Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

एमपी बीजेपी के आठ राज्यसभा सांसदों में एक भी ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग से नहीं संगठन में 'वैश्य' समाज का बढ़ा वर्चस्व

मध्य प्रदेश को भाजपा का प्रयोगशाला कहा जाता है। प्रयोग करने का आलम यहां तक पहुंच गया कि भाजपा ने अपने कोर वोटर ब्राह्मण और क्षत्रियों को ही ठिकाने लगा...

• Oct 25, 2026• 3 min read
एमपी बीजेपी के आठ राज्यसभा सांसदों में एक भी ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग से नहीं संगठन में 'वैश्य' समाज का बढ़ा वर्चस्व

📷 Cover Photo: एमपी बीजेपी के आठ राज्यसभा सांसदों में एक भी ब्राह्मण और क्ष

ADVERTISEMENT
Font Size:
मध्य प्रदेश को भाजपा का प्रयोगशाला कहा जाता है। प्रयोग करने का आलम यहां तक पहुंच गया कि भाजपा ने अपने कोर वोटर ब्राह्मण और क्षत्रियों को ही ठिकाने लगा दिया है। इस बात की गवाही भाजपा के राज्यसभा सांसदों के आंकड़े दे रहे हैं। दरअसल एमपी से भाजपा के नौ राज्यसभा सांसद थे जिसमें एल मुरुगन का इस्तीफा होने के बाद अब आठ सीटें बची हैं नौवीं सीट के लिए चुनावी प्रक्रिया आखिरी पड़ाव पर है। अभी तक जितने भी नौ सांसद थे उनमें एक भी ब्राह्मण और क्षत्रिय सांसद नहीं था। तीन महीने पहले हुए तीन राज्यसभा सीटों में सवर्ण को महत्व देते हुए भाजपा ने रजनीश अग्रवाल को दिल्ली का रास्ता दिखाया है जो वैश्य समाज से आते हैं। भाजपा को लगा कि सवर्ण वर्ग में वैश्य समाज को महत्व देने से ब्राह्मण और क्षत्रिय खुश हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल भाजपा में जातियों का गणित बैठाने की जो सोशल इंजीनियरिंग की जा रही है उसमें ब्राह्मण और क्षत्रिय को पूरी तरह से नजर अंदाज कर अन्य सभी वर्गों को साधने का प्रयास किया जा रहा है। जातियों की सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा ऐसे उलझी है कि उसको सुलझा पाना भाजपा नेताओं के बस में ही नहीं दिख रहा। ओबीसी,एससी और एसटी को महत्व देने के चक्कर में भाजपा ने पूरी तरह से ब्राह्मण और क्षत्रिय को अनदेखा कर दिया है जिसका असर आम जनता को दिख रहा है लेकिन भाजपा आलाकमान को नहीं। अब एल.मुरुगन का इस्तीफा होने के बाद यह बात उठ रही है कि अगला सांसद एमपी से होगा अथवा अन्य किसी राज्य से होगा। और एमपी से होगा तो किस वर्ग का होगा। क्योंकि प्रत्येक वर्ग को भाजपा में प्रतिनिधित्व खूब मिल रहा है सिर्फ ब्राह्मण और क्षत्रिय को छोड़ कर। वैश्य समाज पर तो भाजपा ऐसे मेहरबान हुई कि प्रदेश अध्यक्ष वैश्य,एक राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल वैश्य,प्रदेश मीडिया प्रभारी वैश्य और कार्यालय मंत्री भी वैश्य। अब तक 'ब्राह्मण-बनियों' की पार्टी का ठप्पा लेकर चलने वाली भाजपा ने यह तो सिद्ध कर दिया कि यह पार्टी बनियों की है लेकिन ब्राह्मणों की नहीं क्योंकि यहां तो ब्राह्मणों के लिए स्थान ही नहीं वो सिर्फ टाट और दरी बिछाने का काम करेंगे। एल.मुरुगन से रिक्त हुई सीट पर कई ब्राह्मण और क्षत्रिय नेताओं की नजर है लेकिन हालिया स्थिति देख कर ऐसा लग रहा है कि इन दोनों वर्गों को भाजपा में फिर प्रतिनिधित्व नहीं मिलने वाला है। बाहरी शोर शराबा कितना भी हो लेकिन भाजपा अपने सोशल इंजीनियरिंग पर कायम रहेगी और ब्राह्मण-क्षत्रिय का बहिष्कार जारी रखेगी। भाजपा को इस बात का आभाष नहीं हो रहा कि उसका कोर वोटर छिटक रहा है। अन्य जितने भी वर्ग हैं वो कोई भी भाजपा के कोर वोटर की श्रेणी में नहीं आते क्योंकि वो हर चुनाव में सत्ता की लहर देख कर अपना मूड बनाते हैं और वोट देते हैं। लेकिन सवर्ण वर्ग से आने वाले ब्राह्मण और क्षत्रिय भाजपा के स्थाई वोटर हैं। यही कारण है कि भाजपा ने इस बात का मुगालता पाल लिया है कि सवर्ण तो उनसे दूर जाएगा नहीं चाहे उनके खिलाफ कोई भी ऐक्शन ले लो।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT