जालसाजों के निशाने पर बुजुर्ग दंपति 37 लाख से अधिक की लूटी रकम दर्द से कराहती रही पत्नी

भोपाल में डिजिटल अरेस्ट करने वाले ठगों की क्रूरता का एक अमानवीय चेहरा देखने को मिला है। आरोपियों ने अरेरा कॉलोनी में रहने वाले एक वृद्ध को डिजिटल अरेस्ट रखकर उनके 36 लाख रुपये ठग लिए। हद तो उस वक्त हुई जब डिजिटल अरेस्ट रहने के दौरान उनकी पत्नी घर में काम करते हुए फिसलकर गिर पड़ीं उन्हें इलाज की तत्काल जरुरत थी। बुजुर्ग महिला दर्द से कराह रही थी और पति डिजिटल अरेस्ट होने के कारण पत्नी का इलाज कराने में असमर्थता जाहिर कर रहे थे। जबकि दुर्घटना में उनकी पत्नी के कूल्हे की हड्डी टूट गई। महिला मदद के लिए दर्द से कराहती रहीं। वृद्ध ने पत्नी की मदद के लिए ठगों से बुजुर्ग मिन्नतें करते रहे कुछ देर की मोहलत मांगते रहे लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। काफी देर बाद वृद्ध ने भोपाल में रहने वाली उनकी बेटी और दामाद को फोन कर मदद के लिए बुलाया। जिसके बाद वो कोलार से अरेरा कॉलोनी उनके घर पहुंचे और एंबुलेंस से महिला को अस्पताल पहुंचाया। साथ ही जब बेटी-दामाद जबरन वृद्ध के कमरे में घुसे तो डिजिटल अरेस्ट का राज खुला। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। ई-जीरोएफआईआर के जरिए हबीबगंज पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। गौरतलब है कि 30 अप्रैल की रात बुजुर्ग के मोबाइल पर एक वाट्सएप वीडियो काॅल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताया। वीडियो काॅल में वह वर्दी में था। ठगों ने बुजुर्ग को डराया कि उनके बैंक खाते फेडरल बैंक और इंडसइंड बैंक में संदिग्ध लेनदेन हुआ है और वे गंभीर आपराधिक जांच के दायरे में हैं। ठगों ने गिरफ्तारी का भय दिखाकर कक्कड़ को “डिजिटल अरेस्ट” में रहने का आदेश दिया और कहा कि वो कहीं जा नहीं सकते। इसके साथ ही खातों की पूरी रकम तुरंत “सुरक्षित जांच” के नाम पर ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया। लगातार धमकी, निगरानी और मानसिक दबाव के बीच बुजुर्ग ने अलग-अलग खातों में कुल 37.60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन एक मई को बैंक जाकर उनकी एफडी तोड़ने की बात भी कही गई। वहीं जब अगले दिन वो बैंक जाने लगे तो ठगों ने उनकी पत्नी को वीडियो काॅल पर नजरबंद कर ‘गारंटी’ बनाकर एक कमरे में कैद रहने को मजबूर किया, ताकि बुजुर्ग उनके हर आदेश का पालन करते रहें। ठगों ने दंपति की 30-30 लाख रुपये की दो एफडी तुड़वाने की कोशिश करवाई, लेकिन बैंक अधिकारियों ने अवधि पूरी न होने के कारण मना कर दिया, जिससे बड़ी राशि बच गई। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। लेकिन जिस प्रकार से यह मामला सामने आया है उससे यह भी स्पष्ट नजर आ रहा है कि जालसाजों की गिरफ्त में बुजुर्ग हैं। जिनकी पारिवारिक स्थिति पता करने के बाद जालसाज उन्हें अपनी गिरफ्त में लेते हैं।
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