Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

सत्ता और संगठन के बीच 'विभीषण' कौन बूझो तो जानें पढ़िए मुखबिर पर पूरी खबर

मध्य प्रदेश की सत्ता और संगठन में एक ऐसा विभीषण है जो दोनों के बीच अस्थिरता का माहौल बनाए रखने में पूरी ईमानदारी के साथ काम करता है। पिछले कुछ दिनों स...

Sep 16, 2026 3 min read
सत्ता और संगठन के बीच 'विभीषण' कौन बूझो तो जानें पढ़िए मुखबिर पर पूरी खबर

📷 Cover Photo: सत्ता और संगठन के बीच 'विभीषण' कौन बूझो तो जानें पढ़िए मुखबि

ADVERTISEMENT
Font Size:
मध्य प्रदेश की सत्ता और संगठन में एक ऐसा विभीषण है जो दोनों के बीच अस्थिरता का माहौल बनाए रखने में पूरी ईमानदारी के साथ काम करता है। पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार से सत्ता और संगठन के बीच अस्थिरता का माहौल बना हुआ है उसमें पूर्ण योगदान विभीषण रुपी एक नेता का है। कभी संगठन के बीच कानाफूसी तो कभी सत्ता के बीच कानाफूसी। आलम ये है कि आज सीएम और बीजेपी अध्यक्ष के बीच आपसी संबंधों में दरार सी आ चुकी है। जो नेता एक दूसरे की परछाई बन कर चल रहे थे अब वो परछाईं नहीं रही दोनों के बीच मतभेद की एक बड़ी दीवार खड़ी हो चुकी है। और उस मजबूत दीवार को खड़ा करने में विभीषण का पूरा हाथ है। दरअसल सीएम मोहन यादव ने शुरु से ही विभीषण को सीएम हाउस में फ्री इंट्री दे दी जिसके बाद उस विभीषण ने पहले सीएम हाउस में अपना नेटवर्क तैयार किया। वीडी शर्मा के बाद जब हेमंत खंडेलवाल प्रदेश अध्यक्ष बने तो वो सादगी और सरलता की एक मिशाल थे। उनकी सादगी का विभीषण ने खूब इस्तेमाल किया। प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष के पहुंचते ही विभीषण उनको अपनी गिरफ्त में लेने लगे। सियासत के उस विभीषण ने धीरे-धीरे अध्यक्ष का विश्वास जीत लिया और फिर सत्ता-संगठन के बीच गलत फहमी की दीवार खड़ी करने लगा। दोनों नेताओं के बीच गलत फहमी का उसने ऐसा बीज रोपित किया जिसे उगने में एक साल से अधिक का वक्त लगा तब तक भाजपा का विभीषण खाद और पानी देने का काम करता रहा। जैसे ही सत्ता संगठन के बीच गलत फहमी का पौधा अंकुरित हुआ तो विभीषण ने अपनी चाल को और मजबूत कर दिया। इस विभीषण रुपी नेता से आज पार्टी का प्रत्येक नेता परेशान है। सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश कार्यालय से लेकर सीएम हाउस तक उनकी सुनवाई नहीं होती है क्योंकि हर जगह विभीषण मौजूद रहता है। और वो सभी के खिलाफ गलत फीडबैक देने का काम करता है। उस फीडबैक का असर ये है कि आज पदाधिकारियों के बीच पार्टी के प्रति विश्वास का अभाव हो चुका है। पदाधिकारी दवी जुवां यही कहते नजर आते हैं कि वो कुछ भी कर लें लेकिन विभीषण तो उनके लिए गलत फीडबैक ही देगा। हांलांकि समय रहते बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उस विभीषण की पहचान कर ली है और उसका इलाज भी शुरु कर दिया गया है। विभीषण की पहचान होने के बाद सत्ता और संगठन अब आपसी संबंध को मजबूत करने की दिशा में फिर बढ़ रहे हैं। लेकिन अब सवाल इस बात का उठता है कि एक बार आई दरार को क्या इतनी जल्दी भरा जा सकता है। क्योंकि विभीषण अब भी अपना काम उसी सिद्धत से कर रहा है। इस सियासी विभीषण की पहचान भले हो चुकी हो लेकिन उसका इलाज अभी तक नहीं हुआ है। लिहाजा सत्ता और संगठन के बीच निर्वाध रुप से समन्वय स्थापित करने के लिए विभीषण को जब तक देश निकाला नहीं दिया जाएगा तब तक स्थिरता का माहौल बनना मुस्किल नजर आ रहा है।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT