Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

'शिव' ने युद्ध स्तर पर तेज की 'राज' की तैयारी 'मोहन' की माया हुई निष्प्रभावी बदलेंगे समीकरण या फिर ताबूत पर ठुकेगी आखिरी कील

Aug 19, 2026 3 min read
'शिव' ने युद्ध स्तर पर तेज की 'राज' की तैयारी 'मोहन' की माया हुई निष्प्रभावी बदलेंगे समीकरण या फिर ताबूत पर ठुकेगी आखिरी कील
ADVERTISEMENT
Font Size:

दतिया उप चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद नेताओं को अपनी हैसियत का अंदाजा लग चुका है। जिन भाजपा नेताओं को इस बात का अहंकार था कि भाजपा में व्यक्ति नहीं कमल का निशान चुनाव लड़ता है और जीतता है दतिया की जनता ने भाजपा के सारे मुगालते दूर कर दिए हैं। इस हार के बाद ही मध्य प्रदेश में तेजी से समीकरण भी बदलने लगा है। जिस मामा को 'मामू' बनाने का प्रयास किया जा रहा था उसी मामा ने मोहन की माया को पल भर में तहस नहस करके रख दिया। जो सीएम हर हफ्ते दिल्ली में पीएम मोदी और अमित शाह से मिलने जाया करते थे आज उन्हीं सीएम को दिल्ली में मिलने के लिए समय नहीं दिया जा रहा है। हाल ही में एमपी के सीएम को संघ कार्यालय में भी तलब किया गया था। वर्तमान सीएम की दिल्ली में पेसी हो रही है तो दूसरी तरफ पूर्व सीएम शिवराज ने एमपी में अपनी फील्डिंग जमाना शुरु कर दिया। हांलांकि मोहन और शिवराज के बीच यह अदावत अचानक शुरु नहीं हुई। साल 2023 में जब शिवराज की जगह मोहन यादव को सीएम बनाया गया तभी से आंतरिक लावा उबल रहा था। उस लावे को शांत करने के बजाय सीएम मोहन यादव ने खुल कर शिव के परिवार पर हमला शुरु कर दिया। सबसे पहले एनालॉग पनीर पर रोक लगा कर पूर्व सीएम के बिजनेस पर करारा प्रहार किया जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ। शुरुआत वर्तमान सीएम ने की तो पूर्व सीएम ने भी कहा कि अब शुरुआत हो चुकी है लिहाजा मोर्चा खोलने में कोई हर्ज नहीं है। पूर्व सीएम ने तीन दिन पहले शाम के समय घर में एक छोटा कार्यक्रम किया जिसमें गुपचुप तरीके से सभी शिव गणों को आमंत्रित किया गया। जो नेता मामा के घर नहीं पहुंचे उन नेताओं के घर पर पूर्व सीएम खुद पहुंचे। सबसे पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर फिर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पर पूर्व सीएम गए सभी जगहों पर पर्याप्त समय दिया और पार्टी के आंतरिक मसलों से लेकर सीएम के स्वभाव में आए बदलाव पर भी चर्चा हुई। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार वरिष्ठ नेताओं ने लाविंग शुरु कर दी है। मुलाकातों का दौर सिर्फ भोपाल तक ही सीमित नहीं रहा यह मुलाकातें दिल्ली में भी खूब चलीं। संगठन के पदाधिकारियों से लेकर सरकार के मंत्रियों से भी मुलाकातें हुईं और एक नई सियासी स्क्रिप्ट लिखने की पूरी भूमिका तैयार की गई। दूसरी तरफ वर्तमान सीएम ने पार्टी में मित्र तो नहीं बनाया लेकिन दुष्मन खूब बनाया है। यही कारण है कि जो खेल साल 2023 से पर्दे के पीछे से चल रहा था वही खेल अब पर्दे के सामने से खेला जा रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि शह और मात की इस चौसर में जो दांव चले जा रहे हैं उन्हें अभी समझना मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है।

ADVERTISEMENT

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT