#Narendra Singh Tomar
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वर्चश्व की लड़ाई में अब आमने-सामने होंगे तोमर और सिंधिया,कार्यकारिणी के साथ निगम-मंडल की नियुक्तियों पर होगा संघर्ष

विधानसभा में उपाध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस ने उठाई मांग,विस अध्यक्ष को पत्र लिख कर कांग्रेस ने मांगा पद

विरासत,इतिहास और उद्योग थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव में अंबानी और अडानी समूह करेंगे निवेश

अध्यक्ष बनने के लिए रामेश्वर शर्मा ने लगाया एड़ी-चोटी का बल,दिल्ली से लेकर भोपाल तक नेताओं से मुलाकात कर की खुद के लिए लॉविंग

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सिवनी सड़क घोटाले का रीवा से जुड़ा तार,विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कहा आरोप सिद्ध हुए तो विधायकी से दे दूंगा इस्तीफा

मोदी के मंत्रिमंडल में सामान्य वर्ग के साथ खेला,एमपी से एक भी चेहरे को नहीं मिला मौका,72 मंत्रियों ने ली शपथ

विधानसभा में दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन,नेता प्रतिपक्ष ने विधायकों के प्रटोकाल पर उठाया सवल
मप्र वाधानसभा (mp vidhan sabha) में दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम ओम बिड़ला (om birla) के अलाव उत्तरप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष भी शामिल हुए हैं। दो दिनों तक चलने वाले प्रबोधन कार्यक्रम में नए चुन कर आए विधायकों को विधानसभा की बारीकियों के बारे में बताया जाना है। प्रबोधन के माध्यम से विधायकों को सदन में सवाल करने की ट्रेनिंग भी दी जानी है। प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने (umang singhar) कुछ गंभीर बातें कही हैं। उन्होने कहा कि अब विधायक विधानसभा में सवाल लगाते हैं तो अधिकारी कर्मचारी ठीक तरीके से जवाब नहीं देते। कुछ भी गलत जानकारी भेज देते हैं और उसी गलत जानकारी को संबंधित विभाग के मंत्री विधानसभा में प्रस्तुत कर देते हैं। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विधायकों के प्रटोकाल में भी काफी लापरवाही बरती जा रही है। जातने विधायक आते हैं वो अपने क्षेत्र की जनता के प्रतिनिधि हैं लिहाजा उनको सम्मान मालना जरुरी है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) ने भी प्रबोधन कार्यक्रम में विधायकों की सुख सुविधा के मामले का प्रबोधन में उल्लेख किया है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जो पुराने विधायक विश्राम गृह हैं वो अनुपयोगी हो चुके हैं लिहाजा अब उनकी जगह पर नए विधायक विश्राम गृह का निर्माण किया जाना चाहिए। जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने सहस्त्र स्वीकार करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने जो मांग की है उसका पालन किया जाएगा। प्रदेश सरकार की ओर से धनराशि की समस्या नहीं आने दी जाएगी।

मप्र और छग की विधानसभा में आज से 'ठाकुर' राज
भारतीय जनता पार्टी ने मप्र और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज कर सरकार बना ली है (assembly elections)। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने चौकाने वाला निर्णय भी लिया है। छत्तीसगढ़ में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे सबसे सीनियर नेता डॉ. रमन सिंह (Raman Singh) को छत्तीसगढ़ विधानसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उसी प्रकार एमपी में सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे चलने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Toma) rको मप्र विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यानि इससे यह तय हो गया है कि अब मप्र और छत्तीसगढ़ की विधानसभाओं में ठाकुरों का ही राज चलेगा। इस प्रकार का संयोग भी पहली बार देखने को मिला है। एमपी विधानसभा में ज्यादातर पंतित विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं और छत्तीसगढ़ में अभी तक चार विधानसभा अध्यक्ष बने और हर बार अलग-अलग वर्ग के अध्यक्ष बनाए गए हैं और इस बार भी वह प्रक्रिया लगातार जारी है।

मोहन यादव की कैबिनेट में राजगढ़ जिले से मिल सकता है मंत्री पद
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी के मनोनीत मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोहन यादव के साथ जगदीश देवड़ा (jagdish dewda) और राजेश शुक्ला (rajesh shukla) ने भी राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बता दें, बीजेपी ने मुरैना से विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (narendra singh tmar) को विधानसभा स्पीकर नियुक्त किया है। वहीं, आज वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव (gopal bhargava) को प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई गई। अब सबके मन में सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश की नई सरकार में कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि 30 से 35 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में मंत्री पद पर उनका हक ज्यादा बताया जा रहा है जहां वोट प्रतिशत अधिक रहा है। वोट प्रतिशत अधिक, इसलिए मंत्री पद पर हक ज्यादा राजगढ़ जिले की पांचों सीटों पर भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की है। राजगढ़ जिले में वोट प्रतिशत 80 रहा है। ऐसे में इस जिले से नई सरकार में मंत्री पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। जिले की ब्यावरा विधानसभा सीट से नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ सीट से अमर सिंह यादव और नरसिंहगढ़ से मोहन शर्मा का नाम शामिल है। बता दें कि पिछली 15 वीं विधानसभा में इस जिले से कोई मंत्री नहीं था। वहीं, 18 महीने की कांग्रेस सरकार में खिलचीपुर सीट से विधायक प्रियव्रत सिंह को ऊर्जा मंत्री बनाया गया था। ऐसे में नई सरकार इस जिले से किसी एक विधायक को मंत्रीमंडल में शामिल कर सकती है। बता दें कि शिवराज सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव राजगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री रह चुके हैं। जिसका फायदा जीतकर आए विधायकों को मिल सकता है। इन सीटों पर 80 प्रतिशत वोट राजगढ़, आगर-मालवा, नीमच, शाजापुर, सिवनी, राजगढ़ और रतलाम इनका हक ज्यादा राजगढ़ और सिवनी इन सीटों पर 75 से फीसदी तक बालाघाट, डिंडौरी, मंदसौर, श्योपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम, देवास, विदिशा, खरगोन और शहडोल इनका हक ज्यादा श्योपुर, निवाड़ी और शहडोल

मोहन की 'अग्नि परीक्षा' चार दिग्गज परीक्षा लेने के लिए सदन में हमेशा रहेंगे मौजूद
डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। काफी समय बाद एमपी को नया मुख्यमंत्री मिला है लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने जिस प्रकार से चार वरिष्ठ नेताओं को मोहन यादव का जूनियर बनने के लिए उन्हे मजबूर कर दिया है तो क्या वो चारों दिग्गज अपनी सिकस्त को ऐसे ही स्वीकार कर लेंगे या फिर डॉ. मोहन यादव के लिए समस्या भी खड़ी करेंगे। इस बात में कोई शक नहीं है कि डॉ. मोहन यादव एक सुलझे हुए खिलाड़ी हैं लेकिन जिन सीनियरों को उनका जूनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया गया है तो क्या वो अपमान के आंसू पी कर ऐसे ही अपनी सियासी जमीन खिसकते हुए देखते रहेंगे। कहते हैं दुस्मन का दुस्मन दोस्त होता है ठीक वैसा ही जैसा मोहब्बत और जंग में सबकुछ जायज होता है। लिहाजा राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही कोई दुस्मन। मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) को पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष बना कर उन्हे उनके राजनीतिक कद का अहसास करवा दिया है तो वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की जमीन तैयार करने वाले कैलाश विजयवर्गीय (kailash Vijayvargiya) को भी भाजपा ने उनका कद और पार्टी में क्या हैसियत है वो बता दिया है। प्रलाद पटेल भी भाजपा के कद्दावर नेता हैं उम्र के अंतिम पड़ाव में वो भी अपना डेजिग्नेशन बदलना चाहते थे लेकिन केन्द्रीय नेत्रृत्व ने यह बता दिया कि आप विश्वास के लायक नहीं हो पहले पल्टी मार चुके हो। अब बात करते हैं एक ऐसे नेता कि जो पिछले 18 साल से एमपी बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा था। लाड़ली बहनों का भाई और लाड़ली लक्ष्मियों का मामा। प्रदेश में जब सब कह रहे थे कि सीएम विरोधी लहर है तब उन्होने सभी के समीकरण को धता बताते हुए 163 सीटें लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिर में नतीजा यह निकला कि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उन्हे भी दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर दिया। और तीसरी बार चुनाव जीत कर आए डॉ. मोहन यादव को मप्र का अगला मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल भाजपा के सभी नेताओं के होंठों पर मुस्कान तो दिख रही है लेकिन मुस्कान कुटिलता की भी निशानी होती है किसी को यह नहीं भूलना चाहिए। आने वाले समय में प्रदेश के नए मुखिया को अपने घर के अंदर ही जूझने के लाए तैयार रहना पड़ेगा।