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मध्य प्रदेश

भाजपा सरकार के गले की 'फांस' बना OBC आरक्षण हां किया तो एसटी-एससी और सवर्ण नाराज मना किया तो ओबीसी

मध्य प्रदेश के सियासी पटल से गायब हो चुके कमलनाथ भाजपा और कांग्रेस के बीच एक ऐसा बीज बो कर चले गए जो कांग्रेस और भाजपा दों के गले की फांस बन चुका है। ...

• Nov 3, 2026• 2 min read
भाजपा सरकार के गले की 'फांस' बना OBC आरक्षण हां किया तो एसटी-एससी और सवर्ण नाराज मना किया तो ओबीसी

📷 Cover Photo: भाजपा सरकार के गले की 'फांस' बना OBC आरक्षण हां किया तो एसटी

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मध्य प्रदेश के सियासी पटल से गायब हो चुके कमलनाथ भाजपा और कांग्रेस के बीच एक ऐसा बीज बो कर चले गए जो कांग्रेस और भाजपा दों के गले की फांस बन चुका है। साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 से 27 प्रतिशत करने का अध्यादेश लाई थी। इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती मिली और 50 प्रतिशत आरक्षण का हवाला देकर न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। दो-तीन दिन तक कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में जम कर धमाचौकड़ी मचाई। लेकिन कानूनी सलाहकारों की राय लेकर वो शांत बैठ गए। कांग्रेस ने इस लड़ाई को प्रत्यक्ष लड़ने के बजाय अप्रत्यक्ष तरीके से लड़ने का रास्ता निकाल लिया जिससे किसी भी परिस्थिति में नुकसान भाजपा का हो। विधानसभा के सीतकालीन सत्र में कांग्रेस 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए संकल्प ला रही है। इसके जरिए कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। दरअसल भाजपा के सामने संकट यह है कि विधानसभा में भाजपा अगर संकल्प का विरोध करती है तो कांग्रेस को लाभ मिलेगा और समर्थन करती है तो एससी-एसटी और सवर्ण वर्ग नाराज हो जाएगा। प्रदेश में ओबीसी वोटर की संख्या 48 फीसदी बताई जाती है। इसी लिए दोनों दल इस वर्ग को साधने में लगे हैं। अब कांग्रेस विधानसभा में संकल्प लाकर भाजपा को उसी के जाल में फंसाना चाहती है। कांग्रेस का प्लान है कि भाजपा अगर संकल्प का विरोध करती है तो ओबीसी विरोधी बताया जाए और समर्थन करती है तो गेंद केन्द्र सरकार के पाले चली जाएगी कि 50 प्रतिशत की सीमा हटाने के लिए संविधान संशोधन लाए। भाजपा इस मामले में फिलहाल बैकफुट पर है। मुखबिरों के मुताबिक कांग्रेस ओबीसी आरक्षण के नाम पर ऐसे चक्रव्यूह की रचना करने पर काम कर रही है जिसे तोड़ने के लिए भाजपा को अभिमन्यु की तलाश करनी पड़ेगी। लेकिन सीएम मोहन यादव ने पार्टी के सभी अभिमन्यु को ठिकाने लगा कर पहले ही घर बैठा दिया है जों सरकार की ढाल का काम करते थे। अब भाजपा सरकार में जो मंत्री हैं वो 'धृतराष्ट्र' की सभा में बैठे दरवारी बन चुके हैं जो देख और सुन सकते हैं लेकिन बोल नहीं सकते।

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