का सबसे बड़ा सवर्ण बाहुल क्षेत्र माना जाता है इसके बाद भी विंध्य के एक भी सवर्ण नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। यहां से भाजपा का ओबीसी प्रेम विंध्य की जनता के सामने आया। बात चस वक्त और गंभीर हो गई जब सीधी में आदिवासी पेशाबकांड (Sidhi Peshab Kand) का मामला सामने आया। विंध्य के सवर्णों ने घटना का जमकर विरोध किया और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का भी समर्थन किया लेकिन जब आरोपी के घर पर बुल्डोजर चला और उसके परिवार को सड़क पर आना पड़ा तो विंध्य की जनता में शिवराज सरकार और भाजपा के खिलाफ आक्रोश की लहर दौड़ गई। लगातार उपेक्षा का दंश झेलने वाली विंध्य की जनता का इस बार भाजपा से मोह भंग हो गया है। जिस प्रकार से सीएम शिवराज और भाजपा के हर नेता का ओबीसी प्रेम जनता के सामने आया उसके बाद विंध्य की जनता ने भाजपा अलग होने पर खुद की भलाई देख रहे हैं। इन सब बातों की जानकारी भाजपा हाई कमान को है। इसी लिए केन्द्रीय नेतृत्व ने विंध्य में लगातार फोकस किया और मोदी की दो सभाएं रीवा और शहडोल में आयोजित की गई। अमित शाह ने सतना में सभा की। सीएम शिवराज ने महीने भर में विंध्य की ज्यादा तर सीटों का दौरा किया है लेकिन इस बार विंध्य की जनता का मूड बदल पाने में अब तक भाजपा नाकाम साबित हुई है इसी लिए अब भाजपा एक बार फिर भगवान राम का सहारा लेकर उनकी तपोभूमि चित्रकूट से जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) का आगाज करने जा रही है जिसको राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे।

ब्राम्हण, बनिया को जेब में रखने वाले बीजेपी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव को चुपके से किया साइडलाइन
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव (Muralidhar Rao) कहां हैं भाजपा का कोई भी पदाधिकारी जवाब देने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। दरअसल भाजपा के प्रदेश प्रभारी (MP BJP State incharge) मुरलीधर राव को सत्ता और संगठन के बीच समन्वय के लिए एमपी भेजा गया था लेकिन मुरलीधर राव का कार्यकाल भाजपा के अन्य प्रदेश प्रभारियों की तुलना में सबसे ज्यादा खराब गुजरा है। मुरलीधर राव के प्रदेश प्रभारी बनने के बाद बीजेपी में प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर तक गुटबाजी हो गई थी। मुरलीधर राव ना संगठन में समन्वय बना पाए और ना ही सरकार में समन्वय बना पाए। मुरलीधर राव ही थे जिन्होने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि ब्राम्हण और बनिया को अपने जेब में रखते हैं। भारतीय जनता पार्टी की सोच यहीं से जनता के सामने आई। मुरलीधर राव के रहते भाजपा में इतना असंतोष की स्थिति निर्मित हुई की केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी के पूरे संगठन को टेकओवर कर लिया। इसलिए प्रदेश चुनाव प्रभारी के रुप में भूपेन्द्र यादव (Bhupendra Yadav), सह चुनाव प्रभारी अश्वनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को बनाया गया। और चुनाव संयोजक नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) को बनाया गया। भाजपा में ये भी पहली बार देखने को मिला कि जब उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हुई उसके बाद भाजपा के सिटिंग एमएलए ने पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। मुरलीधर राव के प्रदेश प्रभारी रहते भाजपा टुकड़ों और धड़ों में बंट गई थी। यही कारण है कि केन्द्रीय नेतृत्व ने पार्टी के बिखराव का सारा ठीकरा मुरलीधर राव के ऊपर फोड़ कर उन्हे साइडलाइन कर दिया है। अब भाजपा की किसी भी बैठक में मुरलीधर राव और पंकजा मुंडे को साइडलाइन कर दिया गया। हांलाकि मुरलीधर राव की सुविधाओं को एमपी नेतृत्व ने काफी तरजीह दी थी लेकिन पार्टी की उपेक्षाओं में मुरलीधर राव खरे नहीं उतर पाए। वहीं इसके उलट कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल (JP Agrawal) की बात करें तो उनको बदलने से पहले कांग्रेस की ओर से लेजर जारी कर बताया गया। और रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) को नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है उसकी भी सार्वजनिक तरीके से घोषणा की गई थी लेकिन मुरलीधर राव के बारे में यह सवाल आज भी बना हुआ है कि कहां हैं भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव?

सिंधिया समर्थक उम्मीदवारों पर फंसा पेंच,पार्टी हाई कमान डैमेज कंट्रोल में जुटा
मप्र भाजपा की दूसरी सूची में सिंधिया समर्थकों (Scindia supporters) की दावेदारी ने पेंच फंसा दिया है। जिन सीटों पर समर्थक टिकट मांग रहे हैं, वहां पुराने भाजपा नेता सक्रिय हैं। इधर पार्टी को भी जिताऊ चेहरे की तलाश है। मध्य प्रदेश की सियासत में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का बड़ा कद है जिसके भरोसे वर्ष 2020 में भाजपा ने उस कांग्रेस से सत्ता छीनी थी। पिछले कुछ महीनो से ज्योतिरादित्य सिंधिया का समय ठीक नहीं चल रहा है। पिछले कुछ समय में फोन के पांच बड़े वफादार अब तक कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। इतना ही नहीं भिंड के गोहद से रणवीर सिंह जाटव (Ranveer Singh Jatav) का टिकट काटने के बाद समर्थ कौन है जिस तरह से खून से खत लिखकर अपनी विवशता को दर्शाया था ,उससे यह लगने लगने लगा है कि आने वाले समय में सिंधिया के कुछ और वफादार उनका साथ छोड़ सकते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक हारी हुई सीट पर प्रत्याशी तय करने बैठे भाजपा के निर्णयकर्ताओं को अपनी अनुशंसा सहित जिस सूची को दिल्ली भेजा है,उसमें कई सिंधिया समर्थकों के नाम गायब बताए जा रहे है। इनमें से चंबल-ग्वालियर अंचल की वो सीटें शामिल हैं। उपचुनाव में हारे सिंधिया समर्थकों की दावेदारी भी अब कमजोर पड़ती जा रही है। गौरतलब है कि जब उपचुनाव हुए तो भाजपा ने सिंधिया समर्थकों को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था। तब इन समर्थकों के लिए भाजपा के पुराने नेताओं ने अपनी कुर्बानी दी थी। इनमें से कई ऐसे नेता हैं,जिन्होने भाजपा को अपने-अपने क्षेत्रों में खड़ा किया था। लेकिन सरकार को बहुमत लाने के लिए इन नेताओं ने तब चुप्पी साध ली थी। और अब ऐसी स्थिति नहीं है उपचुनाव में सिंधिया समर्थक 6 नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था। जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ी है और अब पार्टी का पूरा फोकस जिताऊ चम्मीदवार पर आकर टिक गया है। ऐसे में इन समर्थकों के साथ-साथ इस चुनाव में टिकट की आस लगाए बैठे नेताओं की भी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

भाजपा की तस्वीर से अमित शाह गायब,अब जेपी नड्डा यात्रा को दिखाएंगे हरी झंडी
भारतीय जनता पार्टी तीन सितंबर से प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) का आगाज करने जा रही है। लेकिन यात्रा के पहले ही भारतीय जनता पार्टी में चल रहे आपसी विवाद और मन मुटाव की तस्वीर सामने आने लगी है। दरअसल दो दिन पहले भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भाजपा की तरफ से जन आशीर्वाद यात्रा का प्रारुप बताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) की तरफ से एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया था। प्रेसवार्ता के दौरान एक होर्गिंग लगाई गई थी जिसमें पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की तस्वीर के साथ एमपी के कुछ कद्दावर नेताओं की तस्वीर लगाई गई। लेकिन उस तस्वीर में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को स्थान नहीं दिया गया था जबकि अमित शाह को ही चित्रकूट से पहली विकास यात्रा (vikas yatra) को हरी झंडी दिखानी थी। पोस्टर में एक और मजे की बात देखने को मिली कि भूपेन्द्र सिंह को विकास यात्र की टोली का संयोजक बनाया गया है लेकिन पोस्टर में भूपेन्द्र सिंह (Bhupendra Singh) को स्थान नहीं दिया गया। हांलाकि भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संत्ति मामले में लोकायुक्त की जांच भी चल रही है यही कारण हो सकता है कि भाजपा भूपेन्द्र सिंह को लाइमलाइट से दूर रख कर उनकी संगठनात्मक काबिलियत का फायदा उठाना चाहती होगी। लेकिन महत्वपूर्ण यही है कि इस पूरी भूमिका में जिस प्रकार से अमित शाह को पोस्टर से गायब किया गया वो राजनीतिक पंडितों के गले से नहीं उतर रहा है और सभी इस सवाल का जवाब ढूंढ़ रहे हैं कि आखिर अमित शाह को पोस्टर से गायब क्यों किया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे मामले की जानकारी अमित शाह को हुई तो उन्होने काफी नाराजगी ब्यक्त की बात यहीं खत्म नहीं हुई अमित शाह ने चित्रकूट आने से इंकार कर दिया जिसके बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा चित्रकूट आकर जन आशीर्वाद यात्रा को हरी झंडी दिखाने वाले हैं। गौरतलब है कि भाजपा के सर्वे के अनुसार विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज है जिनको मनाने के लिए भाजपा की ओर से अलग-अलग प्रयास किए गए लेकिन नतीजा शिफर ही रहा है। इसी लिए अब भाजपा ने विंध्य से जन आशीर्वाद यात्रा का आगाज करने की योजना तैयार की है।