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मध्य प्रदेश

निगम-मडल की नियुक्तियों में यादवों और संघियों पर मेहरबान भाजपा सरकार दहशत में कार्यकर्ता कुछ बोले तो नोटिस जारी होने का सता रहा डर

May 2, 2026 3 min read
निगम-मडल की नियुक्तियों में यादवों और संघियों पर मेहरबान भाजपा सरकार दहशत में कार्यकर्ता कुछ बोले तो नोटिस जारी होने का सता रहा डर
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सरकार और संगठन की तरफ से जारी निगम-मंडलों की सूची में यादव समाज और संघियों का दबदबा देखने को मिला है। तीन अध्यक्ष यादव समाज के बनाए गए हैं तो वहीं करीब 15 अध्यक्ष संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। इस सूची को देख कर भाजपा के जो कोर कार्यकर्ता हैं वो भी हैरान और परेशान हैं। कार्यकर्ता इस वक्त चिंतन और मंथन की स्थिति में चले गए हैं। शनिवार को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए भाजपा कार्यकर्ताओं से जब मुखबिरी का दौर शुरु हुआ तो सभी के दिल का दर्द बाहर आना शुरु हो गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाला कार्यकर्ता यही कह रहा है कि क्या हमारी उम्र टट और दरी बिछाने में ही निकल जाएगी। क्योंकि जिन्हें निगम-मंडल में शामिल किया जा रहा है वो तो मूल भाजपाई हैं ही नहीं। सरकार संघ की पृष्ठभूमि से आए लोगों पर मेहरबान है। उसके बाद जो पद बच रहे हैं वो यादव और फिर कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को दिए जा रहे हैं। मुखबिरी के दौरान जब कार्यकर्ताओं से पूछा गया कि आप अपनी शिकायत संगठन के सामने क्यों नहीं करते तो उनका कहना था कि संगठन में उनकी सुन कौन रहा है। उल्टे अगर वो कुछ कहने की हिम्मत करते हैं तो उन पर बागी होने अथवा कोई न कोई कमी होने का आरोप लगा कर चुप कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में जो पार्टी का मूल कार्यकर्ता हैं जो चुनाव के दौरान परिस्थिति में सरकार के साथ खड़ा रहता है उसको कोई तबज्जों नहीं दी जाती है। किसी तरह अगर कोई कार्यकर्ता कुछ हिम्मत भी जुटाता है तो उसको नोटिस थमा दिया जाता है। मुखबिरी के दौरान एक कार्यकर्ता कहता है कि जो नियुक्तियां हो रही हैं उससे कोई कार्यकर्ता खुश नहीं हैं लेकिन दहशत में जरुर हैं। क्योंकि कोई कार्यकर्ता अपनी जुवान खोलेगा तो उसको नोटिस थमा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में कौन सा कार्यकर्ता अपनी जुवान खोल सकता है। लिहाजा कार्यकर्ता सब कुछ देख कर भी धृतराष्ट्र बने रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि साल 2027 से चुनावी वर्ष शुरु होने जा रहा है। और जिस प्रकार से नियुक्तियां हो रही हैं उससे हजारों कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका है। अब टूटे मन से कौन सा कार्यकर्ता खड़ा होगा। यह भाजपा के सामने एक बड़ा सवाल है।

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