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#elections 2023

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बसपा के वर्चश्व वाली 69 सीटों पर भाजपा की नजर
भोपाल

बसपा के वर्चश्व वाली 69 सीटों पर भाजपा की नजर

मप्र के विधानसभा चुनाव में बसपा हमेशा छुपी रुस्तम साबित होती रही है (bsp mp)। आंकड़ो के हिसाब से उसके पास सीटें एक या दो ही रहती हैं लेकिन प्रदेश में 69 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जिनमें बसपा का हमेशा वर्चश्व रहा है। जिसके कारण कांग्रेस और भाजपा को संतुलन बनाने में काफी दिक्कतें होती रही हैं। प्रदेश के एससी वर्ग का झुकाव भी बसपा की तरफ रहा है। प्रदेश में लगातार नौ फीसदी वोट भी बसपा को मिलता रहा है। कुछ सालों में बसपा के कमजोर होने से उसका वोट बैंक छिटकने लगा है लेकिन यह भाजपा को ना मिल कर कांग्रेस को जाता है। साल 2013 में भाजपा के पास एससी वर्ग की 28 सीटें थीं, जबकि साल 2018 में घट कर 18 रह गई। भाजपा की यही चिंता है, ऐसे में बसपा के वोट बैंक पर भाजपा की नजर लगातार बनी हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए संत रविदास मंदिर (sant Ravidas) और सुमित्रा वाल्मीकि (Sumitra Valmiki) को राज्यसभा सदस्य बनाने जैसे निर्णय को प्रचारित कर भाजपा बसपा के वोट बैंक में सेंध लगा रही है। भाजपा ने साल 2018 में हुए नुकसान की भरपाई के लिए और कुछ जातियों का साथ पाने के लिए इस वर्ग के कई नेताओं को अपने साथ मिलाया है। उत्तरप्रदेश सहित मध्यप्रदेश में अहिरवार,चौधरी,साकेत और जाटव जैसी जातियां बसपा का परंपरागत वोट बैंक रही हैं। वर्ष 2023 के चुनाव में भी इनके वोट निर्णायक भूमिका अदा करेंगे।इस बीच भाजपा ने बसपा के कई नेताओं को अपने पाले में कर लिया है। भाजपा की चिंता यह है की उत्तर प्रदेश सहित मध्य प्रदेश में अहिरवार, चौधरी, साकेत और जाटव जैसी जातियां बसपा का परंपरागत वोट रही है आप पार्टी के कमजोर पढ़ने के बाद भी यह जातियां बसपा को छोड़ कांग्रेस का साथ दे रही हैं। भाजपा ने इन जातियों के नेताओं को टिकट दिया तो भी जीत नहीं दिला पाई। ग्वालियर- चंबल और विंध्य में इन जातियों के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। यही कारण है कि अब बीजेपी इन जातियों का साथ पाने के लिए छोटे-छोटे नेताओं को तोड़ रही है। बसपा की पूर्व विधायक उषा चौधरी, सत्य प्रकाश सकवार जैसे नेताओं को भाजपा में शामिल कराया गया है। भिंड से बसपा विधायक संजीव कुशवाहा को भाजपा में शामिल तो कर लिया है लेकिन अभी उनका टिकट घोषित नहीं किया गया है। कांग्रेस भी एससी वोट के लिए पूरी कोशिश कर रही है। पार्टी ने वर्ष 2018 में बसपा से चुनाव लड़ने वाले कैलाश कुशवाहा को पहरी और सब सिंह गुर्जर को ग्वालियर ग्रामीण से प्रत्याशी बनाया है।

16/10/2023103
नारायण ने छोड़ा 'शिव' और 'विष्णु' का साथ,जल्द करेंगे अपने भविष्य का फैसला
भोपाल

