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शासकीय कर्मचारियों को मोहन सरकार का तोहफा,होली के चलते एक मार्च को मिलेगा वेतन
एमपी के शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है (mp government employees)। प्रदेश की मोहन सरकार इस बार मार्च महीने की सैलिरी पहले ही कर्मचारियों के खाते में जनरेट कर देगी (mohan government)। गौरतलब है कि मार्च महीने में आठ तारीख को महाशिवरात्रि है और होली सहित अन्य पर्व भी हैं। जिसको देखते हुए लाड़ली बहना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी कर्मचारियों को भी सैलिरी का बड़ा तोहफा देने का काम करने जा रही है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ा निर्देश दिया गया है। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी आरडी चौधरी ने जिले के सभी आहरण संवितरण अधिकारियों से 27 फरवरी तक वेतन देयक जनरेट करने का अनुरोध किया है। कोषालय अधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी निर्धारित तारीख तक अनिवार्य रुप से वेतन देयक जनरेट कर दें। जिससे एक मार्च को शत प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जा सके। समय पर वेतन जनरेट न करने से मार्च की प्रथम तारीख को वेतन दिया जाना संभव नहीं हो पाएगा। जिन अधिकारी कर्मचारियों का वेतन किसी कारण वश रोका गया है उन्हे छोड़ कर शेष सभी के वेतन देयक जनरेट करने के निर्देश सख्ती से जारी किए गए हैं।

अब 65 वर्ष नहीं होगी शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु,वित्त विभाग ने किया क्लियर
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) की सेवानिवृत्ति की आयु अब 65 वर्ष नहीं होगी। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की सीमा बढ़ने वाली है। इस मामले में जहां युवाओं में सरकार के प्रति विरोध के स्वर निकलने लगे थे वहीं शासकीय कर्मचारी भी इस फैसले पर हैरान थे। कुछ कर्मचारी तो रिटायरमेंट आयु की सीमा बढ़ाए जाने से नाराज थे कुछ इसका समर्थन कर रहे थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने रिटायरमेंट एज लिमिट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए गुड न्यूज़ है लेकिन सरकार के लिए चिंता की बात है क्योंकि सरकार के पास रिटायर होने वाले कर्मचारियों को देने के लिए GPF और दूसरा फंड नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र-2023 में मप्र सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु में एकरूपता लाने का बिंदु शामिल था। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बीती 11 जनवरी को राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष रमेश शर्मा ने मप्र के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए नोटशीट लिखी। जिसमें कहा गया कि शासकीय सेवकों की सेवानिवत्ति की आयु सीमा 62 से बढ़ाकर 65 करने पर शासन को विचार करना चाहिए। उन्होंने पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ाने और खाली पदों को लेकर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की फाइल मंत्रालय में दौड़ पड़ी थी। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने वित्त विभाग से खजाने पर पड़ने वाले भार के लिए अभिमत मांगा था। इसी बीच कई कर्मचारी संगठन व युवा सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विरोध करने लगे। वहीं, अब वित्त विभाग ने सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का आईडिया ड्रॉप कर देने के लिए कहा है। विद्युत विभाग का कहना है कि अब इन कर्मचारियों को देने के लिए वेतन भी नहीं है।

