Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

पटवारी और सिंघार के बीच चल रही 'जमीनी रस्सा-कसी' के बीच कार्यकर्ताओं को दिल्ली ले जाने की विकट स्थिति कैसे होगा भीड़ का 'टारगेट पूरा'

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने विकट समस्या आकर खड़ी हो गई है। दरअसल एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस पैदल मार्च निकालने जा र...

• Oct 31, 2026• 3 min read
पटवारी और सिंघार के बीच चल रही 'जमीनी रस्सा-कसी' के बीच कार्यकर्ताओं को दिल्ली ले जाने की विकट स्थिति कैसे होगा भीड़ का 'टारगेट पूरा'

📷 Cover Photo: पटवारी और सिंघार के बीच चल रही 'जमीनी रस्सा-कसी' के बीच कार्

ADVERTISEMENT
Font Size:
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने विकट समस्या आकर खड़ी हो गई है। दरअसल एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस पैदल मार्च निकालने जा रही है जिसमें दस लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटाने का दावा किया गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सभी प्रदेश इकाइयों को निर्देशित करते हुए कहा है कि वो ज्यादा से ज्यादा संख्या में कार्यकर्ताओं की भीड़ लेकर दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रीय नेतृत्व के आदेश का पालन करना एमपी कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी की मजबूरी है। अब उनके सामने सवाल इस बात का उठ रहा है कि वो इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को कैसे जुटाएं। एक बार एमपी का मामला होता तो जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के हाथ- पैर भी जोड़ लेते लेकिन यहां तो मामला दिल्ली का है। कार्यक्रम तो एक दिन का है लेकिन कार्यकर्ताओं के आने-जाने का समय तीन दिन का हो जाएगा। बड़े कार्यकर्ता तो दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं लेकिन छोटे कार्यकर्ता जो छोटे व्यवसाय अथवा खेती से अपना जीवन यापन करते हैं उनके लिए दिल्ली दूर लग रही है। दूसरा और भी बड़ा कारण है। जीतू पटवारी को राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष भले बना दिया हो लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच अब भी उनकी स्वीकार्यता न के बराबर है। पार्टी के कार्यकर्ता दिखावे के लिए भले उन्हें अध्यक्ष कहते हों लेकिन पीठ पीछे यही कहते हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष बना कर खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। दरअसल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का कार्यकर्ताओं के प्रति जो व्योहार है उससे कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं हैं। दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं में एक बात घर करके बैठी है कि जो नेता खुद की सीट बचा नहीं पाया उस नेता को सरकार बनाने और प्रदेश भर में सीट जिताने का जिम्मा दिया गया है ऐसा नेता कैसे कांग्रेस की सत्ता में वापसी करा पाएगा। गौरतलब से कि साल 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बीच वर्चस्व की भी लड़ाई चल रही है। एक नेता जमीन पर बैठता है तो दूसरा नेता भी जमीन पर ही बैठता है। दोनों के बीच चल रही जमीनी रस्सा कशी को पार्टी के कार्यकर्ता काफी गंभीरता से देख रहे हैं इसी लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए फिलहाल दिल्ली दूर लग रही है।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT