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19 सितंबर से 'आक्रोश' में आएगी कांग्रेस,प्रदेश भर में निकाली जाएगी जन आक्रोश यात्रा
भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब देने के लिए कांग्रेस पार्टी 19 सितंबर से प्रदेश भर में जन आक्रोश यात्रा (Jan Aakrosh Yatra) निकालने जा रही है। भाजपा के जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) की तर्ज पर कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा प्रदेश के सात स्थान से प्रारंभ होगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी सभा और छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं होंगी। इसकी तैयारियों को लेकर शुक्रवार को भोपाल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने यात्रा के प्रभारी,जिला अध्यक्ष, प्रभारी और संगठन मंत्रियों के साथ बैठक की। यात्रा के दौरान घर-घर भाजपा सरकार के विरुद्ध जारी पार्टी का आरोप पत्र जारी किया जाएगा। यात्रा के दौरान मंहगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,महिलाओं पर अत्याचार,अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के उत्पीड़न की घटनाओं को मुद्दा बना कर भाजपा सरकार को घेरा जाएगा। साथ ही शिवराज सरकार (Shivraj Government) द्वारा की जा रही घोषणाओं की स्थिति भी जनता के बीच रखी जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस सरकार बनने पर विभिन्न वर्गों के हित में जो कदम उठाए जाएंगे,उसे भी प्रचारित किया जाएगा। यात्रा की पूरी रुपरेखा आज पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला सार्वजनिक करेंगे।

युवाओं और महिलाओं को आगे कर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रुप देने में जुटी कांग्रेस पार्टी युवाओं पर ज्यादा दांव लगाने की कोशिश में जुटी है (Congress Meeting)। कांग्रेस की ओर से ना सिर्फ युवाओं को ही आगे रखा जाएगा बल्कि महिलाओं को भी काफी मौके दिए जाएंगे। लगातार दो चुनाव हार चुके उन्ही नेताओं को टिकट मिलेगा जिनके नाम सर्वे के साथ पर्यवेक्षक की रिपोर्ट में जीतने की संभावना वाले दावेदार के रुप में आएंगे। प्रत्याशी चयन को लेकर दिल्ली में मध्य प्रदेश कांग्रेस (MP Congress)की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई थी (Congress Screening Committee)। इसमें समिति अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह(Jitendra Singh),प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) पिछले दिनों भोपाल में जिला,ब्लाक, प्रदेश पदादिकारी, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायकों से दावेदारों को लेकर जो रायशुमारी की थी,उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रत्याशी चयन को लेकर अपनी भी बात रखी। दिल्ली में कांग्रेस के वार रुम में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव,सुरेश पचौरी,नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह,अजय सिंह,अजय कुमार लल्लू,सप्तगिरी उल्का,कमलेश्वर पटेल,प्रदेश प्रभारी सहित अन्य नेता शामिल हुए। देर रात तक चली बैठक में वर्तमान विधायकों और लगातार हारने वाली 66 सीटों की स्थिति को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई। Mukhbirmp.com के अनुसार बैठक में एक बात साफ कर दी गई कि प्रत्याशी कोई भी हो उसे जिताने की जिम्मेदारी सामूहिक होगी। यह चुनाव पार्टी के लिए अहम है। इसका असर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की सभाओं पर पड़ेगा (Loksabha Elections 2024)। इसलिए प्रत्याशी चयन में जातिगत और स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। प्रत्याशी चयन के लिए तीन सूचियां तैयार होंगी। इसमें कमलनाथ और कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे, पर्यवेक्षक के साथ प्रभारी और पदाधिकारियों की रिपोर्ट में जिन सीटों के लिए एक ही नाम होगा उसकी सूची अलग बनेगी। वर्तमान विधायकों की एक सूची रहेगी और एक सूची उन सीटों की होगी,जहां दो या उससे अधिक दावेदार होंगे। आज एक बार फिर बैठक होगी जिसमें वर्तमान विधायक और लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा होगी।

कांग्रेस में टिकट के लिए स्थानीय नेताओं की सहमति होगी जरुरी
