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मध्य प्रदेश खनिज विभाग में ज्वाइन डायरेक्टर जितेन्द्र सोलंकी की 'ढाल' बने संचालक फ्रेंक नोबल ए

मध्य प्रदेश संचालनालय भौमिक तथा खनिकर्म में राम-लखन की जोड़ी जम कर काम कर रही है। यह राम लखन की जोड़ी एक दूसरे के प्रति इतनी वफादार हैं कि इन किसी के ...

• Nov 2, 2026• 2 min read
मध्य प्रदेश खनिज विभाग में ज्वाइन डायरेक्टर जितेन्द्र सोलंकी की 'ढाल' बने संचालक फ्रेंक नोबल ए

📷 Cover Photo: मध्य प्रदेश खनिज विभाग में ज्वाइन डायरेक्टर जितेन्द्र सोलंकी

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मध्य प्रदेश संचालनालय भौमिक तथा खनिकर्म में राम-लखन की जोड़ी जम कर काम कर रही है। यह राम लखन की जोड़ी एक दूसरे के प्रति इतनी वफादार हैं कि इन किसी के ऊपर कोई भी समस्या आती है तो एक दूसरे का बचाव करने के लिए खड़े रहते हैं। इस मामले का उस वक्त खुलासा हुआ जब ज्वाइन डायरेक्टर जितेन्द्र सोलंकी से संबंधित सूचना के अधिकार के तहत कुछ सवाल पूछे गए । यहीं से दोनों अधिकारियों की आपसी जुगलबंदी के संकेत मिले। दरअसल ज्वाइन डायरेक्टर की सालाना आय की जानकारी मांगी गई थी। जो सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में आती है। यह जानकारी प्रति वर्ष विभाग द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों से भी लेने का प्राविधान है। ज्वाइन डायरेक्टर साहब की इस जानकारी को छुपाने में पूरा विभाग लग गया। दो महीने बीतने के बाद भी खनिज विभाग जानकारी देने से आनाकानी कर रहा है। सिर्फ पेशियां कराई जा रही हैं नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है। प्रथम अपीलीय अधिकारी फ्रेंक नोबल हैं। उन्होंने दो बार सुनवाई के लिए बुलाया लेकिन सुनवाई के दौरान वो अपनी अधिकारी गीरी झाड़ने लगे। इन अधिकारियों ने सूचना के अधिकार के नियम को पूरी तरह नकार दिया है और उसकी परिभाषा अपने तरीके से गढ़ने लगे हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जो जानकारी सरकार को उपलब्ध कराई जा रही है वही जानकारी सूचना के अधिकार में क्यों नहीं दी जा रही। जितेन्द्र सोलंकी पिछले दस साल से एक ही कार्यालय में जमे हैं जबकि नियम के मुताबिक किसी भी अधिकारी कर्मचारी को एक स्थान पर तीन साल से अधिक नहीं रहना है। फिर जितेन्द्र सोलंकी ने ऐसी कौन सी शहद चटा रखी है जिसके कारण सभी कर्मचारियों के तबादले हो रहे हैं सिर्फ सोलंकी को छोड़। यहां पर एक और भी खास बात देखने को मिली है। यहां पर अधिकारियों को मंहगे फोन का भी खूब चस्का लगा है। खनिज विभाग के अधिकारियों के हाथ में साढ़े चार लाख के मोबाइल यह बताने में पर्याप्त हैं कि खनिज विभाग कितनी तेजी से तरक्की कर रहा है।

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