शासकीय कर्मचारियों के लिए अंतरिम बजट में मोहन की सौगात,4% डीए और मंहगाई राहत देने का लिया संकल्प
लगभग दो महीने पुरानी डा. मोहन यादव की सरकार ने 1,45, 229 करोड़ रुपये का पहला अंतरिम बजट (interim budget) यानी लेखानुदान विधानसभा में प्रस्तुत किया। भाजपा के मिशन 370 को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस अंतरिम बजट में ' मोदी की गारंटी और विकसित मध्य प्रदेश' की झलक दिखाई दे रही है, जिसमें समाज के सभी वर्गो के विकास और कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र को अमलीजामा पहनाने का प्रयास अंतरिम बजट में किया गया है। मोदी की चार जाति गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के कल्याण के लिए भरसक प्रयत्न किए गए हैं। कर्मचारियों और पेंशनर के लिए चार प्रतिशत डीए और महंगाई राहत का प्रविधान किया गया है। एक अप्रैल से 31 जुलाई तक के लिए महिलाओं की लाड़ली बहना (ladli behna) और अन्य योजनाओं के लिए 9438 करोड़ का प्रविधान किया गया है। किसानों को ब्याजरहित ऋण देने और स्थाई विद्युत पंप पर अनुदान देने के लिए कृषक मित्र योजना को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए 9593 करोड़ रुपये किसान कल्याण विभाग को दिए गए हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्वादन पर प्रतिलीटर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सड़क, औद्योगिक कारिडोर निर्माण और एक्सप्रेस वे को गति देने के लिए पीडब्ल्यूडी को 4098 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि ठेकेदारों के लंबित भुगतान पूरा कर नई परियोजनाओं के काम को तेज किया जा सके। स्वस्थ मध्य प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए एयर एंबूलेंस सेवा आरंभ की जाएगी। युवा वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएम एक्सीलेंस कालेज का निर्माण सभी जिलों में किया जाएगा। केरल की तरह पर्यटन क्षेत्र से रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के लिए पांच पर्यटन केंद्रो तक हेलीकाप्टर चलाने की तैयारी मोहन सरकार ने अंतरिम बजट में की है। आदिवासी विकास के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए 23 जिलों में प्रधानमंत्री जनमन योजना को जमीन पर उतारने के लिए अनुसूचित जनजाति कल्याण के बजट में 7500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। गरीब परिवार की महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मिलने वाली प्रसूति सहायता योजना के लिए 2024-25 के अंतरिम बजट (लेखानुदान) में 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।श्रमिकों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अंतरिम बजट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी सरकार ने समान प्राथमिकता दी है। शहरी विकास के लिए 6143 और गांव के विकास के लिए 6314 करोड़ रुपये चार महीने में खर्च किए जाएंगे।

बेरोजगार जनसेवा मित्रों ने दिया धरना,न्याय के लिए सीएम हाउस गए तो पुलिस ने लाठियां बरसाई
शनिवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में हजारों की संख्या में जनसेवा मित्र (janseva mitra) न्याय की आस लेकर धरने पर बैठे। दरअसल जनसेवा मित्रों की तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) के द्वारा ज्वाइनिंग कराई गई थी। प्रदेश के हर जिलों में पदस्थ जनसेवा मित्रों से सरकार जनहित की योजनाओं को कराने का काम करती थी। लेकिन जनवरी के महीने में जनसेवा मित्रों का अनुबंध खत्म हो गया और वो बेरोजगार हो गए। बेरोजगारी से आर्थिक तंगी की मार झेल रहे जनसेवा मित्रों ने राजधानी के जंबूरी मैदान में दिन भर धरना दिया। और जब वहां उनकी खोई खोज खबर लेने नहीं पहुंचा तो हजारों की संख्या में मौजूद जनसेवा मित्रों ने सीएम हाउस की तरफ कूंच कर दिया।सीएम हाउस की तरफ जा रहे सभी कर्मचारियों को रास्ते में पुलिस ने पहले रोकने का प्रयास किया जब वो नहीं माने तो पुलिस ने उन जनसेवकों पर हल्का बल प्रयोग भी किया जिसके कारण उन्हे खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। गौरतलब है की जनसेवा मित्र के रुप में काम कर रहे इन कर्मचारियों से लाड़ली बहन योजना के साथ-साथ अन्य योजनाओं के लाभ दिलाना एवं उसकी जानकारी लोगों को प्रदान करना उनके डॉक्यूमेंट की केवाईसी करना जैसे काम दिया जाता था। राज्य सरकार के दमनकारी नीति के कारण फिलहाल जनसेवा मित्रों ने अपने कदम पीछे कर लिया है लेकिन वो जल्द भी एक बड़ा जन आंदोलन सरकार के खिलाफ करने की योजना बना रहे हैं।

मोहन के बजट में शासकीय कर्मचारियों के लिए नहीं स्थान,नहीं मिलेगा कर्मचारियों को डीए
मप्र में शासकीय सेवकों का चार फीसदी डीए लंबे समय से लंबित है। जबकि केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को कई महीने से 46 फीसदी डीए मिल रहा है। एमपी सरकार (mp government) सोमवार को अपना अर्ध बजट पेश करने है। लेकिन पता चल रहा है कि इस बजट में शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) के डीए के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के मुताबिक जो बजट तैयार किया गया है उसमें फिलहाल एमपी के साढ़े सात लाख कर्मचारियों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलने वाली है। ऐसा नहीं है कि सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए की जानकारी नहीं है। पिछली कैबिनेट में इस मामले पर चर्चा भी हुई थी लेकिन वहां पर मौजूद प्रमुख सचिव वीरा रामा का तर्क था कि अगर शासकीय सेवकों को चार फीसदी डीए की राशि दी जाएगी तो सरकार के खजाने पर अतिरिक्त भार आएगा। पहले से ही लाड़ली बहना योजना के कारण सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊपर से कर्मचारियों का डीए दिया जाता है तो उसकी राशि की ब्यवस्था करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर हो जाएगा। इसी लिए फिलहाल जो बजट पेश होने वाला है उसमें राज्य के शासकीय सेवकों को डीए के लिए किसी प्रकार का प्राविधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि कर्मचारियों को डीए देना भी जरुरी है नहीं तो उनमें नारागी बढ़ जाएगी। इन सभी बातों के बाद यह भी फैसला लिया गया है कि लोकसभा चुनाव के बाद शासकीय सेवकों के डीए पर विचार किया जाएगा।

आदिवासियों के हिस्से की 207 करोड़ राशि सरकार ने अन्य विभागों में की ट्रांफर,विक्रांत भूरिया ने उठाया मामला
कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया (vikrant bhuria) ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। डॉ. भूरिया ने कहा है कि भाजपा सरकार (mp government) आदिवासियों के हितों के साथ उनका हक किसी और को देकर खुले रूप से खिलवाड़ कर रही है जिसका ताजा उदाहरण भाजपा सरकार के निर्देश पर वित्त विभाग द्वारा इसी माह फरवरी में एक आदेश जारी किया गया है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि जो राशि आदिवासियों की शिक्षा स्वास्थ्य उनके क्षेत्र में विकास कार्यों एवं शिक्षा स्वास्थ्य पर खर्च होने वाली थी और ट्राइबल सबप्लान की राशि थी। वो 207 करोड़ अन्य विभागों में स्थानांतरित कर दी गई है। विक्रांत भूरिया यहीं नहीं रुके उन्होने ये भी कहा कि भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियों के साथ कुठाराघात कर खुले तौर पर उनके साथ अन्याय किया गया है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि भाजपा आदिवासियों को एक वोट बैंक तक ही सीमित रखती है। आदिवासियों के विकास के लिए कार्य योजना बनाना तो दूर उनके हिस्से की राशि की बंदरबांट कर भ्रष्टाचार का नंगा नाच खेला जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में आदिवासियों के वोट हासिल करने के लिए 11 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आदिवासियों को गुमराह करने आ रहे हैं, अपने चुनावी वादों में आदिवासी किसान गरीब महिलाओं बेरोजगारों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने का दावा किया था लेकिन इन्हीं वर्गों के वास्तविक और समुचित उत्थान के लिए बजट में कोई व्यवस्था सरकार नहीं कर पाई।