मिशन 2023 फतह करने में जुटी कांग्रेस पार्टी (mp congress) में इन दिनों बड़ी संख्या में बाहरी नेताओं का दाखिला हो रहा है। लेकिन उन्हे चुनाव लड़ने के लिए टिकट तभी मिलेगा जब स्थानीय स्तर पर सहमति बनेगी। दरअसल अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस में शामिल हो रहे नेताओं को लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में नाराजगी का आलम देखने को मिल रहा है यही कारण है कि कांग्रेस ने स्थानीय महत्व देते हुए कहा है कि टिकट उसी को दिया जाएगा जिसको लेकर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सहमति होगी। पार्टी की सदस्यता दिलाने के लिए जिला इकाई के पदाधिकारियों के साथ पहले बैठक की जाती है,फिर उनकी उपस्थिति में ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई जाती है,ताकि विरोध जैसी स्थिति ना बने। प्रत्याशी चयन में भी इसी तरह सावधानी बरती जा रही है। यही कारण है कि संभावित दावेदारों की जानकारी ब्लॉक इकाई तक से लग गई है। कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के साथ भाजपा में जाने वाले नेताओं की बड़ी संख्या में वापसी हो चुकी है। इसमें ग्वालियर,दतिय,शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,निवाड़ी,टीकमगढ़,धार,देवास सहित अन्य जिलों के भाजपा से जुड़े नेता अधिक हैं। कोलारस से भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इनके पार्टी में आने से अंदरखाने में चर्चा प्रारंभ हो गई है कि इन नेताओं को कुछ विधानसभा में प्रत्याशी भी बनाया जा सकता है। ऐसे में चुनाव के दौरान इनका विरोध न हो,इसलिए यह तय किया गया है कि स्थानीय स्तर पर सहमति के बिना टिकट नहीं दिया जाएगा। दरअसल जब सिंधिया के साथ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भाजपा में गए थे,तब स्थानीय स्तर पर समीकरण गड़बड़ाए और इसका नुकसान पार्टी को नगरीय निकाय चुनाव में भी उठाना पड़ा। अब तो पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी कह दिया है कि किसी को भी पार्टी में तब तक नहीं लिया जाएगा,जब तक स्थानीय इकाई सहमति नहीं देती है।

कांग्रेस सरकार बनते ही पटवारियों की 2800 रुपए ग्रेड-पे दिए जाएंगेःकमलनाथ
छिंदवाड़ा में अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 21 अगस्त से आंदोलनरत पटवारियों (patwaris) के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal natha) पहुंचे और पटवारियों से मुलाकात कर चर्चा की, साथ ही उनकी मांगों का समर्थन भी किया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हड़ताल स्थल पर पहुंचकर हडताल कर रहे पटवारियों (patwari strike) को यह आश्वासन दिया की आपने 25 साल इंतजार कर लिया है तीन महीने और इंतजार कर लीजिए, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही आपकी 2800 ग्रेड-पे दिए जाने की 25 साल पुरानी मांग सबसे पहले पूरी की जाएगी। कमलनाथ ने कहा कि सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के संघर्ष में वो उनके साथ हैं, उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ग के साथ न्याय होना चाहिए। पटवारियों से संवाद करते हुए कमलनाथ ने कहा कि एक पटवारी का रोल कितना महत्वपूर्ण होता है, वह कितने विभागों का काम अकेला करता है, यह बात सभी जानते हैं। सभी के साथ न्याय हो ऐसी सरकार होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आगे यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार बनते ही हम पुरानी पेंशन स्कीम लागू करेंगे और सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ न्याय हो ऐसी सरकार स्थापित करेंगे। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की तस्वीर आप सबके सामने हैं, आज मध्य प्रदेश की सरकार कर्ज पर कर्ज लेती जा रही है और मध्य प्रदेश पर 3 लाख 30 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा हो गया है, लेकिन इस कर्ज का वह कर क्या रही है, यह बात देखने लायक है। भाजपा सरकार कर्ज लेकर बड़े-बड़े ठेके दे रही है, ताकि उनका कमीशन बन सके, सरकार द्वारा लिए गए कर्ज से किसी कर्मचारी का, आशा, उषा बहनों का, आउटसोर्स कर्मचारियों का पटवारियों का, किसी का भला नहीं हो रहा है। यदि भला हो रहा है तो चंद ठेकेदारों और भाजपा नेताओं का। उन्होंने कहा कि आज यह बात हम सबको समझना है कि हमारा प्रदेश कहां घसीटा जा रहा है। मुख्यमंत्री घोषणाओं पर घोषणाएं करते जा रहे हैं, चुनाव सर पर है जो चाहे वह, सब कुछ बोल दो। लेकिन आप सबको भी जागरूक बनना पड़ेगा और आम जनता को भी जागरूक करना पड़ेगा। कमलनाथ ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्य प्रदेश की जनता सच्चाई का साथ देगी, कांग्रेस का साथ देगी।

भाजपा के रास्ते पर कांग्रेस,अन्य राज्यों के सांसद-विधायक विधानसभाओं में भेजेगी कांग्रेस
कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी ने चार राज्यों के 230 प्रवासी विधायकों को एमपी बुला कर पार्टी की स्थिति को खंगालने का प्रयास किया था जिसका कांग्रेस के नेता मजाक उड़ा रहे थे लेकिन अब कांग्रेस ने भी भाजपा के रास्ते पर चलने की योजना तैयार की है (MP Congress)। जिसके तहत कांग्रेस दूसरे राज्यों के सांसद और विधायकों को एमपी बुलाने की योजना पर का कर रही है। दूसरे राज्यों से एमपी में आए कांग्रेस के विधायक-सांसद उन विधानसभा सीटों की तैयारियों का आंकलन करेंगे और अपनी पार्टी के संगठन को उसकी रिपोर्ट सौंपेंगे। लोकसभा वार नियुक्त किये गए इन पर्यवेक्षकों की पहली बैठक 12 सितंबर (मंगलवार) को भोपाल में होगी। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal), प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Surjewala), प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ (Kamal Nath) सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। अन्य राज्यों से आए कांग्रेस के विधायक-सांसद सभी सहयोगी संगठनों की भूमिका,आपसी समन्वय और चुनाव अभियान को लेकर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगे। साथ ही लोकसभा की दृष्टि से भी संभावित दावेदारों को लेकर भी अन्य जानकारी जुटा कर संगठन को देंगे। मंगलवार को ही कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। इसमें कमेटी के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह,सदस्य अजय कुमार लल्लू,सप्तागिरी उल्का और प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चार दिनों तक दावेदारों का फीडबैक लिया है। जिस पर इस बैठक में विचार किया जाएगा। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी जिन 66 सीटों पर लंबे समय से चुनाव हार रही है और जिन विधायकों को चुनाव लड़ाया जाना है,उन्हे शामिल करते हुए प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित की जा सकती है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले हर घर दस्तक देने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जन-आक्रोश यात्रा के साथ हर घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में जिला,ब्लॉक,मंडलम् और सेक्टर इकाई के पदाधिकारियों को घर-घर भेज कर ग्रामीणों को भाजपा सरकार की असफलताओं के बारे में बताया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आरोप पत्र बांटे जाएंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने जो 11 वचन दिये हैं उसकी याद भी दिलाई जाएगी।

जातियों के सहारे कांग्रेस,जल्द आयोजित करेगी दो बड़े सम्मेलन
प्रदेश में सत्ता पाने के लिए कांग्रेस (mp congress) बड़े मतदाता वर्ग आदिवासी और ओबीसी के सम्मेलन करने जा रही है (congress conference)। ये राज्य स्तरीय सम्मेलन होंगे। आदिवासी सम्मेलन (adivasi sammelan) झाबुआ में तो ओबीसी का सम्मेलन (obc sammelan) भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी की जिम्मेदारी पार्टी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को सौंपी गई है। सम्मेलन की तारीख भी आदिवासी और ओबीसी वर्ग के नेता ही तय करेंगे। बुंदेलखंड में भी एससी वर्ग का बड़ा कार्यक्रम भी चुनाव अभियान समिति ने प्रस्तावित किया है। प्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं लेकिन इनका प्रभाव 80 सीटों से ज्यादा पर है। ओबीसी मतदाताओं का प्रभाव भी 100 से अधिक सीटों पर है। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों आदिवासी और ओबीसी वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति (congress election committee) ने तय किया है कि आदिवासी बहुल झाबुआ,अलीराजपुर,बड़वानी,खरगोन सहित अन्य जिलों के आदिवासी भाग लेंगे। इसकी तैयारी का जिम्मा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष कांतीलाल भूरिया को दिया गया है। आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. विक्रांत भूरिया इसमें सहयोगी की भूमिका में होंगे। इसके अलावा भोपाल में आयोजित होने वाले ओबीसी सम्मेलन की जिम्मेदारी कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव को सौंपी गई है। दोनों को कार्यक्रम की रुपरेखा निर्धारित करने के लिए कहा गया है। प्रदेश में कई विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

भाजपा को करारा जवाब देगी कांग्रेस की चेतना सभा,हर विधानसभा में 50 हजार घरों तक पहुंचने का लक्ष्य
भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब देने के लिए कांग्रेस पार्टी चेतना सभा का आयोजन कर रही है (congress chetna sabha)। कांग्रेस की ओर से गांवों में चेतना सभा का आतोजन किया जाएगा। और इस चेतना सभा के माध्यम से कांग्रेस करीब 50 हजार घरों में पहुंचने वाली है। कांग्रेस पार्टी इसके माध्यम से 50 प्रतिशत कमीशन और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाएगी। कांग्रेस की ओर से यह अभियान 15 सितंबर तक चलाया जाएगा। कांग्रेस पदाधिकारियों का मानना है कि प्रदेश में सत्ता वापसी के लिए पार्टी के कार्यकर्ता अति उत्साहित हैं और उसका फायदा उठाते हुए पार्टी ने चेतना अभियान चलाने की योजना तैयार की है। दरअसल अति उत्साह के चलते कांग्रेस के कार्यकर्ता निष्कृय होते चले जा रहे थे यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी के हाई कमान ने चेतना अभियान चलाने की योजना तैयार की है। जिला अध्यक्ष और प्रभारियों की सामूहिक बैठक में निर्देश दिए गए गांवों में चेतना सभाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। जिसमें भ्रष्टाचार,50% कमीशन और झूठी घोषणाओं के विषया को उठाया जाएगा। प्रत्येक विधानसभा में 50 हजार घरों तक पहुंच कर भाजपा सरकार के विरोध में पर्चे वितरित किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर भाजपा की बात करें तो साल 2003 से पहले की याद को फिर से ताजा करने के लिए वीडियो वार की तैयारी की जा रही है। जिसकी थीम भी तैयार कर ली गई है। जिसके तहत वीडियो में एक महिला अपनी बेटी से कहती नजर आएगी कि 'बेटी ये वही शिवराज सरकार है जिसकी बदौलत तेरा ब्याह हुआ' मिशन- 2023 की तैयारियों में जुटी भाजपा इंटरनेट मीडिया का सर्वाधिक इस्तेमाल का प्लान तैयार कर रही है। भाजपा का थिंक टैंक ऐसी सामग्री तैयार कर रहा है जो महिलाओं को आकर्षक लगे और वो भावनात्मक तरीके से सीएम शिवराज से जुड़ पाएं। 'शिवराज नहीं होता तो क्या होता' जैसी कई पंचलाइनें तैयार की जा रही हैं जो महिलाओं को असर पहुंचा सकें और वो सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) को भाई के रुप में स्वीकार कर एक बार फिर भाजपा को वोट दे सकें।

स्पेशल 100 कांग्रेस के जीत का तैयार करेंगे मास्टर प्लान
मिशन 2023 की तैयारियों में जुटी कांग्रेस पार्टी इंटरनेट मीडिया के सभी माध्यमों का भरपूर इस्तेमाल करने जा रही है। इसके लिए कांग्रेस ने वार रुम बनाने के साथ प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए 100-100 कार्यकर्ता तैयार किए हैं (MP Congress)। इन कार्यकर्ताओं को कमलनाथ (Kamalnath) के स्पेशर 100 का नाम दिया गया है। इनका काम प्रत्याशियों और पार्टी का प्रचार सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर सूचनाएं प्रसारित करने से लेकर फीडबैक जुटाने का होगा। पार्टी का आईटी विभाग विभिन्न मुद्दों को लेकर वीडियो भी तैयार करवा रहा है, जिन्हे प्रत्याशियों की घोषणां के साथ ही प्रसारित किया जाने लगेगा। वहीं विभाग की एक टीम केवल भाजपा द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का अध्ययन करके उसका तोड़ निकालने के लिए तैयार की गई है। कांग्रेस ने प्रदेश में भाजपा (MP BJP) के संगठन से मुकाबला करने के लिए मतदान केन्द्र पर फोकस किया है। भारत जोड़ो यात्रा (bharat jodo yatra) और कर्नाटक चुनाव (karnataka election) का काम देख चुके सुनील कानूगोलू (Sunil Kanugolu) की टीम ने भोपाल में डेरा डाल लिया है और वार रुम भी बन गया है। यहां फिलहाल मैदानी स्तर से चुनावी मुद्दों,संभावित दावेदार और चुनाव की तैयारियों पर फीडबैक लिया जा रहा