नारायण ने छोड़ा 'शिव' और 'विष्णु' का साथ,जल्द करेंगे अपने भविष्य का फैसला

मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी (Narayan Tripathi) ने अपनी विधायकी से इस्तीफा देते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि विधायक नारायण त्रिपाठी को भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के विधानसभा चुनाव (MP Elections) में टिकट नहीं दिया है जिससे नारायण त्रिपाठी काफी आहत चल रहे थे। लिहाजा नारायण त्रिपाठी ने विधायकी और पार्टी की सदस्यता से एक साथ इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होने यह भी कहा है कि वो जल्द ही खुलासा करेंगे कि आगे क्या करने वाले हैं। नारायण त्रिपाठी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे और पृथक विंध्य राज्य की मांग को लेकर वो लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। नारायण ने विंध्य राज्य की मांग करते हुए कई यात्राएं भी निकाली थी। मैहर को भी अलग जिला बनाने के लिए उन्होने काफी संघर्ष किया आखिरकार उन्हे सफलता मिली और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने मैहर को अलग जिला बनाने की घोषणा कर दी। माना जा रहा है कि नारायण त्रिपाठी जल्द ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं हालाकि उन्होने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं क्योंकि उन्होने खुद की भी पार्टी बनाने की बात कही थी। इसलिए सियासी गलियारों में यह कानाफूसी चल रही है कि शायद नारायण त्रिपाठी खुद की भी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं। नारायण त्रिपाठी का भाजपा से अलग होने का मतलब है कि सतना में भाजपा का और कमजोर होना। भाजपा ने सतना से सांसद गणेश सिंह (Ganesh Singh) को विधानसभा चुनाव में उतार रखा है और नारायण त्रिपाठी अगर भाजपा गणेश सिंह को हराने में जुट जाएंगे तो यह सीट भाजपा के हाथ में नहीं आएगी। फिलहाल नारायण त्रिपाठी चिंतन और मंथन कर रहे हैं जल्द ही वो अपने सियासी पत्ते खोलेंगे।

13/10/2023201
'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता से कर रहे सवाल
भोपाल

'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता से कर रहे सवाल

प्रदेश की सियासत में इस वक्त एक ही सवाल है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं। यही सवाल कई मंचों से सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) प्रदेश की जनता से भी पूछते नजर आए हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' गौरतलब है भारतीय जनता पार्टी ने अब तक जारी अपनी तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा की है जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं है। इसी लिए हर जुवान पर यही सवाल है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़ेंगे या नहीं और लड़ेंगे तो कहां से लड़ेंगे। दरअसल भाजपा ने 103 विधानसभा सीटों को आकांक्षी सीट का नाम दिया था जिसमें भाजपा के विधायक नहीं थे। उन 103 में भाजपा ने 79 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की हैं इनमें तीन ऐसी सीटें भी हैं जहां भाजपा के विधायक थे,इनमें सीधी, मैहर और नरसिंहपुर शामिल है जहां भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को बदला है। इस बीच प्रदेश में यही बात जोर पकड़ रही है कि सीएम शिवराज (Shivraj Government) का क्या होगा। बात को बल उस वक्त और ज्यादा बल मिला जब भाजपा ने जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) निकाली और सभी पांचों यात्राओं का अलग-अलग नेताओं को नेतृत्व सौंपा गया। पहले जब भी जन आशीर्वाद यात्रा निकला करती थी तो उसका नेतृत्व अकेले सीएम शिवराज करते थे लेकिन इस बार भाजपा ने पांच अलग-अलग जन आशीर्वाद यात्रा निकाली और सभी यात्राओं का नेतृत्व भी अलग-अलग नेताओं ने किया इसी लिए प्रदेश की जनता में संशय है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं वहीं सीएम शिवराज खुद जनता से पूंछ रहे हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं'

7/10/2023326
दिल्ली में प्रत्याशी चयन पर कांग्रेस लगाएगी अंतिम मुहर, पांच सर्वे के आधार पर 150 से ज्यादा सीटों पर होगा मंथन
भोपाल

दिल्ली में प्रत्याशी चयन पर कांग्रेस लगाएगी अंतिम मुहर, पांच सर्वे के आधार पर 150 से ज्यादा सीटों पर होगा मंथन

एआईसीसी की ओर से प्रत्याशी चयन करने कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज दिल्ली में होगी (congress meeting)। इसमें लगातार हारने वाली 66 विधानसभा क्षेत्रों के अलावा उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो सकता हैं, जहां एक ही दावेदार का नाम है। पहली सूची में 150 से अधिक सीटों के प्रत्याशियों के नाम हो सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की अध्यक्षता में होगी। इसमें राज्य से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और ओमकार सिंह मरकाम शामिल होंगे। बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी में (congress screening committee) जिन नामों पर सहमति बन चुकी है, उन पर विचार करके अंतिम रूप दिया जाएगा। पार्टी ने प्रत्याशी चयन के लिए पांच सर्वे कराए और विभिन्न माध्यमों से दावेदारों को लेकर जानकारी जुटाई। इसके आधार पर स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, सदस्य अजय कुमार लल्लू और सप्तगिरि उलका ने तीन दौर की बैठकें की। सूत्रों का कहना है कि शनिवार को होने वाली बैठक में पहली सूची में शामिल किए जाने वाले प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। Mukhbirmp.com के मुताबिक कांग्रेस दो से तीन बार में प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। पहली सूची 150 से अधिक नामों की आ सकती है। जिन सीटों के लिए एक से अधिक नाम हैं, उनको लेकर पार्टी ने फिर से सर्वे कराया है। इसकी रिपोर्ट को सामने रखकर एक बार और स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी और फिर केंद्रीय चुनाव समिति को नाम भेजे जाएंगे। समिति में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अंबिका सोनी, डा.अमी याज्ञनिक, केसी वेणुगोपाल, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद, केजे जार्ज, मधुसूदन मिस्त्री, डा.मोहम्मद जावेद, पीएल पुनिया, प्रीतम सिंह, एन.उत्तम कुमार रेड्डी, टीएस सिंहदेव और ओमकार सिंह मरकाम सदस्य हैं।

6/10/202393
प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस
भोपाल

प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस

पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है (MP Elections)। मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही भाजपा और कांग्रेस युवाओं को आकर्षित करते के लिए रणनीति बनाने में जुट गई हैं (First time voters)। मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश भर में 19 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। युवा मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंप दी है (BJP Yuva Morcha)। पार्टी हाई कमान का आदेश मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा ने तीन अक्टूबर से प्रदेश भर में नव मतदाता सप्ताह अभियान शुरु कर दिया है। इसके तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अपने सभी 1070 मंडलों में युवा मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। दस अक्टूबर को सभी मंडलों में इसका समापन होगा। इसमें युवा मतदाताओं के अलावा जिले के भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कुछ युवा मतदाताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव है ऐसे में युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस दोनों ही संगठन युवा मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं। युवा मोर्चा ने 'खेलेगा मध्यप्रदेश' समेत कई अभियान शुरु किए हैं। इसी प्रकार युवा कांग्रेस ने 'बूथ जोड़ो, यूथ जोड़ो' अभियान शुरु किया है (Youth Congress)। प्रदेश में एक करोड़ 48 लाख युवा मतदाता हैं। दोनों दलों को लगता है कि इन्हे साधने से पूरे परिवार के वोट उनकी झोली में आ जाएंगे।

4/10/2023253
कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
भोपाल

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच

कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

3/10/2023127
कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद
भोपाल

कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद

कांग्रेस (MP Congress) विंध्य में काफी कमजोर है और उसकी विंध्य में अगर कोई उम्मीद हैं तो पूर्व मंत्री अजय सिंह (राहुल) भैया (Ajay Singh Rahul)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार से अजय सिंह की उपेक्षा हुई है उससे वो खुद परिचित हैं यही कारण है कि राहुल सिंह इस वक्त पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय खुद की विधानसभा में मेहनत करना ज्यादा जरुरी समझते हैं। मामला अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच का है। दरअसल कमलनाथ ने अजय सिंह को बुलाकर कहा कि आपको सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (Siddharth Kushwaha) की मदद करनी है जिसके बाद अजय सिंह ने कमलनाथ से सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद करने से साफ इंकार कर दिया। अजय सिंह ने कहा कि जब रैगांव में विधानसभा का उपचुनाव चल रहा था तब उन्होने सिद्धार्थ कुशवाहा से मदद करने के लिए कहा था जबकि उसके रैगांव में करीब दस हजार वोट हैं लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा ने कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा की किसी भी सूरत में मदद नहीं की। अजय सिंह (राहुल) भैया ने कमलनाथ से यहां तक कहा कि आप चाहो तो मेरा टिकट काट दो अथवा प्रदेश में किसी के भी पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए कहो मैं करुंगा लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद नहीं करुंगा। अजय सिंह के इस प्रकार बात करने से पीसीसी चीफ कमलनाथ भी टेंशन में आ गए हैं। सही मायने में कहा जाए तो कांग्रेस के पास विंध्य में कोई मजबूत नेता नहीं है। साल 2013 के बाद विंध्य में कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती चली गई है। अजय सिंह खुद चुनाव नहीं जीत पाए माना यह भी जा रहा है कि विंध्य में अजय सिंह ने सही तरीके से मेहनत नहीं की तो फिर कांग्रेस पार्टी विंध्य (Vindhya)में ठीक तरीके से परफार्मेंश नहीं कर पाएगी।

2/10/2023536
'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे
मुखबिर विशेष

'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे

हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं।

1/10/2023235
विधान चुनाव 2023: भाजपा या कांग्रेस जानिए इस बार क्या है जनता की राय
भोपाल

विधान चुनाव 2023: भाजपा या कांग्रेस जानिए इस बार क्या है जनता की राय

गांव से लेकर शहर तक हर ब्यक्ति  की जुवान पर एक ही नाम है सरकार किसकी बनेगी। कुछ लोग कहते हैं सरकार भाजपा की बनेगी तो कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेस की सरकार बनेगी। वास्तव में प्रदेश की जनता अब तक यही तय नहीं कर पा रही है कि वोट किसको देना है।

2/2/202382