#Mohan Yadav
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अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

दिल्ली दरवार में मुख्यमंत्री की हाजिरी,हर तीसरे दिन हो रहा दौरा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने दिल्ली दौरे पर लगातार जा रहे हैं। सीएम बनने के बाद हर तीसरे- चौथे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली में दौरा हो रहा है। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दिल्ली का दौरा किया करते थे। माना जा रहा है कि सियासत का ककहरा अब मोहन यादव दिल्ली के प्रवास पर ही पढ़ रहे हैं। सोमवार को मूख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने कई केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इन मुलाकातों को लेकर एमपी में लगातार अलग-अलग सियासी कयास लगाए जा रहे हैं। जिस प्रकार से मोहन यादव दिल्ली के दौरे कर रहे हैं उससे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री काम करनी की खुली छूट चाहते हैं साथ ही वो एमपी बीजेपी के संगठन में भी अपना दखल चाहते हैं जिससे उनके हिसाब से पूरी तरह से काम हो सके। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का पिछले साल फरवरी में कार्यकाल समाप्त हो गया था लेकिन चुनाव को देखते हुए केन्द्रीय नेत्रृत्व ने अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बदलाव का जोखिम नहीं उठाया। अब लोकसभा चुनाव है और मुख्यमंत्री मोहन यादव चाहते हैं कि साबकुछ उनके हिसाब से चले यही कारण है कि उनके दिल्ली के लगातार दौरे चल रहे हैं।

पार्बती-कालीसिंध-चंबल ईआर सीपी लिंक परियोजना को मंजूरी,मुख्यमंत्री मोहन यादव को मिली कामयाबी
मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक (parbati kalisindh chambal link) परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (gajendra singh shikawat), मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा (bhajan lal sharma) की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान शासन के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के उपरांत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा। प्रदेश के ड्राई बेल्ट वाले जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। परिणामस्वरूप इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे। यह परियोजना निश्चित रूप से पश्चिमी मध्यप्रदेश के लिए एक वरदान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह परियोजना 5 वर्ष से कम समय में फलीभूत होगी, जिसकी वर्तमान लागत लगभग 75000 करोड़ रुपए है। प्रदेश के लगभग 1.5 करोड़ आबादी इस परियोजना से लाभान्वित होगी। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। परियोजना से लगभग 5.60 लाख हैकटेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी जिसके लिए दोनों सरकारें बधाई की पात्र हैं। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों में कुल 5.60 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिये पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फीजिबिलिटी रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।

कमलनाथ की राह पर मोहन यादव,हर तीसरे दिन उज्जैन में करते हैं प्रवास
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) आज तक उज्जैन से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिलती है जब हर तीसरे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के प्रवास में रहते हैं। इस बात में कोई सक नहीं है कि उज्जैन एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी है लेकिन मुख्यमंत्री को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो अकेले उज्जैन के सीएम नहीं हैं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री वही हैं। सीएम बनने के बाद विधानसभा में भी जब मुख्यमंत्री मोहन यादव का पहला भाषण हुआ तो उन्होने अपने 15 मिनट के भाषण में करीब 10 बार उज्जैन का नाम लिया। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) का भी छिंदवाड़ा प्रेम देखने को मिलता था। हर तीसरे दिन सीएम रहते उनका छिंदवाड़ा दौरा होता था कोई विकास की बात हो तो छिंदवाड़ा से ही शुरु होती थी। कमलनाथ अपने 15 महीने के कार्यकाल में छिंदवाड़ा से बाहर नहीं निकल पाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी ठीक उन्ही के रास्ते पर चल पड़े हैं। करीब डेढ़ महीने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बने हो चुका है इस बीच करीब 20 दौरे वो उज्जैन के कर चुके हैं हर तीसरा दिन मोहन यादव का उज्जैन में ही बीतता है। और अब इस बात के चर्चे तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच में भी होने लगे हैं। पार्टी के किसी नेता को मुख्यमंत्री से मुलाकात करनी हो तो मुलाकात नहीं हो पाती। प्रदेश की जनता भी अब दवी जुवान ये कहने लगी है कि मोहन यादव उज्जैन के ही मुख्यमंत्री बन कर रहना चाहते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार संघ भी मोहन यादव के उज्जैन दौरे और उज्जैन प्रेम पर काफी नजर रख रहा है।

बीजेपी के पोस्टरों से गायब होंगे 'मामा' मोहन युग की ओर आगे बढ़ेगी बीजेपी
मप्र बीजेपी ने अब तय कर दिया है कि 'मामा' राज खत्म हो चुका है। इसकी बानगी के तौर पर पहले सीएम पद की कुर्सी छीनी गई उसके बाद उन्हे एमपी में कोई जिम्मेदारी देने के बजाय साउथ में सक्रिय होने का निर्देश जारी किया गया। पार्टी सूत्रों की मानें तो अब एमपी बीजेपी हर पोस्टर से पूर्व सीएम को हटाने की योजना पर काम कर रही है। दरअसल 18 साल तक एमपी में सीएम रहे मामा ने अन्य किसी नेता को एमपी बीजेपी में पनपने नहीं दिया यही कारण है कि आज भारतीय जनता पार्टी को चुनाव के दौरान मोदी के सहारे ही चलना पड़ता है। लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को भी पूर्व सीएम ने केन्द्र सरकार की बगैर अनुमति के शुरु किया था जो आज मोहन सरकार (mohan government) के लिए समस्य बन चुकी है हर महीने सरकार को 1500 करोड़ से ऊपर का बजट लाड़ली बहना योजना के लिए बनाना पड़ रहा है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लाड़ली बहना योजना की फरवरी में मिलने वाली किस्त के लिए राज्य सरकार के पास बजट नहीं है। यही कारण है कि सरकार को फिर कर्ज लेना पड़ रहा है। पूर्व सीएम के द्वारा अनेकों ऐसी योजनाएं हैं जिनमें सरकार को प्रतिमाह हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है और सरकार लगातार कर्ज के बोझ में दबती चली जा रही है। इसी लिए केन्द्रीय नेत्रृत्व ने तय किया है कि मामा द्वारा शुरु की गई योजनाओं को धीरे-धीरे बंद किया जाना चाहिए। उसके पहले पोस्टर बैनर से गायब करने की योजना है जिससे लोगों को ज्यादा भनक न लगने पाए। प्रदेश की जनता के मन में मोहन यादव को जगह दिलाने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे एक नए युग की शुरुआत की जा सके। (mp bjp)

बच्चों के साथ विशेष भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव (mohan yadav) ने गणतंत्र दिवस (republic day) के अवसर पर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अन्तर्गत शासकीय जालसेवा निकेतन उमावि सीएम राइज स्कूल में आयोजित विशेष भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित किया गया था। विद्यालय के प्राचार्य डॉ.प्रदीप देशपांडे द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्कूल के बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई वर्षों के कड़े संघर्ष के पश्चात हमारे देश को स्वतंत्रता मिली और उसके पश्चात गणतंत्र लागू हुआ। देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी महापुरूषों और क्रान्तिकारियों को नमन है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश लगातार प्रगति कर रहा है। भारत दुनिया में सबसे युवा जनसंख्या वाला देश है। आज गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन में शामिल होने का अवसर मिला है। वर्तमान में आजादी का अमृतकाल चल रहा है। आने वाले समय में हमारा प्रदेश हर क्षेत्र में तरक्की करे, यही कामना है। सरकार द्वारा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समय-समय पर आगे बढ़ने एवं उनकी प्रतिभाओं को निखारने के अवसर प्रदान किये जायेंगे। हमारे प्रदेश के युवा पढ़-लिखकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें एवं अपने सपनों को पूरा करें। मुख्यमंत्री ने सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

'बड़ी अभागी है कांग्रेस' मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस को क्यों बताया अभागा
भगवान राम 22 जनवरी को राम मंदिर के गर्भगृह (ram mandir pran pratishtha) में स्थापित होने जा रहे हैं। उससे पहले भक्ति के रस में देश सराबोर है तो सियासत भी पूरे शबाब पर है। राम मंदिर के लिए देश भर में निमंत्रण भेजे जा रहे हैं और उसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी को भी निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में जाने के न्योते को ये कह कर अस्विकार कर दिया कि भाजपा ने इस पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक बना दिया है। हांलाकि कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले पर कांग्रेस कई अलग-अलग धड़ों में बंट गई है। कांग्रेस आला कमान ने एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए ऐसा किया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी का कोई भी नेता तंज कसने से पीछे नहीं हो रहा है। इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने भी जमकर चुटकी ली है। मोहन यादव ने कहा कि 'कांग्रेस बड़ी अभागी है' क्योंकि भगवान राम के मंदिर और भगवान राम का सभी को इंतजार था और अब जब राम मंदिर बन रहा है और भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो उसमें करीब- करीब सभी शामिल हो रहे हैं लेकिन कांग्रेस आला कमान की तरफ से न्योता अस्विकार होने के बाद कांग्रेस के नेता खुद को तो ठगा सा महसूस कर ही रहे हैं लेकिन भाजपा के नेताओं को तंज कसने का अच्छा मौका भी मिल गया है।

