Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

पटवारी जिनका नाम 'जीतू' है लेकिन इनके नसीब में 'जीत' शब्द नहीं है क्योंकि ये जमीन पर कम हवा में ज्यादा बात रहते हैं

Jul 6, 2026 3 min read
पटवारी जिनका नाम 'जीतू' है लेकिन इनके नसीब में 'जीत' शब्द नहीं है क्योंकि ये जमीन पर कम हवा में ज्यादा बात रहते हैं
ADVERTISEMENT
Font Size:

साल 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा जिसके बाद युवा चेहरा जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस का अध्य बनाया गया लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व का यह दांव इतनी बुरी तरह फेल होगा किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक जानकारों को लग रहा था कि एक युवा चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है तो अब पार्टी में कुछ नया होगा लेकिन इतना नया होगा कि प्रदेश में एक दलीय प्रथा हो जाएगी यह किसी ने नहीं सोचा था। अध्यक्ष बनते ही जीतू पटवारी प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीट हारे उस वक्त सभी को लगा नया- नया अध्यक्ष है काम समझने के लिए कुछ वक्त चाहिए। यही सोचते-सोचते तीन वर्ष का वक्त बीतने चगा लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी के लिए कुछ ऐसा नहीं कर पाए जिससे यह लगे कि कांग्रेस मजबूत हुई है। जब से अध्यक्ष बने तब से अब तक कांग्रेस हर मोर्चों पर फेल होती चली गई। चुनाव में जीत की बात हो अथवा पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को धरातल में उतारने की बात हो हर जगह कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी फेल हुए। इनसे एक काम बहुत अच्छे तरीके से बनता है कुछ दिन शांत रहते हैं और जब कोई न्यूज़ पेपर सत्ता पक्ष के खिलाफ कोई बड़ी खबर छापता है तब वो जागते हैं और उस अखबार की कटिंग लेकर प्रेसवार्ता आयोजित करते हैं और सरकार पर जम कर आरोप लगाते हैं। अगले दिन जब मीडिया में वो खबर नहीं छपती तो फरमान जारी करते हैं कि मीडिया के खिलाफ पार्टी का 'मौन सत्याग्रह' चल रहा है। कोई पटवारी को यह नहीं समझाता कि आप अखबार की कटिंग से आरोप लगाएंगे तो दूसरा मीडिया वाला क्यों स्थान देगा। जो खबर छप चुकी है उसी खबर को दूसरा मीडिया वाला क्यों दिखाएगा और क्यों छापेगा। हाल ही में पटवारी ने जिस प्रकार से सीएम पर कथित जमीन खरीदी का आरोप लगाया जिसे मीडिया ने दिखाया लेकिन उन्हीं की पार्टी के पूर्व सीएम ने अध्यक्ष के आरोपों को निराधार बता दिया ऐसी स्थिति में पटवारी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा सरकार पर की तरह के आरोप लगाए गए लेकिन एक भी आरोप विपक्ष साबित नहीं कर पाया अब स्थिति ऐसी बन चुकी है कि कांग्रेस में काम करने वाले पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को ही अपने अध्यक्ष पर विश्वास नहीं रहा। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश में विपक्ष की भूमिका न के बराबर होती जा रही है।

ADVERTISEMENT

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT