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मध्य प्रदेश

दतिया में अब तक कार्यकारिणी घोषित करने में नाकाम रही भाजपा पूर्व कांग्रेसियों पर दांव लगाने की तैयारी

दतिया उप चुनाव में भाजपा ने पहले ब्राह्मण नेता डाक्टर नरोत्तम मिश्रा को उपेक्षित कर आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया तो वहां के कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए।...

• Nov 2, 2026• 3 min read
दतिया में अब तक कार्यकारिणी घोषित करने में नाकाम रही भाजपा पूर्व कांग्रेसियों पर दांव लगाने की तैयारी

📷 Cover Photo: दतिया में अब तक कार्यकारिणी घोषित करने में नाकाम रही भाजपा प

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दतिया उप चुनाव में भाजपा ने पहले ब्राह्मण नेता डाक्टर नरोत्तम मिश्रा को उपेक्षित कर आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया तो वहां के कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए। गुस्साए नेतृत्व ने अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया। पूर्व जिला अध्यक्ष डाक्टर नरोत्तम मिश्रा के करीबी बताए जाते थे इस लिए भाजपा ने क्षत्रिय को दतिया का जिला अध्यक्ष बना दिया। मानवेन्द्र सिंह परिहार अध्यक्ष तो बन गए लेकिन महीना भर बीतने के बाद भी अब तक वो जिला कार्यकारिणी घोषित कर पाने में नाकाम हैं। मुखबिरों के मुताबिक दतिया में यादव और क्षत्रिय वाद चलाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। खबर है कि पूर्व में कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को जिला अध्यक्ष कार्यकारिणी में शामिल कराना चाहते हैं। क्योंकि भाजपा के जो मूल कार्यकर्ता हैं वो सभी पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा से जुड़े हैं और उनके कट्टर समर्थक हैं। भाजपा चाहती है कि इस बार ऐसे पदाधिकारी बनाए जाएं जो पूर्व गृह मंत्री के समर्थक नहीं बल्कि पार्टी के समर्थक हों। ऐसी स्थिति में पूर्व कांग्रेसियों पर पार्टी दांव लगाना चाहती है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। क्योंकि पदाधिकारी तो कहीं से भी ढूंढ कर बना दिए जाएंगे लेकिन कार्यकर्ता तो वही रहेंगे जिन्होंने पूर्व गृह मंत्री के समर्थन में पूरे दतिया को जाम कर दिया था। भाजपा इस वक्त पसोपेश की स्थिति में है। एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खाई है। सत्ता के केन्द्रबिंदु के इशारों पर चल रहा संगठन फैसले लेने में पूरी तरह से नाकाम हो रहा है। क्योंकि संगठन अपने हिसाब से नियुक्त चाहता है और सत्ता के मुखिया अपने हिसाब से पदाधिकारियों की नियुक्ति चाहते हैं। जिसमें यादवों को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल पाए। इन सभी ऊहा-पोह की स्थिति में प्रदेश नेतृत्व कोई फैसला नहीं कर पा रहा है। उसका साइड इफेक्ट ऐसे निकल रहा है कि दतिया में भाजपा की हालत बद से बद्तर होती जा रही है। पूर्व गृह मंत्री को घर बैठाने के चक्कर में दतिया पूरी तरह से कांग्रेस मय होने की स्थिति में आ चुकी है। पहले ही दतिया से कांग्रेस ने चुनाव जीत कर यह बता दिया है कि यह सीट भाजपा की नहीं कांग्रेस की पारंपरिक सीट है। ऊपर से भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री को घर बैठाने की मंशा के चलते खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। अति उत्साह के दौर से गुजर रही भाजपा उप चुनाव में चारों खाने चित्त हो चुकी है उसके बाद भी भाजपा का नेतृत्व नहीं चेत रहा। अब भी समय है अगर भाजपा का प्रदेश नेतृत्व सत्ता के चश्मे को उतार कर सही फैसला लेने में नाकाम रहा तो साल 2028 में भाजपा का दतिया जिले से सूपड़ा साफ होने में देर नहीं लगेगी।

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