मध्य प्रदेश
भाजपा सरकार ने संकट का 'मोचन' करने वाले नरोत्तम मिश्रा को घर बैठा दिया अब विपक्षी हमलों से बचने के लिए 'सड़क' पर सत्ता और संगठन
इतिहास गवाह है राजशाही रही हो या फिर लोकतंत्र में चलने वाली सरकारें सभी तंत्रों में ब्राह्मण नेता को सलाहकार के तौर पर रखा जाता था। और उसकी मिशाल पूर्...
• Nov 3, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: भाजपा सरकार ने संकट का 'मोचन' करने वाले नरोत्तम मिश्रा को घर
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इतिहास गवाह है राजशाही रही हो या फिर लोकतंत्र में चलने वाली सरकारें सभी तंत्रों में ब्राह्मण नेता को सलाहकार के तौर पर रखा जाता था। और उसकी मिशाल पूर्व की शिवराज सरकार रही है। जब भी सरकार में कोई संकट आता था तो पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा सरकार को बचाने के लिए ढाल का काम करते थे।दिसंबर 2022 के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस ने शिवराज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा था। सत्ता पक्ष (भाजपा) की तरफ से गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर जमकर चुटकी ली और कहा कि विपक्ष को ही अपने इस प्रस्ताव पर विश्वास नहीं है। सदन में नरोत्तम मिश्रा ने अपने संसदीय ज्ञान का ऐसा प्रदर्शन किया था जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। नरोत्तम मिश्रा ने ऐसा तर्क दिया जिसे कांग्रेस के नेता समझ ही नहीं पाए और अविश्वास प्रस्ताव पल भर में ध्वस्त हो गया था। ऐसे संकट मोचक को मोहन सरकार में घर बैठा दिया गया। नरोत्तम मिश्रा के जो समकक्ष नेता हैं उनकी जुवां पर ताला जड़ दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में विपक्ष के प्रत्येक हमले का सिर्फ सीएम मोहन यादव जवाब देते हैं। तीन साल बीतने चले सरकार की तरफ से कोई प्रवक्ता तय नहीं हो पाया जो विपक्षियों को करारा जवाब दे सकें। आज जिन परिस्थितियों से सरकार गुजर रही है उसका दोषी भी कोई और नहीं भाजपा सरकार के मुखिया खुद हैं क्योंकि उन्होंने अपने करीब किसी को फटकने ही नहीं दिया। ऐसा कोई साथी नेता तैयार नहीं किया जो सरकार के लिए कवच का काम कर सके। नरोत्तम मिश्रा को घर बैठा कर उनका जो नुक्सान किया तो किया लेकिन भाजपा की सरकार ने खुद का कितना बड़ा नुकसान किया इस बात का अंदाजा अभी भाजपा को नहीं लग रहा है। लेकिन जब चुनाव आएंगे और सवर्णों में ब्राह्मण वर्ग को साधने की बात आएगी तब समझ में आएगा कि नरोत्तम मिश्रा सिर्फ भाजपा के नेता नहीं थे बल्कि ब्राह्मण वर्ग का चेहरा थे जिसने हमेशा सरकार को संकट से उबारने पर काम किया और संकट मोचक की भूमिका निभाई। राजनीति में समय एक समान कभी नहीं रहता। समय और वक्त दोनों बदलते हैं लेकिन जब वक्त बदलेगा तो मोहन यादव को इस बात का जवाब देना होगा कि पद में रहते हुए उन्होंने सवर्णों के विरोध में क्या काम किया। क्योंकि सवर्ण ऐसा वर्ग है जो सड़क पर नहीं ईवीएम की मशीन पर जवाब देना पसंद करता है।
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