है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार ये स्पेशल 100, प्रत्याशी कोई भी हो उसके लिए काम करेंगे। इंटरनेट मीडिया के सभी प्लेटफार्म का उपयोग पार्टी की बात आमजन तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। प्रत्याशी की ओर से सामग्री पोस्ट करने का काम ये कार्यकर्ता करेंगे और फिर उस पर मिलने वाला फीडबैक संगठन तक पहुंचाएंगे। कांग्रेस द्वारा घोषित होने वाले वचन पत्र, प्रमुख नेताओं की सभा,रोड शो सहित अन्य कार्यक्रमों की लिंक साझा होगी तो समय-समय पर पार्टी की रीति-नीति से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाएंगे। ये सभी सामग्री राज्य स्तर से उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि एकरुपता बनी रहे।

कमजोर बूथों को कांग्रेस के अनुशांगिक संगठन लेंगे गोद
प्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए जो रोड मैप तैयार किया है उसमें सहयोगी संगठनों की बड़ी भूमिका निर्धारित की गई है (MP Congress)। सेक्टर और मंडलम् के साथ बूथ प्रबंधन का काम महिला, युवा, अनुसूचित जाति- जनजाति और किसान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की टीम संभालेगी। सभी कमजोर मतदान केदो को गोद लेंगे। प्रत्येक केंद्र पर कार्यकर्ताओं को तैनात किया जाएगा। प्रत्याशियों के साथ सभी संगठनों के कार्यकर्ता प्रचार में जुटेंगे। मतदान के लिए मतदाताओं को घर से निकलने, पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने, पांच गारंटीयों का प्रचार करने, भाजपा सरकार की असफलता को जनता के बीच ले जाने का दायित्व भी सहयोगी संगठनों को सौंपा गया है। सभी ने अपने-अपने स्तर पर तैयारी भी तेज कर दी हैं। पूरा फोकस इस बात पर है कि प्रत्याशियों के साथ पूरा संगठन मैदान में करता दिखे। कांग्रेस संगठन की ओर से मिली जिम्मेदारी का आगाज सितंबर माह से किया जाएगा। इधर,प्रदेश कांग्रेस ने सहयोगी संगठनों के कामों पर नजर रखने के लिए प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि जो दायित्व संगठनों को दिया गया है,उसकी वास्तव में पूर्ति हो। प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा के संगठन से मुकाबला करने के लिए इस बार मतदान केंद्र पर सर्वाधिक ध्यान केंद्रित किया है। बूथ,सेक्टर और मंडलम् बनाने के बाद सहयोगी संगठनों को भी बड़े-बड़े कार्यक्रम करने के स्थान पर मतदान केन्द्र पर फोकस करने के लिए कहा गया है। संगठन चाहता है कि प्रत्याशी के साथ-साथ संगठन की भी अपनी तैयारी रहे। अभी तक मतदान केन्द्रों पर पूरी टीम प्रत्याशी की रहती थी लेकिन इस बार कांग्रेस इसमें बदलाव करने की तैयारी में है।

'कांग्रेस करप्शन की दुकान है' बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का बड़ा आरोप
कांग्रेस और भाजपा के बीच आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है (MP Elections 2023)। पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रेसवार्ता का आयोजन कर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर ताबड़ तोड़ आरोप लगाए। आरोपों का असर इतना तेज हुआ कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने कमलनाथ को 1983 दगों का माडल बता डाला। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के घोटालों का जखीरा खोलते हुए 15 महीने की सरकार में किए घोटालों की लंबी लिस्ट पेस की। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि कमलनाथ की सरकार को दिग्विजय सिंह चला रहे थे। उन्ही के इशारों पर प्रदेश में घोटाले हुए। बीजेपी अध्यक्ष ने ग्वालियर में हुई प्रियंका गांधी की सभा का जिक्र करते हुए कहा कि वो भाजपा के घोटालों की लिष्ट लेकर आई थी और मंच पर उनकी लिष्ट गायब हो गई। वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस भाजपा की सरकार पर 50% कमीशन का आरोप लगाती है वो ये क्यों नहीं बताते कि रतुलपुरी कौन है रतुलपुरी के घर पर छापा क्यों पड़ा था। मृगलानी का जिक्र करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रतुलपुरी के साथ मृगलानी का नाम क्यों जोड़ा जाता है। सिंचाई परियोजनाओं में हुए घोटाले को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि बिना काम शुरु हुए 877 करोड़ का पेमेंट किसने करवाया था। मोबाइल घोटाले का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि बगैर मोबाइल खरीदे 63 करोड़ का पेमेंट किसने किया था। आइफा अवार्ड अवार्ड का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उद्योगपतियों पर दबाव डाल कर बृजक्राफ्ट कंपनी को किसने फायदा पहुंचाया है। इसी प्रकार के बहुत सारे घोटालों की लिष्ट बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने जारी की और कहा कि भाजपा पहले से ही कहती रही है कि वल्लभ भवन को कांग्रेस ने दलाली का अड्डा बना दिया था। यही कारण था कि 15 महीने में जितने तबादले हुए उतना कभी किसी सरकार में तबादले नहीं हुए हैं। पीसीसी चीफ कमलनाथ की प्रेसवार्ता के बाद जिस प्रकार से बीजेपी अध्यक्ष ने हड़बड़ाहट में प्रेसवार्ता आयोजित कर उनके आरोपों के बदले जवाब नहीं दिया बल्कि कांग्रेस सरकार पर आरोपों और घोटालों की जमकर बारिश की है। मतलब साफ है कि अब विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और आने वाले समय में जहां कांग्रेस 18 महीने की भाजपा सरकार का पोस्टमार्टम करेगी तो वहीं भाजपा ने भी जमकर तैयारी कर रखी है और कांग्रेस के हर आरोप पर कटाक्ष करने के लिए भाजपा के नेता तत्काल अटैक करेगी।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ
गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एमपी की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है और इसकी बानगी उस वक्त को देखने को मिली जब पूर्व विधायक अभय मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की सदस्यता दिला दी। अभय मिश्रा रीवा के सेमरिया से विधायक रह चुके हैं और साल 2018 में भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस से राजेन्द्र शुक्ला के खिलाफ चुनाव लड़े थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में सेमरिया विधानसभा सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था वहां वर्तमान में केपी त्रिपाठी विधायक हैं और उनसे स्थानीय जनता काफी नाराज है उसी का लाभ उठाते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अभय मिश्रा को सेमरिया से टिकट देने का ऐलान कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐसी गुगली फेंकी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह एकसाथ क्लीन बोल्ड हो गए। गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा की ओर से ब्राम्हण चेहरा माना जाता है और विंध्य वो काफी लोकप्रिय हैं। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रीवा के प्रभारी रहे हैं इस दौरान वहां की स्थानीय जनता से उनके करीबी संबंध रहे हैं यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को विंध्य की जनता ब्राम्हण चेहरे के रुप में देखती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी गृह मंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राम्हण के रुप में उनके चेहरे को इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी का गृह मंत्री हमेशा पालन करते हैं और यही कारण है कि सरकार बनाने से लेकर हर फैसले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रहती है। इस चुनाव मे माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। जहां भी ब्राम्हण चेहरे को उतारने की अथवा डैमेज कंट्रोल करने की जरुरत होती है वहां पर संगठन और सरकार की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष का भी नाम आता है और वो भी विंध्य की तासीर से काफी परिचित हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य से ही शुरु हुई थी यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की भी विंध्य में स्वीकार्यता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के कई ऐसे नेता गृह मंत्री के संपर्क में हैं जो आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी अपने कुनवे को संभालने में लगी रहेगी और भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को परवान चढ़ाने में लगी रहेगी। भाजपा के प्लान के मुताबिक कांग्रेस को चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए इसी लिए इस प्रकार की रणनीति भारतीय जनता पार्टी ने अपनाई है।

पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार
आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।