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खुद के बनाए जाल में उलझी कांग्रेस,अपनी ही सीट पर उलझे कांग्रेस के महारथी
भोपाल

खुद के बनाए जाल में उलझी कांग्रेस,अपनी ही सीट पर उलझे कांग्रेस के महारथी

लोकसभा चुनाव में एमपी से करीब दस सीटें जीतने का कांग्रेस (mp congress) के नेता दावा कर रहे हैं जबकि हकीकत उसके कुछ उलट ही देखने को मिल रही है। दरअसल कांग्रेस पार्टी में जिन नेताओं के ऊपर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन को सक्रिय करने की सियासी जिम्मेदारी थी अब वो सभी नेता अपनी ही सीट पर उलझ कर रह गए हैं। कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा सतना से तो आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम को बैतूल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार गया है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह राजगढ़, कमलनाथ छिंदवाड़ा और कांतिलाल भूरिया रतलाम में उलझ कर रह गए हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने रणनीति के तहत कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है। गौरललब है कि 2018 से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथों में पार्टी की पूरी बागडोर थी वही सत्ता और संगठन के केंद्र बिंदु थे उन्होंने अपने हिसाब से जमत भी की थी लेकिन जब चार माह पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पराजय मिली तो पार्टी ने उन्हें हटाकर जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद प्रदेश में आदिवासी और पिछड़ा वर्ग को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की जिम्मेदारी जिन संगठनों की थी, उनके मुखिया ही चुनाव लड़ रहे हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार न तो सिद्धार्थ कुशवाहा सतना छोड़ रहे हैं और न ही रामू टेकाम बैतूल से बाहर निकल पा रहे हैं। इससे संगठन की गतिविधियां भी एक प्रकार से तप हो गई हैं और टीम भी एक दिशा में काम नहीं कर पा रही है। यही स्थिति युवा कांग्रेस के साथ भी हो रही थी। इसके प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के पिता कांतिलाल भूरिया रतलाम लोकसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। वह स्वयं झाबुआ से विधायक भी हैं जो रतलाम लोकसभा क्षेत्र में ही आता है इसलिए वो पूरा समय वहीं दे रहे थे। इससे संगठन की गतिविधियां प्रभावित हो रही थी जिसे देखते हुए उन्होंने पद छोड़ने की पेशकश की, जिसे स्वीकार करते हुए अब मितेंद्र सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। फिलहाल भाजपा के आगे कांग्रेस के चुनावी जमावट की बात करें तो कांग्रेस बेहद कमजोर नजर आ रही है। भाजपा के नेता एक साथ एक दिन में आठ से दस लोकसभा सीट कवर कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस एकात सीट से आगे नहीं निकल पा रही है। इसके अलावा कांग्रेस इतने बड़े चुनाव में कांर्यकर्ताओं की कमी से भी जूझ रही है।

13/4/2024144
...और कितना टूटेगी कांग्रेस,क्या कर रहे हैं पीसीसी चीफ पटवारी,फिर सैकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी में हुए शामिल
भोपाल

...और कितना टूटेगी कांग्रेस,क्या कर रहे हैं पीसीसी चीफ पटवारी,फिर सैकड़ों कार्यकर्ता बीजेपी में हुए शामिल

कांग्रेस पार्टी में लगातार पलायन का दौर जारी है। शुक्रवार को पूर्व विधायक पारुल साहू (parul sahu) सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) की उपस्थिति में सैकड़ों कांग्रेसियों ने अपने हाथ में फूल थाम लिया। ज्वाइन करने वाले नेताओं में सागर जिले की सुरखी से पूर्व विधायक पारुल साहू,अमित सक्सेना जिला पंचायत उपाध्यक्ष छिंदवाड़ा,शेर सिंह यादव प्रदेश महामंत्री कांग्रेस,डॉक्टर प्रतिमा राजगोपाल,पूर्व पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, प्रशासन अकादमी,शाहिद खान, पूर्व अध्यक्ष, शासकीय महाविद्यालय, छिंदवाड़ा सहित छिंदवाड़ा और विदिशा,रायसेन बेगमगंज के सैकडों कांग्रेसियों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। गौरतलब है कि जिस दिन से जीतू पटवारी को मप्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में लगातार पलायन का दौर जारी है जो अब तक नहीं थमा है। सदस्यता समारोह के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिस दिन कांग्रेस ने भगवान राम के स्थापना का निमंत्रण ठुकराया उसी दिन से कांग्रेस के पतन का दौर शुरु हो गया है और अब सभी पीएम मोदी के नेत्रृत्व में देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी लिए सब बीजेपी में अपना भविष्य देख रहे हैं।

12/4/2024311
डेढ़ घंटे की प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता नहीं बता पाए कि आखिर वो कहना क्या चाहते हैं?
भोपाल

डेढ़ घंटे की प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता नहीं बता पाए कि आखिर वो कहना क्या चाहते हैं?

कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर एमपी कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता (congress press conference) का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) ,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार,विवेक तन्खा अरुण यादव,पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक शामिल हुए। प्रेसवार्ता के दौरान सभी नेताओं ने एक-एक कर अपनी तरफ से मीडिया को संबोधित किया। करीब डेढ़ घंटे तक चली प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस का एक भी नेता यह नहीं बता पाया कि वो कहना क्या चाहता है। विवेक तन्खा के हाथ में माइक गया तो वो न्यायालय पर सवाल खड़ा करते नजर आए,अरुण यादव के पास माइक आया तो उन्होने किसानों के विषय में बात की। जीतू पटवारी ने भी कई मिनट तक अपनी बात रखी लेकिन उन्हे खुल नहीं मालूम होगा कि उन्होने किस बारे में बात की है। इन सब नेताओं की बात खत्म हुई अथवा बता नहीं पाए तो जेपी धनोपिया को अंत में माइक पकड़ा दिया गया। कुछ देर जेपी धनोपिया ने बोला तो इतना समझ में आया कि कांग्रेस के नेत्रृत्व में सरकार बनी तो मनरेगा में 400 रुपये के हिसाब से मजदूरी मिलेगी। प्रेसवार्ता के दौरान मुकेश नायक ने अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सबको लिख कर ले दिया गया है जिसको जो पूछना हो पूछ सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कांग्रेस कभी भेदभाव नहीं करती सभी को साथ लेकर चलती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने केन्द्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि क्या कारण है कि केन्द्र सरकार जातिगत जनगणना क्यों नहीं करवाती है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अर्जुन सिंह की सरकार में भी पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की कोशिश हुई थी लेकिन न्यायालय ने यह कहा था कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरक्षण के लिए भारतीय संबिधान में संशोधन किया जाएगा।

10/4/2024165
जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज होगा सबसे नाकाम अध्यक्ष का वर्ल्ड रिकार्ड,6 अप्रैल को लगेगा एक लाख झटका
भोपाल

जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज होगा सबसे नाकाम अध्यक्ष का वर्ल्ड रिकार्ड,6 अप्रैल को लगेगा एक लाख झटका

जीतू पटवारी (jitu patwari) की विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में करारी शिकस्त के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हे यह सोच कर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था कि युवा चेहरा है कुछ नया करेगा। लेकिन इतना नया करेगा कांग्रेस के हाई कमान को इस बात का अंदाजा नहीं था। दरअसल जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद पार्टी में ऐसे पलायन का दौर चला कि अब तक 18 हजार से ज्याना नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। और जीतू पटवारी हैं कि अब भी अपने ही कार्यकर्ताओं पर सारा दोष मढ़ रहे हैं। और अब तो जीतू पटवारी अपने अध्यक्ष के नाकामी का वर्ल्ड रिकार्ड भी कायम करने वाले हैं। छह अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। और इस दिन को यादगार बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बड़ी मुहिम चला दी है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने ऐलान किया है कि वो भाजपा के स्थापना दिवस पर प्रदेश भर में करीब एक लाख कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ज्वाइनिंग भाजपा में कराने जा रहे हैं। पूर्व गृह मंत्री की इस घोषणा के बाद से पूरी कांग्रेस में हलचल सी पैदा हो गई है। मजे की बात यह है कि पार्टी में बचे-खुचे कार्यकर्ता एक दूसरे को सक की निगाहों से देख रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता एक दूसरे से यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या तुम भी बीजेपी में शामिल हो रहे हो। Mukhbirmp.com की टीम ने कुछ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क किया तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होने कहा कि कांग्रेस में उन्हे किसी प्रकार का सम्मान नहीं मिल रहा है। पहले कमलनाथ अध्यक्ष थे तो उनका कद इतना बड़ा था कि उनसे मिलना बहुत मुस्किल था और कमलनाथ के बाद जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बनाया गया तो उनसे मिलना कमलनाथ से भी ज्यादा कठिन हो गया है। उनके निवास पर घंटों इंतजार करना पड़ता है किसी तरह जीतू पटवारी बंगले से बाहर निकलते हैं तो देखते हैं कि भीड़ में उनका करीबी कौन है और फिर वो उस कार्यकर्ता के कंधे पर अपना हाथ रख कर कुछ देर तक इधर- उधर घूमते हैं फिर सभी से यह कहते हैं कि जमकर चुनाव की तैयारियां कीजिए हम कुछ सीटों पर अच्छी स्थिति में हैं और जीत भी दर्ज करेंगे। पीसीसी चीफ की इस प्रकार की बांते सुन कर कार्यकर्ता और नेता उदास हो जाते हैं यही कारण है कि कार्यकर्ता अब कांग्रेस में अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं। जिसके चलते अब वो अपना भविष्य भाजपा में देख रहे हैं। इधर बीजेपी ने इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को शामिल कराने के लिए अपने बूथ स्तर की इकाइयों को भी लगा दिया है और सभी से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे बीजेपी में शामिल कराया जाए। तभी प्रदेश भर में एक लाख कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो पाएंगे।

4/4/2024207
छिंदवाड़ा-राजगढ़ का दुर्ग जीतने में जुटी बीजेपी,रीवा-सतना में BSP कर रही सेंधमारी
भोपाल

छिंदवाड़ा-राजगढ़ का दुर्ग जीतने में जुटी बीजेपी,रीवा-सतना में BSP कर रही सेंधमारी

मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपना सारा फोकस छिंदवाड़ा (chhindwara) और राजगढ़ (rajgarh)में कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव (lok sabha ekections) में प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का संकल्प लिया है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता पहले छिंदवाड़ा फिर राजगढ़ की बात करता नजर आ रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि छिंदवाड़ा को जीत लिया तो प्रदेश की अन्य 28 सीटें मोदी और उनकी गारंटी के बल पर ही जीत जाएंगे। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी छिंदवाड़ा और राजगढ़ को जीतने के लिए ब्यूह रचना करने में जुटी है उससे यह स्पष्ट है कि भाजपा नेताओं ने खुद को दो संसदीय क्षेत्रों में ही सीमित कर लिया है। भाजपा ने जिस प्रकार रणनीति अपनाई है उससे एक कहावत याद आती है। 'आधी छोड़ पूरी को धावै-पूरी मिलै न आधी पावै' मतलब साफ है कि भाजपा ने छिंदवाड़ा और राजगढ़ जीतने की रणनीति तो बना ली लेकिन सतना,रीवा और सीधी बीजेपी के हाथ से फिसलती नजर आ रही है। भाजपा ने रीवा और सतना में अपने थके हुए प्रत्याशियों को वहां की स्थानीय जनता के ऊपर थोपने का काम किया है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह को पांचवीं बार मौका दिया है तो वहीं रीवा से दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है जो निस्क्रिय नेता माने जाते हैं। सतना में गणेश सिंह के लिए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा चुनौती दे ही रहे हैं लेकिन बीएसपी ने नारायण त्रिपाठी को चुनाव में उतार कर मोदी की गारंटी को संशय में डाल दिया है। ठीक उसी प्रकार रीवा में भाजपा ने जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों में ब्राम्हण उम्मीदवार होते ही बीएसपी ने कुर्मी को अपना प्रत्याशी बना दिया है जिससे बीएसपी की संभावनाएं मजबूत हो गई है। सीधी की बात करें तो कमलेश्वर पटेल भीजेपी उम्मीदवार पर भारी पड़ते दिख रहे हैं पैसों की भी उनके पास कमी नहीं है जिसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मंच पर भी स्वीकार कर चुके हैं। मतलब साफ है कि भाजपा छिंदवाड़ा और राजगढ़ का दुर्ग जीतने में लगी है और विंध्य में बीएसपी सेंधमारी कर रही है।

30/3/2024180
एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी
भोपाल

एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी

कार्यकर्ताओं का एक से दूसरी पार्टी में आना जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही लेकिन एक के बाद,झटके पर झटके एमपी कांग्रेस (mp congress) को लगते जा रहे हैं जिस दिन से जीतू पटवारी (jitu patwari) को पीसीसी चीफ बनाया गया है ठीक उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर शुरु हो गया है। एक दो नहीं,एक दो हजार भी नहीं अब तक करीब 18 हजार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर कमल का फूथ हाथ में थाम चुके हैं। पिछले तीन महीने में ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कांग्रेस के सौ-दो सौ कार्यकर्ता पार्टी न छोड़ते हों लेकिन अपनी मस्ती में सराबोर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। जो लोग कांग्रेस के लिए सालों से काम करते रहे हैं उनके पार्टी छोड़कर जाने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कारण भी नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं उनसे कोई मिलने जाता है तो घंटों तक इंतजार करना पड़ता है किसी तरह से वो सूजी हुई आंखों के साथ बाहर निकलते हैं तो सफाई में कहते हैं कि वर्चुअली मीटिंग चल रही थी। जबकि नेताओं कार्यकर्ताओं को यह मालूम रहता है कि कोई मीटिंग नहीं चल रही थी बल्कि उनके अध्यक्ष सोने में ब्यस्त थे। जीतू पटवारी जब तक अध्यक्ष नहीं थे तब तक अक्शर प्रदेश कार्यालय भी आया करते थे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद वो कार्यालय का रास्ता ही भूल गए। शुक्रवार को Mukhbirmp.com की टीम पीसीसी कार्यालय का मुआयना करने पहुंची तो गिनती के एक दो लोग मिले। जो मिले तो कुछ ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे लेकिन दवी जुवां से इतना बोल गए कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी में कोई अध्यक्ष ही नहीं है और पूरी पार्टी के कार्यकर्ता खुद को अनाथ सा महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव सिर पर है नामांकन की प्रक्रियाएं चल रही हैं लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हे कोई काम ही नहीं बताया जा रहा है जिससे वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब पार्टी कोई काम ही नहीं दे रही है तो कार्यालय आने का भी कोई मतलब नहीं है। जो कार्यकर्ता और नेता कार्यालय आते भी हैं तो उनका समय वर्मान और पूर्व अध्यक्षों की तुलना में ही बीतता है। कुछ कार्यकर्ता दवी जुवां यह भी कहते हैं कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कार्यालय में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वो भी बीजेपी कार्यालय में नौकरी ढूढने के लिए निकल जाएंगे।

30/3/2024171
रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत
मध्य प्रदेश

रीवा और सतना में 'पटेलवाद' मोदी की गारंटी में बनेगा रोड़ा,बीएसपी ने बढ़ाई मुसीबत

एमपी में विध्य क्षेत्र हमेशा राजनीति के जानकारों के लिए अबूझ पहेली रहा है। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र की तासीर बदली है लेकिन इतनी भी नहीं बदली है जितनी भाजपा ने उम्मीद की है। रीवा की बात करें तो यह संसदीय क्षेत्र ब्राम्हण बाहुल माना जाता है। और बीजेपी ने उस ब्राम्हणत्व का पिछली दो पंचवर्षीय से काफी लाभ उठाया है। लेकिन इस बार की परिस्थितियां भिन्न हैं। हांलाकि बीजेपी अब भी मोदी की गारंटी का दंभ भर रही है और बीजेपी का यह भी मानना है कि मोदी की गारंटी फेल हुई तो 'राम बेड़ा पार करेंगे' लेकिन जिस प्रकार से रीवा में भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा (janardan mishra) और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा (neelam mishra) पर दांव लगाया है उसके बाद लड़ाई दिलचश्प हो गई है। इन दोनों पार्टियों से अलग बीएसपी ने रीवा में भाजपा और कांग्रेस का तोड़ निकालते हुए कुर्मी को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। रीवा में ब्राम्हणों के अलावा कुर्मी समाज की बड़ी आबादी है और बीएसपी ने उसी का फायदा उठाते हुए अभिषेक पटेल (abhishekh patel) को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इतिहास गवाह है कि जब भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने ब्राम्हण को अपना उम्मीदवार बनाया है तो रीवा में बीएसपी उम्मीदवारों ने चमत्कारिक प्रदर्शन कर जीत दर्ज की है। सतना का भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। बीजेपी ने चार बार के सांसद गणेश सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जो विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं और कट्टर कुर्मी होने के कारण अन्य वर्ग इनसे काफी नाराज है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) को चुनाव मैदान में उतारा है दोनों नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं। यहां भी बीएसपी ने बड़ा खेला करते हुए पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। मतलब साब है कि बहुजन और ब्राम्हण एक तरफ होंगे तो यहां नारायण त्रिपाठी यानि बीएसपी जीत दर्ज कर सकती है। ऐसी परिस्थितियों में मोदी की गारंटी रीवा और सतना में फैल होने की उम्मीद की जा रही है।

29/3/2024191
सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई
भोपाल

सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई

कमलनाथ (kamal nath) के नजदीकी नेता सैयद जफर (syed zafar) और दीपक सक्सेना (deepak saxena) के भाजपा ज्वाइन करने के बाद छिदवाड़ा में अब आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता सैयद जफर ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कमलनाथ के आजू-बाजू रहने वाले और तन्खा पर काम करने वाले उनके और दीपक सक्सेना के बारे में कमलनाथ से तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। ऐसे लोग जो एक पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वो कमलनाथ को लोकसभा चुनाव जीतने के तरीके बता रहे हैं। गौरतलब है कि सैयद जफर और दीपक सक्सेना पूर्व सीएम कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते थे लेकिन उन्होने अब बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। जिसके बाद कमलनाथ के आजू-बाजू में रहने वाले और तन्खा लेकर काम करने वाले लोग उनके बारे में भ्रामक जानकारी दे रहे हैं। और इस मामले की जानकारी जब सैयद जफर को हुई तो उन्होने एक सभा के दौरान जम कर खरी खोटी सुनाई। गौरतलब है कि कमलनाथ ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ जैसे लोगों को मोटी तन्खा पर रख रखा है। यही वो लोग हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव के दौरान भी कमलनाथ को भ्रामक और गलत जानकारियां लगातार दी थी। जो पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करते थे उनके बारे में भी लगातार गलत फीडबैक दिया गया। यहीं नहीं कमलनाथ को सरकार को लेकर निश्चिंच किया गया था कि अबकी बार कांग्रेस 180 के पार कर रही है और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बन रही है। बाद में क्या हुआ नतीजा सबके सामने है। अब इसी तरह के लोगों ने उनके बारे में फिर से कमलनाथ को गलत फीडबैक दिया जिसके कारण सैयद जफर और दीपक सक्सेना जैसे लोगों को भाजपा की सदस्यता लेनी पड़ी और अब इन सभी नेताओं ने संकल्प लिया है कि इस बार छिंदवाड़ा में भी वो कमल का फूल खिला कर रहेंगे। मतलब साफ है कि तन्खा पर काम करने वाले लोगों ने कमलनाथ को कभी भी सही फीडबैक नहीं दिया और उसका प्रतिफल अब कमलनाथ को भुगतना पड़ रहा है।

28/3/2024165
Mukhbir की बात पहुंची अजय सिंह के पास,मंच से कहा कमलेश्वर से ज्यादा पैसे प्रीती भाभी के पास हैं
भोपाल

Mukhbir की बात पहुंची अजय सिंह के पास,मंच से कहा कमलेश्वर से ज्यादा पैसे प्रीती भाभी के पास हैं

अब चुनाव सेवा नहीं बल्कि पैसों के बल पर लड़े जाते हैं कौन सा उम्मीदवार कितना पैसे खर्च कर सकता है उसी के हिसाब से राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी घोषित करती हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) (ajay singh) ने कहा कि पैसों की कांग्रेस के खाते भले सीज किए गए हैं लेकिन उम्मीदवारों के पास पैसों की कमी नहीं है। आपके सामने जो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है वो पैसे वाला है। अजय सिंह यहीं नहीं रुके उन्होने कहा कि कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) से ज्यादा पैसे तो प्रीती भाभी कमलेश्वर की पत्नी के पास हैं। इस बात में कोई सक नहीं कि अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलेश्वर पटेल भले एक ही पार्टी और एक ही क्षेत्र से आते हैं लेकिन दोनों की आपसी प्रतिद्वंदिता किसी से छिपी नहीं है। अब सवाल इस बात का उठता है कि मंच से पैसों की बात कबूली जा रही है। इसके बाद भी ईडी जैसी संस्थाएं क्या कर रही हैं। क्या कमलेश्वर पटेल कोई स्पेशल ब्यक्ति हैं अथवा उन्हे बीजेपी का संरक्षण प्राप्त है। Mukhbirmp.com ने पहले भी एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें ये बताया गया था कि कमलेश्वर पटेल ने किस प्रकार से मुआबजे के रुप में छह करोड़ रुपये वसूले हैं अलग-अलग गांव में कमलेश्वर पटेल ने अपने घर दिखाए हैं। इस मामले में बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश केशवानी ने कहा कि कांग्रेस गुटों और कबीलों में बंटी हुई पार्टी है जहां नेता अलग-अलग गुटों में बंटे हैं। अजय सिंह (राहुल) का मंच से इस बात को स्वीकरना जांच का विषय है।

27/3/2024404
मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भोपाल

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक

भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

27/3/2024151
कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस
भोपाल

कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस

देश भर की राजनीतिक पार्टिया लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) जीतने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। लेकिन एमपी कांग्रेस (mp congress) के अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) कांग्रेस को खाली करने में लगे हैं। जिस दिन से कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है उसी दिन से कांग्रेस में पलायन का दौर शुरु हुआ जो अब तक निरंतर जारी है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद से अब तक करीब 16 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता पार्टी छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। इन दिनों एक और बात भी निकल कर सामने आ रही है कि एमपी कांग्रेस को पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे हैं। वो पत्रकार अक्सर जीतू पटवारी के निवास पर पाए जाते हैं। इनके अलावा जो भी पत्रकार जीतू पटवारी से मिलने जाता है कुछ देर बैठ कर बात करना चाहता है उसको जीतू पटवारी बड़े ही आदर भाव से चलता करते हैं। जीतू पटवारी पहले पत्रकार के कंधे पर हाथ रखते हैं कुछ देर इधर-उधर घुमा कर कुछ बातें करते हुए कहते हैं कि तू तो मेरा भाई है और फिर बड़े प्यार से गेट के बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने पर लोगों को लगा था कि युवा चेहरे को मौका मिला है कुछ नया और अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन जीतू पटवारी की अकड़ ने कुछ नया करने की बजाय पार्टी को और गर्त में डालने का काम किया है। पार्टी के कितने कार्यकर्ता छोड़ कर भाजपा में जा चुके हैं उन्हे तो ये भी नहीं मालूम मीडिया कर्मियों से जीतू पटवारी पूछते नजर आते हैं कौन छोड़ कर चला गया।

26/3/2024223
चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता
भोपाल

चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव (vidhansabha elections) खत्म होते ही लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) का शंखनाद कर दिया था। एमपी बीजेपी की ही बात करें तो कांग्रेस अब भी अपने सभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है। उधर बीजेपी ने न सिर्फ उम्मीदवारों का ऐलान किया है बल्कि शक्ति केन्द्रों पर पथ सम्मेलन,होली के मौके पर 'मोदी की राम-राम' लेकर भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के सातों मोर्चे और जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं सभी घर-घर जाकर लगातार वोटरों से संवाद कर रहे हैं और इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि वो चुनाव में भाजपा को न सिर्फ टक्कर देंगे बल्कि वो जीत कर आएंगे। जबकि हकीकत यही है कि उन्हे इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि चुनाव में उनकी करारी हार होने जा रही है। उन्ही नेताओं में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,कांतीलाल भूरिया सहित कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्हें मालूम है कि चुनाव में उनकी क्या दशा होने वाली है लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों के अभाव में इन बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का आदेश दिया है तो वो भी अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए ना-ना करते-करते चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस ईवीएम मशीन का दिग्विजय सिंह अब तक विरोध करते रहे हैं और उसमें फर्जी मतदान पड़ने का मीडिया के सामने डेमो भी देते रहे हैं अब उसी ईवीएम मशीन से दिग्विजय सिंह के लिए भी जनता वोट करेगी। दिग्विजय सिंह के ईवीएम को लेकर समय-समय पर लगाए गए आरोपों से यह सिद्ध होता है कि वो चुनाव में पहले से ही हारने का मन बना कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। क्योंकि दिग्विजय सिंह को ईवीएम मशीन पर विश्वास नहीं है और उन्हे उसी ईवीएम की शरण में जाना पड़ेगा और चुनाव जीतना है तो उसी ईवीएम की आरती भी उतारनी पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ अन्य उम्मीदवार भी हैं जो यह दम भर रहे हैं कि वो चुनाव में खुद के दम पर जीत दर्ज कर लेंगे। बाद में कहते हैं ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कुछ भी हो सकता है। वहीं कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं और कहते हैं की पूरी पार्टी को भगवान राम का श्राप लगा है कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के प्रकोष्टव का आमंत्रण ठुकराया था उसके बाद से ही पार्टी की दुर्दशा होनी शुरु हो गई है।

26/3/2024126
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