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मध्य प्रदेश

भाजपा मीडिया विभाग में 'शून्यता' का असर नए मीडिया प्रभारी की अब तक नहीं हो पाई नियुक्ति सत्ता और संगठन में खींचतान का दिख रहा असर

मध्य प्रदेश भाजपा में पहली बार देखने को मिल रहा है जब महीने भर से प्रदेश मीडिया प्रभारी नहीं है। आशीष ऊषा अग्रवाल की राष्ट्रीय टीम में नियुक्ति होने क...

Sep 15, 2026 3 min read
भाजपा मीडिया विभाग में 'शून्यता' का असर नए मीडिया प्रभारी की अब तक नहीं हो पाई नियुक्ति सत्ता और संगठन में खींचतान का दिख रहा असर

📷 Cover Photo: भाजपा मीडिया विभाग में 'शून्यता' का असर नए मीडिया प्रभारी की

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मध्य प्रदेश भाजपा में पहली बार देखने को मिल रहा है जब महीने भर से प्रदेश मीडिया प्रभारी नहीं है। आशीष ऊषा अग्रवाल की राष्ट्रीय टीम में नियुक्ति होने के बाद यह महत्वपूर्ण पद खाली है लेकिन इस पद को भरने के लिए अब तक भाजपा को योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाया है। दरअसल पूर्व मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल इतनी बड़ी लाइन खींच कर गए जिसको पार करना वर्तमान नेतृत्व को कठिन हो रहा है। दावेदारों की तो एक लंबी फौज है। संघ,संगठन और सरकार की तरफ से अलग-अलग नामों पर विचार हुआ। कई लोगों के लिए फोन गए लेकिन अंतिम सहमति अभी तक नहीं बनी। लेकिन इस बीच एक दिलचस्प पहलू ये देखने को मिली है कि बहुत से लोग स्वयंभु मीडिया प्रभारी बने घूम रहे हैं। कुछ लोग तो बधाइयां भी लेते फिर रहे हैं। जबकि हकीकत तो यह है कि वर्तमान मीडिया टीम में जो सह प्रभारी,प्रदेश प्रवक्ता है उनमें किसी को भी प्रदेश नेतृत्व मीडिया प्रभारी का दायित्व देने के मूड में नहीं दिख रहा है। नेतृत्व एक नए चेहरे की खोज में है। एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो पूर्व मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के स्थान की भरपाई कर पाए। दरअसल बृजेश लुनावत के बाद आशीष अग्रवाल ही ऐसे मीडिया प्रभारी थे जिनके मीडिया के बीच में काफी मजबूत संबंध थे। आशीष अग्रवाल ने मीडिया कर्मियों का कभी माथा देख कर तिलक लगाने का काम करने के बजाय सभी को एक तराजू में तौलने का काम किया और उनकी यही खूबी मीडिया कर्मियों को पसंद थी। सरकार और संगठन के बीच आशीष अग्रवाल का समन्वय भी बहुत बढ़िया था। लिहाजा इस प्रकार के मीडिया प्रभारी की तलाश अब तक भाजपा का नेतृत्व नहीं कर पाया है। हांलांकि खबर यह भी है कि भोपाल सहित कुछ उज्जैन की मीडिया में काम कर रहे कुछ मीडिया कर्मियों ने भी मीडिया प्रभारी बनने के लिए अपनी सिफारिश लगाई है। ये ऐसे मीडिया कर्मी हैं जिन्होंने जीवन में सिर्फ अपने लाभ के बारे में सोचा और काम किया अब उनके लाभ और लालच की पराकाष्ठा इतनी बढ़ गई है कि उन्हें भाजपा मीडिया विभाग में मलाई की अनुभूति नजर आने लगी है। इसलिए अपना मूल काम छोड़ कर वो भाजपा मीडिया प्रभारी बनने का सपना संजो रहे हैं। फिलहाल तो सरकार और संगठन मीडिया प्रभारी पद को लेकर अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंचे हैं। अब देखना यही है कि किस नेता के नाम की लाटरी लगती है। जो सत्ता,संगठन और मीडिया के बीच में समन्वय का काम स्थापित कर सके।

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