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मध्य प्रदेश

बिना 'पावर' के 'सेंटर' कैसे बनता है उसकी मिशाल हैं पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा

पानी उतरता देख समुंदर किनारे कोई भी घर बना सकता है लेकिन समुंदर की लहरों से उस घर को बचाए रखने का हुनर सिर्फ डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा जैसे नेता के पास है...

Sep 14, 2026 3 min read
बिना 'पावर' के 'सेंटर' कैसे बनता है उसकी मिशाल हैं पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा

📷 Cover Photo: बिना 'पावर' के 'सेंटर' कैसे बनता है उसकी मिशाल हैं पूर्व गृह

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पानी उतरता देख समुंदर किनारे कोई भी घर बना सकता है लेकिन समुंदर की लहरों से उस घर को बचाए रखने का हुनर सिर्फ डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा जैसे नेता के पास है। दतिया उप चुनाव में जिस प्रकार से ऐन मौके पर पूर्व गृह मंत्री का टिकट काट कर उनकी राजनीतिक हत्या की साज़िश रची गई वो किसी से छुपी नहीं है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता वरिष्ठों के सामने खुल कर बोलने की भले हिम्मत न रखते हों लेकिन पीठ पीछे यही कहते नजर आते हैं कि पूर्व गृह मंत्री के साथ पार्टी ने जो भी किया वो ग़लत था जिसका बदला खुद दतिया की जनता ने लिया है। इतना सबकुछ होने के बाद भी भाजपा नेताओं की अब तक आंख नहीं खुली है जबकि दतिया में कोई भाजपा का 'दीया' जलाने वाला तक नहीं बचा है। भाजपा में एक ऐसे नेता को किनारे लगाने की साज़िश रची गई जिसने संगठन से लेकर सरकार को हमेशा ताकत देने का काम किया है। साल 2024 को शायद भाजपा भूल गई जब प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीत कर भाजपा ने पहली बार क्लीन स्वीप कर इतिहास रचा। इस क्लीन स्वीप की चर्चा तो होती है लेकिन इसके पीछे जिसने भूमिका निभाई उसकी चर्चा नहीं होती। दरअसल पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा को न्यू ज्वाइनिंग कमेटी का प्रदेश संयोजक बनाया गया था जिसके बाद पूर्व गृह मंत्री ने कांग्रेसी खेमें में ऐसा कोहराम मचाया कि वहां भगदड़ मच गई। कांग्रेस के छोटे-बड़े सभी स्तर के करीब पांच लाख से अधिक नेता और कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए और उसका नतीजा यह निकला कि भाजपा ने मध्य प्रदेश में पहली बार क्लीन स्वीप किया। इतना सबकुछ करने के बाद भी पूर्व गृह मंत्री को सम्मानित करने के बजाय राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया गया। और शिकार करने वाले खुद उन्हीं के साथी और सहयोगी थे। साल 2018 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तब भी पूर्व गृह मंत्री ने भाजपा की सरकार बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन उन सभी कामों का इनाम पूर्व गृह मंत्री को इस प्रकार से मिलेगा इसकी उन्होंने सपनों में भी कल्पना नहीं की होगी। पिछले कुछ दिनों से पूर्व गृह मंत्री के निवास पर भाजपा के नेताओं की आवक बढ़ने से प्रदेश की सियासत में प्रश्नों की बाढ़ सी आ गई है। प्रदेश की जनता ये जानना चाहती है कि पूर्व गृह मंत्री के लिए भाजपा कुछ सोच रही है या फिर उनको राजनीतिक भवंर में फंसाए रखने का कोई नया कुचक्र चला जा रहा है। हांलांकि इतना सबकुछ होने के बाद पूर्व गृह मंत्री का पाज़िटिव और शांत दिमांग यह बता रहा है कि सियासत के समंदर के वो मंझे हुए खेवइया हैं और उन्हें तूफानों से अपनी कस्ति निकालने का हुनर आता है। आंधी-तूफान तो आते- जाते रहते हैं लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति उनको बिना पावर के सेंटर कैसे बनाएं रखना है उसकी ताकत देती रहती है।

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