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सुन लो रे कांग्रेस वालो लोकसभा चुनाव में तुमको 'खाता भी नहीं खोलने दूंगा'
भोपाल

सुन लो रे कांग्रेस वालो लोकसभा चुनाव में तुमको 'खाता भी नहीं खोलने दूंगा'

जहां एक ओर प्रदेश में अगले सीएम को लेकर चर्चाएं जोर पर हैं वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) मिशन 2024 (loksabha elections 2024) फतह हासिल करने के अभियान को अंजाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुल कर बोल दिया है कि वो दिल्ली नहीं जाएंगे और एमपी में ही रह कर पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। सीएम शिवराज ने यह भी दावा किया कि वो सीएम पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और न ही वो दावेदार हैं। मतगणना समाप्त होते ही जहां प्रदेश की जनता और भाजपा के नेता अगले सीएम की बात करने में जुट गए हैं वहीं दूसरी तरफ सीएम शिवराज ने उन सीटों को अपने रडार पर ले लिया है जहां पर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने अभियान का आगाज छिंदवाड़ा से किया जहां की सभी सातों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मतलब साफ है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ के अभेद्य किले पर सीएम शिवराज ने सेंध लगाने की रणनीति तैयार कर ली है। यही कारण है कि सीएम चौहान ने सबसे पहले छिंदवाड़ा जाना उचित समझा। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन सभी सीटों पर दौरा करने जाएंगे जहां पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। बात सिर्फ सीएम शिवराज सिंह चौहान तक ही सीमित नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी छिंदवाड़ा फतह की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष से लेकर मंडल और ब्लाक अध्यक्षों के साथ मीटिंग कर हार के कारणों की समीक्षा करने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने के लिए ठोस रणनीति पर काम कर रहे हैं।

7/12/2023174
कुशल रणनीतिकार वीडी शर्मा का दिल्ली दौरा,केन्द्रीय नेत्रृत्व से की मुलाकात
भोपाल

कुशल रणनीतिकार वीडी शर्मा का दिल्ली दौरा,केन्द्रीय नेत्रृत्व से की मुलाकात

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल किया है। इस जीत के बड़े सूत्रधारों में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) भी हैं। लोग लाड़ली बहना (ladli behna) और मोदी मैजिक की बात कर रहे हैं लेकिन संगठन में ठीक तरीके से कसावट ही नहीं होगी तो कितना भी बड़ा नेता हो सिर्फ भाषणा से जनता का दिल नहीं जीत सकता है। साल 2018 में राकेश सिंह (rakesh singh)प्रदेश अध्यक्ष थे और भाजपा जीत के मुहानज तक पहुंचते-पहुंचते रह गई थी। उसके बाद युवा नेता वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। सिंधिया भाजपा में आए 28 सीटों पर उप चुना हुआ जिसमें भाजपा ने 19 सीट जीत कर प्रदेश में स्थाई सरकार बना ली। इसी लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भाजपा में शुभंकर नेता कहा जाता है। प्रदेश अध्यक्ष यहीं नहीं रुके उन्होने लगातार संगठन को मजबूत करने के लिए दिन रात एक कर दिया। एक अभियान समाप्त होता उसके पहले दूसरे अभियान का रुट प्लान तैयार रहता था। वीडी शर्मा के इन्ही कामों को देखते हुए पीएम मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष की तारीफ की थी। अब एक बार फिर प्रदेश में भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। चुनाव के दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से कोई पूछता था कि आपको किसती सीटों की उम्मीद है जिसका वो एक ही जवाब देते थे कि इस बार ऐसा बहुमत मिलेगा जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। आखिर तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कही हर बात सभु साबित हुई। अब प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली दौरे पर हैं जहां वो लगातार केन्द्रीय नेत्रृत्व से मुलाकात कर रहे हैं।

7/12/2023113
कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...
भोपाल

कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...

प्रदेश में इस वक्त हर ब्यक्ति की जुवां पर एक ही सवाल है कि अगला सीएम कौन बनेगा (madhya pradesh cm)। तो भाई लोग इसका जवाब ये है कि अगला सीएम भी कोई और नहीं शिवराज सिंह चौहान ही बनेंगे (shivraj singh chouhan)। जब भाजपा के अलग-अलग नेता दिल्ली दरवार में चक्कर लगा रहे हैं तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन जगहों पर सभाएं ले रहे हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। सीएम शिवराज पहले छिंदवाड़ा दौरे पर गए जहां की भाजपा सातों सीट हार गई है। उसके बाद सीएम शिवराज शिवपुरी भी गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिस प्रकार लाड़ले भांजे भांजियों के सीच प्यार लुटा रहे हैं और लाड़ली बहनों का सम्मान हासिल कर रहे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी सीएम बदलने का जोखिम नहीं उठा सकती है। सवाल इस बात का भी उठता है कि आखिर में भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व प्रदेश में सीएम क्यों बदलेगा। शिवराज सिंह चौहान पार्टी की तरफ से सीएम चेहरा जरुर घोषित नहीं किए गए थे लेकिन जब चुनाव हुआ तो प्रदेश के सीएम वही थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अकेले करीब डेढ़ सौ विधानसभा सीटों में जाकर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया। जिस वक्त लोग कह रहे थे कि सरकार विरोधी लहर है तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना लांच की और उसी योजना को गेम चेंजर के रुप में देखा भी जा रहा है। हांलाकि इस बीच प्रदेश में मोदी मैजिक और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठनात्मक शक्ति भी देखने को मिली लेकिन बात वहीं आकर रुप जाती है कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रहते भाजपा ने 163 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है तो फिर पार्टी सीएम क्यों बदलेगी।

7/12/2023132
प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात
भोपाल

प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात

मप्र में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज करने के साथ सियासी हलचलें भी तेज हो गई हैं (madhya pradesh elections)। दिल्ली दौरे पर पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (amit shah) से मुलाकार कर प्रचंड जीत पर उन्हे बधाई दी। गौरतलब है कि चुनाव से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मप्र में 51% वोट शेयर का लक्ष्य रखा था। और उसके लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने काफी मेहनत की। नतीजा यह निकला कि 41 फीसदी से विधानसभा चुनाव में भाजपा 48.45% का वोट शेयर हासिल करने में कामयाब रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल भी मौजूद रहे जिनका प्रदेश अध्यक्ष ने आभार ब्यक्त किया। गौरतलब है कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 सीट और कांग्रेस ने 114 विधानसभा सीटें जीती थी। आंकड़ों के हिसाब से भाजपा ने सीट कम जीती थी लेकिन कांग्रेस की तुलना में भाजपा का वोट प्रतिशत ज्यादा था। उसके बाद वीडी शर्मा को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और उन्होने लगातार वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की मेहनत रंग लाई और वहां भी भाजपा को बंपर जीत मिली थी। अब विधानसभा में भाजपा ने 48% से ज्यादा वोट हासिल कर लक्ष्य के आसपास पहुंचने का काम किया है। इस लक्ष्य तक पहुंचने में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की रणनीति और मेहनत का असर देखने को मिला है।

5/12/2023104
'शिव' ने की श्रीराम की आराधना,लिया आशीर्वाद
भोपाल

'शिव' ने की श्रीराम की आराधना,लिया आशीर्वाद

बीकानेर से 24 नवंबर को शुरु हुई रथ यात्रा मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) के हाउस पहुंची। इस रथ यात्रा जगदगुरु श्रीराम भद्राचार्य जी ने ध्वज दिखा कर रवाना किया था। यह रथ यात्रा लगभग 26 हज़ार किलोमीटर का सफर तय कर 16 जनवरी को अयोध्या पहुंचेगी। भगवान राम की आकर्षक झांकियों से लैस इस यात्र के दर्शन के लिए जगह-जगह लोगों की लंबी कतार देखने को मिल रही थी। यात्रा जहां से गुजर रही थी वहां लोग फूलों की बारिश कर झांकियों का दर्शन करने के लिए पहुंच रहे है। यात्रा जब सीएम हाउस पहुंची तो सीएम शिवराज की भगवान राम के प्रति आस्था देखते ही बन रही थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सपत्नीक भगवान राम की आरती कर उनसे प्रदेश के खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान सीएम हाउस में भी भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।

