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मध्य प्रदेश

सत्ता-संगठन में अनिश्चितता पैदा करने वाले बने छोटी टोली के सदस्य,अब समन्वयक की निभाएंगे जिम्मेदारी

Sep 20, 2025 3 min read
सत्ता-संगठन में अनिश्चितता पैदा करने वाले बने छोटी टोली के सदस्य,अब समन्वयक की निभाएंगे जिम्मेदारी
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मप्र के सत्ता और संगठन में पिछले कुछ समय से बड़े छत्रपों का राज चल रहा है। सरकार की बात करें तो सीनियर नेता अपना वर्चश्व बनाए रखने के लिए सत्ता और संगठन के बीच अनिश्चितता की स्थिति निर्मित कर रहे हैं। काफी समय तक सभी सीनियर नेताओं के बीच अंदर ही अंदर समन्वय स्थापित करने का प्रयास हुआ लेकिन सत्ता और संगठन के हाथ नाकामी लगी। जिसकी शिकायत दिल्ली तक पहुंची। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से लेकर सीएम मोहन यादव ने गुप्त रुप से दिल्ली के कई दौरे कर प्रदेश संगठन और सरकार की जानकारी दी जिसके बाद केन्द्रीय नेतृत्व भी अलर्ट मोड में आ गया। दरअसल टाइगरों की बीच जिस प्रकार से अपनी टेरेटरी का विवाद होता है ठीक उसी प्रकार बीजेपी के नेताओं में अपनी टेरेटरी को लेकर विवाद चल रहा है। महाकौशल और बुंदेलखंड में प्रहलाद पटेल और राव उदयप्रताप के बीच आपसी द्वंद चल रहा है। मालवा में कैलाश विजयवर्गीय और अन्य नेताओं के बीच विवाद चल रहा है। विंध्य में राजेन्द्र शुक्ल V/S ऑल नेताओं के बीच विवाद चल रहा है। महाकौशल में राकेश सिंह का भी अन्य नेताओं के बीच विवाद चल रहा है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए उन्ही नेताओं की छोटी टोली बनाई गई जो अब तक अस्थिरता की कहानी लिख रहे थे। सीएम हाउस से आई तस्वीरें दिखने में तो नॉर्मल लग रही हैं सभी नेता आपस में हंसी ठिठोली ही करते नजर आ रहे हैं लेकिन गंभीरता की बात करें तो उसकी कहानी कुछ अलग ही है। क्षेत्री संगठन मंत्री शिवप्रकाश,प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल छोटी टोली की बैठक में शामिल हुए। सभी नेताओं से आपसी विवाद को छोड़ कर संगठन और सरकार के काम को आगे ले जाने के लिए कहा गया। अब मजे की बात ये है कि जो अस्थिरता पैदा कर रहे उन्ही के हाथ में समन्वय का काम देकर मास्टर स्ट्रोक मारने का प्रयास किया गया है। यहां से अब यह देखना दिलचश्प होगा कि छोटी टोली किस प्रकार से बड़े कामों को सुलझाएगी। हांलाकि इस छोटी टोली में वर्तमान भाजपा के सबसे कद्दावर नेताओं को ही शामिल किया गया है। लेकिन सवाल अब भी वही है कि खुद को सीएम पद का दावेदार मानने वाले ये सभी नेता क्या छोटी टोली का सदस्य बन कर शांत रहेंगे अथवा कहानी और कोई मोड़ लेगी।

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