शासकीय कर्मचारियों के दबाव में मोहन सरकार,रिटायरमेंट सीमा 65 करने पर फंसी सरकार,शिक्षकों ने दी धमकी
शासकीय सेवकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने के मामले में अब प्रदेश की मोहन सरकार (mohan government) फंसती नजर आ रही है। दरअसल शासकीय सेवकों (mp government employees) की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष की जाती है तो चयनित शिक्षकों की नियुक्ति पर असर पड़ेगा। एक तरफ सरकारी नौकरी नहीं निकल रही है, युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में राज्य की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी कर रही है। इधर, इस फैसले से चयनित शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि चार सालों से हम नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में यदि सरकार ऐसा कुछ फैसला लेती है तो चयन के बावजूद हम बाहर हो जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवार इस कवायद से चिंतित हैं। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के अनुसार सरकार रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित शिक्षकों का कहना है कि चयनित होने के बावजूद हम नियुक्ति-पत्र का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पुराने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से उनके हाथ में आया यह अवसर भी खत्म हो जाएगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि सरकार ने कुछ साल पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 की थी। इस प्रकार से सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से शिक्षित युवाओं को मौका नहीं मिल रहा है, वहीं बेरोजगारों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। इससे चयनित शिक्षक जिन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है, वो बेहद चिंतित है। उनका कहना है कि यदि सरकार ऐसा करती है तो चयन के बावजूद हमारे हाथ से सरकारी नौकरी का मौका निकल जाएगा। हजारों चयनित शिक्षकों में से कई ओवरएज हो जाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार बार-बार आयु ही बढ़ाती रहेगी तो युवाओं का भविष्य अंधकार में आ जाएगा। सेवानिवृत्ति की आयु पहले की तरह 60 साल करना चाहिए। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी. 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था. अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है. आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा. दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि सरकार अब अपने फैसले पर ही विचार कर रही है क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव है और अगर प्रदेश का युवा सरकार के फैसले से नाराज हुआ तो लोकसभा चुनाव में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा तोहफा,लंबित मानदेय की मिली सौगात
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं (anganwadi workers) को मध्य प्रदेश सरकार (mp government) ने बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश सरकार ने 3 महीने के लंबित मानदेय भुगतान का आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए 207 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी गई है। यह राशि अनुसूचित जनजाति उप योजना से लिए जायेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भुगतान को विशेष प्रकरण मानते हुए अनुसूचित जाति उप योजना की राशि से मानदेय दिया जाएगा। इसे लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया है। गौरतलब है कि लंबे समय से आगनबाड़ी कार्यकर्ता मानदेय भुगतान की मांग कर रही थी। राज्य

युवाओं को रोजगार देने के बजाय एमपी सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 करने की तैयारी में, सरकार के पास नहीं पैसे
आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्य प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने का प्लान तैयार किया है। बताया जा रहा है कि मोहन यादव (mohan yadav) सरकार इस बार प्रदेश के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 3 साल बढ़ाकर 65 साल कर सकती है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने पर शासन विचार करे। (mp government employees) मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा लाए गए संकल्प पत्र 2023 में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में एकरूपता लाने का भी बिंदु शामिल था। राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने अपने पत्र में इस बिंदु का भी हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि मध्य प्रदेश के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने लिखा है कि सरकार को शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ानी चाहिए क्योंकि पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ा गया है और कई विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी। 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था। अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है। आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा। दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि रिटायरमेंट आयु बढ़ाने पर कर्मचारी दो खेमे में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए 60 वर्ष की आयु के बाद काम करना और रोज आफिस जाना मुस्किल होता है।

अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारियों को अभी नहीं मिलेगा 4% डीए का लाभ,केन्द्र फिर देगा मंहगाई भत्ता
मप्र के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राज्य सरकार फिलहाल बढ़ा हुआ चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के मूड में नहीं है (mp government employees)। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस बारे में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से अब तक दो बाह मंहगाई भत्ते की फाइल चली,लेकिन मुख्य सचिव वीरा राणा के दफ्तर से लौटा दी गई। वहीं Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार जल्द ही मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की और पढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है। इस जानकारी के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गौरतलब है कि मतदान से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओक से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने ये कह कर रोक लगाई थी कि मतदान 17 दिसंबर को है तब तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। मतदान खत्म होने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने निर्वाचन आयोग के पास प्रस्ताव नहीं भेजा। मतलब साफ है कि वो चुनाव में फायदा लेने के लिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता जोड़ना चाहते थे। नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हे अब चार फीसदी मंहगाई भत्ता मिलेगा लेकिन दो बार फाइल चलने के बाद भी उस पर अंतिम मुहर नहीं लगी जिसके चलते अब राज्य के कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऊपर से केन्द्र सरकार एक बार फिर चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता देकर राज्य कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने का काम करने जा रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जुलाई 2023 में चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता और मंहगाई राहत दी थी। जिसके कारण केन्द्र के कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है और राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ 42 फीसदी मंहगाई भत्ते पर ही संतोष करना पड़ रहा है। जबकि राज्य में भी केन्द्र के समान ही मंहगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के कारण कर्मचारियों को दो से दस हजार रुपये तक का प्रतिमाह नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण प्रदेश के शासकीय कर्मचारी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जाकर वोटिंग कर सकते हैं।