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10वीं 12वीं पास के लिए बंपर भर्ती,फारेस्ट विभाग में होने वाली है भर्ती
मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा फॉरेस्ट गार्ड (mp forest department) केरिक्त पदों पर भर्ती निकाली गई है। और मध्य प्रदेश सरकार लोकसभा चुनाव के पहले इन रिक्तियों पर भर्तियां शुरू कर देगी। वर्तमान में कुल 3795 फॉरेस्ट गार्ड के पद खाली हैं। इन पदों पर शैक्षणिक योग्यता केवल दसवीं एवं 12वीं पास रखी जाएगी एवं शारीरिक मापदंड एवं व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी जाएगी। जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार फॉरेस्ट गार्ड की भर्तियां लोकसभा चुनाव के पहले शुरू कर देगी। हालांकि इन भर्तियों में खास बात यह रहेगी कि जिस प्रकार इंडियन आर्मी में अग्नि वीरों की भर्ती की जाती है इसी अनुसार मध्य प्रदेश शासन ने भी यह सुनिश्चित किया है कि वन विभाग में भी वन वीरों की भर्ती की जाएगी। मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा फॉरेस्ट गार्ड की विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी। हालांकि यह भर्तियां अस्थाई होगी और 5 साल के बाद उन्हें परमानेंट कर दिया जाएगा। इस फार्मूले के अनुसार बाघ मित्र, चिता मित्र, हाथी मित्र सहित अन्य पदों पर भर्ती की जाएगी। वन विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि वन वीर भर्ती योजना में ऐसे युवाओं को मौका दिया जाएगा जिनके घर जंगल के आसपास है एवं उनकी नियुक्तियां 1 साल के लिए की जाएगी। 1 साल में उनका अच्छा प्रदर्शन होने पर कार्यकाल 5 साल तक आगे बढ़ा दिया जाएगा और उसके बाद फिर उन्हें परमानेंट कर दिया जाएगा। और इस नियम में टोटल नियुक्त वन वीरों में से 30% वन वीरों को हर साल परमानेंट करने का प्रावधान है। मध्य प्रदेश वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के कुल 3795 पद रिक्त हैं। जिसमें जिसमें हर साल पांच सौ से अधिक वन वीरों की भर्तियां की जाएगी। और इन वन वीरों को 15 हजार से 20 हजार रूपये मासिक वेतन दिया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार लोकसभा चुनाव के पहले ही इन पदों पर भर्तियां प्रारंभ कर देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के निर्देश पर चीता मित्रों की भर्ती की जाएगी ताकि चीतों के प्रति जागरूकता लाई जाए और ग्रामीणों के मन से जंगली जानवरों और खास तौर पर चीतों का डर समाप्त किया जाए। और इसी वजह से वन वीर भर्ती में चीता मित्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

शासकीय कर्मचारियों को अभी नहीं मिलेगा 4% डीए का लाभ,केन्द्र फिर देगा मंहगाई भत्ता
मप्र के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राज्य सरकार फिलहाल बढ़ा हुआ चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के मूड में नहीं है (mp government employees)। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस बारे में सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव से अब तक दो बाह मंहगाई भत्ते की फाइल चली,लेकिन मुख्य सचिव वीरा राणा के दफ्तर से लौटा दी गई। वहीं Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार जल्द ही मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की और पढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है। इस जानकारी के बाद प्रदेश के कर्मचारी संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। गौरतलब है कि मतदान से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्मचारियों को चार फीसदी मंहगाई भत्ता देने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी। वोटिंग से चार दिन पहले धनतेरस के दिन 12 नवंबर को राज्य सरकार की ओक से भेजे गए प्रस्ताव पर तब आयोग ने ये कह कर रोक लगाई थी कि मतदान 17 दिसंबर को है तब तक इस निर्णय को स्थगित रखा जाए। मतदान खत्म होने के बाद तत्कालीन शिवराज सरकार ने निर्वाचन आयोग के पास प्रस्ताव नहीं भेजा। मतलब साफ है कि वो चुनाव में फायदा लेने के लिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता जोड़ना चाहते थे। नई सरकार बनने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उन्हे अब चार फीसदी मंहगाई भत्ता मिलेगा लेकिन दो बार फाइल चलने के बाद भी उस पर अंतिम मुहर नहीं लगी जिसके चलते अब राज्य के कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऊपर से केन्द्र सरकार एक बार फिर चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता देकर राज्य कर्मचारियों के जले में नमक छिड़कने का काम करने जा रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने जुलाई 2023 में चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता और मंहगाई राहत दी थी। जिसके कारण केन्द्र के कर्मचारियों को कुल 46 प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है और राज्य के कर्मचारियों को सिर्फ 42 फीसदी मंहगाई भत्ते पर ही संतोष करना पड़ रहा है। जबकि राज्य में भी केन्द्र के समान ही मंहगाई भत्ता देने की परंपरा रही है। राज्य सरकार के इस फैसले के कारण कर्मचारियों को दो से दस हजार रुपये तक का प्रतिमाह नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण प्रदेश के शासकीय कर्मचारी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जाकर वोटिंग कर सकते हैं।

