मध्य प्रदेश
पहले SEIAA में कोठारी-उमा महेश्वरी का विवाद अब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में अनिरुद्ध मुखर्जी की जॉइनिंग ने खड़े किए सवाल
भोपाल। मध्य प्रदेश में पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां देने वाली सरकारी एजेंसियों में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है
• Nov 8, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: पहले SEIAA में कोठारी-उमा महेश्वरी का विवाद अब पॉल्यूशन कंट्
ADVERTISEMENT
Font Size:
भोपाल। मध्य प्रदेश में पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां देने वाली सरकारी एजेंसियों में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पहले स्टेट एनवायरमेंटल क्लीयरेंस अथॉरिटी (SEIAA) में तत्कालीन अधिकारी प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी और उमा महेश्वरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब वही विवाद मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPPCB) तक पहुंच गया है।
इस बार निशाने पर हैं प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी ACS अनिरुद्ध मुखर्जी। आरोप है कि जिस पद को सरकार ने साल 2019 में ही खत्म कर दिया था, उसी पद पर उन्होंने जॉइन कर लिया और 6 महीने के अंदर पर्यावरण से जुड़े कई बड़े फैसले भी ले लिए।
क्या ये सिर्फ प्रशासनिक चूक है, या जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया गया? यही सवाल अब भोपाल के गलियारों में गूंज रहा है।
पहले समझिए - पूरा मामला क्या है?
मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड प्रदेश में फैक्ट्री, खदान, बिल्डिंग और उद्योगों को पर्यावरण की मंजूरी देने वाली सबसे अहम संस्था है। बिना इसके क्लीयरेंस के कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सकता।
इसीलिए इस बोर्ड के अध्यक्ष का पद बेहद ताकतवर माना जाता है।
2019 में क्या हुआ था? - जब सरकार ने ही पद खत्म कर दिया
साल 2019 में राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया था।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए प्रमुख सचिव, पर्यावरण के अध्यक्ष का पद को विलोपित (समाप्त) कर दिया गया।
मतलब साफ था - अब प्रमुख सचिव, पर्यावरण अपने आप इस बोर्ड के अध्यक्ष नहीं बनेंगे। इसके लिए अलग से नियुक्ति होगी।
लेकिन आरोपों के मुताबिक, इसके बाद भी ऐसा नहीं हुआ।
17 जून 2026 का आदेश - और फिर भी जॉइनिंग?
सरकार ने 17 जून 2026 को एक आदेश जारी किया।
इस आदेश में अनिरुद्ध मुखर्जी को केवल -
- अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण
- एप्को (EPCO) का अतिरिक्त प्रभार
दिया गया था।
आरोप है कि इस आदेश में उन्हें MP पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का अध्यक्ष नहीं बनाया गया था।
इसके बावजूद, अनिरुद्ध मुखर्जी ने MPPCB के अध्यक्ष की जगह पर जॉइन कर लिया।
यही उनकी जॉइनिंग अब विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गई है।
6 महीने में क्या-क्या हुआ? - फैसलों की झड़ी
सूत्रों के मुताबिक, जॉइनिंग के बाद महज 6 महीने के भीतर अनिरुद्ध मुखर्जी ने पर्यावरण से जुड़े कई बड़े कामों को मंजूरी दे दी।
इनमें शामिल हैं -
1. एनवायरमेंटल क्लीयरेंस प्रमोशन
कई प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय मंजूरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
2. कई तबादले
बोर्ड के अंदर कई अधिकारियों के तबादले भी कर दिए गए।
अब सवाल उठ रहा है - जब जॉइनिंग ही सवालों के घेरे में है, तो उनके किए गए फैसले कितने वैध हैं?
SEIAA से MPPCB तक - पैटर्न एक जैसा?
ये पहली बार नहीं है जब पर्यावरण मंजूरी वाली एजेंसी विवादों में आई हो।
इससे पहले SEIAA में भी इसी तरह के आरोप लगे थे। तब तत्कालीन अधिकारी प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी और उमा महेश्वरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
अब MPPCB में भी वही पैटर्न दोहराए जाने की चर्चा है।
Reader Reactions
What is your reaction to this story?ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:
Reader Discussion & Comments (0)
Moderated CommentsLoading comments...
ADVERTISEMENT
Related Top News

विधायक के कक्ष में पुलिसकर्मी ने मनाई 'रंगरलियां' महिदपुर के विधायक दिनेश जैन ने पकड़ा रंगे हाथ सचिवालय ने शुरु की जांच
8/11/2026
ये दिवाली सफाईकर्मियों वाली बढ़ेगा वेतन स्थाई होगी नौकरी सरकार ने दिया एक महीने में प्रक्रिया पूरी करने का आश्वासन
8/11/2026
बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सीएम की 'तीसरी नजर' निशांत खरे की नियुक्ति से 'निगेटिविटी' खत्म करने का प्रयास
8/11/2026