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विश्व के पहले नवग्रह शक्तिपीठ में 10 से 20 फरवरी तक उमड़ेगा आस्था और विश्वास का जन सैलाव

Feb 3, 2026 Updated: Feb 3, 2026 2 min read
विश्व के पहले नवग्रह शक्तिपीठ में 10 से 20 फरवरी तक उमड़ेगा आस्था और विश्वास का जन सैलाव
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मध्यप्रदेश का डबरा नगर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। जहां अगले 10 दिन तक आस्था और विश्वास का जन सैलाव उमड़ने जा रहा है। दरअसल यहां पर विश्व का पहला भव्य नवग्रह शक्तिपीठ मंदिर का निर्माण किया गया है। जहां नौ ग्रह अपनी-अपनी पत्नियों के साथ विराजमान होंगे। यह अनूठी अवधारणा डबरा को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाने जा रही है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने Mukhbir को बताया कि नवग्रह शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा का महाआयोजन 10 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। 10 फरवरी को स्टेडियम ग्राउंड से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नवग्रह शक्तिपीठ पहुंचेगी। इस यात्रा में 20 हजार से अधिक महिलाओं के सम्मिलित होने की संभावना है। इस महा आयोजन में देश-विदेश से संत-महापुरुषों का आगमन होने जा रहा है। इस विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन में देश के प्रमुख संत, कथावाचक और आध्यात्मिक विभूतियां सहभागिता करेंगी। मुख्य रूप से बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पंडित प्रदीप मिश्रा प्रख्यात कवि कुमार विश्वास दांती महाराज, पंडोखर धाम के गुरुशरण शर्मा,धूमेश्वर धाम, दंदरौआ धाम, रावतपुरा सरकार सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहेंगे। 11 से 13 फरवरी: पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा 14 से 16 फरवरी कुमार विश्वास की भावनात्मक काव्य-प्रस्तुति “अपने-अपने राम”17 से 20 फरवरी: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा एवं दिव्य दरबार इसी अवधि में नौ मंजिला भव्य यज्ञशाला में प्रतिदिन प्रत्येक ग्रह देवता के लिए एक-एक लाख आहुतियां दी जाएंगी। संत बद्रीश जी महाराज एवं उनके 70 उपासक विधि-विधान संपन्न कराएंगे, जबकि दांती महाराज द्वारा पूरे दस दिन विशेष अनुष्ठान किया जाएगा। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि पूरा डबरा नगर एक परिवार की तरह इस आयोजन को सफल बनाने में न केवल जुटा हुआ है बल्कि हर तरह का सहयोग भी कर रहा है। मुझे पूरी आशा है कि “विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ डबरा को आध्यात्मिक पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाएगा। यह आयोजन सनातन संस्कृति और ज्योतिष परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करेगा।”

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