मध्य प्रदेश
कुपोषण और अधूरे टीकाकरण से सेहत पर संकट बालाघाट में 2 महीने में 30 बैगा बच्चों की मौत सरकारी आंकड़ों में सब 'All is Well'
मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में बच्चों की सेहत दोहरी चुनौती से जूझ रही है। एक तरफ कुपोषण उनके शरीर को अंदर से कमजोर कर रहा है, तो दूसरी तरफ अधूरा...
• Sep 17, 2026• 1 min read

📷 Cover Photo: कुपोषण और अधूरे टीकाकरण से सेहत पर संकट बालाघाट में 2 महीने
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मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में बच्चों की सेहत दोहरी चुनौती से जूझ रही है। एक तरफ कुपोषण उनके शरीर को अंदर से कमजोर कर रहा है, तो दूसरी तरफ अधूरा टीकाकरण उन्हें संक्रामक बीमारियों के प्रति असुरक्षित बना रहा है। यह चिंताजनक तस्वीर अब आंकड़ों में भी सामने आने लगी है।
बालाघाट में सबसे दर्दनाक स्थिति
बालाघाट में कुपोषण, खसरा और मलेरिया के संयुक्त प्रकोप से पिछले दो महीनों में बैगा आदिवासी समाज के 30 बच्चों की मौत हो चुकी है।
NFHS-6 रिपोर्ट ने खोली पोल
अगस्त में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की रिपोर्ट ने आदिवासी जिलों की गंभीर हकीकत उजागर की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुपोषण की सबसे गंभीर श्रेणी 'ठिगनापन' (Stunting) में सबसे बुरा हाल झाबुआ का है -
- झाबुआ: 44.7% बच्चे ठिगनापन के शिकार
- आलीराजपुर: 44.2%
- बड़वानी: 43.6%
- श्योपुर: 40.5%
यानी इन जिलों में हर 10 में से करीब 4 बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से अपेक्षित लंबाई हासिल नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह लंबे समय से चले आ रहे कुपोषण का संकेत है।
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