5/12/202383
नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना
भोपाल

नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना

सियासत की चौसर में पार्टियों का सबसे बड़ा चेहरा उसका मीडिया विभाग होता है (bjp media department)। पार्टी की सूचनाओं का प्रजेंटेशन किस प्रकार होना चाहिए इसका निर्धारण भी मीडिया विभाग के हाथ में ही होता है। बीजेपी ने जिस प्रकार से प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की है उसमें मीडिया विभाग की भूमिका और उस मीडिया विभाग के कप्तान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐन चुनाव के मौके पर अपने मीडिया प्रभारी का जिम्मा युवा चेहरा आशीष अग्रवाल (ashish agarwal) के कंधों पर डाल दिया था। आशीष अग्रवाल का युवा चेहरा होने के नाते पत्रकारों के बीच यही कानाफूसी हुआ करती थी कि क्या आशीष अग्रवाल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी ठीक तरीके से निभा पाएंगे। इन कश्मकश के बीच आशीष अग्रवाल ने बगैर किसी कंट्रोवर्शी में फंसे किस प्रकार पार्टी की आवाज को बुलंद करना है उसको लेकर लगातार मेहनत की। उनमें उम्र के हिसाब से अनुभव जरुर कम था लेकिन जिस प्रकार से टीम को सजाया और संवारा जाता है और उसका विश्वास किस प्रकार जीता जाता है इस बात को भी आशीष अग्रवाल ने बखूबी बेहतरीन तरीके से दिखाया। युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण से लैस बीजेपी मीडिया विभाग की टीम का आशीष अग्रवाल ने कभी मनोबल ढीला नहीं पड़ने दिया। जब लोग भाजपा के मीडिया सेंटर (bjp media centre) में भाजपा विरोधी लहर की बात करते थे तो आशीष अग्रवाल बड़े ही विनम्र भाव से कहते थे कि आप देखते रहिए भाजपा की सरकार और संगठन ने जिस प्रकार से काम किया है उसका नतीजा वोट के रुप में सामने आएगा। और तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल की कही हर बात सच साबित हुई और भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की (madhya pradesh election result)। अब सवाल इस बात का उठता है कि भाजपा की जीत में बीजेपी मीडिया विभाग की क्या भूमिका थी। दरअसल किसी भी पार्टी का मीडिया विभाग चेहरा होता है और पार्टी की सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम मीडिया विभाग की टीम का ही होता है। जिस प्रकार एक अखबर में पत्रकारों के साथ संपादक मीटिंग कर रोजाना प्रमुख खबरों पर बात करता है और किस खबर को अखबार में कहां स्थान देना है ठीक उसी प्रकार एक मीडिया प्रभारी की भी जिम्मेदारी होती है कि पार्टी की हर बात को किस बेहतर तरीके से मीडिया के माध्यम से जनता के पास पहुंचाना है। इस मामले में बीजेपी के युवा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बेहतर तरीके से साबित किया कि उम्र और अनुभव कभी आड़े नहीं आते बस मन में विश्वास और निष्ठा होना जरुरी है। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी का सफर तय करने वाले आशीष अग्रवाल ने कामयाबी की एक ऐसी मिशाल कायम की है जो भविष्य में भाजपा के अन्य मीडिया प्रभारियों के लिए एक नजीर के रुप में देखी जाएगी।

4/12/2023163
'कमलनाथ को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा' निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलते ही कमल नाथ के पास होगा जमा
भोपाल

'कमलनाथ को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा' निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलते ही कमल नाथ के पास होगा जमा

