दो डिप्टी सीएम तीन मंत्री शिवप्रकाश अध्यक्ष खंडेलवाल और सीएम की बैठक सामान्य तो नहीं

मप्र भाजपा इन दिनों एक साथ कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रही है। भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही अलग-अलग अंचलों में गुट परवान चढ़ने लगे थे। नव निर्वाचित अध्यक्ष खुद को जमाने के लिए कार्यकर्ताओं के साथ मेलजोल बढ़ा रहे थे जिसके कारण संगठन की जो लगाम थी वो ढीली पड़ गई और स्थिति ऐसी बन गई कि विंध्य,मालवा और ग्वालियर-चंबल के छत्रपों में वर्चश्व की लड़ाई सतह पर आ गई। कहतें हैं बबूल एक ऐसा पौधा होता है कि उसके नीचे कोई दूसरा पौधा नहीं पनप पाता है। ठीक वही काम बड़े नेता करते हैं कि दूसरा नेता न पनपने पाए क्योंकि नेता पनपेगा तो भविष्य में उसी के लिए मुसीबत बनेगा। लिहाजा भाजपा में अलग-अलग अंचलों मे खुद को सीएम पद का दावेदार माने जा रहे नेताओं ने अपनी ही पार्टी के नेताओं का पत्ता काटना शुरु कर दिया जिसकी शिकायत न सिर्फ भोपाल तक पहुंची बल्कि दिल्ली में भी एमपी के नेताओं की शिकायत पहुंच गई। बात और आगे न बढ़े उसके लिए क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवप्रकाश को भोपाल भेज दिया गया। सीएम हाउस में न सिर्फ शिवप्रकाश बैठे बल्कि उनके साथ प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल,जगदीश देवड़ा और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,प्रहलाद पटेल के साथ राकेश सिंह सीएम के दरवार में बैठे। तस्वीर में तो सभी नेता हंसी ठहाके लगाते नजर आ रहे हैं लेकिन हैं लेकिन हकीकत इससे कोशों दूर है। जिस प्रकार से ग्वालियर-चंबल में दो नेताओं के बीच वर्चश्व की लड़ाई चल रही है ठीक उसी प्रकार विंध्य में राजेन्द्र शुक्ल के खिलाफ सभी नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। मालवा और बुंदेलखंड भी गृह युद्ध से अछूते नहीं हैं लिहाजा हर क्षेत्र और हर अंचल में विवादों का सामना कर रही भाजपा अब सभी विवादों को खत्म करके आगे बढ़ने की योजना तैयार कर रही है। इसी लिए सीएम हाउस में बैठक आयोजित की गई क्योंकि बड़े नेताओं की लड़ाई में अब छोटे कार्यकर्ताओं के बीच अराजकता का माहौल बन रहा है। दिल्ली से मिले निर्देशों के बाद सीएम और अध्यक्ष दोनों हर्कत में आ गए हैं। कल को आपसी लड़ाई का लाभ कांग्रेस न उठा ले इसी लिए उस आपसी लड़ाई को भाजपा खत्म कर आगे की रणनीति पर काम करना चाहती है।
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सत्ता-संगठन में अनिश्चितता पैदा करने वाले बने छोटी टोली के सदस्य,अब समन्वयक की निभाएंगे जिम्मेदारी
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