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देश के पांच राज्यों में आज से चुनाव आचार संहिता लागू,एमपी में 17 नवंबर को होगा मतदान
देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आज से आदर्श आचार संहिता लागू (model code of conduct) हो गई है (assembly elections)। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा है कि भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान को पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान किया जाएगा (MP Elections)। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान आयोजित किया जाएगा,पहला चरण 7 नवंबर और फिर दूसरा चरण 17 नवंबर को होगा। राजस्थान में 23 नवंबर को मतदान होगा,मिजोरम में सात नवंबर को मतदान होगा। तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान डाले जाएंगे। मतों की गणना तीन दिसंबर को की जाएगी। मतदान की तारीखों का ऐलान होते ही भाजपा और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते हुए चुनाव में दो-दो हाथ का ऐलान करते हुए शपथ की तारीखों का ऐलान तक कर दिया है।

नारी शक्ति के भरोसे भाजपा का 51% वोट पाने का लक्ष्य,वाट्सेप ग्रुपों से जोड़ी जाएंगी महिलाएं
विधानसभा चुनाव में 51% वोट प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी महिलाओं पर लगातार फोकस बढ़ा रही है (MP BJP)। भाजपा अब प्रत्येक मतदान केन्द्र स्तर पर महिलाओं के वाट्सेप ग्रुप भी अलग से बनवा रही है,ताकि भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे महिला केन्द्रित कार्यों को प्रचारित किया था सके। भाजपा ने रणनीति बनाई है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का ब्यापक स्तर पर प्रचार- प्रसार किया जाएगा (Nari Shakti Vandan Adhiniyam)। भाजपा हर हाल में विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव को महिला केन्द्रित बनाने की तैयारी कर रही है। रणनीति के तहत प्रत्येक मतदान केन्द्रों पर ऐसी महिलाओं से संपर्क किया जा रहा है, जो केन्द्र या शिवराज सरकार की किसी ना किसी योजना से लाभान्वित हो रही हैं। प्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Ladli Behana Yojana) के माध्यम से एक करोड़ 31 लाख लाड़ली बहनों को प्रतिमाह एक हजार 250 रुपये दिये जा रहे हैं। वहीं,प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Ujjwal Yojana) और लाड़ली बहनों को 450 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आजीविका मिशन से भी 43 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इन सभी से महिला मोर्चा न केवल प्रत्यक्ष संपर्क करेगा,बल्कि इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यमों से भी अपनी बात पहुंचाएगा। इसके लिए मोर्चा की कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। प्रदेश स्तर से जिला और बूथ स्तर तक की महिला कार्यकर्ताओं को तत्थ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। महिला मोर्चा की पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में दो करोड़ 72 लाख 36 हजार 229 महिला मतदाता हैं। 29 विधानसभा में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है (MP Elections)।

अतिथि विद्वानों को अब एक दिन के दो हजार रुपये मिलेंगे
प्रदेश के सरकारी महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि विद्वानों को अब 1500 से बढ़कर प्रतिदिन दो हजार रुपये मानदेय मिलेगा (MP guest teachers) । वही इनका अधिकतम मानदेय प्रतिमाह 50 हजार रुपये होगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। यह एक अक्टूबर से लागू होगा। इससे प्रदेश के 4500 अतिथि विद्वानों को लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने 11 सितंबर को अतिथि विद्वानों की महापंचायत में 50 हजार रुपये निश्चित मासिक वेतन देने की घोषणा की थी। हालांकि अतिथि विद्वानों का कहना है कि विभाग द्वारा जारी आदेश में प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय मिलने से 50 हजार रुपये से कम मानदेय होगा। इसी बीच कॉलेज में नियमित शिक्षकों के रिक्त पदों पर अतिथि विद्वानों को आमंत्रित करने के आदेश जारी किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन होंगे। इस बार अतिथि विद्वानों को साल में 13 दिन का आकस्मिक और तीन दिन का ऐच्छिक अवकाश दिया जाएगा। प्राचार्य को निर्देशित किया गया है कि अतिथि विद्वान के कार्य पर उपस्थित होने पर उसकी उपस्थिति इस दिन में शाम 5:30 बजे तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन मॉड्यूल में दर्ज किया जाए। साथी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी, और ग्रंथपाल भर्ती परीक्षा में चयनितों के लिए 25 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। फालेन आउट (विस्थापित) अतिथि विद्वान च्वाइस फिलिंग से भर्ती में शामिल होंगे।

