'अदृष्य' भाजपा कार्यालय बना बड़े फैसलों का 'केन्द्र' प्रदेश कार्यालय में दिखावे की होती हैं बैठकें

मप्र भाजपा इन दिनों अलग ही मोड़ पर चल रही है। इसका रिमोट कंट्रोल कहीं और से ही दब रहा है और वहीं से नियुक्तियां हो रही हैं। कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों को बैठाया जा रहा है और जनसुनवाई की जा रही है। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। पार्टी के कार्यकर्ता भी अब धीरे-धीरे समझने लगे हैं कि यहां पर 'हाथी के दात' जैसी स्थिति बन गई है जो दिखता कुछ है और होता कुछ और है। मंत्रियों के बैठने के बावजूद भी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं की घटती भीड़ इस बात का प्रमाण दे रही है कि अब कार्यकर्ताओं को इस बात का अहसास हो चुका है कि प्रदेश कार्यालय तो बस दिखावे के लिए है बांकी फैसले कहीं और से ही हो रहे हैं। जिस प्रकार से निगम-मंडलों को लेकर सरकार से लेकर संगठन में रहस्य बना हुआ है उससे कार्यकर्ता अब विचलित होने लगे हैं। मोहन सरकार अपनी कामयाबी के दो साल मना रही हैं लेकिन इतने दिनों में निगम-मंडलों की नियुक्ति न कर पाने से सरकार खुद के ही कार्यकर्ताओं में विश्वास कायम रख पाने में नाकाम हो रही है। दूसरी तरफ पार्टी में जरुरत से ज्यादा रहस्य कार्यकर्ताओं के सब्र के बांध को फोड़ने का कार्य कर रहा है। संगठन में भी जिस प्रकार से अप्रत्याशित नियुक्तियां हुई उसकी कल्पना पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नहीं की थी। विधानसभा चुनाव से केन्द्रीय नेतृत्व ने चौंकाने वाले फैसले लेने शुरु किए थे जो अब भी बदस्तूर जारी हैं। हांलाकि केन्द्रीय नेतृत्व की आड़ लेकर सरप्राइज नियुक्तियों का मसला अब पार्टी के कार्यकर्ताओं को समझ आने लगा है। और उन्हें इस बात का अहसास होने लगा है कि अब फैसले दिल्ली से नहीं बल्कि भोपाल में स्थित अदृश्य कार्यालय से लिए जा रहे हैं। इस अदृश्य कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी सुबह सात बजे से नौ बजे तक और शाम सात बजे से 11 बजे के बीच पहुंचते हैं और वहीं से पार्टी की रणनीति तय हो जाती है। अदृश्य कार्यालय का आलम ये है कि उसके फैसलों के कारण ही कार्यकर्ताओं में असुरक्षा की भावना आती जा रही है। जिस पार्टी में किसी भी कार्यकर्ता की लाटरी लग जाया करती थी उसी भाजपा में अब सिफारिस से पद दिए जा रहे हैं। इस प्रकार से हो रहे फैसलों के कारण अब कार्यकर्ताओं के मन में निराशा घर बनाती जा रही है इसी लिए कार्यकर्ताओं ने एसआइआर में भी दिलचस्पी नहीं ली वहीं सीएम के दो वर्ष पूर्ण होने पर भी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को नहीं मिला।
Reader Reactions
What is your reaction to this story?अजय जामवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने मंत्री प्रतिमा बागरी की लगाई क्लास बढ़ सकती हैं मुस्किलें
रीवा में भाजपा खुद की पार्टी से एक भी नेता नहीं कर पाई तैयार सातों विधायक दूसरे दल से आए चला रहे भाजपा
Reader Discussion & Comments (0)
Moderated CommentsRelated Top News

हर पंचायत में वालेंटियर तैनात करेगी सरकार,फसलों का मुआबजा पटवारी नहीं वालेंटियर करेगा तय,भाजपा का वोट बैंक होगा मजबूत
6/8/2024
पंचायत सचिवों के लिए बड़ी खबर,अब अन्य जिलों में भी मिलेगी स्वजनों को अनुकंपा नियुक्ति,नियम में होगा संशोधन
22/5/2024
4% डीए देने का ऐलान,शासकीय कर्मचारियों को मिला तोहफा,चार फीसदी बढ़ा डीए,सीएम यादव ने की घोषणा
28/10/2024