खतरे में लाखों संविदा कर्मियों का भविष्य,मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों के सामने रखी बड़ी शर्त,अब क्या करेंगे संविदा कर्मी
प्रदेश भर में करीब 38 विभागों में काम कर रहे लाखों की संख्या में संविदा कर्मियों (samvida workers) के सामने मोहन सरकार (mohan government) ने उनके भविष्य को चिंता खड़ी कर दी है। अभी तक यह संविदा कर्मी (Samvida) सिर्फ इस बात को लेकर परेशान थे कि रिटायर होने के बाद उन्हे पेंशन नहीं मिलेगी तो उनका गुजारा कैसे होगा। उससे पहले ही मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों को खुद के भविष्य के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल संविदा कर्मियों को नियमित होना है तो उन्हे परीक्षा में उत्तीर्ण होना होगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए उन्हे कम से कम 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा। अगर कोई अभ्यर्थी 50 फीसदी से कम अंक लेकर आता है तो उसे नौकरी से भी निकाला जा सकता है। मतलब साफ है अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को अगर नौकरी में बने रहना है तो उन्हे किसी भी हालत में 50 फीसदी से ज्यादा का अंक लाना अनिवार्य होगा। करीब तीन घंटे के पेपर में डेढ़ सौ अंक लाने होंगे। अगर कोई अभ्यर्थी 50 पीसदी से कम अंक लेकर आया तो उसे अनुत्तीर्ण माना जाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल से BRTS को हटाने का किया फैसला, 20 जनवरी को हटेगा BRTS
भोपाल की सड़कों में बनाए गए BRTS को हटाने का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने फैसला कर लिया है। जानकारी के मुताबिक 20 जनवरी से BRTS को हटाने की कार्रवाई शुरु की जाएगी।अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तय समय सीमा में बीआरटीएस (brts bhopal) का हटाने का काम होना चाहिए।मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा कि बीआरटीएस कॉरिडोर यातायात में सुगमता और जन सुविधा के लिए हटाए जा रहे हैं । अतः जहां ट्रैफिक का दबाव सर्वाधिक हो वहीं से बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का कार्य आरंभ किया जाए। कॉरिडोर हटाने का कार्य बैरागढ़ से आरंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा जन सुविधा को देखते हुए बीआरटीएस हटाने का काम रात में किया जाए और पुलिस से समन्वय करते हुए बीआरटीएस हटाने की संपूर्ण अवधि में शहर में सुगम और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

60 की उम्र के बाद मोहन सरकार पेंशन देने की बना रही योजना,मंत्री प्रहलाद पटेल ने की समीक्षा
मोहन सरकार (mohan government मजदूरों को 60 की उम्र के बाद पेंशन देने की योजना पर विचार कर रही है। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है बहुत जल्दी घोषणा होने वाली है। प्रदेश के श्रम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल (prahlad patel) ने विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह बात कही है। प्रहलाद पटेल ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन दिया जाना निश्चित किया जा रहा है। कितनी पेंशन दी जाएगी इस पर अभी विचार होना शेष है। इसके लिए विचार विमर्श का चल रहा है बहुत जल्दी प्रदेश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की टीम पूरी तरह से प्रदेश के विकास कार्य में जुड़ चुकी है। प्रदेश के श्रम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विभागीय समीक्षा के दौरान असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को लेकर कई बड़े सुधार करने की घोषणा की है। साथ ही असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन देने की योजना पर काम किया जा रहा है। श्रम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा है कि 60 की उम्र के बाद मजदूर में काम करने की क्षमता घट जाती है ऐसे में उनके शारीरिक श्रम को ध्यान में रखते हुए पेंशन की योजना बनाई जा रही है। श्री पटेल का कहना था कि मजदूरों के संबंध में प्रावधानों और निर्णय में संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाए। मजदूरों के पंजीयन निरस्त होने की स्थिति में अनुविभागीय आधिकारिक के यहां होने वाली अपील के प्रावधान को हटाया जाएगा। श्रम मंत्री का कहना है कि गरीब व्यक्ति को अनावश्यक रूप से होने वाली परेशानी से बचाना सरकार का मुख्य उद्देश्य है। कहा गया है की अपील का प्रावधान जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी या श्रम बोर्ड के समक्ष विचार के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को 45 वर्ष की उम्र के बाद बीमा योजना में कर करने संबंधी निर्णय लिया जाएगा। साथ ही 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन का लाभ दिया जाए। जनकल्याण संबल योजना तथा मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना के विभिन्न प्रावधानों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

एमपी में नया कैलेंडर होगा लागू,68 साल पहले PM नेहरु ने करवया था बंद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने फिर पुराने कैलेंडर को लागू करने की योजना तैयार की है। अब नया कैलेंडर (new calendar) विक्रम संवत (vikram samvat) के रुप में लागू होगा। गौरतलब है कि बीते 68 सालों से यहां शक संवत का शासकीय कैलेंडर चलता था। अब एक बार फिर से मध्य प्रदेश सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित विक्रम संवत कैलेंडर को लागू करने की योजना तैयार कर ली है। राज्य के संस्कृति विभाग ने यह कैलेंडर छपवा लिए हैं। शक संवत नहीं, मध्य प्रदेश में फिर होगा विक्रम संवत का शासकीय कलेंडर, 68 साल पहले पीएम नेहरु ने लागू की थी अंग्रेजी व्यवस्था मध्य प्रदेश में नवगठित डॉ. मोहन यादव की सरकार ने एक बार फिर से शासकीय कलेंडर में विक्रम संवत को मान्यता दी है. मध्य प्रदेश में शदियों से विक्रम संवत को ही मान्यता मिलती रही है, लेकिन आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने पुरानी व्यवस्था को बदल कर अंग्रेजी व्यवस्था लागू कर दी थी. इसी व्यवस्था के तहत विक्रम संवत को भी दरकिनार कर शक संवत लागू किया गया था। डॉ. मोहन यादव की सरकार ने शपथ लेने के साथ ही इस व्यवस्था को बदलने का फैसला किया और अब नए कलेंडर छप कर तैयार हो गए हैं. मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश पत्र के मुताबिक अब नया शासकीय कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से नहीं होगा. बल्कि इसे विक्रम संवत के तहत तैयार किया गया है. इसमें विक्रम संवत की तिथियां और व्रत त्यौहार भी दिए गए हैं. बता दें कि उज्जैन के राजा सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत शुरू किया था. सैकड़ों सालों तक इसी संवत को पूरा देश मानता था। मध्यप्रदेश का सरकारी कैलेंडर भी विक्रम संवत के अनुसार प्रिंट होता था. यह व्यवस्था आजादी के बाद 1949 तक रही. साल 1955 मे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक आदेश के तहत विक्रम संवत को हटा दिया था. उन्हीं इसके स्थानों पर अंग्रेजों द्वारा पोषित शक संवत को महत्व दिया था. तब से आज 68 साल बाद तक यही कैलेंडर प्रकाशित होता आ रहा है. अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के विक्रम संवत को एक बार फिर से मध्यप्रदेश के शासकीय कैलेंडर के तौर पर लागू करने के आदेश दिए हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक संस्कृति विभाग ने नए कैलेंडर छपवा लिए हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद न्याय प्रिय राजा सम्राट विक्रमादित्य में काफी प्रेरित हैं. वह उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए भी राजा विक्रमादित्य के इतिहास से जुड़े संदर्भों पर काफी काम कर चुके हैं. उन्होंने विक्रमादित्य के नाट्य मंचन का आयोजन भी कराया था, जिसे पूरे देशभर में खूब सराहा गया. उनके प्रयासों से मध्यप्रदेश के पाठ्यक्रम में राजा विक्रमादित्य को शामिल किया गया।