मध्य प्रदेश
पटवारी ने कोशिश तो खूब की लेकिन कांग्रेस का 'खसरा' तैयार करने में अब तक नाकाम रहे
मध्य प्रदेश में दो दलीय प्रथा हमेशा रही है। पहले कांग्रेस के हाथ में सत्ता रही उसके बाद भाजपा के हाथ में सत्ता है
• Sep 3, 2026• 2 min read

📷 Cover Photo: पटवारी ने कोशिश तो खूब की लेकिन कांग्रेस का 'खसरा' तैयार करन
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मध्य प्रदेश में दो दलीय प्रथा हमेशा रही है। पहले कांग्रेस के हाथ में सत्ता रही उसके बाद भाजपा के हाथ में सत्ता है। विपक्ष से सत्ता में आने की कोशिश कर रही कांग्रेस ने अपने प्रत्येक तुरुप के इक्कों को मौका दिया लेकिन कांग्रेस के सारे तुरुप के इक्के खोंटे सिक्के निकले। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जब करारी हार का सामना करना पड़ा तो युवा चेहरे के रुप में जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। अध्यक्ष बनने के बाद पटवारी ने अपने तरीके से खसरा बनाने का प्रयास किया जो अब तक बन कर तैयार नहीं हुआ। पार्टी के नेता एकजुट होने के बजाय और बिखर गए। पार्टी में सीनियर और जूनियर के बीच अंतरद्वंद शुरु हो गया। अजय सिंह जैसे नेता अपना अस्तित्व बचाते नजर आए। विजयपुर और दतिया का उप चुनाव जीतने के बाद पटवारी ऐसे खुश हुए जैसे वो सत्ता की दहलीज पर खड़े हो गए हों। सरकार को जब भी घेरने का मौका मिला तो एक दो दिन जम कर प्रहार किया फिर ऐसे ठंडे पड़े जैसे दिया में तेल के बजाय पानी डाल दिया गया हो। नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उमंग सिंघार को जब मौका मिला तो वो विधानसभा में नुक्कड़ नाटक का आयोजन करके सरकार का विरोध करते नजर आए। वर्तमान कांग्रेस की कमान पटवारी और सिंघार के नेतृत्व में है। दोनों नेता मीडिया में बाइट देकर ही खुद की राजनीति चमकाने में लगे रहे। अब राहुल गांधी को इंदौर बुला कर पटवारी को लग रहा है कि कोई बड़ा तीर मार लेंगे लेकिन हकीकत उससे कोसों दूर है। क्योंकि राहुल गांधी का मध्य प्रदेश में कोई जनाधार नहीं है। भाजपा ने राहुल गांधी के आने से पहले ही उनके खिलाफ माहौल बनाने का काम शुरु कर दिया है। पटवारी सभी बातों को देख कर भी अनजान से बने हुए हैं। पटवारी के समझ में ही नहीं आ रहा कि वो सभी नेताओं को एक मंच पर कैसे लाएं। कुल मिलाकर कांग्रेस भी अब तक जनता के दिल में जगह बना पाने में पूरी तरह नाकाम रही। कांग्रेस ने ऐसा एक भी आंदोलन खड़ा नहीं किया जो जमीन पर दिखा हो।
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