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भाजपा और कांग्रेस दोनों लोकतंत्र की 'चौकीदारी' कर रहे हैं फिर में खतरे में 'लोकतंत्र'

देश की जनता के मन में एक ही सवाल चल रहा है कि लोकतंत्र को खतरा किससे है‌। दरअसल देश की दोनों सबसे बड़ी पार्टियां चीख-चीख कर कह रही हैं कि लोकतंत्र को ...

• Nov 1, 2026• 4 min read
भाजपा और कांग्रेस दोनों लोकतंत्र की 'चौकीदारी' कर रहे हैं फिर में खतरे में 'लोकतंत्र'

📷 Cover Photo: भाजपा और कांग्रेस दोनों लोकतंत्र की 'चौकीदारी' कर रहे हैं फि

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देश की जनता के मन में एक ही सवाल चल रहा है कि लोकतंत्र को खतरा किससे है‌। दरअसल देश की दोनों सबसे बड़ी पार्टियां चीख-चीख कर कह रही हैं कि लोकतंत्र को खतरा है जवाब कोई नहीं दे रहा कि लोकतंत्र को खतरा किससे है। जब भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां लोकतंत्र की चौकीदारी कर रही हैं तब भी लोकतंत्र को खतरा है। भाजपा अभियान चला रही है लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ और कांग्रेस ने दिल्ली में महारैली निकाली और नारे लगाए 'वोट चोर गद्दी छोड़' राहुल गांधी हाथ में संविधान की किताब लेकर चलते हैं। पीएम मोदी संविधान की पुस्तक के सामने अपना माथा टेकते हैं उसके बाद भी लोकतंत्र को खतरा है। हकीकत यह है कि खतरे में सत्ता और कुर्सी है। देश में पिछले 12 साल से पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है। कांग्रेस ने इन 12 साल में तमाम तरह के प्रयास कर लिए कि मोदी सरकार को उखाड़ कर फेंक दिया जाए लेकिन मोदी हैं कि अंगद के पांव की तरह जम गए हैं। अब अंगद का पांव तो रावण जैसा ज्ञानी और वीर राक्षस भी नहीं हटा पाया था तो उसमें आम इंसान की क्या मजाल है। सारे हथकंडे आजमाने के बाद जब विपक्ष की दाल नहीं गली तो पीछे के दरवाजे से जेन-जी की इंट्री करवा दी गई। जमकर बवाल कटा देश के युवा जाग उठे उन्हें पहली बार समझ में आया कि सरकार तो उनके वोट से बन रही है। जेन-जी जब तक पीएम मोदी का कुछ नुकसान कर पाते उसके पहले भाजपा ने जेन-जी को अपनी ओर साधने की योजना बना ली। भाजपा शासित राज्यों में युवाओं को साधने के लिए तरह-तरह के उपाय आजमाएं जाने लगे। भाजपा के सीएम के संवाद शुरु हो गया। आखिर जेन-जी एक युवा वर्ग है जो जितनी जल्दी गुस्से में आता है उतनी ही जल्दी उसका गुस्सा शांत भी हो जाता है। हुआ भी वही भाजपा ने जब जेन-जी को धीरे-धीरे साधने का प्रयास किया तो विपक्ष को हवा का रुख बदलते हुए दिखाई पड़ने लगा। विपक्ष ने नया नारा दे दिया ज्ञानेश कुमार 'चोर' है। युवाओं के मन में संशय पैदा किया जाने लगा कि भाजपा ने चुनाव व्यवस्था को ही हैक कर लिया है जिसके कारण भाजपा की सरकार बन रही है। बात इतने में भी नहीं बनी तो दिल्ली में महारैली का आयोजन कर बल के आधार पर अपनी बात मनवाने का प्रयास किया गया और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर खूब जोर आजमाइश की गई। इस जोर आजमाइश में एमपी कांग्रेस के नेता भी अपनी आहुति देने पहुंच गए। मंच पर उन्हें इंट्री मिलने वाली नहीं थी लिहाजा रामलीला मैदान में पहले ही पहुंचे एमपी कांग्रेस के नेताओं ने जम कर फोटो खींची और अपनी उपस्थिति फोटो-सेल्फी के माध्यम से दर्ज कराई। सबकुछ हुआ लेकिन ये किसी नेता ने नहीं बताया कि लोकतंत्र को खतरा किससे है। एक देसी कहावत है 'कउआ' कान ले गया और भीड़ उसके पीछे दौड़ पड़ी। लोकतंत्र को लेकर ऐसी अफवाहें उड़ाई जा रही हैं जैसे वो सड़क पर पड़ी कोई लावारिस वस्तु हो जिसे कोई आएगा और चुरा ले जाएगा। हकीकत यही है कि लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ सियासी रोटी सेंकने का काम चल रहा है और जनता के मन में डर के बजाय भ्रम पैदा किया जा रहा है कि लोकतंत्र खतरे में है। और खतरे में है तो बताओ खतरा किससे है। जब देश की दोनों पार्टियां लोकतंत्र की चौकीदारी कर रही हैं फिर भी खतरा है तो यह लोकतंत्र की विडंबना नहीं तो और क्या है?

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