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कमल नाथ के बनाए संगठन पर जीतू पटवारी करेंगे बदलाव,सेक्टर खत्म कर बनाएंगे समितियां

दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के भविष्य को लेकर मंथन,पार्टी में आगे क्या होगी भूमिका दिल्ली में होगा फैसला

दिल्ली से आए प्रतिनिधि मंडल ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी से किया किनारा,कमलनाथ को भी ठहराया जा रहा हार का दोषी

कमलनाथ के गढ़ में भाजपा की बड़ी सेंधमारी से हासिए पर कमल नाथ की राजनीति,केन्द्रीय नेतृत्व नहीं दे रहा महत्व

कैलाश विजयवर्गीय की चुटकी,कमलनाथ अच्छे इंसान,चाहें तो भाजपा में आ सकते हैं

डॉ. नरोत्तम मिश्रा राजनीति की चलती फिरती पाठशाला,जिसने जीवन में हारना नहीं सीखा
मप्र में नेताओं की कमी नहीं है लेकिन बात जब पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) की आती है तो सभी के शिर खुद ब खुद उनके सजदे में झुक जाते हैं। संसदीय ज्ञान ऐसा कि सालों तक लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व सीएम कमलनाथ (kamal nath) भी उनकी बातों का तोड़ नहीं निकाल पाते हैं। एक वाक्य याद आता है जब कांग्रेस पार्टी शिवराज सरकार (shivraj government) के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। लेकिन उस अविश्वास प्रस्ताव को पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पल भर में तहस नहस कर दिया। राजनीतिक गलियारों में पूर्व सीएम शिवराज और डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एक दूसरे का विरोधी कहा जाता है लेकिन जब भी पूर्व सीएम पर शंकट आया है तो सबसे पहले डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनकी ढाल बन कर खड़े हुए। साल 2019 में भाजपा की सरकार जाने के बाद जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रयासों से फिर भाजपा की सरकार बनी उसमें पूर्व गृह मंत्री की क्या भूमिका थी अब किसी से छुपी नहीं है। फिर कोरोनाकाल में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी जिस प्रकार से संभाली और वैक्सीनेशन के काम को जिस प्रकार से उन्होने गति दी उसके अलावा आवागमन के माध्यम बंद होने के वाबजूद पूर्व गृह मंत्री ने लोगों को खासकर मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने का लगातार प्रयास किया और उसमें वो सफल भी रहे। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए लेकिन उन्हे पार्टी ने ज्वाइनिंइ कमेटी का संयोजक बनाया तो उन्होने फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कर चार लाख से अधिक लोगों को भाजपा की सदस्यता दिला दी जो पूरे देश में रिकार्ड है। पूर्व गृह मंत्री पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर बड़ी सहजता से कहते हैं कि वो एक छोटे से कार्यकर्ता हैं और पार्टी उन्हे जो भी काम देगी वो उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाते रहेंगे। बांकी पूर्व गृह मंत्री का यह भी कहना है कि वो कर्म पर विश्वास रखते हैं फल ऊपर वाले और पार्टी के शीर्श नेत्रृत्व के हाथ में है।

कांग्रेस की भगदड़ पर जीतू पटवारी का जवाब,दिग्विजय और कमलनाथ पर मढ़ा सारा दोष
पिछले तीन महीने से कांग्रेस पार्टी में लगातार भगदड़ का माहौल है। अब तक करीब 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया है। इस मामले में कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) से जवाब तलब किया है। कहा यह भी जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (mallikarjun kharge) ने जीतू पटवारी को बंद कमरे में जमकर खरी खोटी भी सुनाई है। कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व द्वारा पूछे गए सवाल पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपनी लिखित सफाई दी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी ने अपनी सफाई में सारा दोष दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर मढ़ दिया है। जीतू पटवारी ने अपने जवाब में कहा है कि उनको नाकाम साबित करने के लिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इस प्रकार का भयानक षड़यंत्र रच रहे हैं इसी लिए ज्यादातर दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के करीबी लोग ही बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी चीफ ने इनके अलावा दो और नेताओं का नाम भी शामिल किया है जिसमें अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) को भी कांग्रेस की भगदड़ का दोषी बताया है। उन्होने कहा है कि बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा और इन नेताओं की आपस में दोस्ती है और ये सब मिल कर इतना बड़ा खेल- खेल रहे हैं। हांलाकि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी के आरोपों को ज्यादा तबज्जो नहीं दी है। बल्कि कांग्रेस में लगातार जारी पलायन को जल्दी से जल्दी रोकने की नसीहत दी गई है।

सैयद जफर ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ पर किया करारा प्रहार,सतह पर आई लड़ाई
कमलनाथ (kamal nath) के नजदीकी नेता सैयद जफर (syed zafar) और दीपक सक्सेना (deepak saxena) के भाजपा ज्वाइन करने के बाद छिदवाड़ा में अब आर-पार की लड़ाई शुरु हो गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता सैयद जफर ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कमलनाथ के आजू-बाजू रहने वाले और तन्खा पर काम करने वाले उनके और दीपक सक्सेना के बारे में कमलनाथ से तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। ऐसे लोग जो एक पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वो कमलनाथ को लोकसभा चुनाव जीतने के तरीके बता रहे हैं। गौरतलब है कि सैयद जफर और दीपक सक्सेना पूर्व सीएम कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते थे लेकिन उन्होने अब बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। जिसके बाद कमलनाथ के आजू-बाजू में रहने वाले और तन्खा लेकर काम करने वाले लोग उनके बारे में भ्रामक जानकारी दे रहे हैं। और इस मामले की जानकारी जब सैयद जफर को हुई तो उन्होने एक सभा के दौरान जम कर खरी खोटी सुनाई। गौरतलब है कि कमलनाथ ने पीयूस बबेले और प्रवीण कक्कड़ जैसे लोगों को मोटी तन्खा पर रख रखा है। यही वो लोग हैं जिन्होने विधानसभा चुनाव के दौरान भी कमलनाथ को भ्रामक और गलत जानकारियां लगातार दी थी। जो पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करते थे उनके बारे में भी लगातार गलत फीडबैक दिया गया। यहीं नहीं कमलनाथ को सरकार को लेकर निश्चिंच किया गया था कि अबकी बार कांग्रेस 180 के पार कर रही है और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बन रही है। बाद में क्या हुआ नतीजा सबके सामने है। अब इसी तरह के लोगों ने उनके बारे में फिर से कमलनाथ को गलत फीडबैक दिया जिसके कारण सैयद जफर और दीपक सक्सेना जैसे लोगों को भाजपा की सदस्यता लेनी पड़ी और अब इन सभी नेताओं ने संकल्प लिया है कि इस बार छिंदवाड़ा में भी वो कमल का फूल खिला कर रहेंगे। मतलब साफ है कि तन्खा पर काम करने वाले लोगों ने कमलनाथ को कभी भी सही फीडबैक नहीं दिया और उसका प्रतिफल अब कमलनाथ को भुगतना पड़ रहा है।

छिंदवाड़ा को 'छिन्न भिन्न बाड़ा' बनाने के बाद नकुलनाथ को बीजेपी से 'बी' फार्म जारी करने की तैयारी
सियासत में असंभव कुछ नहीं सबकुछ संभव माना जाता है। और बीजेपी में जिस प्रकार से भर्ती अभियान जारी है उससे स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों को 'छिन्न भिन्न' करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। करीब ढाई महीने में 16 हजार से ज्यादा कांग्रेसियों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। गुरुवार को पहले रीवा के पूर्व सांसद देवराज सिंह (devraj singh) और नागौद से कांग्रेस के पूर्व विधायक यादवेन्द्र भाजपा में शामिल हो गए। इनके बाद शाम को छिंदवाड़ा के कई नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया। पिछले एक हफ्ते के अंदर जिस प्रकार से कमलनाथ (kamal nath) के बेहद करीबी नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है उससे स्पष्ट हो गया है कि दाल में कुछ काला है। पर्दे के पीछे सियासत का ऐसा खेल खेला जा रहा है जिसे लोग देख नहीं पा रहे हैं। कमलनाथ के करीबियों का भाजपा में शामिल होना कोई सामान्य घटना नहीं है। कांग्रेस से बीजेपी में आए कमलनाथ के एक करीबी से जब Mukhbirmp.com की टीम ने संपर्क किया और उसके बाद जब उससे सवाल किया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप सभी की ज्वाइनिंग के बाद भाजपा की तरफ से नकुलनाथ के नाम से 'बी' फाम जारी कर दिया जाए। जिसके बाद कमलनाथ के करीबी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ऐसा हुआ तो वो सबसे ज्यादा खुश होंगे। मतलब साफ है बीजेपी और कमलनाथ के बीच कुछ तो ऐसी खिचड़ी पक रही है जिसके तहत पहले कमलनाथ के सभी समर्थकों को बीजेपी में शामिल कराया जा रहा है और अंत में नकुलनाथ के नाम पर पार्टी 'बी' फाम जारी कर सकती है। क्योंकि राजनीति में असंभव तो कुछ है नहीं सबकुछ संभव है। और जिस प्रकार से कमलनाथ के कट्टर समर्थक थोक में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं उससे तो यही संकेत मिल रहे हैं और कांग्रेस से भाजपा में आए कमलनाथ के समर्थकों के चेहरों की मुस्कान भी कुछ ऐसा ही बयां कर रही है।

कमलेश्वर पटेल का बड़ा कारनामा,पत्नी,बेटे और भाई के नाम पर बनवाया छह करोड़ का मुआबजा
सीधी लोकसभा (sidhi lok sabha) से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी एवं कमलनाथ (kamal nath) की 15 महीने की सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे सिहावल के पूर्व विधायक कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) के ऊपर करोड़ों के भू-अर्जन भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। सिंगरौली कलेक्टर की आधिकारिक वेबसाइट पर धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना हेतु किए गए भू- अर्जन का अपलोड किया गया अवार्ड एवं गणना पत्रक पूरे विंध्य में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। मुखबिर को मिले दस्तावेजों की सूची में धिरौली कोल ब्लॉक में प्रभावित विभिन्न ग्रामों में कमलेश्वर पटेल की पत्नी प्रीति पटेल उनके सुपुत्र ईशान पटेल सुपुत्री ईशा पटेल एवं भाई अजीत पटेल के नाम करीबन 6 करोड रुपए का मुआबजा तैयार किया गया है। उक्त ग्रामों में कोल उत्खनन हेतु अधिग्रहण की सूचना लगते ही कमलेश्वर पटेल एवं उनके परिजनों के द्वारा गरीब किसानों से बेहद ही मामूली कीमत पर जमीन क्रय कर ली गई और अपने राजनीतिक रसूल का उपयोग कर उन जमीनों पर फर्जी मकान एवं पर संपत्तियां दर्शाकर करोड़ों का मुआबजे का खेल खेलने की एक पूरी साजिश रची गई है। जाहिर है कांग्रेस सरकार में मिले मंत्री पद का रसूक बड़ी मुआबजे प्रतिकार की राशि में कमलेश्वर पटेल के काम आया ऐसे में अब बड़ा सवाल यह उठत है की क्या प्रदेश की भाजपा सरकार मामला प्रकाश में आ जाने के बावजूद संपूर्ण मुआबजा कमलेश्वर पटेल को प्रदान करेगी अथवा मामले की गंभीरता से जांच करवाएगी। सिंगरौली में कमलेश्वर पटेल की ही तरह विभिन्न रसूखदारों ने मुआबजे का अरबों में गबन किया है। मुआबजा प्रभावित ग्रामों में ना तो कमलेश्वर पटेल कभी गए ना ही उनके परिजन नहीं उनके पास बिजली पानी राशन कार्ड जैसी कोई चीज का मुआबजा प्रभावित गांव की है फिर भी स्थानीय लोगों से ज्यादा मुआबजा उनके नाम कैसे तैयार हो गया यह गंभीर प्रश्न है। अन्य नेताओं अधिकारियों मीडिया कर्मियों और पुलिस के लोगों के मुआवजे के बंदर पाट की जानकारी mukhbirmp.com आपके साथ शेयर करता रहेगा। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने जिस प्रकार से भाजपा की सरकार में अवैध तरीके से वैध राशि को निकालने का एक बड़ा शड़यंत्र रचा है उससे स्पष्ट है की इस पूरे मामले में भाजपा के नेताओं का भी हाथ है। इसी लिए अभी तक बीजेपी के किसी भी नेता ने इस मामले में किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया। अब इस पूरे मामले में ईडी की क्या भूमिका रहेगी यह तो वक्त बताएगा। कमलेश्वर पटेल के द्वारा फर्जी तरीके से निकाली जा रही मुआबजे की राशि की लिष्ट यहीं खत्म नहीं होती है। उनके कारनामें और हैं जिन्हे Mukhbir में आगे प्रकाशित किया जाएगा।

कमलनाथ के सबसे करीबी ब्यक्ति ने छोड़ा हाथ,हजारों कार्यकर्ताओं ने ली बीजेपी की सदस्यता
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग अभियान जारी है। सोमवार को हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इन सभी में जो सबसे अहम बात रही कि कमलनाथ (kamal nath) के सबसे करीबी माने जा रहे कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सय्यद जाफर (syed zafar) ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है। इनके अलावा पथरिया के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिनेश श्रीधर, कांग्रेस महामंत्री डॉ. मनीषा दुबे, रतलाम जिला पंचायत सदस्य संतोष पालीवाल, बसपा के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश महासचिव डॉ. रामसखा वर्मा, पूर्व प्रचारक अभयराज सिंह, रतलाम के मध्यप्रदेश आई.टी.सेल महामंत्री अंकित पोरवाल, जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री विरेन्द्र नायमा, आलोट विधानसभा युवक कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेश डागी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश मैनूखेड़ी, ब्लॉक अध्यक्ष दुर्गालाल अटोलिया, एनएसयूआई के जिला प्रभारी गोपाल सिसोदिया सहित 64 से अधिक जनपद सदस्य, सरपंच, पूर्व सरपंच, कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष ने अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष चिंतामणि मालवीय, प्रदेश महामंत्री व विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल एवं छिदंवाड़ा लोकसभा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू उपस्थित रहे।

सन्यास के लिए कमलनाथ हुए तैयार,चौरई में कमलनाथ ने किया ऐलान
बेटे का भविष्य संवारने के लिए पिता कोई भी त्याग करने से पीछे नहीं हटता। और इसकी जीती जागती मिशाल हैं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath)। कुछ समय पहले तक उन्होने भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी ओर से तमाम प्रयास किए लेकिन बात नहीं बन पाई। अब कमलनाथ पर कांग्रेस हाई कमान भी पहले की तरह विश्वास नहीं कर रहा है। और यही कारण है कि कमलनाथ ने राजनीति से सन्यास लेने की योजना तैयार कर ली है। लेकिन बेटे को एक बार फिर सांसद बनाने के लिए उन्होने छिंदवाड़ा जिले के चौरई विधानसभा की जनता के सामने कुछ ऐसी बातें कही जिससे स्थानीय जनता का दिल भर आया। दरअसल कमलनाथ ने भावुक होते हुए कहा कि मुझे आपने इतने साल तक प्यार और सम्मान दिया है। अगर कमलनाथ को आप विदा करना चाहते हैं तो मै विदा होने के लिए तैयार हूं। कमलनाथ ने चौरई की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मै खुद को आपके ऊपर थोपना नहीं चाहता हूं। कमलनाथ यहीं नहीं रुके उन्होने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा बहुत मजबूत और आक्रामक प्रचार कर रही है। लेकिन डरिएगा नहीं मुझे विश्वास है कि आप फिर नकुलनाथ को सांसद बनाएंगे। गौरतलब है कि भाजपा पिछले कुछ समय से छिंदवाड़ा में लगातार किलेबंदी करने में जुटी है। जिससे कमलनाथ को अपने बेटे नकुलनाथ (nakul nath) का भविष्य अधर में दिख रहा है यही कारण है कि कमलनाथ बेटे सहित भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे थे। दो चरणों में उनकी भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व से बात भी हुई लेकिन उन पर सिक्ख दंगे का आरोप है और भाजपा के नेता लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। एमपी बीजेपी के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने का विरोध किया था जिसके कारण कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। अब कमलनाथ अपने बेटे को जिताने के लिए चुनाव प्रचार में जुट चुके हैं और जनता के सामने इमोश्नल कार्ड खेल कर किसी भी तरह से नकुलनाथ को एक बार फिर सांसद बनाना चाहते हैं।