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मध्य प्रदेश

भाजपा के दिये में कौन डालेगा 'तेल' पार्टी में चल रही अ-स्थिरता के चलते 'आशीर्वाद' लेने को तैयार नहीं कार्यकर्ता

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 17 सितंबर को जन्मदिन है इस मौके पर भाजपा महीने भर का सेवा संकल्प अभियान चलाने जा रही है। इस अभियान के दौरान भाजपा के कार...

Sep 13, 2026 3 min read
भाजपा के दिये में कौन डालेगा 'तेल' पार्टी में चल रही अ-स्थिरता के चलते 'आशीर्वाद' लेने को तैयार नहीं कार्यकर्ता

📷 Cover Photo: भाजपा के दिये में कौन डालेगा 'तेल' पार्टी में चल रही अ-स्थिर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 17 सितंबर को जन्मदिन है इस मौके पर भाजपा महीने भर का सेवा संकल्प अभियान चलाने जा रही है। इस अभियान के दौरान भाजपा के कार्यकर्ता प्रदेश के सभी 71 हजार से अधिक बूथों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ प्रत्येक बूथों में कम से कम 21 घर में दीया जला कर आशीर्वाद लेने का काम करेंगे। इस दौरान कार्यकर्ता लाभार्थियों से संवाद कर उन्हें यह बताएंगे कि केन्द्र सरकार की तरफ से कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हो रही हैं और उन योजनाओं को जनता को किस प्रकार से लाभ मिल रहा है। मतलब साफ है कि दिये की लौ के सहारे भाजपा अपनी बुझती हुई लौ को फिर जलाने का प्रयास करने जा रही है। महीने भर चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत लगानी होगी। लेकिन सरकार और संगठन के बीच चल रही आंख मिचौली के चलते बीजेपी के कार्यकर्ताओं में अ-स्थिरता का माहौल है। भाजपा के कार्यकर्ता निराश और हरास नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह व्यक्तिगत रुप से सक्रिय होकर प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर स्थानीय इकाइयों के साथ बैठक कर रहे हैं और अभियान को सफल बनाने की बात कर रहे हैं। लेकिन अभियान में एक और समस्या आ रही है जिससे पार्टी अनभिज्ञ नजर आ रही है। इस पूरे अभियान के संचालन का जिम्मा जिसे सौंपा गया है उसे अब मनहूस का दर्जा दिया जा रहा है। दरअसल दो महीने पहले दतिया में हुए विधानसभा के उप चुनाव में उस व्यक्ति को पार्टी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। तमाम प्रयासों के बाद भी दतिया में भाजपा को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। उसी हार के बाद उस व्यक्ति को मनहूस का टैग लगा दिया गया। और अब उसी व्यक्ति को आशीर्वाद का दिया जलाने के लिए भी कहा गया है। भाजपा ने ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी है जिसे देखते ही कार्यकर्ताओं का मुंह फूल आता है और फुसफुसाहट का दौर तेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में प्रदेश प्रभारी की मेहनत पर पानी भी फिर सकता है। फिलहाल तो भाजपा अपने दिये की लौ तेज करने के लिए कार्यकर्ताओं को मनाने का प्रयास कर रही है लेकिन दिलचस्प यही है कि निराशा के दौर में चल रहे कार्यकर्ताओं के मन में दिये से कैसे आशा का दीप प्रज्वलित होगा यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब भाजपा के पदाधिकारियों को देना होगा।

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