आपरेशन लोटस (operation lotus) एमपी में फिर ना हो इसलिए कांग्रेस पार्टी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। कांग्रेस की इस रणनीति का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि पीसीसी चीफ कमल नाथ (kamal nath) को अपने नेताओं पर भरोसा नहीं है। यह कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी की ओर से सभी 230 प्रत्याशियों को फरमान जारी कर निर्देश जारी किया गया है कि मतगणना समाप्त होते ही प्रमाण पत्र को पीसीसी कमलनाथ के पास जमा कराना होगा। मतलब साफ है कि कांग्रेस के जितने संभावित विजेता हैं उनकी जीत होते ही उनको भोपाल आकर अपने प्रमाण पत्र पीसीसी चीफ कमलनाथ के हाथों में सौंपना पड़ेगा। जिससे भाजपा की तरफ से संपर्क करने के अथवा किसी भी लालच अथवा प्रलोभन देने के बाद भी कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ न जाने पाएं। फिलहाल कांग्रेस के कंट्रोल रुम की तरफ से हर प्रत्याशियों से मिनट टू मिनट संवाद स्थापित किया जा रहा है जिससे उनके मन को समझने में दिक्कत न हो। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार हर जिलों में प्रदेश कांग्रेस की ओर से ऐसे पदाधिकारियों को निगरानी में तैनात किया गया है जिन्हे वहां के स्थानीय नेता अथवा प्रत्याशी ना पहचानते हैं। खैर मतगणना कल है लेकिन कांग्रेस इस बार किसी प्रकार का मौका भाजपा को नहीं देना चाहती है यही कारण है कि कांग्रेस अलग-अलग तरीकों से अपने प्रत्याशियों की निगरानी कर रही है।

2/12/2023139
एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार
भोपाल

एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार

मप्र में 17 नवंबर को मतदान संपन्न हुए थे तब से अब तक सभी प्रकार के राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से गणित लगा रहे थे कि एमपी में अगली किसकी सरकार बन रही है (madhya pradesh elections)। लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को अलग-अलग एजेंसियों का एग्जिट पोल जारी हो गया। एग्जिट पोल (exit polls) में जिस प्रकार से चौकाने वाले आंकड़े आए हैं उसके बाद कांग्रेसी खेमें में खामोशी सी छा गई है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा (mp bjp) में भी तरह-तरह की बातें शुरु हो गई है। दरअसल जिस प्रकार से एग्जिट पोल के अनुमान आया है उसके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मतलब साफ है कि एग्जिट पोल के मुताबिक कमलनाथ (kamal nath) की कोई भी गारंटी काम नहीं आई। कांग्रेस के वचन पत्र में महिलाओं,कर्मचारियों,किसानों हर वर्ग को साधने के लिए कुछ न कुछ गारंटी दी गई थी। यह भी बार-बार कहा जा रहा था कि इस बार कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने कांग्रेस (mp congress) की बकिया उधेड़ कर रख दी है। कांग्रेस की ओर से एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा की साजिश के तहत इस प्रकार के रुझान दर्शाए जा रहे हैं जबकि स्थिति ठीक इसके उलट है। वहीं भाजपा नेताओं की मानें तो उधर खुशी की लहर है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि एग्जिट पोल के अनुमान से भी अच्छे परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे क्योंकि भाजपा की सरकार ने इतने काम किए हैं जिसका परिणाम वोट के रुम में भाजपा के पक्ष में आएगा।

1/12/2023148
कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया
भोपाल

कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया

तीन दिसंबर को मतगणना होने वाली है लेकिन उसके पहले लोगों के धैर्य का बांद फूट रहा रहा (madhya pradesh elections)। दरअसल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में से किसकी सरकार बनेगी उसको लेकर शर्त लगाने का दौर तेज हो गया हो। दो लोगों ने शर्त की सीमा को लांघते हुए स्टांप पेपर पर एक लाख रुपये की शर्त लगा डाली है। बकायता दोनों ने स्टांप पेपर में एक लाख रुपये की शर्त लगाई है। धनीराम भलावी ने शर्तलगाते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार (congress government) बनेगी वहीं नीरज मालवीय ने कहा है कि भाजपा की सरकार (bjp government) बनेगी। शर्त को और अपनी बात को सही साबित करने के लिए नोटरी से पचास रुपये स्टांप भी बनवाया गया है। इतना ही नहीं दोनों ने एक-एक लाख का चेक साइन कर गांव के ही अमित पांडे को दिया है जिसकी सर्त सही साबित होगी वो नीरज पांडे से एक लाख रुपये का चेक प्राप्त कर लेगा। यह पहला मौका नहीं है इससे कुछ दिन पहले भी इसी प्रकार से सर्त लगाई गई थी। फिलहाल इंतजार तीन दिसंबर का है जिस दिन मतगणना होगी उस दिन क्लियर होगा की एक लाख की लाटरी किसकी लगने वाली है।

28/11/2023164
बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर सपा भाजपा और कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित
भोपाल

बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर सपा भाजपा और कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित

इस बार विधानसभा चुनाव पर प्रत्याशियों से ज्यादा भाजपा, कांग्रेस और सपा के दिग्गज चेहरों पर नजर है। क्योंकि बुंदेलखंड (bundelkhand) में कुछ सीट ऐसी हैं जहां से हार जीत के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव (akhilesh yadav) भाजपा, की दिग्गज नेत्री उमा भारती (uma bharti) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) सहित कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) की प्रतिष्ठा दांव पर है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने छतरपुर की महाराजपुर और निवाड़ी विधानसभा में पूरा जोर लगा दिया है। क्योंकि पिछली बार छतरपुर से बिजावर सीट सपा को मिली थी। इसलिए वह प्रदेश में कहीं न कहीं अपना वजूद बनाए रखने के लिए ताबड़तोड़ सभाएं करते रहे। जिले की महाराजपुर सीट पर कांग्रेस से बागी हुए दौलत तिवारी के समर्थन में अखिलेश यादव ने चुनावी सभाएं कीं और नौगांव में पार्टी के लिए लोगों को संगठित करने का काम किया। बुंदेलखंड में चुनाव के नजदीक कुछ दिन अखिलेश यादव खजुराहो में डेरा डाले रहे।चुनावी परिणाम आने में अभी करीब आठ दिन बाकी हैं। चुनावी कयास भले ही किसी भी पार्टी के हार जीत के लगाए जाते रहे हों लेकिन असल फैसला तीन दिसंबर को ही सामने आएगा। अपने नाम का झंडा गाड़ने झौंकी पूरी ताकत बुंदेलखंड में छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में उमा भारती, भाजपा प्रदेश ध्यक्ष वीडी शर्मा और अखिलेश यादव ने शुरू ये ही अपना प्रभाव जमा रखा था। कहीं न कहीं इन दिग्गजों के चाहने वाले ही चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसलिए इन तीनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। हालांकि इस बार उमा भारती चुनावी मैदान में कम नजर आईं। खास बात यह है कि बुंदेलखंड की सीटों पर भोपाल और यूपी से नजरें गढ़ी हुई हैं। भाजपा कांग्रेस के प्रभाव के बीच अखिलेश यादव भी नौगांव, निवाड़ी और चंदला आदि सीटों पर अपना झंडा गाड़ने तुले हुए हैं। क्योंकि इन जगहों पर अखिलेश यादव ने एड़ी चोड़ी का जोर लगाया है। इस बार का चुनाव जो पिछला चुनाव हारे और इस बार पहली बार चुनाव में खड़े हुए प्रत्याशियों के लिए बेहद अहम है। क्योंकि इस बार की हार जीत आने वाले दिनों की राजनीति तय करेंगी। छतरपुर से ललिता यादव के लिए यह चुनाव बहुत अहम है। भाजपाइयों के कड़े अंदरूनी विरोध के चलते वह टिकट पाने में कामयाब रही थीं और उन्होंने पूरी दमदारी से चुनाव भी लड़ा है। लेकिन छतरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आलोक चतुर्वेदी अपनी पहले से ही चुनावी चौसर बिछाए बैठे थे। इस कड़े चुनावी मुकाबले में कौन अधिक भारी है यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि यहां कांग्रेस से बागी हुए बब्बू राजा के चुनावी मैदान में आने से त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। इधर ललिता यादव तो मुख्यमंत्री को जीत की बधाई तक देने पहुंच गई। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी महाराजपुर कांग्रेस से दौलत तिवारी के बागी होने के बाद से ही महाराजपुर में त्रिकोणीय मुकाबला कहा जा रहा था। यहां त्रिकोणीय मुकाबले में सीट फंसी हुई है। महाराजपुर से कौन जीतेगा यह कह पाना मुश्किल है। महाराजपुर से पहली बार भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे कामाख्या प्रताप सिंह को मिला युवाओं का साथ चुनावी समीकरण बदलने का काम कर सकता है। इधर कांग्रेस के नीरज दीक्षित की घर-घर तक पकड़ रही है। बसपा प्रत्याशी भी सबसे आगे रहने के दावे कर रहे हैं। अब दोनों ही युवाओं में कौन भारी रहा है यह फैसला तीन दिसंबर को सामने आएगा।