दिल्ली दरवार में मुख्यमंत्री की हाजिरी,हर तीसरे दिन हो रहा दौरा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने दिल्ली दौरे पर लगातार जा रहे हैं। सीएम बनने के बाद हर तीसरे- चौथे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली में दौरा हो रहा है। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दिल्ली का दौरा किया करते थे। माना जा रहा है कि सियासत का ककहरा अब मोहन यादव दिल्ली के प्रवास पर ही पढ़ रहे हैं। सोमवार को मूख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने कई केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इन मुलाकातों को लेकर एमपी में लगातार अलग-अलग सियासी कयास लगाए जा रहे हैं। जिस प्रकार से मोहन यादव दिल्ली के दौरे कर रहे हैं उससे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री काम करनी की खुली छूट चाहते हैं साथ ही वो एमपी बीजेपी के संगठन में भी अपना दखल चाहते हैं जिससे उनके हिसाब से पूरी तरह से काम हो सके। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का पिछले साल फरवरी में कार्यकाल समाप्त हो गया था लेकिन चुनाव को देखते हुए केन्द्रीय नेत्रृत्व ने अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बदलाव का जोखिम नहीं उठाया। अब लोकसभा चुनाव है और मुख्यमंत्री मोहन यादव चाहते हैं कि साबकुछ उनके हिसाब से चले यही कारण है कि उनके दिल्ली के लगातार दौरे चल रहे हैं।

पार्बती-कालीसिंध-चंबल ईआर सीपी लिंक परियोजना को मंजूरी,मुख्यमंत्री मोहन यादव को मिली कामयाबी
मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक (parbati kalisindh chambal link) परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (gajendra singh shikawat), मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा (bhajan lal sharma) की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान शासन के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के उपरांत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा। प्रदेश के ड्राई बेल्ट वाले जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। परिणामस्वरूप इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे। यह परियोजना निश्चित रूप से पश्चिमी मध्यप्रदेश के लिए एक वरदान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह परियोजना 5 वर्ष से कम समय में फलीभूत होगी, जिसकी वर्तमान लागत लगभग 75000 करोड़ रुपए है। प्रदेश के लगभग 1.5 करोड़ आबादी इस परियोजना से लाभान्वित होगी। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। परियोजना से लगभग 5.60 लाख हैकटेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी जिसके लिए दोनों सरकारें बधाई की पात्र हैं। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों में कुल 5.60 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिये पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फीजिबिलिटी रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।

कमलनाथ की राह पर मोहन यादव,हर तीसरे दिन उज्जैन में करते हैं प्रवास
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) आज तक उज्जैन से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिलती है जब हर तीसरे दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन के प्रवास में रहते हैं। इस बात में कोई सक नहीं है कि उज्जैन एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी है लेकिन मुख्यमंत्री को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो अकेले उज्जैन के सीएम नहीं हैं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री वही हैं। सीएम बनने के बाद विधानसभा में भी जब मुख्यमंत्री मोहन यादव का पहला भाषण हुआ तो उन्होने अपने 15 मिनट के भाषण में करीब 10 बार उज्जैन का नाम लिया। ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) का भी छिंदवाड़ा प्रेम देखने को मिलता था। हर तीसरे दिन सीएम रहते उनका छिंदवाड़ा दौरा होता था कोई विकास की बात हो तो छिंदवाड़ा से ही शुरु होती थी। कमलनाथ अपने 15 महीने के कार्यकाल में छिंदवाड़ा से बाहर नहीं निकल पाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी ठीक उन्ही के रास्ते पर चल पड़े हैं। करीब डेढ़ महीने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बने हो चुका है इस बीच करीब 20 दौरे वो उज्जैन के कर चुके हैं हर तीसरा दिन मोहन यादव का उज्जैन में ही बीतता है। और अब इस बात के चर्चे तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच में भी होने लगे हैं। पार्टी के किसी नेता को मुख्यमंत्री से मुलाकात करनी हो तो मुलाकात नहीं हो पाती। प्रदेश की जनता भी अब दवी जुवान ये कहने लगी है कि मोहन यादव उज्जैन के ही मुख्यमंत्री बन कर रहना चाहते हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार संघ भी मोहन यादव के उज्जैन दौरे और उज्जैन प्रेम पर काफी नजर रख रहा है।

बीजेपी के पोस्टरों से गायब होंगे 'मामा' मोहन युग की ओर आगे बढ़ेगी बीजेपी
मप्र बीजेपी ने अब तय कर दिया है कि 'मामा' राज खत्म हो चुका है। इसकी बानगी के तौर पर पहले सीएम पद की कुर्सी छीनी गई उसके बाद उन्हे एमपी में कोई जिम्मेदारी देने के बजाय साउथ में सक्रिय होने का निर्देश जारी किया गया। पार्टी सूत्रों की मानें तो अब एमपी बीजेपी हर पोस्टर से पूर्व सीएम को हटाने की योजना पर काम कर रही है। दरअसल 18 साल तक एमपी में सीएम रहे मामा ने अन्य किसी नेता को एमपी बीजेपी में पनपने नहीं दिया यही कारण है कि आज भारतीय जनता पार्टी को चुनाव के दौरान मोदी के सहारे ही चलना पड़ता है। लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को भी पूर्व सीएम ने केन्द्र सरकार की बगैर अनुमति के शुरु किया था जो आज मोहन सरकार (mohan government) के लिए समस्य बन चुकी है हर महीने सरकार को 1500 करोड़ से ऊपर का बजट लाड़ली बहना योजना के लिए बनाना पड़ रहा है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लाड़ली बहना योजना की फरवरी में मिलने वाली किस्त के लिए राज्य सरकार के पास बजट नहीं है। यही कारण है कि सरकार को फिर कर्ज लेना पड़ रहा है। पूर्व सीएम के द्वारा अनेकों ऐसी योजनाएं हैं जिनमें सरकार को प्रतिमाह हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है और सरकार लगातार कर्ज के बोझ में दबती चली जा रही है। इसी लिए केन्द्रीय नेत्रृत्व ने तय किया है कि मामा द्वारा शुरु की गई योजनाओं को धीरे-धीरे बंद किया जाना चाहिए। उसके पहले पोस्टर बैनर से गायब करने की योजना है जिससे लोगों को ज्यादा भनक न लगने पाए। प्रदेश की जनता के मन में मोहन यादव को जगह दिलाने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे एक नए युग की शुरुआत की जा सके। (mp bjp)

बच्चों के साथ विशेष भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव (mohan yadav) ने गणतंत्र दिवस (republic day) के अवसर पर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अन्तर्गत शासकीय जालसेवा निकेतन उमावि सीएम राइज स्कूल में आयोजित विशेष भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित किया गया था। विद्यालय के प्राचार्य डॉ.प्रदीप देशपांडे द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्कूल के बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई वर्षों के कड़े संघर्ष के पश्चात हमारे देश को स्वतंत्रता मिली और उसके पश्चात गणतंत्र लागू हुआ। देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी महापुरूषों और क्रान्तिकारियों को नमन है। हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश लगातार प्रगति कर रहा है। भारत दुनिया में सबसे युवा जनसंख्या वाला देश है। आज गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन में शामिल होने का अवसर मिला है। वर्तमान में आजादी का अमृतकाल चल रहा है। आने वाले समय में हमारा प्रदेश हर क्षेत्र में तरक्की करे, यही कामना है। सरकार द्वारा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समय-समय पर आगे बढ़ने एवं उनकी प्रतिभाओं को निखारने के अवसर प्रदान किये जायेंगे। हमारे प्रदेश के युवा पढ़-लिखकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें एवं अपने सपनों को पूरा करें। मुख्यमंत्री ने सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

शासकीय कर्मचारियों को एक से पांच तारीख तक वेतन नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारायों (government employees) को एक से पांच तारीख के अंदर वेतन नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। समस्त आहरण संवितरण कार्यालयों के प्रत्येक शासकीय सेवक का मासिक वेतन आगामी माह की 05 तारीख तक न होने की स्थिति में, विलंब के लिये संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी की जबावदेही होगी। शासन स्तर पर स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह देखने में आ रहा है कि कुछ कार्यालयों द्वारा संदर्भित पत्र में दिये गये निर्देशों की अवहेलना की जाकर जा रही है। मासिक वेतन का नियत समत पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप शासकीय सेवकों के वेतन में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके अतिरिक्त अधिकाशं कार्यालय उनके अधीनस्थ अधिकारियों / कर्मचारियों का मासिक वेतन स्टॉप सैलरी पेमेंट के माध्यम अथवा विलंब से आहरित करते हैं, किन्तु स्टॉप सैलरी पेमेंट एवं विलंब से भुगतान के संबंध में, उसका कारण एवं सक्षम स्वीकृति संलग्न नही की जाती है, जिससे त्रुटिपूर्ण भुगतान एवं वित्तीय अनियमितता / गबन की स्थिति बन रही है। स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक माह के अंतिम कार्य दिवस के 02 दिवस पूर्व समस्त प्रकार के वेतन देयक पारित किये जाने हेतु कोषालय में ऑनलाईन प्रेषित किया जाना है।

