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मध्य प्रदेश

बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सीएम की 'तीसरी नजर' निशांत खरे की नियुक्ति से 'निगेटिविटी' खत्म करने का प्रयास

मध्य प्रदेश भाजपा कार्यालय करीब एक साल से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। पीढ़ी परिवर्तन के तौर पर भाजपा के संगठन ने जम कर प्रयोग किया

• Nov 8, 2026• 3 min read
बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सीएम की 'तीसरी नजर' निशांत खरे की नियुक्ति से 'निगेटिविटी' खत्म करने का प्रयास

📷 Cover Photo: बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सीएम की 'तीसरी नजर' निशांत खरे की

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मध्य प्रदेश भाजपा कार्यालय करीब एक साल से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। पीढ़ी परिवर्तन के तौर पर भाजपा के संगठन ने जम कर प्रयोग किया। पार्टी ने कुछ नए चेहरों को नया दायित्व दिया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सोच अच्छी थी लेकिन उस सोच को नियुक्त पदाधिकारी धरातल पर नहीं उतार पाए। अगर नए पदाधिकारियों ने अपना काम सही तरीके से संभाला होता तो आज कार्यालय में 'निगेटिविटी' भरा माहौल देखने को नहीं मिलता। प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय से लेकर कार्यकर्ताओं तक एक अच्छा माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उनके द्वारा नियुक्त पदाधिकारी पद और मिले दायित्व का सही तरीके से निर्वहन करें तब तो प्रदेश अध्यक्ष की सोच धरातल में उतर पाएगी लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष बेहद शांत और सरल व्यक्तित्व वाले नेता हैं। चुनावी रणनीतियां बनाने में उनका कोई सानी नहीं है जिसका प्रमाण वो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में दे चुके हैं जब भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर क्लीन स्वीप कर इतिहास दर्ज कर दिया था। लेकिन वो सारी रणनीति पर्दे के पीछे से बनाई गई। अब हेमंत खंडेलवाल प्रदेश अध्यक्ष हैं और फ्रंट-फुट पर उनकी खेलने की बारी है। दिल से साफ प्रदेश अध्यक्ष ऐसा करने की कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन उनकी कोशिश को उनकी टीम के लोग ही धरातल में उतरने से बाधक बन रहे हैं। जिन कार्यकर्ताओं को पार्टी की तरफ से जो दायित्व दिया जा रहा है वो उस दायित्व के निभाने के अलावा बांकी सबकुछ करते हैं। कार्यालय में दूर-दूर से आने वाले कार्यकर्ताओं को ऐसे अहसास दिलाया जाता है जैसे वो पेड वर्कर हों। जबकि भाजपा के कार्यकर्ताओं को देवतुल्य कार्यकर्ता कहा जाता है। अलग-अलग मोर्चों में काम करने वाले पदाधिकारी पूरी तरह से निष्कृय नजर आ रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता काम मांगने आते हैं तो उन्हें सही तरीके से बताने वाला भी कोई नहीं होता है। प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ता आते हैं तो लावारिसों की तरह इधर से उधर घूमते हैं और शाम होते ही थक हार कर घर लौट जाते हैं। इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए स्थाई रुप से निशांत खरे के रुप में कार्यालय प्रभारी की नियुक्ति हुई है। भाजपा में कार्यालय प्रभारी का बड़ा दायित्व होता है। यह एक बड़ी अथारिटी के रुप में माना जाता है। निशांत खरे सीएम मोहन यादव के करीबी माने जाते हैं। इसका मतलब ये भी है कि सीएम ने संगठन के महत्वपूर्ण पद पर अपने करीबी को बैठा कर कार्यालय को भी अप्रत्यक्ष तरीके से अपनी मुट्ठी में कर लिया है। इसी लिए सवाल इस बात का उठ रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने इस बड़ी नियुक्ति को हरी झंडी तो दे दी है लेकिन यह नियुक्त कहीं उल्टी न पड़ जाए यह एक बड़ा सवाल है।

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