मध्य प्रदेश
निर्मला सप्रे की विधायकी पर 'सुप्रीम' फैसला कोर्ट ने दिया 2 महीने का अल्टीमेटम नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की थी याचिका
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में भूचाल ला देने वाला फैसला आ गया है
• Nov 4, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: निर्मला सप्रे की विधायकी पर 'सुप्रीम' फैसला कोर्ट ने दिया 2
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भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में भूचाल ला देने वाला फैसला आ गया है। बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर बीजेपी में शामिल हुईं विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी पर अब तलवार लटक गई है। सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष को 2 महीने के अंदर फैसला लेने का सख्त निर्देश दिया है।
उमंग सिंघार का वीडियो वायरल, बोले- ये संविधान की जीत है
फैसले के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वीडियो जारी कर सुप्रीम कोर्ट का आभार जताया। उन्होंने कहा -
> "बीना से कांग्रेस के टिकट पर चुनी गई विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की गरिमा को मजबूत करने वाला है। जनता ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस के टिकट पर चुनकर भेजा था। जनादेश के साथ विश्वासघात करने वालों को दल-बदल कानून के तहत जवाबदेह बनाना जरूरी है।"
सिंघार ने भरोसा जताया कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर अब शीघ्र, निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय लेंगे।
क्या है पूरा मामला? समझिए 2 मिनट में
1. 2023 में कांग्रेस से जीतीं: निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी।
2. मई 2024 में पलटी मारी: लोकसभा चुनाव के दौरान वे अचानक सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में बीजेपी के मंच पर दिखीं और बीजेपी में शामिल हो गईं।
3. याचिका दायर: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के सामने दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने की याचिका दायर की।
4. 2 साल से लटका था मामला: विधानसभा में सुनवाई पूरी होने के बाद भी 2 साल से फैसला नहीं हो रहा था। हाईकोर्ट ने भी कहा- इसमें कोई अर्जेंसी नहीं है।
5. सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सिंघार: वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। CJI सूर्य कांत की बेंच ने कहा- "दल-बदल जैसे मामलों को लटकाया नहीं जा सकता, चाहे कार्यकाल में कितना भी समय बचा हो।"
अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब स्पीकर को 2 महीने में अयोग्य घोषित करना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला लेना ही होगा। अगर निर्मला सप्रे अयोग्य हुईं तो बीना में फिर से उपचुनाव होगा।
इस फैसले के बाद MP की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इसे जनादेश की जीत बता रही है, तो बीजेपी खेमे में खामोशी है।
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