2024 के बाद देश में नहीं बचेगा लोकतंत्र,'130 सीटों पर भाजपा ने की EVM की सेटिंग'
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग मोदी और अमित शाह के दबाव में काम कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने निवास पर आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान गुजरात के अतुल पटेल को बुलाया था जो ईवीएम (evm hacking) के स्पेशलिष्ट हैं। अतुल पटेल ने डेमो दिखाते हुए बताया कि किस प्रकार से आपकी वोटिंग पर डाका डाला जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने कर्नाटक और तेलंगाना का जिक्र करते हुए कहा कि जहां पर भाजपा का इंट्रेस्ट नहीं होता और पोल खुलने का डर रहता है वहां पर भाजपा किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं करती है। दिग्विजय सिंह ने दावा करते हुए कहा कि भाजपा को मालूम था कि वो एमपी में चुनाव हारने वाली है। यहां तक कि मीडिया रिपोट के मुताबिक भी भाजपा चुनाव हार रही थी फिर इतना बड़ा बदलाव कैसे। पूर्व मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना का जिक्र भी किया और कहा कि उससे कुछ हद तक भाजपा को फायदा हुआ है लेकिन इतना फायदा नहीं हुआ था कि भाजपा की सरकार बन जाती। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अमित शाह को पहले ही पता चल गया था कि एमपी में इस बार भाजपा की सरकार नहीं आने वाली है इसी लिए पहले उन्होने दो केन्द्रीय मंत्रियों को एमपी में बैठाया और शिवराज सिंह चौहान को ठिकाने लगाया फिर खुद एमपी में अमित शाह ने दर-दर की ठोकरें खाई और फिर करीब 120-130 सीटों में गड़बड़ी कर पूरे चुनावी नतीजे को बदल कर रख दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मोदी ने पहली बार कहा था कि हमारी पूर्ण बहुमत से सरकार आएगी तब 282 सीट आई और फिर कहा कि इस बार 300 पार तो 303 सीट आई। और अब कह रहे हैं कि अबकी बार 400 पार। इतना आत्मविश्वास कैसे हो सकता है। फिर बात करेंगे राम लला कि क्या राम लला के नाम पर वोटों का प्रतिशत इतना बढ़ जाता है। बिहार का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वहां पर लालू कि पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि उनकी पार्टी का अपना एक वोट बैंक है। नीतीश की पार्टी को सीटें मिली क्योंकि उनसे साठ -गाठ थी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो 2003 से आरोप लगा रहे हैं कि ईवीएम में गड़बड़ है तब कोई नहीं मानता था और अब धीरे-धीरे सब मानने लगे हैं कि कुछ तो गड़बड़ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वो इस बात को जनता के बीच लेकर जाएंगे उनका कोई साथ दे या न दे। देश में चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो 2024 के बाद देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। साथ ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो वोट देने वाले लोग हैं उन्हे पता होना चाहिए कि उन्होने जिसको वोट दिया है तो मिला य नहीं मिला है।

बीजेपी का कुशल फीडबैक मजबूत संगठन की रख रहा आधारशिला,प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी की टीम मिशन 24 की तैयारियों में जुटी
भारतीय जनता पार्टी का संगठन ही पार्टी की जीत का आधार होता है (mp bjp)। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) न सिर्फ शुभंगर नेता हैं बल्कि एक कुशल संगठक भी माने जाते हैं। और इसकी बानगी साल 2020 के उप चुनाव में देखने को मिली जहां 28 विधानसभा सीटों में 19 पर पार्टी ने फतह हासिल कर जीत का पर्चम लहराया। उसके बाद असल परीक्षा तो तब हुई जब 2023 विधानसभा चुनाव में हर तरफ से यही खबरें आ रही थी कि इस बार प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन सभी अफवाहों को नजरअंदाज करते हुए संगठन को मजबूत और एकजुट कर चुनाव लड़ा नतीजा यह रहा है कि भारतीय जनता पार्टी 163 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत से फिर सरकार बनाने में कामयाब हो गई। इन सभी में प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका के साथ प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) का भी रोल अहम रहा है। संगठन की सूचना का जिस प्रकार से प्रसार करने का जिम्मा उन्होने उठाया वो भी देखते ही बन रहा था। विधानसभा चुनाव खत्म होते ही प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। उनके साथ ही प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी अब पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहते बल्कि आगे और क्या बेहतर हो सकता है उसकी बात करने लगे हैं। आशीष अग्रवाल इन दिनों मीडिया कर्मियों से ही सलाह लेते नजर आते हैं कि वो अपने काम को और कैसे बेहतर बना सकते हैं। आशीष अग्रवाल की एक खूबी है कि वो अपनी तुलना किसी से किए बगैर अपना खुद का उदाहरण काम के तौर पर पेश करना चाहते हैं। इस लिए वो सीनियर पत्रकार हो अथवा जूनियर किसी में भेद किए बगैर हमेशा पूछते नजर आते हैं कि उनके काम में और क्या सुधार हो सकता है। बीजेपी मीडिया सेंटर में 22 जनवरी को भगवान राम के स्थापना दिवस के मौके पर जब कार्यक्रम आयोजित किया गया था तो उस दौरान भी आशीष अग्रवाल प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से कई बार बात करते नजर आए। हांलाकि उन्होने यह तो नहीं बताया कि उन दोनों के बीच बात क्या हो रही थी लेकिन यह समझ जरुर आता है कि प्रदेश मीडिया प्रभारी अपने काम को लेकर कितने गंभीर हैं। जिस प्रकार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एक बार फिर बूथों को मजबूत करने में जुट गए हैं और कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने की अलग-अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं ठीक उसी प्रकार बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी मीडिया सेंटर को फिर मजबूत करने में जुट गए हैं। जिससे पार्टी की बात को जनता को मीडिया के माध्यम से ठीक तरीके से पहुंचाया जा सके।

असम में राहुल गांधी पर हुए हमले के विरोध में भोपाल में मौन धरना
जहां एक ओर पूरा देश राम मय है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने विरोध प्रदर्शन (mp congress protest) का रास्ता अपना रखा है। दरअसल राहुल गांधी (rahul gandhi) की भारत जोड़ो न्याय यात्रा (bharat jodo nyay yatra) पर असम में हमला होने का आरोप लगाया जा रहा है। लिहाजा कांग्रेस के नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में भोपाल में मौन प्रदर्शन किया है। कार्यक्रम में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता हाथ में काली पट्टी बांधकर बैठे। कांग्रेस का यह धरना भोपाल के रोशनपुरा में आयोजित किया गया था जिसमें कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

संयुक्त ब्राह्मण सामाजिक संगठन जल्द आयोजित करेगा जनप्रतिनिधियों का सम्मान समारोह
संयुक्त ब्राह्मण सामाजिक कल्याण (sanyukt brahmin samajik sangathan) समिति के संगठन की कोर समिति सदस्यों की बैठक आयोजन की गई। बैठक में संयुक्त ब्राह्मण सामाजिक कल्याण समिति के संगठन के द्वारा अति शीघ्र उज्जैन में भव्य ब्राह्मण सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किए जाने की रणनीति पर चर्चा की गई है।इस बैठक के माध्यम से मध्य प्रदेश के समस्त नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों का सम्मान एवं ब्राह्मण समाज में अति विशिष्ट कार्य करने वाले विप्र जनों के सम्मान पर सहमति बनी है। बैठक की विशेषता यह रही कि मध्य प्रदेश के सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इस कार्यक्रम हेतु आमंत्रित करने पर सभी ने सहमति जताई है। इस बड़े आयोजन में ब्राह्मण समाज प्रदेश स्तर पर समाज को संगठित करने के लिए क्या भूमिका निभा रहा है इन विषयों पर भी चर्चा हुई है। यह सम्मान समारोह उज्जैन दक्षिण विधानसभा में आयोजित किया जाएगा। जिसकी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। बैठक का नेतृत्व पं मनोज( अजय )रावत राष्ट्रीय अध्यक्ष कर रहे थे। इनके अलावा,पं प्रेम नारायण उपाध्याय,पं अजय पांडे भोला गुरु,पं महेंद्र व्यास जी,पं दीपक जोशी,पंडित राहुल शुक्ला,पं योगेंद्र मंडलोई,रेखा भार्गव,प्रतीक्षा शर्मा,संध्या पुरोहित,उपस्थित रहे।