मध्य प्रदेश
हाथ में कमल और जुवान पर कांग्रेस लेकर चलते हैं भाजपा विधायक सिद्धार्त तिवारी कांग्रेस के एजेंडे को जमीन पर उतारने का कर रहे प्रयास
त्योंथर से भाजपा विधायक सिद्धार्त तिवारी सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ही नहीं चलते हैं बल्कि वो कांग्रेस की भाषा में बात भी करते हैं। साल 2023 म...
• Sep 18, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: हाथ में कमल और जुवान पर कांग्रेस लेकर चलते हैं भाजपा विधायक
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त्योंथर से भाजपा विधायक सिद्धार्त तिवारी सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ही नहीं चलते हैं बल्कि वो कांग्रेस की भाषा में बात भी करते हैं। साल 2023 में कांग्रेस की उपेक्षा का शिकार हुए सिद्धार्त तिवारी ने ऐन मौके पर कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था और कमल के फूल का सहारा लेकर विधायक बने थे। लेकिन उनके DNA में कांग्रेस है जिसे वो कभी निकाल नहीं सकते हैं और उसकी बानगी समय-समय पर देखने को मिलती रहती है। त्योंथर में जितने भी भाजपा के मूल कार्यकर्ता हैं वो उपेक्षित होकर घूम रहे हैं और सभी कांग्रेस के कार्यकर्ता विधायक सिद्धार्त तिवारी के साथ घूमते हैं। सिद्धार्त को भाजपा में लाने का श्रेय डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल को ही जाता है लेकिन जब वो सिद्धार्त को भाजपा में लेकर आए थे तो शायद उन्हें यह नहीं मालूम था कि जिस युवा नेता को वो भाजपा में लेकर आ रहे हैं कल वही उनके लिए समस्या का सबब बनेगा। और हुआ भी वैसा ही हाथ में कमल थाम कर सिद्धार्त तिवारी विधायक बन गए और कांग्रेसी एजेंडे को लागू करने लगे। उनके दादा यानि श्रीनिवास तिवारी के सारे कार्यकर्ताओं को भी साथ में जोड़ लिया। साथ में कांग्रेस की भाषा का भी उपयोग करने लगे। एक-एक करके वो भाजपा के नेताओं पर ही हमला करने लगे। कुछ दिन पहले भाजपा विधायक दिव्य राज सिंह के खिलाफ भी सिद्धार्त तिवारी ने बयान देते हुए उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों पर सवाल खड़ा किया था और अब मृतक कल्पना मिश्रा की मौत पर सियासी रोटियां सेंकते हुए सिद्धार्त तिवारी ने स्वास्थ व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है। गौरतलब है कि स्वास्थ विभाग डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल के पास है और रीवा की अस्पताल में प्रसूता की हुई मौत के बाद सारा आरोप राजेन्द्र शुक्ल के ऊपर ही मढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। सिद्धार्त के आरोपों को भोपाल से भी बल दिया जाता है क्योंकि सीएम यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल के बीच चल रही अदावत को जमीन पर उतारने का काम सिद्धार्त तिवारी ही करते हैं। आए दिन सिद्धार्त तिवारी और सीएम के मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया में वायरल होती रहती हैं। जिसका मतलब साफ है कि भाजपा में रह कर भी सिद्धार्त तिवारी कांग्रेस की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन सीएम यादव को शायद यह नहीं मालूम कि सिद्धार्त तिवारी मौसम की तरह ही अपना स्वभाव और मिजाज बदलते हैं। आज मोहन यादव का वक्त है तो वो उनके साथ हैं और जिस दिन किसी और का वक्त आएगा तो सिद्धार्त तिवारी उसके साथ खड़े होंगे। सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा ने जिस प्रकार से कांग्रेसियों को अपने साथ जोड़ा है वो सभी मौके की नजाकत को देख कर हाथ में कमल का फूल थाम कर चल रहे हैं बांकी हवा का रुख बदलते ही यही तथाकथित फूल छाप कांग्रेस अपने DNA का परिचय जरुर करवाएंगे।
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