Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

बीजेपी में संभागों की लहर बरपा सकती है कहर रीवा से ग्वालियर फिर इंदौर और बुंदेलखंड में विद्रोह का निकल रहा लावा

पहले हंगामा फिर सन्नाटों के दौर से गुजरी मध्य प्रदेश भाजपा में एक बार फिर संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर शुरु हो गया है। इन नियुक्तियों के चलते पार्टी ...

Sep 24, 2026 4 min read
बीजेपी में संभागों की लहर बरपा सकती है कहर रीवा से ग्वालियर फिर इंदौर और बुंदेलखंड में विद्रोह का निकल रहा लावा

📷 Cover Photo: बीजेपी में संभागों की लहर बरपा सकती है कहर रीवा से ग्वालियर

ADVERTISEMENT
Font Size:
पहले हंगामा फिर सन्नाटों के दौर से गुजरी मध्य प्रदेश भाजपा में एक बार फिर संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर शुरु हो गया है। इन नियुक्तियों के चलते पार्टी की आंतरिक कलह पर फिलहाल कोई बात नहीं कर रहा है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि यहां पर विवाद खत्म हो चुका है। 

रीवा में राजेन्द्र शुक्ल के खिलाफ अनशन और इस्तेफे की मांग

रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के बाद उनके पिता ने पूरे स्वास्थ व्यवस्था के टांके को खोल कर रख दिया। मजबूरन पुलिस को उन्हें उठा कर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। राजेन्द्र शुक्ल और भाजपा को लेकर पूरे रीवा एक अलग ही माहौल है। उसके अलावा राजेन्द्र शुक्ल और V/S सिद्धार्त और गिरीश गौतम के बीच चल रही पावर की लड़ाई भाजपा को गर्त की ओर लेकर जा रही है जिसे प्रदेश नेतृत्व और राष्ट्रीय नेतृत्व देख कर अनदेखा कर रहे हैं। 

सागर जहरीली शराब कांड के चिंताओं की आग अब तक शांत नहीं हुई 

सागर जिले में जहरीली शराब पीने से जिस प्रकार से मौतें हुई उसका गुनाह भी भाजपा के सिर पर है। सरकार में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और उनके रिश्तेदारों पर जहरीली शराब बिकवाने का आरोप लगा लेकिन सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके अलावा गोविंद सिंह राजपूत,भूपेन्द्र सिंह और गोपाल भार्गव के बीच जो वर्चस्व की लड़ाई चल रही है वो किसी से छुपी नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लेकिन वरिष्ठ नेतृत्व को बिगड़ते हालात से कोई लेना देना नहीं है जनता मरती है तो मरने तो कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा में देखने को मिल रही है। 


सीएम और कैलाश विजयवर्गीय का युद्ध सार्वजनिक मंच पर आया

17 सितंबर को पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इंदौर दौरे पर थे इस दौरान जो कुछ भी हुआ उसका शाक्षी पूरा देश बना। जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव ने पूरे कार्यक्रम का श्रेय एक नेता को दिया उससे कैलाश विजयवर्गीय के दिल में छिपा दर्द बाहर आ गया और उन्होंने मंच से ही यह अहसास दिला दिया कि उनके और सीएम के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये बात और है कि नितिन नबीन अपने अविभावक की बात को समझ पाए अथवा नहीं लेकिन इसके साइड इफेक्ट मालवा की जनता झेल रही है। 

ग्वालियर में सिंधिया को दिखाए गए काले झंडे


ग्वालियर में कुशवाहा छात्रावास के भूमिपूजन समारोह में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाषण के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध किया। विरोध के बाद सिंधिया समर्थकों और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। ये स्थिति आज भाजपा की हकीकत को बयां कर रही है कि जनता के मन में भाजपा के प्रति क्या भावना है। प्रदेश के हर कोने में भाजपा नेताओं के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए बड़ी चुनौती हैं। भाजपा का महीने भर का सेवा संकल्प अभियान भी चल रहा है जिसके तहत संभाग स्तरीय बैठकों का आयोजन हो रहा है उन बैठकों में अजय जामवाल के सामने ही पदाधिकारियों के बीच मतभेद और मनभेद उभर कर सामने आ रहे हैं और वो देख कर भी कुछ नहीं करने की स्थिति में लग रहे हैं। अब सवाल ये उठता है कि सरकार के नेतृत्व कर्ता को यह कुछ नहीं दिख रहा है और बात 2028 को फतह करने की हो रही है। जिस भाजपा के नेताओं में ही महाभारत छिड़ी है उस भाजपा में कार्यकर्ता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे और जिस जनता के वोट से सरकार बनती है वही जनता भाजपा को वोट कैसे देगी। एक कुशल संगठक कहलाने वाले हेमंत खंडेलवाल के आगे चुनौतियों का अंबार है जिससे वो कैसे पार लगेंगे अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT