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पीएम मोदी ने दी मप्र को हजारों करोड़ रुपये की सौगात,सीएम मोहन यादव और अध्यक्ष रहे मौजूद
लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने आदिवासी बाहुल क्षेत्र झाबुआ में एक जनसभा संबोधित करने से पहले प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी है (pm modi in jhabua)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने झाबुआ (Jhabua) में 7,550 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) और उनके कैबिनेट मंत्री भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र की महत्वपूर्ण आदिवासी आबादी को लाभ होगा। पीएमओ के एक बयान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से आदिवासी आबादी को लाभ पहुंचेगा। साथ ही आहार अनुदान योजना के तहत लगभग दो लाख महिला लाभार्थियों को आहार अनुदान की मासिक किश्तों का वितरण पीएम मोदी द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा SVAMITVA योजना के लाभार्थियों को 1.75 लाख अधिकार अभिलेख (अधिकारों का रिकॉर्ड) भी वितरित किया जाएगा। बता दें कि यह लोगों को उनकी जमीन के अधिकार के लिए दस्तावेजी सबूत प्रदान करेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 559 गांवों के लिए 55.90 करोड़ रुपये भी हस्तांतरित किए जाएंगे और झाबुआ में 'सीएम राइज स्कूल' की आधारशिला रखेंगे। पीएमओ ने कहा कि स्कूल छात्रों को स्मार्ट क्लास, ई-लाइब्रेरी आदि जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी को एकीकृत करेगा।

ये क्या कर रहे हैं मुख्यमंत्री मोहन यादव,दीवार पर पेंटिंग की जरुरत क्यों पड़ी
भारतीय जनता पार्टी का छोटा कार्यकर्ता हो या फिर बड़ा सभी समान होते हैं। और इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) दीवार लेखन करने के लिए खुद निकले। दरअसल भाजपा की तरफ से इन दिनों गांव चलो अभियान (gaon chalo abhiyan) चलाया जा रहा है साथ में दीवार लेखन अभियान भी संचालित हो रहा है। दीवारों पर भाजपा के नेता कमल का फूल बनाते हैं और उस पर लिखते हैं फिर एक बार मोदी सरकार। मतलब साफ है भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की जनता को सोते जागते भाजपा और कमल का फूल दिखाना चाहती है। केन्द्र से मिले आदेश के बाद मप्र भाजपा के सभी नेता एक-एक कर दीवार लेखन कर रहे हैं और केन्द्र सरकार के योजनाओं की जानकारी भी प्रदेश की जनता को दे रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के लालघाटी के पास दीवार लेखन का काम किया और मोदी सरकार के कामों की जानकारी दी तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा गांव चलो अभियान के तहत लगातार गांव के प्रवास पर हैं जहां वो एक रात किसी गांव में रुकते हैं। इतना ही नहीं वीडी शर्मा 24 घंटे के दौरान गांव के हर घर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर लोगों को मीदी सरकार के कामों की जानकारी देते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी लगातार उन्ही का अनुसरण कर रहे हैं वो गांव में नहीं रुक रहे लेकिन जब भी मौका मिल रहा है तो दीवार लेखन के साथ मोदी सरकार के काम काज की जानकारी जनता को दे रहे हैं।

प्रदेश की लाड़ली बहनों को कल मिलेगी सौगात
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना (ladli behna yojana) में पात्र महिलाओं को सरकार द्वारा हर महीने 1250 रुपए ट्रांसफर किए जा रहे हैं अब नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने लाडली बहनों के लिए घोषणा कर दी गई है। जो महिलाएं इस योजना में पात्र हैं सिर्फ उन्हीं महिलाओं को लाडली बहना योजना की 9 वीं किस्त ट्रांसफर की जाएगी। मोहन यादव ने लाडली बहना योजना की नई लिस्ट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। सिर्फ एक दिन शेष रह चुके हैं। लाडली बहना योजना की अगली किस्त की राशि ट्रांसफर होने से पहले सूचना जारी की गई है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना में पात्र महिलाओं की संख्या में कमी देखने को मिल रही है। जब लाडली बहना योजना की आठवीं किस्त ट्रांसफर की गई थी। तब कुल पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख महिलाएं इस योजना में शामिल थी। जब नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बने और उनके द्वारा 10 जनवरी 2024 को लाडली बहना योजना की आठवीं किस्त ट्रांसफर की गई। तब महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 29 लाख ही रह चुकी है। लगभग 2 लाख के आसपास लाडली बहनों को इस योजना से बाहर कर दिया है। मध्य प्रदेश की ऐसी महिलाएं जो इस योजना में आवेदन करने के बाद पात्र सूची में नाम शामिल है। ऐसी महिलाओं को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 10 फरवरी 2024 को लाडली बहनों के बैंक खाते में 1250 रुपए ट्रांसफर करेंगे यह राशि सिर्फ उन्हीं महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी जिन महिलाओं का लाडली बहना योजना की नई सूची में नाम शामिल है। 1250 रुपए हर महीने मध्य प्रदेश की लाडली बहनों को बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लाडली बहनों के बैंक खाते में अगली किस्त की राशि 250 रुपए की बढ़ोतरी की जा सकती है। लाडली बहना योजना में पात्र महिलाएं अगली किस्त का इंतजार कर रही हैं। इधर इस लाडली बहना योजना से वंचित महिलाएं तीसरे चरण के फॉर्म भरने का इंतजार कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव लाडली बहना योजना की नौवीं किस्त की राशि 10 फरवरी 2024 को 1250 रुपए ट्रांसफर करेंगे। और लाडली बहना योजना से वंचित महिलाओं के लिए तीसरे चरण की तारीख की घोषणा कर सकते हैं। जैसे ही लाडली बहना योजना की तीसरे चरण की तारीख की घोषणा होगी। हम आपको सूचित कर देंगे। लाडली बहना योजना की नौवीं किस्त का इंतजार कर रही महिलाओं के लिए जानकारी बता दें कि अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव की तरफ से लाडली बहना योजना की नौवीं किस्त की राशि में बढ़ोतरी करने के लिए कोई सूचना नहीं दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाडली बहनों को अगली किस्त की राशि में बढ़ोतरी की जा सकती है। लेकिन जब तक मुख्यमंत्री के द्वारा सूचना जारी नहीं होती, तब तक लाडली बहना योजना की राशि 1250 रुपए ही मिलेगी।

हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लाष्ट पर क्या बोल गए मुख्यमंत्री मोहन यादव
हरदा की ब्लास्ट वाली पटाखा फैक्ट्री में बुधवार को दूसरे दिन भी मलबा हटाया जा रहा है (harda blast)। मध्यप्रदेश के हरदा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 11 लोगों की मौत हो गई। 217 लोग घायल हो गए, इनमें फैक्ट्री के 51 मजदूर शामिल हैं। 73 लोग हरदा, इंदौर, भोपाल और नर्मदापुरम के अस्पतालों में भर्ती हैं (harda firecracker factory blast)। इतनी दुखद घटना के बाद बीजेपी प्रदेश कार्यालय में कांग्रेस के दो महापौर सहित कई पार्षदों की ज्वाइनिंग कराई गई। इस दौरान सीएम मोहन यादव (cm mohan yadav) ने नए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि घटना दुखद है लेकिन सरकार जो कर सकती थी सरकार ने किया। लेकिन मुख्यमंत्री ने जो चौकाने वाली बात कही वो ये है कि ऐसी घटना पर किसी का वश नहीं है। सवाल इस बात का उठता है कि रिहायशी क्षेत्रों में पटाखा फैक्ट्री लगाने के लिए अनुमति कौन देता है। क्या अनुमति देते समय मौके का मुआयना नहीं किया जाता है। और फिर घटना के बात सरकार ये कह कर इति श्री कर लेती है कि सरकार की तरफ से जो कुछ हो सकता है सरकार ने सबकुछ किया। लेकिन मुख्यमंत्री का गैर जिम्मेदाराना बयान कि घटना पर किसी का बस नही है।

हरदा ब्लास्ट पर सख्त हुए सीएम मोहन यादव,बुलाई बैठक,दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने हरदा में पटाखा फैक्ट्री में हुई दुर्घटना (harda blast) के संबंध में मंत्रालय में आपात बैठक ली, अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हरदा के आसपास के क्षेत्र से एंबुलेंस हरदा पहुंचाई जा रही हैं इसके साथ ही हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था के लिए सेना से संपर्क किया गया है।भोपाल, इंदौर में मेडिकल कॉलेज और aiims भोपाल में बर्न यूनिट को तैयारी रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। होशंगाबाद में भी अस्पतालों में घायलों के उपचार के लिए व्यवस्था की गई है। बैठक में बताया गया कि हरदा में होशंगाबाद सहित आसपास के क्षेत्र से 14 डॉक्टर तत्काल रवाना किए गए हैं। हरदा में 20 एम्बुलेंस मौजूद हैं, तथा 50 और पहुंच रही है। भोपाल इंदौर स बैतूल, होशंगाबाद भेरूंदा, रेहटी सहित अन्य नगरीय निकायों तथा संस्थाओं से फायर ब्रिगेड हरदा भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह, ACS अजीत केसरी, डीजी होमगार्ड को तत्काल हेलीकॉप्टर से हरदा जाने के निर्देश दिए हैं। NDRF, SDRF की टीमों को भेजा जा रहा है।बैठक में मुख्य सचिव वीरा राणा, पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव गृह संजय दुबे, प्रमुख सचिन नगरी प्रशासन एवं विकास नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राघवेंद्र सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारियों को अभी नहीं मिलेगा 4% डीए का लाभ,केन्द्र फिर देगा मंहगाई भत्ता
मप्र के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राज्य सरकार फिलहाल बढ़ा हुआ चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के मूड में नहीं है (mp government employees)। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस बारे में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से अब तक दो बाह मंहगाई भत्ते की फाइल चली,लेकिन मुख्य सचिव वीरा राणा के दफ्तर से लौटा दी गई। वहीं Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार जल्द ही मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की और पढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है। इस जानकारी के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गौरतलब है कि मतदान से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओक से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने ये कह कर रोक लगाई थी कि मतदान 17 दिसंबर को है तब तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। मतदान खत्म होने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने निर्वाचन आयोग के पास प्रस्ताव नहीं भेजा। मतलब साफ है कि वो चुनाव में फायदा लेने के लिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता जोड़ना चाहते थे। नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हे अब चार फीसदी मंहगाई भत्ता मिलेगा लेकिन दो बार फाइल चलने के बाद भी उस पर अंतिम मुहर नहीं लगी जिसके चलते अब राज्य के कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऊपर से केन्द्र सरकार एक बार फिर चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता देकर राज्य कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने का काम करने जा रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जुलाई 2023 में चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता और मंहगाई राहत दी थी। जिसके कारण केन्द्र के कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है और राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ 42 फीसदी मंहगाई भत्ते पर ही संतोष करना पड़ रहा है। जबकि राज्य में भी केन्द्र के समान ही मंहगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के कारण कर्मचारियों को दो से दस हजार रुपये तक का प्रतिमाह नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण प्रदेश के शासकीय कर्मचारी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जाकर वोटिंग कर सकते हैं।

दिल्ली दरवार में मुख्यमंत्री की हाजिरी,हर तीसरे दिन हो रहा दौरा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने दिल्ली दौरे पर लगातार जा रहे हैं। सीएम बनने के बाद हर तीसरे- चौथे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली में दौरा हो रहा है। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दिल्ली का दौरा किया करते थे। माना जा रहा है कि सियासत का ककहरा अब मोहन यादव दिल्ली के प्रवास पर ही पढ़ रहे हैं। सोमवार को मूख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने कई केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इन मुलाकातों को लेकर एमपी में लगातार अलग-अलग सियासी कयास लगाए जा रहे हैं। जिस प्रकार से मोहन यादव दिल्ली के दौरे कर रहे हैं उससे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री काम करनी की खुली छूट चाहते हैं साथ ही वो एमपी बीजेपी के संगठन में भी अपना दखल चाहते हैं जिससे उनके हिसाब से पूरी तरह से काम हो सके। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का पिछले साल फरवरी में कार्यकाल समाप्त हो गया था लेकिन चुनाव को देखते हुए केन्द्रीय नेत्रृत्व ने अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बदलाव का जोखिम नहीं उठाया। अब लोकसभा चुनाव है और मुख्यमंत्री मोहन यादव चाहते हैं कि साबकुछ उनके हिसाब से चले यही कारण है कि उनके दिल्ली के लगातार दौरे चल रहे हैं।

पार्बती-कालीसिंध-चंबल ईआर सीपी लिंक परियोजना को मंजूरी,मुख्यमंत्री मोहन यादव को मिली कामयाबी
मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक (parbati kalisindh chambal link) परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (gajendra singh shikawat), मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा (bhajan lal sharma) की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान शासन के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के उपरांत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा। प्रदेश के ड्राई बेल्ट वाले जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। परिणामस्वरूप इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे। यह परियोजना निश्चित रूप से पश्चिमी मध्यप्रदेश के लिए एक वरदान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह परियोजना 5 वर्ष से कम समय में फलीभूत होगी, जिसकी वर्तमान लागत लगभग 75000 करोड़ रुपए है। प्रदेश के लगभग 1.5 करोड़ आबादी इस परियोजना से लाभान्वित होगी। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। परियोजना से लगभग 5.60 लाख हैकटेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी जिसके लिए दोनों सरकारें बधाई की पात्र हैं। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों में कुल 5.60 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिये पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फीजिबिलिटी रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।

कमलनाथ की राह पर मोहन यादव,हर तीसरे दिन उज्जैन में करते हैं प्रवास
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) आज तक उज्जैन से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिलती है जब हर तीसरे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के प्रवास में रहते हैं। इस बात में कोई सक नहीं है कि उज्जैन एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी है लेकिन मुख्यमंत्री को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो अकेले उज्जैन के सीएम नहीं हैं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री वही हैं। सीएम बनने के बाद विधानसभा में भी जब मुख्यमंत्री मोहन यादव का पहला भाषण हुआ तो उन्होने अपने 15 मिनट के भाषण में करीब 10 बार उज्जैन का नाम लिया। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) का भी छिंदवाड़ा प्रेम देखने को मिलता था। हर तीसरे दिन सीएम रहते उनका छिंदवाड़ा दौरा होता था कोई विकास की बात हो तो छिंदवाड़ा से ही शुरु होती थी। कमलनाथ अपने 15 महीने के कार्यकाल में छिंदवाड़ा से बाहर नहीं निकल पाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी ठीक उन्ही के रास्ते पर चल पड़े हैं। करीब डेढ़ महीने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बने हो चुका है इस बीच करीब 20 दौरे वो उज्जैन के कर चुके हैं हर तीसरा दिन मोहन यादव का उज्जैन में ही बीतता है। और अब इस बात के चर्चे तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच में भी होने लगे हैं। पार्टी के किसी नेता को मुख्यमंत्री से मुलाकात करनी हो तो मुलाकात नहीं हो पाती। प्रदेश की जनता भी अब दवी जुवान ये कहने लगी है कि मोहन यादव उज्जैन के ही मुख्यमंत्री बन कर रहना चाहते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार संघ भी मोहन यादव के उज्जैन दौरे और उज्जैन प्रेम पर काफी नजर रख रहा है।

लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने किए प्रभारी नियुक्त
मिशन 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) ने 23 राज्यों के चुनाव प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। विधानसभा चुनाव में एमपी में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (bhupendra yadav) और अश्विनी वैष्णव (ashwini vaishnaw) को प्रभारी नियुक्त किया गया था। फिलहाल इस सूची में मप्र के प्रभारी की नियुक्ति नहीं हुई है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगली सूची में भाजपा एमपी के प्रभारी की भी नियुक्ति कर देगी। सूची में दिलचश्प यह है कि एमपी के किसी भी नेता को किसी राज्य का दायित्व नहीं सौंपा गया है। माना जा रहा है कि अगली सूची में एमपी से किसी नेता को किसी राज्य की जवाबदारी दी जा सकती है।