मध्य प्रदेश
'शिव' के बाद 'सिंधिया' बने भाजपा के दूसरे फुफा पार्टी की बैठकों से किनारा करने के बाद भोपाल से बनाई दूरी
मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों फुफाओं की फौज तैयार हो रही है। पहले मामा से शिवराज फुफा बने थे जिनसे पूरा प्रदेश परिचित है और अब उसी रास्ते पर ज्योतिरा...
• Nov 4, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: 'शिव' के बाद 'सिंधिया' बने भाजपा के दूसरे फुफा पार्टी की बैठ
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मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों फुफाओं की फौज तैयार हो रही है। पहले मामा से शिवराज फुफा बने थे जिनसे पूरा प्रदेश परिचित है और अब उसी रास्ते पर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अग्रसर हैं। बीजेपी की दो कोर ग्रुप की बैठकों से सिंधिया गायब रहे। जिसका पार्टी की तरफ से अन्य कारण बताया गया लेकिन हकीकत उससे कोसों दूर है। दरअसल साल 2019 में सिंधिया भाजपा में आए थे उस वक्त उन्हें पार्टी में खूब महत्व दिया गया लेकिन साल 2023 में जब भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना ली तो सिंधिया का महत्व पार्टी में कम होने लगा। हांलांकि सिंधिया के साथ दहेज में आए कुछ नेताओं को मोहन सरकार में इस बार भी मंत्री बनाया गया है लेकिन उसमें भी कटौती कर दी गई है। उसके अलावा जिस प्रकार से सिंधिया एमपी की राजनीति में हस्तक्षेप कर रहे थे उस पर भी सरकार और संगठन ने विराम लगा दिया है। पिछले कुछ महीनों से ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे ग्वालियर तक ही सीमित रह गए हैं। अब वो भोपाल की तरफ रुख नहीं करते हैं। सिंधिया का बीजेपी से नाराजगी का आलम ये है कि वो पिछले दरवाजे से कांग्रेस में इंट्री मारने की तैयारी कर रहे हैं। मुखबिरों की मानें तो सिंधिया कांग्रेस में घर वापसी के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। उनकी लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस अब तक उनको शामिल करने के लिए राजी नहीं हुई है। क्योंकि कांग्रेस की सत्ता में 15 साल बाद वापसी हुई थी और उन्होने उसी सरकार से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया था। जिसके ज़ख्म कांग्रेस में अब भी हरे हैं। हांलांकि मध्य प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें लेने पर सहमत हो रहे हैं लेकिन सिंधिया की शर्थ आड़े आ रही है। सिंधिया चाहते हैं कि पार्टी उन्हें सीएम के चेहरे के तौर पर लांच करे लेकिन कांग्रेस में नेताओं के बीच उनके लिए आम राय नहीं बन पा रही है। कुल मिला कर ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी भाजपा में बरकरार है। जिसका उदाहरण बार-बार देखने को मिल चुका है। आने वाला साल 2028 सिंधिया और भाजपा के बीच बहुत कुछ देखने को मिलने वाला है। क्योंकि फुफा जी की नाराजगी लगातार बनी हुई है और उन्हें मनाने की कोशिश भी नहीं की जा रही है। ऐसी स्थिति में सिंधिया के पास घर वापसी के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।
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