140 सीटों पर कांग्रेस का मंथन खत्म,पित्रपक्ष के बाद जारी होगी सूची
प्रत्याशी चयन में कांग्रेस पार्टी किसी भी प्रकार की चूक नहीं करना चाहती (congress candidates) । पहले भोपाल में बैठक होती हैं जहां पैनल तैयार किया जाता है। भोपाल में पैनल तैयार करके दिल्ली भेजा जाता है जहां केंद्रीय चुनाव समिति उसे पैनल में चुनिंदा नामों पर मुहर लगाती है। शनिवार को भी ऐसा ही देखने को मिला जब कांग्रेस की दिल्ली में चुनाव समिति की बैठक आयोजित की गई (congress meeting) । इस बात में भी कोई शक नहीं है कि कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारों के चयन में कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है यही वजह है कि 140 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की पहली सूची पार्टी अब पितृपक्ष के बाद जारी करेगी। प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक शनिवार को दिल्ली में आयोजित की गई थी। बैठक की जानकारी देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने कहा कि बहुत सारे नाम पर चर्चा हुई है अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन यह निर्णय हम अगले छह -सात दिन में (पित्रपक्ष के बाद) करेंगे। लगभग 140 सीटों पर चर्चा हुई है,सबके सुझाव सुने हैं। एक बार फिर से बैठक बुलाई जाएगी और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि बैठक में लगातार हारने वाली 66 विधानसभा सीटों के अलावा उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर भी चर्चा हुई है,जहां एक ही दावेदार का नाम है। जिन नामों पर सहमति बन गई है उन पर विचार करके अंतिम रुप दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस दो से तीन बार में उम्मीदवारों की घोषणा करने की योजना बना रही है।

'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता से कर रहे सवाल
प्रदेश की सियासत में इस वक्त एक ही सवाल है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं। यही सवाल कई मंचों से सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) प्रदेश की जनता से भी पूछते नजर आए हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' गौरतलब है भारतीय जनता पार्टी ने अब तक जारी अपनी तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा की है जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं है। इसी लिए हर जुवान पर यही सवाल है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़ेंगे या नहीं और लड़ेंगे तो कहां से लड़ेंगे। दरअसल भाजपा ने 103 विधानसभा सीटों को आकांक्षी सीट का नाम दिया था जिसमें भाजपा के विधायक नहीं थे। उन 103 में भाजपा ने 79 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की हैं इनमें तीन ऐसी सीटें भी हैं जहां भाजपा के विधायक थे,इनमें सीधी, मैहर और नरसिंहपुर शामिल है जहां भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को बदला है। इस बीच प्रदेश में यही बात जोर पकड़ रही है कि सीएम शिवराज (Shivraj Government) का क्या होगा। बात को बल उस वक्त और ज्यादा बल मिला जब भाजपा ने जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) निकाली और सभी पांचों यात्राओं का अलग-अलग नेताओं को नेतृत्व सौंपा गया। पहले जब भी जन आशीर्वाद यात्रा निकला करती थी तो उसका नेतृत्व अकेले सीएम शिवराज करते थे लेकिन इस बार भाजपा ने पांच अलग-अलग जन आशीर्वाद यात्रा निकाली और सभी यात्राओं का नेतृत्व भी अलग-अलग नेताओं ने किया इसी लिए प्रदेश की जनता में संशय है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं वहीं सीएम शिवराज खुद जनता से पूंछ रहे हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं'

