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मोहन सरकार का दूसरा बजट होगा ऐतिहासिक,शून्य आधार पर तैयार होगा बजट,हर योजना का होगा मूल्यांकन

लाड़ली बहनों को मोहन सरकार का तोहफा,450 रुपये में मिलेगा घरेलू गैस सिलेंडर,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी मिली बड़ी सौगात

मोहन सरकार का ये कैसा फैसला,विधानसभा अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का अब भी सरकार ही भरेगी आयकर

शासकीय सेवकों पर सख्ती की तैयारी,मोबाइल एप से जियो अटेंडेंस करनी होगी दर्ज,शिकायतों के बाद सख्त हुई सरकार

संविदा कर्मियों को राहत देने की तैयारी में प्रदेश की मोहन सरकार,राष्ट्रीय पेंशन योजना दायरे में लाने की कवायद

रोजगार के अवसर तलासेगी प्रदेश की मोहन सरकार,क्षेत्रीय स्तर पर इन्वेस्टर समिट की जाएगी आयोजित

शासकीय कर्मचारियों को मोहन सरकार का तोहफा,होली के चलते एक मार्च को मिलेगा वेतन
एमपी के शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है (mp government employees)। प्रदेश की मोहन सरकार इस बार मार्च महीने की सैलिरी पहले ही कर्मचारियों के खाते में जनरेट कर देगी (mohan government)। गौरतलब है कि मार्च महीने में आठ तारीख को महाशिवरात्रि है और होली सहित अन्य पर्व भी हैं। जिसको देखते हुए लाड़ली बहना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी कर्मचारियों को भी सैलिरी का बड़ा तोहफा देने का काम करने जा रही है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ा निर्देश दिया गया है। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी आरडी चौधरी ने जिले के सभी आहरण संवितरण अधिकारियों से 27 फरवरी तक वेतन देयक जनरेट करने का अनुरोध किया है। कोषालय अधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी निर्धारित तारीख तक अनिवार्य रुप से वेतन देयक जनरेट कर दें। जिससे एक मार्च को शत प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जा सके। समय पर वेतन जनरेट न करने से मार्च की प्रथम तारीख को वेतन दिया जाना संभव नहीं हो पाएगा। जिन अधिकारी कर्मचारियों का वेतन किसी कारण वश रोका गया है उन्हे छोड़ कर शेष सभी के वेतन देयक जनरेट करने के निर्देश सख्ती से जारी किए गए हैं।

भ्रष्ट अधिकारियों पर मोहन सरकार की टेढ़ी नजर,रिटायरमेंट से पहले अधिकारियों-कर्मचारियों की होगी विभागीय जांच
प्रदेश की मोहन सरकार (mohan government) अलग-अलग विभागों में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त हो गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अगर किसी शासकीय अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही हैं (Departmental inquiry conducted) तो उन्हें 30 जून 2024 के पहले खत्म करना होगा। ये आदेश मप्र सरकार ने जारी किए है(Mp Govt instructions)। अब प्रदेश में रिटायरमेंट से पहले भ्रष्ट अफसरों की विभागीय जांच होगी। भ्रष्टाचार में लिप्त सरकारी कर्मचारियों की विभागीय जांच के लिए डेडलाइन तय कर दी गई है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। एक साल के अंदर रिटायर होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ 30 जून 2024 तक जांच पूरी करने के आदेश जारी किए गए हैं। मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सरकार सख्त हो गई है। इस साल रिटायर हो रहे ऐसे अफसरों की जानकारी मांगकर जून तक जांच पूरी करने को कहा गया है (Investigation of corrupt officers before retirement)। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 5 हजार अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और आर्थिक अनियमितताओं के मामले लंबित हैं। प्रदेश में कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी के मामले ही 3-4 साल से चल रहे हैं। रिटारयमेंट हो गया, लेकिन जांच ही पूरी नहीं हुई, जिससे पेंशन रुक गई। अब इन मामलों के निराकरण की टाइम लिमिट ज्यादा से ज्यादा एक साल और कम से कम 5 महीने होगी।

शासकीय कर्मचारियों के लिए अंतरिम बजट में मोहन की सौगात,4% डीए और मंहगाई राहत देने का लिया संकल्प
लगभग दो महीने पुरानी डा. मोहन यादव की सरकार ने 1,45, 229 करोड़ रुपये का पहला अंतरिम बजट (interim budget) यानी लेखानुदान विधानसभा में प्रस्तुत किया। भाजपा के मिशन 370 को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस अंतरिम बजट में ' मोदी की गारंटी और विकसित मध्य प्रदेश' की झलक दिखाई दे रही है, जिसमें समाज के सभी वर्गो के विकास और कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र को अमलीजामा पहनाने का प्रयास अंतरिम बजट में किया गया है। मोदी की चार जाति गरीब, महिला, किसान और युवा वर्ग के कल्याण के लिए भरसक प्रयत्न किए गए हैं। कर्मचारियों और पेंशनर के लिए चार प्रतिशत डीए और महंगाई राहत का प्रविधान किया गया है। एक अप्रैल से 31 जुलाई तक के लिए महिलाओं की लाड़ली बहना (ladli behna) और अन्य योजनाओं के लिए 9438 करोड़ का प्रविधान किया गया है। किसानों को ब्याजरहित ऋण देने और स्थाई विद्युत पंप पर अनुदान देने के लिए कृषक मित्र योजना को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए 9593 करोड़ रुपये किसान कल्याण विभाग को दिए गए हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्वादन पर प्रतिलीटर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सड़क, औद्योगिक कारिडोर निर्माण और एक्सप्रेस वे को गति देने के लिए पीडब्ल्यूडी को 4098 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि ठेकेदारों के लंबित भुगतान पूरा कर नई परियोजनाओं के काम को तेज किया जा सके। स्वस्थ मध्य प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए एयर एंबूलेंस सेवा आरंभ की जाएगी। युवा वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पीएम एक्सीलेंस कालेज का निर्माण सभी जिलों में किया जाएगा। केरल की तरह पर्यटन क्षेत्र से रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के लिए पांच पर्यटन केंद्रो तक हेलीकाप्टर चलाने की तैयारी मोहन सरकार ने अंतरिम बजट में की है। आदिवासी विकास के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए 23 जिलों में प्रधानमंत्री जनमन योजना को जमीन पर उतारने के लिए अनुसूचित जनजाति कल्याण के बजट में 7500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। गरीब परिवार की महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मिलने वाली प्रसूति सहायता योजना के लिए 2024-25 के अंतरिम बजट (लेखानुदान) में 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।श्रमिकों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अंतरिम बजट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी सरकार ने समान प्राथमिकता दी है। शहरी विकास के लिए 6143 और गांव के विकास के लिए 6314 करोड़ रुपये चार महीने में खर्च किए जाएंगे।

मोहन के बजट में शासकीय कर्मचारियों के लिए नहीं स्थान,नहीं मिलेगा कर्मचारियों को डीए
मप्र में शासकीय सेवकों का चार फीसदी डीए लंबे समय से लंबित है। जबकि केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को कई महीने से 46 फीसदी डीए मिल रहा है। एमपी सरकार (mp government) सोमवार को अपना अर्ध बजट पेश करने है। लेकिन पता चल रहा है कि इस बजट में शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) के डीए के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के मुताबिक जो बजट तैयार किया गया है उसमें फिलहाल एमपी के साढ़े सात लाख कर्मचारियों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिलने वाली है। ऐसा नहीं है कि सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए की जानकारी नहीं है। पिछली कैबिनेट में इस मामले पर चर्चा भी हुई थी लेकिन वहां पर मौजूद प्रमुख सचिव वीरा रामा का तर्क था कि अगर शासकीय सेवकों को चार फीसदी डीए की राशि दी जाएगी तो सरकार के खजाने पर अतिरिक्त भार आएगा। पहले से ही लाड़ली बहना योजना के कारण सरकार को हर महीने कर्ज लेना पड़ रहा है। ऊपर से कर्मचारियों का डीए दिया जाता है तो उसकी राशि की ब्यवस्था करना सरकार के लिए टेढ़ी खीर हो जाएगा। इसी लिए फिलहाल जो बजट पेश होने वाला है उसमें राज्य के शासकीय सेवकों को डीए के लिए किसी प्रकार का प्राविधान नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि कर्मचारियों को डीए देना भी जरुरी है नहीं तो उनमें नारागी बढ़ जाएगी। इन सभी बातों के बाद यह भी फैसला लिया गया है कि लोकसभा चुनाव के बाद शासकीय सेवकों के डीए पर विचार किया जाएगा।

अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

खतरे में लाखों संविदा कर्मियों का भविष्य,मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों के सामने रखी बड़ी शर्त,अब क्या करेंगे संविदा कर्मी
प्रदेश भर में करीब 38 विभागों में काम कर रहे लाखों की संख्या में संविदा कर्मियों (samvida workers) के सामने मोहन सरकार (mohan government) ने उनके भविष्य को चिंता खड़ी कर दी है। अभी तक यह संविदा कर्मी (Samvida) सिर्फ इस बात को लेकर परेशान थे कि रिटायर होने के बाद उन्हे पेंशन नहीं मिलेगी तो उनका गुजारा कैसे होगा। उससे पहले ही मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों को खुद के भविष्य के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल संविदा कर्मियों को नियमित होना है तो उन्हे परीक्षा में उत्तीर्ण होना होगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए उन्हे कम से कम 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा। अगर कोई अभ्यर्थी 50 फीसदी से कम अंक लेकर आता है तो उसे नौकरी से भी निकाला जा सकता है। मतलब साफ है अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को अगर नौकरी में बने रहना है तो उन्हे किसी भी हालत में 50 फीसदी से ज्यादा का अंक लाना अनिवार्य होगा। करीब तीन घंटे के पेपर में डेढ़ सौ अंक लाने होंगे। अगर कोई अभ्यर्थी 50 पीसदी से कम अंक लेकर आया तो उसे अनुत्तीर्ण माना जाएगा।