बीजेपी अध्यक्ष की थ्री-लेयर सिक्योरिटी और हावी होते 'कॉर्पोरेट' कल्चर से 'दहशत' में भाजपा के कार्यकर्ता

भय मुक्त वातावरण की बात करने वाली भाजपा के कार्यकर्ता ही दहशत के साए में राजनीति करने को मजबूर हैं। कुछ कार्यकर्ताओं को तो अब अपना राजनीतिक जीवन ही खतरे में नजर आने लगा है। दरअसल भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया है जिसके कारण कार्यकर्ता वर्तमान नेतृत्व से खुश नहीं हैं। किसी कार्यकर्ता को प्रदेश अध्यक्ष से मिलना भी है तो उसके लिए की लेयर पार करके जाना पड़ता है और फिर अंदर अलग से लाइन लगानी पड़ती है तब जाकर किसी भी कार्यकर्ता की मुलाकात प्रदेश अध्यक्ष से हो पाती है। दरअसल प्रदेश कार्यालय में हावी होता कॉर्पोरेट (Corporate) कल्चर अब कार्यकर्ताओं को परेशान करने लगा है। ऊपर से कोई भी कार्यकर्ता नेतृत्व के सामने खुल कर अपनी बात नहीं रख पा रहा है। हफ्ते भर ने निगम-मंडलों की नियुक्ति का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। जिस प्रकार से नियुक्तियां हो रही हैं उससे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को लेकर नाराजगी उभरने लगी है। अपने-अपने क्षेत्रों से कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय आते हैं कि वो अपनी बात नेतृत्व के सामने रखेंगे लेकिन कार्यालय मंत्री,कार्यालय व्यवस्थापक सहित अलग-अलग स्तर की लेयर पहले ही अध्यक्ष के चारों तरफ मौजूद रहते हैं। जैसे ही इन्हे पता चलता है कि कार्यकर्ता नाराजगी व्यक्त करने आया है तो होंठों पर मुस्कान लिए बड़ी सरलता से उन्हें ऐसे डरा दिया जाता है कि अगर आपने कुछ कहा तो आपके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया जाएगा। प्रदेश में अपनी सरकार है और अच्छी चल रही है। ऐसी स्थिति में चुप रहो जो हो रहा है वो देखते रहो। समय आने पर आपके कार्य का मूल्यांकन होगा और पार्टी आपको महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देगी। इस प्रकार की बातें बोल कर कार्यकर्ताओं के जोश को ठंडा कर दिया जाता है। लेकिन कार्यकर्ता भी तो भाजपा के ही हैं। जो बड़े ढीठ हैं और उन्हें मालूम है कि कब और कैसे चोट करनी है लिहाजा कार्यकर्ताओं के मन में ज्वार-भांटे का जो गुबार उठ रहा है उसको वो फिलहाल ठंडा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिससे ऐन मौके पर वो अपने गुस्से को सही जगह दिखा पाएं। हांलांकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का जो स्वभाव है उसके मुताबिक इन सब मामलों की जानकारी उन्हें नहीं है क्योंकि वो सहज और सरल व्यक्ति हैं। कार्यकर्ताओं से सीधे मिलने के लिए वो हफ्ते में दो दिन प्रदेश कार्यालय में बैठते हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं को प्रदेश अध्यक्ष से मिलने के लिए थ्री- लेयर की सिक्योरिटी से गुजरना पड़ता है तो वहीं पर कार्यकर्ता निराश और हताश होकर उल्टे पांव लौट आता है। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष चेंबर पर बैठने के बजाय उससे लगे एक छोटे कमरे में मुलाकात करते हैं। चेंबर से पहले एक दरवाजा लगाया गया है जहां कार्यालय के दो कर्मचारी होते हैं,उसके बाद चेंबर पहुंचने पर फिर दरवाजा है वहां पर भी दो कर्मचारी मौजूद रहते हैं। दो लेयर पार करने के बाद कार्यकर्ता जब चेंबर के अंदर जाता है तो छोटे कमरे के बाहर फिर कर्मचारी तैनात रहते हैं तब जाकर प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात हो पाती है उसमें भी दो से तीन मिनट का समय मिलता है। और की बार कार्यकर्ता अकेले में बात करना चाहता है जो भीड़ के कारण कह नहीं पाता ऐसी स्थिति में वो मन में आक्रोश लिए चुपचाप बाहर निकल आता है और उदास मन से घर की ओर लौट पड़ता है।
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