दिल्ली में प्रत्याशी चयन पर कांग्रेस लगाएगी अंतिम मुहर, पांच सर्वे के आधार पर 150 से ज्यादा सीटों पर होगा मंथन
एआईसीसी की ओर से प्रत्याशी चयन करने कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज दिल्ली में होगी (congress meeting)। इसमें लगातार हारने वाली 66 विधानसभा क्षेत्रों के अलावा उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो सकता हैं, जहां एक ही दावेदार का नाम है। पहली सूची में 150 से अधिक सीटों के प्रत्याशियों के नाम हो सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की अध्यक्षता में होगी। इसमें राज्य से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और ओमकार सिंह मरकाम शामिल होंगे। बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी में (congress screening committee) जिन नामों पर सहमति बन चुकी है, उन पर विचार करके अंतिम रूप दिया जाएगा। पार्टी ने प्रत्याशी चयन के लिए पांच सर्वे कराए और विभिन्न माध्यमों से दावेदारों को लेकर जानकारी जुटाई। इसके आधार पर स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, सदस्य अजय कुमार लल्लू और सप्तगिरि उलका ने तीन दौर की बैठकें की। सूत्रों का कहना है कि शनिवार को होने वाली बैठक में पहली सूची में शामिल किए जाने वाले प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। Mukhbirmp.com के मुताबिक कांग्रेस दो से तीन बार में प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। पहली सूची 150 से अधिक नामों की आ सकती है। जिन सीटों के लिए एक से अधिक नाम हैं, उनको लेकर पार्टी ने फिर से सर्वे कराया है। इसकी रिपोर्ट को सामने रखकर एक बार और स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी और फिर केंद्रीय चुनाव समिति को नाम भेजे जाएंगे। समिति में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अंबिका सोनी, डा.अमी याज्ञनिक, केसी वेणुगोपाल, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद, केजे जार्ज, मधुसूदन मिस्त्री, डा.मोहम्मद जावेद, पीएल पुनिया, प्रीतम सिंह, एन.उत्तम कुमार रेड्डी, टीएस सिंहदेव और ओमकार सिंह मरकाम सदस्य हैं।

चुनाव आचार संहिता लगने से पहले एक दिन में 53 हजार करोड़ से अधिक का लोकार्पण और भूमिपूजन
प्रदेश की शिवराज सरका हमेशा यही कहती रही है कि वो विकास के माडल पर ही जनता से वोट मांगेगी और प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकार बनाएगी (Shivraj Government)। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब ठीक चुनाव आचार संहिता (Model of Conduct) से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक दिन में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का शिरान्याश और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर को भी बड़ी सौगात दी और गुफा लोक बनाने का ऐलान किया साथ में सीएम शिवराज ने कहा कि 35 करोड़ की लागत से संत निवास का भी निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि गुफा मंदिर एक प्रसिद्ध स्थल के रुप में निर्मित होगा जहां देश भर के दर्शनार्थी और पर्यटक पहुंच सकेंगे। वहीं सीएम शिवराज की घोषणाओं और लोकार्पण पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक दिन में मुख्यमंत्री ने 53 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है तो 18 साल तक ये क्या कर रहे थे। केके मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकार्पण और भूमिपूजन तो ठीक है लेकिन पहले सरकार ये बताए कि क्या सरकार के पास 53 हजार करोड़ रुपये हैं जिससे इतने सारे विकास कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले सरकार एक दिखावा करती है और जिस प्रकार दिया बुझने से पहले खूब फड़फड़ाता है ठीक वही हालत वर्तमान में भाजपा सरकार की है क्योंकि उन्हे भविष्य की जानकारी हो चुकी है कि आगे क्या होने वाला है।

प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस
पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है (MP Elections)। मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही भाजपा और कांग्रेस युवाओं को आकर्षित करते के लिए रणनीति बनाने में जुट गई हैं (First time voters)। मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश भर में 19 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। युवा मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंप दी है (BJP Yuva Morcha)। पार्टी हाई कमान का आदेश मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा ने तीन अक्टूबर से प्रदेश भर में नव मतदाता सप्ताह अभियान शुरु कर दिया है। इसके तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अपने सभी 1070 मंडलों में युवा मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। दस अक्टूबर को सभी मंडलों में इसका समापन होगा। इसमें युवा मतदाताओं के अलावा जिले के भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कुछ युवा मतदाताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव है ऐसे में युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस दोनों ही संगठन युवा मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं। युवा मोर्चा ने 'खेलेगा मध्यप्रदेश' समेत कई अभियान शुरु किए हैं। इसी प्रकार युवा कांग्रेस ने 'बूथ जोड़ो, यूथ जोड़ो' अभियान शुरु किया है (Youth Congress)। प्रदेश में एक करोड़ 48 लाख युवा मतदाता हैं। दोनों दलों को लगता है कि इन्हे साधने से पूरे परिवार के वोट उनकी झोली में आ जाएंगे।

स्थायी रोजगार के लिए भटक रहे प्रदेश के 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी,नोटा पर वोट देने को मजबूर
प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने अलग-अलग वर्गों को खुश करने के तमाम प्रयास किए लेकिन उनमें कुछ वर्ग मुख्यमंत्री की नजर में नहीं आए और वो भटकने को मजबूर हैं। ऐसे ही प्रदेश भर में काम कर रहे करीब 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी (swacchagrahi workers) आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं। एक मामूली से पगार पर काम करने वाले इन स्वच्छाग्राही कर्मियों को जब पता चला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायतों में काम करने वाले रोजगार सहायकों की नौ हजार से सीधे 18 हजार रुपये पगार कर दी और संविदा कर्मियों (samvida workers) को नियमित के समान वेतन और सुविधा कर दी तो स्वच्छाग्राहियों ने भी खुद के लिए न्याय की गुहार लगाना शुरु कर दिया। स्वच्छाग्राही संगठन सी.एफ. टी ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के बंगले से लेकर कई मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के पास गुहार लगाई लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। थक हार कर स्वच्छाग्राही संगठन के पदाधिकारी पवन परमार बीजेपी प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हे सुनने वाला कोई नहीं मिला। अब इस संगठन का कहना है कि सरकार इनके लिए उचित फैसला नहीं लेती है तो प्रदेश भर में इनकी 26 हजार संख्या है तो वो और उनके परिवार के सभी सदस्य नोटा की बटन दबाएंगे (NOTA)। गौरतलब है कि इनकी नियुक्ति राज्य सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायत में शिक्षित ब्यक्तियों का चयन कर जनपद भेजा गया था। इन स्वच्छाग्राहियों ने कोरोनाकाल में वालेंटियर का कार्य किया,ई.ओ.एल कार्य, एस. एल.डब्ल्यु का योजना का कार्य विशेषकर मप्र में स्वच्छता मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश के समस्त पंचायतों को ओडीएफ कराने में स्वच्छाग्राहियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह स्वच्छाग्राही महज 150 रुपये प्रति दिन के हिसाब से काम करते हैं महीने में इन्हे महज तीन हजार रुपये मनदेय दिया जाता है क्योंकि इनसे काम भी सिर्फ 20 दिन लिया जाता है। लिहाजा इतने कम मानदेय में इनका गुजारा नहीं हो पा रहा है लिहाजा इनकी सरकार से गुजारिश है कि इनका मानदेय बढ़ाया जाए और नियमित कर्मचारियों की भांति इनसे काम लिया जाए जिससे ये अपने परिवार का ठीक तरीके से भरण पोषण कर सकें। सरकार इनकी बात नहीं मानती है तो ये नोटा की बटन दबाने के लिए मजबूर होंगे।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

रुठे नेताओं को मनाने में जुटी भाजपा,100 पदाधिकारियों की भेजी टीम
भारतीय जनता पार्टी ने अब तक 79 नामों की घोषणा की (BJP Candidates list) है जिसमें तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित कुल सात सांसद हैं। लेकिन सूची जारी जाने के बाद अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में विवाद की स्थिति देखने को मिलने लगी है। बताया जा रहा है कि जिन केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को टिकट दिया गया है उन सीटों के विधायक और दावेदार नेता पार्टी से खासे नाराज चल रहे हैं। कुछ ऐसे भी नेता हैं जिन्होंने सूची जारी होने के बाद टिकट की उम्मीद खो दी है। पार्टी ने ऐसे रूठे नेताओं को मनाने के लिए 100 वरिष्ठ पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ बैठक कर क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में माहौल टटोला जा रहा है। बैठक में चुनाव की कार्य योजना भी तय की जा रही है साथ ही चुनाव की तैयारी में हुई कमियों को चिन्हित कर इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है (MP BJP)। यह रिपोर्ट अब चुनाव प्रबंधन समिति को सौंप जाएगी। गौरतलब है कि अब तक 79 सीटों की घोषणा हुई है जिसमें तीन विधायकों के टिकट काटे गए हैं। जिन तीन विधायकों के टिकट काटे हैं उनमें मैहर से आने वाले नारायण त्रिपाठी प्रमुख हैं उनकी जगह श्रीकांत चतुर्वेदी (Shrikant Chaturvedi) को प्रत्याशी घोषित किया गया है। वहीं सीधी से विधायक केदारनाथ शुक्ला (Kedarnath Shukla) का टिकट काट कर सांसद रीती पाठक (Riti Pathak) को उतारा गया है। नरसिंहपुर से जालम सिंह पटेल (Jalam Singh Patel) का टिकट काटा गया है उनकी जगह उनके भाई प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) को टिकट दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ हुई सीटों पर भाजपा ने उत्तर प्रदेश और गुजरात से आए मंत्री- विधायकों को जिम्मेदारी सौंप कर जीत की रणनीति तैयार करने का जिम्मा सौंप दिया है। गुजरात के कुछ मंत्रियों और विधायकों को भी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया है। ये सभी नेता हारी हुई सीटों पर नाराज नेताओं के साथ बैठक कर समन्वय बनाने का काम करेंगे,और उन नेताओं की पार्टी के लिए जिम्मेदारी भी तय करेंगे।

कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद
कांग्रेस (MP Congress) विंध्य में काफी कमजोर है और उसकी विंध्य में अगर कोई उम्मीद हैं तो पूर्व मंत्री अजय सिंह (राहुल) भैया (Ajay Singh Rahul)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार से अजय सिंह की उपेक्षा हुई है उससे वो खुद परिचित हैं यही कारण है कि राहुल सिंह इस वक्त पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय खुद की विधानसभा में मेहनत करना ज्यादा जरुरी समझते हैं। मामला अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच का है। दरअसल कमलनाथ ने अजय सिंह को बुलाकर कहा कि आपको सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (Siddharth Kushwaha) की मदद करनी है जिसके बाद अजय सिंह ने कमलनाथ से सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद करने से साफ इंकार कर दिया। अजय सिंह ने कहा कि जब रैगांव में विधानसभा का उपचुनाव चल रहा था तब उन्होने सिद्धार्थ कुशवाहा से मदद करने के लिए कहा था जबकि उसके रैगांव में करीब दस हजार वोट हैं लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा ने कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा की किसी भी सूरत में मदद नहीं की। अजय सिंह (राहुल) भैया ने कमलनाथ से यहां तक कहा कि आप चाहो तो मेरा टिकट काट दो अथवा प्रदेश में किसी के भी पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए कहो मैं करुंगा लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद नहीं करुंगा। अजय सिंह के इस प्रकार बात करने से पीसीसी चीफ कमलनाथ भी टेंशन में आ गए हैं। सही मायने में कहा जाए तो कांग्रेस के पास विंध्य में कोई मजबूत नेता नहीं है। साल 2013 के बाद विंध्य में कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती चली गई है। अजय सिंह खुद चुनाव नहीं जीत पाए माना यह भी जा रहा है कि विंध्य में अजय सिंह ने सही तरीके से मेहनत नहीं की तो फिर कांग्रेस पार्टी विंध्य (Vindhya)में ठीक तरीके से परफार्मेंश नहीं कर पाएगी।