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मध्य प्रदेश

MP में नगरीय निकाय चुनाव टलना तय खुद की पोल न खुले इस लिए जनगणना का लगाया जाएगा बहाना विधानसभा के बाद होंगे चुनाव

मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव जनगणना के कारण प्रभावित हो सकते हैं। वजह वार्ड से लेकर नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगमों की आरक...

Sep 24, 2026 3 min read
MP में नगरीय निकाय चुनाव टलना तय खुद की पोल न खुले इस लिए जनगणना का लगाया जाएगा बहाना विधानसभा के बाद होंगे चुनाव

📷 Cover Photo: MP में नगरीय निकाय चुनाव टलना तय खुद की पोल न खुले इस लिए जन

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मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव जनगणना के कारण प्रभावित हो सकते हैं। वजह वार्ड से लेकर नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगमों की आरक्षण प्रक्रिया है। इसका समय आ चुका है, लेकिन जनगणना का काम चलने से राज्य सरकार इसे आगे बढ़ा सकती है।

दरअसल, जनगणना के बाद नए वार्ड बनेंगे और मौजूदा नगरीय निकायों की सीमाएं भी बदलेंगी। इसी को देखते हुए चुनाव 6 महीने के लिए आगे बढ़ाए जा सकते हैं। हाल ही में कानून-व्यवस्था और बारिश का हवाला देकर कुछ निकायों के चुनाव स्थगित कराए गए हैं।

413 निकायों में 7,679 वार्डों पर होना है चुनाव

प्रदेश में 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद मिलाकर कुल 413 नगरीय निकाय हैं। इनमें महापौर, अध्यक्ष के साथ 7,679 वार्ड पार्षद पदों के लिए चुनाव होने हैं।

इस बार बड़ी बदलाव यह है कि नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे जनता के वोट से होगा। SC-ST और OBC के साथ महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी घोषित कर दिया है।

लेकिन जनगणना चलने से न तो वार्ड परिसीमन हो पा रहा है और न ही नए नियम बन पा रहे हैं। वहीं सरकार ने कुछ पंचायतों को मिलाकर नए नगर परिषद बनाने की घोषणा की है, लेकिन जनगणना पूरी होने तक इनका गठन भी नहीं हो सकेगा।

जल्दबाजी नहीं करना चाहती सरकार

मुखबिर को मिली जानकारी के अनुसार सरकार को अपनी हकीकत मालूम है। जिस प्रकार से पार्टी के अंदर और बाहर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है उससे जनता के मन में भाजपा के प्रति भ्रम की स्थिति बन गई है। ऐसे में अगर चुनाव होता है और भाजपा को हार मिलती है तो साल 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसका विपरीत असर पड़ सकता है इसी लिए सरकार कासी भी बहाने नगरीय निकाय का चुनाव टालने की रणनीति पर काम कर रही है। 

नगरीय निकाय चुनाव दलीय आधार पर होते हैं, इसलिए इनके परिणामों का असर विधानसभा चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक माहौल पर भी पड़ता है। 2022 के चुनाव में महापौर का चुनाव सीधे जनता से हुआ था, जिसमें 16 में से 5 नगर निगमों में कांग्रेस के महापौर जीते थे, जबकि सिंगरौली में AAP की रानी अग्रवाल महापौर बनी थीं।

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