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मध्य प्रदेश

'गुरिल्ला युद्ध' के आगे छिन्न-भिन्न होती सीएम मोहन यादव की सेना जवाब देने में हो रही नाकाम

Nov 30, 2025 3 min read
'गुरिल्ला युद्ध' के आगे छिन्न-भिन्न होती सीएम मोहन यादव की सेना जवाब देने में हो रही नाकाम
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मप्र की मोहन सरकार इस वक्त कई मोर्चों में लड़ाई लड़ रही है। लेकिन उसके सामने जो अदृश्य दुष्मन हैं वो गुरिल्ला युद्ध लड़ने में माहिर हैं। हम बताते चलें कि गुरिल्ला युद्ध क्या होता है। इस युद्ध में 'छोटे समूहों द्वारा दुश्मन के पीछे या किनारों पर छोटे, अचानक हमले किए जाते हैं, जिसके बाद वे दुश्मन के जवाबी हमले से पहले ही पीछे हट जाते हैं' वर्तमान की राजनीतिक रणनीति में इसी युद्ध शैली का उपयोग किया जा रहा है जिससे सियासी दुष्मन किसी को दिखाई नहीं दे रहा और राजनीतिक अस्थिरता का अभाव बना रहता है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार यह युद्ध शैली अपने घर के लोग ही अपना रहे हैं जिनका पार्टी और सरकार में आज भी बड़ा कद है। सीएम यादव ने भी गुरिल्ला युद्ध का जवाब देने के लिए अब तक कई प्रकार के प्रयास किए हैं लेकिन सामने वाली सेना इतनी मंझी हुई है कि सीएम यादव की सेना को जब तक एक हमले के बचाव का उपाय निकालती है तब तक दूसरा हमला हो जाता है। दरअसल सरकार में एक बड़ा धड़ा है जो पूरी तरह से उपेक्षित किया जा रहा है। सालों तक बड़े पदों में रहने वाले नेताओं की राजनीति हासिए पर चली गई है। उन्हें भविष्य का भी डर सता रहा है लिहाजा उनके पास पर्दे के पीछे रह कर लड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में पर्दे के सामने रह कर जो भी लड़ाई लड़ेगा उसका कैरियर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। और जिस अदृश्य टीम का नेतृत्व मझा हुआ नेता कर रहा हो तो उसकी रणनीति को फेल करने के लिए उसी की तरह सोचने वाला भी होना चाहिए। एमपी की राजनीति से दिल्ली भेजे गए नेता को जब वहां महत्व नहीं दिया गया और उसकी जगह किसी और को बैठा दिया गया तो यह तय था कि एक दिन विवाद बढ़ेगा। क्योंकि खाना किसी और ने पकाया और जब थाली लगी तो उसका स्वाद कोई और ले रहा है। अब अपनी थाली पर दूसरे को मुंह मारता देख किसको खुशी लगती है लिहाजा अब इन सब बातों से पार पाने के लिए गुरिल्ला युद्ध शैली का इस्तेमाल किया जा रहा है। मजे की बात यह है कि सीएम यादव जिसको भी अपना समझते हैं वो दूसरे का वफादार निकलता है। जनसंपर्क से लेकर हर क्षेत्र में जिन अधिकारियों को तैनात किया जाता है अंत में वो दूसरी टीम के करीबी निकलते हैं। अब तो वर्तमान सीएम के सामने यह भी एक बड़ी चुनौती है कि सरकार और ब्यूरोक्रेसी में कौन उनका है और कौन दूसरी टीम का।

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