कांग्रेस के खुले 'धागे' मोतियों की तरह बिखरे नेता खुद की नाकामियां ढकने के लिए 'चोरी' जैसे शब्दों का कर रहे इस्तेमाल

मध्य प्रदेश कांग्रेस एक ऐसा दल बन चुका है जो सिर्फ सुर्खियों में ही रख कर खुद को तीसमार 'खां' समझ लेती है। राज्यसभा चुनाव में जिस प्रकार से कांग्रेस के एक-एक धागे खुले वो सबके सामने हैं। भाजपा ने पहले दो उम्मीदवार उतारने का ही फैसला लिया था। लेकिन जब कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को जिताने का दम भरा तो भाजपा कहां पीछे रहने वाली थी। इस पूरे प्रकरण में पर्दे के पीछे से कांग्रेस के नेता ही बैटिंग करते रहे और पर्दे के बाहर कुछ नेता अपनी लाज बचाने का आडंबर ही रचाते रहे। जो कुछ भी हुआ उसमें भाजपा एक दर्शक थी लेकिन कांग्रेस ने अंत में उसी को हीरो बना दिया। कांग्रेस नेताओं के षड़यंत्र का जब राज फाश होने लगा तो फिर भाजपा पर सीट चोरी का आरोप लगाने लगे। इतने शानदार तरीके से ड्रामा खेला गया मानो मीनाक्षी नटराजन का इन नेताओं से बड़ा कोई हितैषी ही नहीं है। असल में कांग्रेस नेताओं के स्वाभिमान पर राहुल गांधी ने करारा प्रहार कर मीनाक्षी नटराजन के नाम पर मुहर लगाई थी। और राहुल गांधी के उसी चयन को ग़लत ठहराने के लिए कांग्रेस के नेता एकजुट हुए और मीनाक्षी के प्रकरणों की जानकारी निर्वाचन आयोग तक पहुंचा दी गई। अगर कांग्रेस को भाजपा पर सक था तो फिर सेफ्टी के तौर पर कांग्रेस एक डमी कैंडीडेट का नामांकन भी भरवा सकती थी। लेकिन कांग्रेस नेताओं को तो यहां खेला कर राहुल गांधी के फैसले को ग़लत साबित करना था। और उसमें कांग्रेस नेता कामयाब हुए। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच जो गृह युद्ध चल रहा था उसकी एक-एक परतें खुल गई और कार्यकर्ता भी समझ गए कि खेला तो उनकी पार्टी के नेताओं ने ही कर दिया है। इसी लिए धीरे-धीरे कार्यकर्ताओं के ताज़िए भी ठंडे पड़ गए। महज एक सीट के लिए रचे गए षड़यंत्र ने कांग्रेस के पूरे एक साल की मेहनत पर पानी फेर दिया। साल 2025 को कांग्रेस ने संगठन सृजन पर्व के रुप में मनाया और संगठन को मजबूत करने का जमकर प्रयास किया लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने जो कुछ किया उससे पार्टि के बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता टूट गए और संगठन का सृजन सिर्फ सृजन ही बन कर रह गया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि अब जनता भी कहने लगी है कि ऐसी पार्टी पर दांव लगाने से क्या मतलब जहां पार्टी के नेता ही पार्टी को हराने का कुचक्र रचते हैं।
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What is your reaction to this story?विश्व की सबसे छोटी हवाई यात्रा कांग्रेस विधायकों ने की जिसमें वो बैठे तो लेकिन उड़ा नहीं इसी को कहते हैं हाथ आया मुंह को लगा नहीं
खंडेलवाल ने पटवारी के 'खसरों' पर बार-बार चलाई कलम और हर बार किया चारों खाने चित्त पर्दे के पीछे से लोकसभा और पर्दे के सामने से राज्यसभा चुनाव में दी सिकस्त
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