26/11/2023120
दांव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  कमलनाथ, दस लाख रुपये की लगी शर्त
भोपाल

दांव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, दस लाख रुपये की लगी शर्त

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हाट सीट रही छिंदवाड़ा से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ मैदान में हैं (kamal nath)। मतगणना तीन दिसंबर को होगी। इससे पहले हार-जीत पर शर्त लगाई जाने लगी है। छिंदवाड़ा में एक पत्र व स्टांप पेपर इंटरनेट मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें कमल नाथ की हार पर 10 लाख रुपयों की शर्त लगाई गई है। दो लोगों के बीच लगी शर्त में स्टांप पेपर पर तीन गवाह भी शामिल हैं। हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद शर्त लगाने वालों ने यह शर्त रद की बात कही। शहर के लालबाग निवासी प्रकाश साहू और राम मोहन साहू ने एक एग्रीमेंट तैयार किया था। इसमें लिखा गया कि अगर कमल नाथ हारते हैं तो वह राम मोहन साहू को 10 लाख रुपये देंगे। अगर भाजपा के बंटी साहू (banti sahu) हारेंगे तो राम मोहन साहू एक लाख रुपये देंगे। इस इकरारनामे में तीन गवाह भी शामिल हैं। इसी प्रकार कांग्रेस के दो युवाओं ने भी आपस में शर्त लगाई है। (madhya pradesh elections)

22/11/2023184
बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन के दे रही संकेत,राजनीतिक पार्टियां निकाल रहीं वोटिंग के मायने
भोपाल

बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन के दे रही संकेत,राजनीतिक पार्टियां निकाल रहीं वोटिंग के मायने

प्रदेश में जब भी बंपर वोटिंग हुई है तब सत्ता परिवर्तन हुए हैं (madhya pradesh elections)। भाजपा और कांग्रेस इस वक्त यही गुत्थी सुलझाने में लगे हैं कि बंपर वोटिंग के मायने क्या हैं यह वोटिंग भाजपा के पक्ष में हुई है अथवा कांग्रेस के पक्ष में हुई है। आइए जानते हैं कि 2003 से लेकर 2018 तक राज्य में कितनी वोटिंग हुई और किसकी सरकार बनी। मध्यप्रदेश में 2018 में 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में 75.2 फीसदी मतदान हुआ था। जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ था। हालांकि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 114 और बीजेपी को 109 सीटें मिलीं थी। वहीं, वोट शेयर की बात करें तो 2018 में बीजेपी को कांग्रेस से ज्यादा वोट मिले थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 70.8 फीसदी वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में बीजेपी को 165 और कांग्रेस को मात्र 57 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2008 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी वोटिंग हुई थी। 70 फीसदी से कम हुई वोटिंग के बाद भी बीजेपी ने अपनी सरकार को बरकरार रखा था। बीजेपी को 143 और कांग्रेस को 71 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2003 के चुनाव बेहद अमह माने जाते थे। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव हुए थे। 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। बीजेपी ने उमा भारती के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। 2003 में राज्य में 67 फीसदी वोटिंग हुई थी। तब बीजेपी को 173 और कांग्रेस को मात्र 38 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश के बीते पांच चुनावों की बात करें तो केवल 2018 में ही 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला था लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राज्य में बदलाव का संकेत देती है (madhya pradesh voter turnout)।

20/11/202373
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